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स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’ || लखनऊ : अखिलेश का दावा, SIR पर चुनाव आयोग में ही मतभेद, बताया- लोकतंत्र के लिए घातक || चेन्नई : राहुल गांधी अगले महीने तमिलनाडु में कर सकते हैं 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम || उत्तर प्रदेश : गोंडा में मुठभेड़ के बाद तीन गौतस्कर गिरफ्तार, बहराइच में शातिर अपराधी पुलिस की गोली लगने से घायल

एक सस्ता और आसान सा दिखने वाला चना हमारे सेहत के लिए बहुत लाभकारी होता है। काले चने भिगोये हुए, भुने हुए, अंकुरित हों या इसकी सब्जी बनाई हो, यह हर तरीके से सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। काले चने में कई सारे पोषक तत्व जैसे की विटामिन ए, बी, सी डी, कैल्शियम, फास्फोरस, फाइबर, आयरन, आदि पाया जाता है। यदि आप रात भर भिगोये हुए 2 मुठ्ठी चेने रोजाना खाते हैं तो इसे आपकी सेहत अच्छी होती है।नर्जी चाहिए, तो रातभर भिगोए हुए या अंकुरित चने में हल्का सा नमक, नींबू, अदरक के टुकडे और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं, बहुत फायदेमंद होता है। काले चेन में भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होता है। जिससे वजन के कम होने में मदद मिलती है। साथ ही इसे खाने से पेट भरा-भरा महसूस होता है, जिससे खाने की ललक कम होती है और हम ओवरईटिंग से बच जाते हैं। चना आपके पेट के लिए मुफिद होता है और जिन लोगों को अकसर कब्ज की शिकायत रहती है उन्हें तो इसका सेवन जरूर करना चाहिए। इसमें ढेर सारा फाइबर मौजूद होता है जो पेट को साफ करने में मददगार है। काला चना शरीर की गंदगी को पूरी तरह से बाहर भी निकालता है।साभार-khaskhabar.com     

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शिमला मिर्च खाने में स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जियों में से एक है। इससे बनाने वाली हर डिश बेहद स्वादिष्टऔर लाजवाब होती है। इसमें कई पोषक तत्व, विटामिन सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते है। इसमें मिनरल्स भी पर्याप्त होते हैं। इसे अपनी खाने में शामिल करने से कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं।लाल और हरी शिमला मिर्च विटामिन सी का बेहतरीन स्त्रोत हैं। सलाद बनाते समय इसे भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है।  शिमला मिर्च में पाचन संबंधित समस्याओं को दूर करने के कई गुण होते हैं। इसे खाने से पाचन क्रिया दुरूस्त हो जाती है और पेट में दर्द, गैस, कब्ज आदि की समस्याएं दूर होती है। शिमला मिर्च में कैलोरी बहुत कम होती है। इसमें वसा को घटाने की शक्ति होती है और इसके सेवन से उपापयच ठीक रहता है और शरीर से टॉक्सिन निकलने की प्रक्रिया होती है। आप इसे सब्जी, सूप या सलाद के सलाद के रूप में आसानी से खा सकते हैं।   साभार-khaskhabar.com       

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Juicing is no longer a lengthy cleanse used by extreme dieters or health nuts. Juices are much more than thirst quenchers; they are instant energy renderers. Here are 5 juice to boost your energy.   Grapes Juice This is a quick and simple recipe to raise your energy levels by detoxifying your lymphatic system. The grapefruit juice naturally provides you with a powerful punch of vitamin C while the celery replenishes your body with electrolytes. Carrot Juice Carrot contains high quantities of beta carotene or Vitamin A, a powerful antioxidant. It removes free radicals from your system, which can cause a lot of damage. However, it shouldn't be consumed in huge amounts, not unless you think yellow skin is a good look on you. Melon Juice It's loaded with water, it will give you the hydration you need to look and feel alive as you go about your day. Coconut juice The coconut in this juice recipe delivers a dose of electrolytes similar to those that balance out our own blood. In fact, doctors have used coconuts to help fight dehydrating diseases such as cholera, dysentery, and influenza, helping save the lives of thousands of children in underdeveloped parts of the world, according to Organic Avenue founder Denise Mari. Cherry Juice Tart cherries are the richest sources of antioxidants in the fruit and vegetable kingdom. This makes it an ideal choice as an energy boosting drink. A glass of cherry juice has a healthy amount of carbohydrates that give you instant energy without sticking around.   साभार-khaskhabar.com     

