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कुछ कटहल की नाम सुनते ही अजीब-अजीब से मुंह बनाने लगते हैं। जब कि कटहल के अंदर कई पौष्टिक तत्व पाये जाते हैं जैसे, विटामिन ए, सी, कैल्शियम, आयरन, नियासिन, जिंक, थाइमिन, पोटैशियम और राइबोफ्लेविन आदि। कटहल की सब्जी, अचार और पकौडे कई लोगों का फेवरेट होता है। यह खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगता है। इसका सेवन करने से सेहत को तो कई लाभ होते ही है साथ में यह आपकी खूबसूरती को भी निखार देता है। कटहल का स्वास्थ्य लाभ आंखों तथा त्वचा पर भी देखने को मिलता है। इस फल में विटामिन ए पाया जाता है जिससे आंखों की रौशनी बढती है और स्किन अच्छी होती है। यह रतौंधी को भी ठीक करता है।कटहल के बीज डाइजेस्टिव सिस्टम को ठीक करते हैं। यह आपके पाचन तंत्र को डिटॉक्सीफाई करता है और विषाक्त पदार्थो को बाहर निकालता है। जब आपको पेट साफ रहेगा तो आपका चेहरा भी निखरे व खिलेगा।कटहल में विटामिन ए और सी पाया जाता है जो कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है और बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन से बचाता है।कटहल में पोटैशियम पाया जाता है जो कि हार्ट की परेशान को दूर करता है क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को लो कर देता है।कटहल में खूब सारा फाइबर पाया जाता है साथ इसमें बिल्कुल भी कैलोरी नहीं होती है। क्या आपको जानकारी है कि पके हुए कटहल के गुदे को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबाला जाए और इस मिश्रण को ठंडा कर एक गिलास पीने से शरीर में जबरदस्त स्फूर्ती आती है, यह हार्ट के रोगियों के लिये भी अच्छा माना जाता है।साभार-khaskhabar.com    

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अक्सर हम सभी शादी, पार्टी या किसी रेस्टोरेंट पर खाना खाने जाते ही हैं लेकिन खाना चाहे कितना भी अच्छा क्यूं ना बना हो ‘सौंफ’ खाने का अपना ही एक मजा है। शायद ही कोई व्यक्ति हो जो सौंफ से परिचित न हो। सौंफ को मसलों की रानी और पान की जान भी कहा जाता है। सौंफ के दानों का सेवन कर हम अपने मुंह को फ्रेश करते हैँ। ऐसा इसलिए क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है। लेकिन क्या आप इस बात को जानती हैं कि सौंफ की चाय भी बनती है जो कि कई रोगों से निजात दिलाने में मदद करती है। आइये जानते हैं ऐसी ही कुछ बीमारियों के बारे में जो कि सौंफ की चाय का सेवन करके दूर की जा सकती हैं। सौंफ के छोटे-छोटे दाने हरे होते हैं। आम तौर पर सौंफ छोटी और बडी दो प्राकर की होती है। दोनों ही खुशबूदार होती है। सौंफ का उपयोग अचारों और सब्जियों में को रूचिकर जायेकदार बनाने के अतिरिक्त औषधि के रूप में भी बहुत अधिक होता है। आयुर्वेद के अनुसार सौंफ त्रिदोष नाशक है। सौंफ की चाय का सेवन करके आप जॉन्डिस के खतरे को कम कर सकती है, इसी के साथ यह किडनी के कार्य को तेज करके हमारे खून को साफ करती है। रातभर ठीक से ना सोने से हमारी आंखों में सूजन हो जाती है, इसके लिए आप सौंफ की चाय बनाए और फिर रूई इसमें डुबोकर अपनी आंखों को 10 मिनट के लिए सेंके। इस चाय का सेवन करके आप आसानी से अपने जोडो में होने वाले दर्द से राहत पा सकती हैं, इससे आपको जल्द ही आराम मिलता है।साभार-khaskhabar.com      