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एक कप कॉफी और ताजगी भरा अनुभव, घर में हों या बाहर, एक कप कॉफी की दरकार हमेशा होती है। रोजमर्रा की थकान में कॉफी की खुशबू, स्वाद और तरोताजा अहसास हमें स्फूर्ति और आनंद से भर देती है। कॉफी एक ऐसा अवयव है जिस पर बहुत बडें पैमाने पर शोध किया गया है। वैज्ञानिक शोधों ने सााबित किया है कि अगर कॉफी को संतुलित मात्रा रोजाना 4-5 रेग्यूलर साइज कप में पिया जाए तो यह वयस्कों के लिए हानिकारक नहीं होती, शारीरिक तौर पर चुस्त-दुरूस्त रखती है व स्वास्थ्यवर्द्धधक भी होती है। कॉफी पर किए गए अध्ययनों में ये भी सामने आया है कि कॉफी डायबिटीज से बचाव करती है। क्या है डायबिटीज! डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें हमारा शरीर खून में मौजूद शर्करा ब्लड शुगर, खासकर ग्लूकोज को नियंत्रित नहीं कर पाता। ऐसा इंसुलिन की समस्या के कारण होता है। इंसुलिन शरीर में मौजूद ग्लूकोज को अन्य अंगों जैसे लीवर, मसल और कोशिकाओं में पहुंचाता है। जब इंसुलिन की कमी होती है तो शर्करा का पूर्ण इस्तेमाल नहीं हो पाता और शरीर में शर्करा की मात्रा बढ जाती है।कॉफी पर शोध व अध्ययन कॉफी पर प्रकाशित हो चुके अध्ययनों में यह बात भी कही गई है कि कॉफी पीना टाईप 2 मधुमेह से बचाव में सहायक होता है। इस तथ्य पर अन्य शोध और अध्ययन भी किए गए जिनमे कॉफी के इस गुण के समर्थन में ही परिणाम निकला है। शोध में यह निष्कर्ष भी निकला है कि चाय न पीने वाले लोग जो संतुलित मात्रा में कॉफी पीते हैं, उनमें मधुमेह होने की संभावना कम होती है। हालांकि अभी तक विभिन्न शोधों में यह पता नहीं चल सकता है कि किस प्रक्रिया द्वारा कॉफी मधुमेह से बचाव करती है लेकिन कैफीमेटेड और डीकैफीमेटेड दोनों तरह की कॉफी में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला क्लोरोजैनिक एसिड इस रक्षात्मक प्रभाव के लिए जिम्मेदार होता है। कई शोधों में विशिष्ट तौर पर यह बात कही गई है कि डीकैफीमेटेड दोनों तरह की कॉफी पीने से टाईप 2 मधुमेह का कम खतरा होता है।इसे इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज या जुवेनाइल डायबिटीज के नाम से भी जाना जाता है। यह आनुवांशिक भी होता है। इसे अडल्ट ऑनसेट डायबिटीज के नाम से भी जाना जाता था। इसका करण यह था कि पहले यह 40 से ज्यादा की उम्र बदलते रहन-सहन और बढते मोटापे के कारण यह बीमारी वयस्कों और यहां तक कि 10 या उससे कम उम्र के बच्चों में भी देखी जाने लगी। तब से इसका अडल्ट ऑनसेट का इस्तेमाल बंद कर दिया गया। मधुमेह के ये दोनों कारण ही शरीर में अनियंत्रित ग्लूकोज के कारण होते हैं। कई बार खाना खाने के बाद शरीर में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से कहीं ज्यादा बढ जाता है।  मधुमेह के कारणों के बारे में निश्चित रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता है। इसमें कई बार पेनक्रियाज शरीर में इंसुलिन की कम मात्रा या सृजन करता है या कोशिकाएं ही इंसुलिन का प्रतिरोध करने लगती है या ये दोनों ही कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि टाईप 2 मधुमेह अनुवांशिक होता है परंतु अन्य कारणों से भी इस बीमारी के होने का खतरा बना रहता है। इन कारणों में शामिल हैं शारीरिक श्रम का अभाव, एक ही जगह बैठे रहना, मोटापा, बढती उम्र, अनियमित डाइट, मधुमेह की पारिवारिक पृष्ठभूमि, पेनक्रियाज में समस्या, एथनीसिटी या अन्य बिमारियां।   साभार-khaskhabar.com       

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दही से आपकी त्वचा में नई रंगत व चमक आती है। दही के साथ आप बेसन या चोकर मिलाकर भी चेहरे पर लगा सकती हैं। इस प्रकार दही का एक गुणकारी सौंदर्य प्रसाधन के रूप में प्रयोग कर आप अपनी त्वचा में निखार ला सकती हैं। अगर आपको अपनी उम्र छुपानी हो तो अपने चेहरे को एकदम दमकता हुआ सा बना लें। कॉस्मेटिक्स से आपके चेहरे की रंगत कुछ समय के लिए बरकरार रह सकती है लेकिन घर में मौजूद प्राकृतिक दही को चेहरे पर लगाने से उसकी रंगत हमेशा बरकरार बनी रहेगी। त्वचा की रंगत निखारने में दही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। दही खाना ना केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है बल्कि इसे शरीर पर उबटन या किसी फेस पैक में मिला कर भी लगाया जा सकता है। तो ऐसे में चलिये जानते हैं दही का त्वचा पर निखार किस प्रकार से होता है।मुंहासे से छुटकारा पाएं दही में एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण होते हैं। पिंपल से छुटकारा पाने के लिये दही को सीधे चेहरे पर लगाएं और इसे आधे घण्टे के बाद धो लें। सिंपल दही कुछ मात्रा में लें और कोमल हाथों से अपनी त्वचा को रब करें यह प्रक्रिया कम से कम 10-15 मिनट तक करने के बाद ठंडे पानी से स्किन को साफ कर लें। झुर्रियां मिटाए  अगर उम्र से पहले ही झुर्रियों ने अपना प्रकोप फैलाना शुरू कर दिया है तो इनकी रफतार को धीमा कर दें। झुर्रियों को प्राकृतिक तरीके से कम करें जिसके लिये दही का फेस मास्क लगाएं। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड मृत्य कोशिकाओं को दूर कर के पोर्स को टाइट करती हैं। रंग साफ करे  दही को आप किसी फेस पैक या फल के साथ मिला कर लगा सकती हैं या फिर ऐसे ही दही को त्वचा पर लगाकर त्वचा को गुनगुने पानी से धोने से आपकी त्वचा नर्म व मुलायम होती है। फलों व सब्जियों का पैक लगाएं एक कटोरी दही में आधी कटोरी गाजर, ककडी, पपीता आदि मौसमी फलों का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से आपकी त्वचा में निखार आएगा। आप चाहे तो मौसमी सब्जियों के रस को भी दही में मिलाकर पैक तैयार कर सकते हैं। साभार-khaskhabar.com       

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आम न केवल पौष्टिक तत्वों से भरपूर है, बल्कि स्वास्थ्यवधर्क गुणों की खान भी है। आम का वृक्ष एक फूलदार, बडा स्थलीय प वृक्ष है। इसमें दो बीजपत्र होते हैं। आम अपने स्वाद व खुशबू की वजह से ही लोकप्रिय है। आम में पाई जाने वाली बेहिसाब खूबियां इसे फलों का राज बनाती है।  आम में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन ए, बी और कॉम्प्लेक्स, पोटेशियम, फॉस्फोरस, लौह खनिज लवण पाए जाते हैं, जो इसे हमारी हेल्थ को परफेक्ट बनाती है। आम हमारे शरीर को कई रोगों से बचाता है और उसे फिट एण्ड फाइन रखता है। एक अध्ययन के अनुसार- आम में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट कैंसर जैसी बीमारी को रोकने में भी सहायक होते हैं। गर्मी के मौसम में कच्चे हरे आम का रस या पना जहां शीतलता प्रदान करता है, वहीं इससे बने अचार, चटनी तो लोगों को मजे लेकर खाते हैं। आम का नियमित सेवन से त्वचा के बंद पोर खुल जाते हैं, जिससे कील-मुहांसों से छुटकारा मिल सकता है। आम के पल्प में शहद और दूध मिलाकर लगाने से त्वचा में निखार आता है। आम का पना ब्लड सेल्स को लचीला बनाता है और नए ब्लड सेल्स बनाने में मदद करता है। साभार-khaskhabar.com          