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अंगूर एक बलवर्धक एवं सौन्दर्यवर्धक फ ल है। अंगूर फल मां के दूध के समान पोषक है। फलों में अंगूर सर्वोत्तम माना जाता है। यह निर्बल-सबल, स्वस्थ-अस्वस्थ आदि सभी के लिए समान उपयोगी होता है। बहुत से ऐसे रोग हैं जिसमें रोगी को कोई पदार्थ नहीं दिया जाता है। उसमें भी अंगूर फल दिया जा सकता है। पका हुआ अंगूर तासीर में ठंडा, मीठा और दस्तावर होता है। यह स्पर को शुद्ध बनाता है तथा आंखों के लिए हितकर होता है। अंगूर वीर्यवर्धक, रक्त साफ  करने वाला, रक्त बढाने वाला तथा तरावट देने वाला फ ल है। अंगूर में जल, शर्करा, सोडियम, पोटेशियम, साइट्रिक एसिड, फ्लोराइड, पोटेशियम सल्फेट, मैग्नेशियम और लौह तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। अंगूर ह्वदय की दुर्बलता को दूर करने के लिए बहुत गुणकारी है । ह्वदय रोगी को नियमित अंगूर खाने चाहिएं। हार्ट-अटैक से बचने के लिए बैंगनी (काले) अंगूर का रस ‘एसप्रिन’ की गोली के समान कारगर है। ‘एसप्रिन’ खून के थक्के नहीं बनने देती है। बैंगनी (काले) अंगूर के रस में  ‘फलोवोनाइड्स’ नामक तत्व होता है और यह भी यही कार्य करता है। पोटेशियम की कमी से बाल बहुत टूटते हैं। दांत हिलने लगते हैं, त्वचा ढीली व निस्तेज हो जाती है, जोडों में दर्द व जकडन होने लगती है। इन सभी रोगों को अंगूर दूर रखता है। अंगूर के पत्तों का रस पानी में उबालकर काले नमक मिलाकर पीने से गुर्दों के दर्द में भी बहुत लाभ होता है। गठिया रोग में अंगूर का सेवन करना चाहिए। इसका सेवन बहुत लाभप्रद है क्योंकि यह शरीर में से उन तत्वों को बाहर निकालता है जिसके कारण गठिया होता है। पेट की गर्मी शांत करने के लिए 20-25 अंगूर रात को पानी में भिगों दे तथा सुबह मसल कर निचोडें तथा इस रस में थोडी शक्कर मिलाकर पीना चाहिए। साभार-khaskhabar.com  

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गन्ने का जूस गर्मियों के मौसम में सबसे अच्छा पेय माना जाता है। गन्ने का रस बुखार के रोगियों के लिए अत्यंत हितकारी है। एक शोध के अनुसार, गन्ने के रस का सेवन से रोगों को लाभ मिलता है। इसे पीने से कई प्रकार की बीमारियों जैसे, एनीमिया, हिचकी, जौण्डिस आदि बीमारियां ठीक हो जाती हैं।  गन्ने के रस में ज्यादा बर्फ मिलाकर नहीं पीना चाहिए, सिर्फ रस पीना ज्यादा लाभकारी है। ऐसे ही गन्ने के कई फायदे हैं जिनके बारें में आज हम आपको अच्छी तरह से बताने वाले हैं। गन्ने को जूस नियमित सेवन करने से लीवर में किसी भी प्रकार का इंफेक्शन नहीं होता। यदि इंफेक्शन होता भी है तो इसमें कमी आती है। गन्ने का जूस लीवर को रक्षा करता है।  गन्ने के रस में पोषक तत्वों का फायदा तभी मिलेगा जब साफ व स्वस्छ जूस हो और ताजा हो, जिससे यह ऑक्सीडाइज न हो सके। गन्ने का रस पीने से स्किन को अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड मिलता है जो कीलमुंहासे दूर करने लाभकारी होता है। गन्ने का रस गर्मियों में सेवन करने डी-हाइड्रेशन से बचा जा सकता है। साभार-khaskhabar.com      

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तरबूज में नब्बे फीसदी पानी होता है, इसलिए गर्मी का मुकाबला करने के लिए इससे अच्छा कोई फल नहीं । शायद यही कारण है कि इसका जन्म अफ्रीका के गर्म ईाके में हुआ। तरबूज पर काफी वैज्ञानिक अनुसंधान भी हुए हैं। गर्मी के झुलसते मौसम में तरबूज की तरावट शरीर और मन दोनों को प्रसन्न कर देती है। इसके फलों का भार लगभग डेढ-दो किलोग्राम तक होता है। फलों के हल्के-पीले-हरे छिलके पर गाढी हरी धानियां होती हैं। इसका छिलका पतला है, इसलिए अंदर के लाल गूदे का मात्रा ज्यादा होती है। मध्यम आकार और भार वाले फलों की एक जापानी किस्म असाही योमामोतो भी भारत लाई गई है। इसे भारत में उगाने के नतीजे उत्साहजनक नहीं हैं। वैस इसका गूदा और सुर्ख लाल रंग का है। तरबूज में विटामिन ए, बी, सी तथा लौहा भी प्रचुर मात्रा में मिलता है, जिससे रक्त सुर्ख व शुद्ध होता है। तरबूज के सेवन से लू और गर्मी की खुश्की से शरीर की रक्षा होती है। देश के रेतीले रेगिस्तानी इलाके और नदियों के किनारों पर गर्मी के मौसम में तरबूज की फसल पटे दिखाई देती है, फिर भी तरबूज उगाने वाले प्रमुख देशों में भारत का नाम नहीं है। पीलिया के रोगियों को तरबूज बहुत फायदा पहुंचाता है, क्योंकि यह शरीर में खून बढाता है और खून को साफ भी करता है। जिस वजह से यह चमडी के रोगियों में तरबूज का सेवन करनेसे लाभ होता है। तरबूज कफनाशक भी है, कहा जाता है कि तरबूज का नियमित सेवन उच्च रक्त-चाप को बढने से रोकता है। साभार-khaskhabar.com          