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खीरा खीरा हेल्थ के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। ये सेहत के साथ-साथ सौंदर्य में बहुत फायदेमंद होता है। कम फेट व कैलोरी से भरपूर खीरे का सेवन आपको कई रोगो से बचाने में सहायता करता है। खीरे को आप कई तरह से खा सकते हैं, जैसे सलाद, जूस, सैंडवीच, या यूं ही नमक छिडक कर भी खा सकते हैं। खीरे के स्वास्थ्यवद्र्धक और सौन्दर्यवद्र्धक गुण दोनों अनगिनत होते हैं जैसे... आयुर्वेद के अनुसार खीरा, पित्त, रक्त पित्त दूर करने वाला तथा रक्तविकार और मूत्र कच्छ नाशक रूचिकर फल है। खीरे के प्रयोग से पेट तथा जिगर की जलन शांत होती है। आयुर्वेद के मुताबिक पेट में गर्मी होने के वजह से मुंह से बदबू निकलता है, खीरा पेट को शीतलता प्रदान करने में मदद करता है। खीरा एक ऐसी सब्जी है जिसमें कोलेस्ट्रोल बिल्कुल नहीं होता। यह हृदय रोगी के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। एक अध्ययन के अनुसार खीरा में जो स्टे्रराल नाम का योगिक होता है वह कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद करता है। खीरे में कैलोरी कम और फाइबर उच्च मात्रा में होता है। इसलिए मीडे डे में भूख लगने पर खीरा खाने से पेट देर तक भरा हुआ रहता है। अगर मुंह से बदबू आती है तो आप कुछ देर के लिए मुंह में खीरे के टुकडा रख लें क्योंकि यह जीवाणुओं को मारकर धीरे-धीरे बदबू निकलना कम कर देता है।   साभार-khaskhabar.com          

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नाशपाती में बहुत से विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं इसलिए इसको खाने से हमारे शरीर को विटामिन्स और मिनरल्स की पूर्ति हो जाती है। खट्टी-मीठी और रसीली स्वाद की नाशपाती होती है। तो आइये जानते हैं नाशपाती के सेहत के लिए औषधीय गुण मौजूद होते है।  जिन लोगों को नाशपाती पसंद होती हैं। उन्हें दोस्ती करना बहुत अच्छा तो लगता है, लेकिन इनकी दोस्ती जल्दी खत्म भी हो जाती है, ज्यादा लंबे समय तक टिक नहीं पाती। लेकिन एक बात बहुत खास है इन के बारे में यह लोग जो भी काम अपने हाथ में लेते हैं। उसे पूरी ईमानदारी व मेहनत से करते हैं,व्यवहार से कुछ-कुछ झगडा करने वाले भी होते हैं। नाशपाती में अधिक मात्रा में बोरोन होता है। बोरोन हड्डियों में कैल्शियम को बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए नाशपाती का सेवन करने से आस्टियोपोरोसिस होने का खतरा नहीं होता। नाशपाती में फाइबर की काफी अच्छी मात्रा होती है, जोकि पाचन तंत्र को स्ट्रॉग बनाती है। नाशपाती खाने से कब्ज की परेशानी से राहत मिलती है। एनीमिया- नाशपाती में प्रचुर मात्रा में आयरन पाया जाता है, जो हीमोग्लोबिन के स्तर केा बढाता है। अगर कोई एनीमिया से पीडित हो तो उसे प्रचुर मात्रा में नाशपाती को खाना चाहिए। नाशपाती में मौजूद विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा पर उम्र बढने के प्रभाव को कम करने, झुर्रियों, मुंहासे और त्वचा से संबंधी अन्य समस्याओं को रोकने में मदद करता है। यह बालों के झडने, धब्बेदार अध: उम्र बढते की प्रक्रिया, मोतियाबिंद आदि अन्य समस्याओं के इलाज में सहायक होता है।   साभार-khaskhabar.com      