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Juicing is no longer a lengthy cleanse used by extreme dieters or health nuts. Juices are much more than thirst quenchers; they are instant energy renderers. Here are 5 juice to boost your energy.   Grapes Juice This is a quick and simple recipe to raise your energy levels by detoxifying your lymphatic system. The grapefruit juice naturally provides you with a powerful punch of vitamin C while the celery replenishes your body with electrolytes. Carrot Juice Carrot contains high quantities of beta carotene or Vitamin A, a powerful antioxidant. It removes free radicals from your system, which can cause a lot of damage. However, it shouldn't be consumed in huge amounts, not unless you think yellow skin is a good look on you. Melon Juice It's loaded with water, it will give you the hydration you need to look and feel alive as you go about your day. Coconut juice The coconut in this juice recipe delivers a dose of electrolytes similar to those that balance out our own blood. In fact, doctors have used coconuts to help fight dehydrating diseases such as cholera, dysentery, and influenza, helping save the lives of thousands of children in underdeveloped parts of the world, according to Organic Avenue founder Denise Mari. Cherry Juice Tart cherries are the richest sources of antioxidants in the fruit and vegetable kingdom. This makes it an ideal choice as an energy boosting drink. A glass of cherry juice has a healthy amount of carbohydrates that give you instant energy without sticking around. साभार-khaskhabar.com  

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प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में छाछ को इंसान के शरीर के लिए बेहद उपयोगी बताया गया है। दही और दूध को मथने से छाछ बनती है। आयुर्वेद में इसे तक्र कहा जाता है। हाल ही में हुए एक रिसर्च में वैज्ञानिकों ने भी इस बात को माना है। छाछ के नियमित सेवन से वजन को कम किया जा सकता है। छाछ में मौजूद गुणों से पेट के अंदर के कीडे खत्म हो जाते हैं और इस वजह से शरीर का वजन घटने लगता है। गर्मियों के मौसम में कोल्ड ड्रिंक आदि पेय पीने की जगह आपको छाछ पीने की आदत डालनी चाहिए। यह आपको गर्मी से तो राहत देगी ही, साथ में आपके स्वास्थ्य के लिए भी काफी असरदार है। छाछ में विटामिन सी, ए, ई और बी पाये जाते हैं जो कि शरीर के पोषण की जरूरत को पूरा करता है। यह स्वस्थ्य पोषक तत्वों जैसे लोहा, जस्ता फोस्फोरस और पोटेशियम से भरी होती है। छाछ में विटामिन सी, ए, ई और बी पाये जाते हैं जो कि शरीर के पोषण की जरूरत को पूरा करता है। यह स्वस्थ्य पोषक तत्वों जैसे लोहा, जस्ता फोस्फोरस और पोटेशियम से भरी होती है। छाछ की तासीर बेहद ठंडी होती है। इसमें काला नामक और जीरा पाउडर मिलाकर सेवन करने से गर्मियों में लू से बचाव होता है। गर्मियों में छाछ को सबसे अधिक असरदार पेय माना गया है। इससे शरीर और दिमाग में ठंडक पहुंचती है। इससे शरीर की पाचन क्रिया बेहतर रहती है।  साभार-khaskhabar.com            