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के.डी. मेडिकल कालेज-हास्पिटल में इलाज की समुचित व्यवस्था न्यूनतम दरों पर होती हैं जांच मथुरा। बारिश का मौसम शुरू हो गया है। हवा में नमी और उमस होने के चलते आप फंगस, वैक्टीरिया व वायरल जैसे रोगों का शिकार हो सकते हैं लिहाजा सावधानी बरतें तथा इस तरह की कोई भी परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें। अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो इनके गम्भीर रोगों में तब्दील होने की आशंका रहती है। दूसरा इस मौसम में मच्छरों के साथ-साथ कई छोटे-मोटे कीड़ों के काटने से भी कई बार त्वचा में खुजली व जलन होनी शुरू हो जाती है। के.डी. मेडिकल कालेज-हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के चर्मरोग विशेषज्ञ डॉ. हर्ष शर्मा का कहना है कि इस मौसम में हवा में नमी होने के कारण चमड़ी रोग होते हैं। इनमें फंगस, वैक्टीरिया व वायरल जैसे इंफेक्शन के साथ ही फोड़े-फुंसी, दाद-खाज-खुजली, पैरों की उंगलियों का अंदर से गलना, घमौरियां जैसे चमड़ी रोग प्रायः होते हैं। डॉ. हर्ष शर्मा की सलाह है कि बरसात में गीले कपड़े न पहनें, बारिश व पसीने से भीगने वाले कपड़े तुरंत बदलें तथा अंदरूनी कपड़े भी रोज बदलें। शरीर को सूखा रखें। गंदे व बरसाती पानी से परहेज करें। शरीर की साफ-सफाई के साथ ही खान-पान पर विशेष ध्यान दें। किसी तरह का कोई भी त्वचा रोग खुजली, जलन, फंगस, त्वचा में खिंचाव, फुंसी आदि होने पर चर्म रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लें। आर.के. एजूकेशन हब के चेयरमैन डा. रामकिशोर अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल और कालेज की प्राचार्य डा. मंजुला बाई कोडागन्नूर ने हाकिम के स्वस्थ होने पर खुशी जताते हुए कहा कि के.डी. मेडिकल कालेज-हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर का उद्देश्य धनार्जन नहीं बल्कि मथुरा जनपद और उसके आसपास के जिलों के लोगों को पूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्रदान करना है।  

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सूर्योदय से पूर्व उठने की आदत डालें, इससे सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है जो तन, मन और मस्तिष्क को शांत करती है।   प्रात: काल आसपास के खुले स्थान, पार्क या भवन की छत पर जाकर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके थोड़ा व्यायाम करें और लंबी सांस लें। इससे प्रकृति में सुबह के समय व्याप्त सकारात्मक ऊर्जा यानी आक्सीजन का भरपूर उपयोग करके आप शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं।    अच्छे स्वास्थ्य के लिए भोजन करते समय आपका मुख सदा पूर्व या उत्तर में रहे। कभी भी पलंग पर बैठकर, खड़े होकर या आड़े-तिरछे बैठकर भोजन करें।    भोजन या तो भूमि पर आसन बिछाकर करें या फिर डायनिंग टेबल का प्रयोग करें। विधिवत भोजन करने से शरीर चुस्त दुरूस्त रहता है। खाना खाते वक्त टेलीविजन नहीं देखें, इससे उत्पन्न होने वाली नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से सभी ज्ञानेंद्रियों पर विपरीत असर पड़़ता है। इससे पेट की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अत: भोजन करते समय टेलीविजन देखने की बजाए पारिवारिक दिनचर्या पर गपशप करें। दवाइयों को डायनिंग टेबल पर नहीं रखें, ये नकारात्मक ऊर्जा की प्रतीक होती है। ऐसा करके हम दवाइयों को भोजन का हिस्सा बनाने का निमंत्रण देते हैं, ऐसा नहीं करें।    यदि घर में बच्चों या वृद्धों के लिए कुछ टॉनिक आदि का प्रयोग कर रहे हों, तो ऐसे टॉनिक की शीशियां व डिब्बे घर की पूर्व दिशा में बनी आलमारियों में रखें और किसी बीमारी से संबंधित दवाइयों को दक्षिण या पश्चिम में रखें।    भोजन पूर्व की तरफ मुंह करके ही बनाएं। यह सेहत के लिए उत्तम और सुखदायी होता है। रसोईघर आग्नेय कोण में ही बनाएं। रसोईघर की व्यवस्था उत्तर-पूर्व में न करें। यह धन और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। ज्वलनशील पदार्थों को भी दक्षिण-पूर्व में रखें। रसोईघर की दीवारों का रंग हल्का पीला, नारंगी या हल्का लाल रखें। जिससे भोजन सुप्पाच्य होकर भूख बढ़ाने में सहायक साबित होगा।   जब एक साथ मिलकर सभी खाना खा रहे हों, तो घर के मुखिया का मुंह पूर्व में तथा अन्य सदस्यों का मुंह उत्तर या पश्चिम में होना चाहिए।    दक्षिणामुख कभी नहीं बैठें। इससे पाचन क्रिया ठीक रहती है। हाथ आदि साफ कर प्रसन्नतापूर्वक खाने से आरोग्यता बढ़ती है। साभार-khaskhabar.com        

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गर्मियों में पुदीना किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं होता है। स्वाद, सेहत और सौंन्दर्य का ऐसा संगम बहुत ही कम पौधों में देखने को मिलता है। पुदीना एक आयुर्वेदक औषधि भी है। पुदीना हरे रंग का एक छोटा सा पौधा होता है, जिसमें विटामिन ए, सी, मिनरल्स, कैल्शियम, आयरन, मैग्रीनिशयम, कॉपर और पौटेशियम पाया जाता है इसलिए यह हमारी सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। हिचकी में पुदीने के रस को पीने से फायदा मिलता है। अगर आपकी हिचकी बंद न हो तो पुदीने के पत्ते में नींबू का रस मिलाकर लें। साथ ही पुदीने के पत्तों पर शक्कर डालकर चबाएं हिचकी में लाभ होगा। अगर आपके चेहरे पर पिंपल है तो पुदीने की कुछ पत्तियों को लेकर पेस्ट बना लें। फिर उसमें 2-3 बूंदे नींबू का रस मिलाकर इसे चेहरे पर कुछ देर के लिए लगाएं। साफ पानी से चेहरा धो लें। कुछ ही दिनों में पिंपल से राहत मिल जाएगी। हाई बीपी से रोगी को पुदीने का सेवन करना चाहिए। जब कि लो बीपी के पीडित की पुदीने की चटनी का सेवन करना चाहिए। अनियमित मासिक की शिकार महिला के शारीरिक चक्र में प्रभावकारी ढंग से संतुलन कायम करता है।   साभार-khaskhabar.com      

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अजवायन में सेहत का राज छिपा है। दादी मां के नुस्खे बिना अजवायन के पूरे नहीं होते। बडे काम की ये छोटी सी चीजें सेहत का बखूबी ध्यान रखती हैं। जिसे तरह इनकी थोडी सी मात्रा अच्छी सेहत के लिए काफी है उसी प्रकार छोटी-छोटी समस्याओं पर समय रहते ध्यान दिया जाएतो वे बडी नहीं होती है। अजवायन की ताजा पत्ती में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व और विटामिन है। विटामिन सी, विटामिन ए, कैल्शियम और मैगनीज, लोह, और साथ ही युक्त ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्त्रोत पाया जाता है। अजवायान पीसकर और उसमें खीरे के रस को मिला लें। इस पेस्ट को फेस पर लगाएं, यकीन मानये चेहरे की झाइयों पर लगाने से फायदा होगा। अजवायन को रात में चबाकर गरम पानी पीने से सुबह पेट साफ हो जाता है। अजवायन की पत्ती का दिलकश स्वाद होता है। अजवायन की पत्ती में एंटी बैक्टीरियल गुण है जो संक्रमण से लडने में मदद करता है। साभार-khaskhabar.com            

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नारद संवाद

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राइन फॉल्स, स्विस सीढ़ियाँ और बुज़ुर्ग घुटने: नाव की सैर बनी ओलंपिक प्रतियोगिता!

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