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अनार में कई गुण समाएं होते हैं। यह अनार बडे काम की चीज है। चाहे आप इसे खाएं या फिर इसका जूस पिएं, इसके फायदे बहुत हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो रोज एक गिलास अनार का जूस पीने से प्रोस्टेट कैंसर कम हो सकता है। एक स्टडी में यह पाया गया कि अनार का जूस लगातार पीने से कैंसरस सेल्स के बढने की गति धीमी हो गई।ये खूबसूरत लाल फल आपको हेल्दी रखने के साथ ही कई रोगों से भी बचाता है। अनार के बीज, गूदे और छिलके में प्यूनिकलाजिन्ज नामक रसायन पाया जाता है, जो नपुंसकता, कैंसर, दिल की बीमारी और हाई ब्लड प्रेशर में असरदार होता है। इस स्टडी में अनार के जूस को दिल के मरीजों के लिए भी बहुत फायदेमंद पाया गया। दरअसल, इसमें एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जिससे आर्टरीज कॉलेस्ट्रॉल से ब्लॉक नहीं होती है। इस जूस में आइसोफ्लेवोंस भी होते हैं, जो आमतौर पर हार्ट को हेल्थी रहने में मदद करते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के एक साइंटिस्ट ने 50 लोगों पर यह स्टडी की है। प्रोस्टेट कैंसर से पीडित इन लोगों को रोज अनार का जूस दिया गया। फिर रिसर्चर ने उनके खून में प्रोस्टेट स्पेसिफिक ऐंटिजेन का लेवल चेक किया और इससे पता चला कि अनार के जूस की वजह से पीएसए का लेवल धीरे-धीरे कम हो गया। अनार का रस पीने से पहले पीएसए का लेवल हर 15 महीनों में दोगुना हो जाता है, लेकिन अनार का जूस पीने से 54 महीनों से पहले ऐसा नहीं हुआ। अनार का सेवन करने से दांतों से संबंधित बीमारियों से छुटकारा मिलता है। साथ ही साथ अनार बहुत सारी दातों में होने वाली बीमारियों से बचाता है। रोजाना एक अनार खाने से हमारे शरीर में खून के मात्रा को बनाये रखता है। साथ ही साथ अनार का जूस पिने से हमारे पाचन तंत्र को सुधरता है। आप चाहे तो साबुत अनार के दाने के साथ ही खा सकते हैं। साभार-khaskhabar.com        

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आम फलों का राज है तो चीकू भी गुणों के मामले में उससे पीछे नहीं हैं। अगर चीकू के गुणों पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि सेहत की दृष्टि से चीकू कितना लाभकारी है। चीकू स्वाद में जीतना मीठा होता है, उसके गुण भी स्वास्थ्य के लिए उतने ही फायदेमंद हैं। चीकू के बीज को पीसकर पेस्ट बना लें और उसमें अरंडी का तेल मिलाकर सिर की त्वचा पर लगाने से बाल चमकदार और डैन्ड्रफ से राहत मिलती है। चीकू के बीजों को पीसकर प्रयोग करने से गुर्दे की पथरी खत्म होती है, साथ ही गुर्दे के अन्य रोगों से भी राहत मिलती है। चीकू में एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जिसके चलते ये फ्री रेडिकल्स को रोकने की ताकत रखता है। इसकी वजह से त्वचा झुर्रियों से मुक्त रहती हैं। चीकू बाल सफेद होने से रोकने में मदद करता है। यह बालों के लिए बेहद लाभकारी है। यह आपके सिर की स्कैल्प को स्वस्थ रखता है। चीकू का उपयोग पेट की खराबी में बहुत फायदेमंद साबित होता है। यह कब्ज को ठीक करता है और आपकी पाचन शक्ति को भी अच्छा बनाता है। इसके अलावा यह हार्ट की बीमारियों से बचाव करता है। चीकू आपके शरीर को संक्रमण से बचाता है। इसमें एंटी वायरल और एंटी बैक्टीरियल, एंटीऑक्सीडेंट गुण, पॉलीफेनोलिक होते हैं, जो आपके शरीर को संक्रमण से बचाते है।   khaskhabar.com    

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गर्मियां आते ही बाजार में हर तरफ लाल-पीलें रंग की मिठी रसीली लीची नजर आने लगती है, जिससे देखकर हर किसी के मुंह में पानी आने लगता है। चाहे बडा हो या छोटा लीची को देखकर कोई भी अपने आपको रोक नहीं पाता। लीची खाने में जितनी स्वादिष्ट होती है, उतनी ही पौष्टिकता से भरपूर है। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी और पोटैशियम, बी कॉम्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, मैगनीशियम, फॉस्फोरस, लौह जैसे खनिज लवण पाए जाते हैं। जिससे शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ रहता है। लीची गर्मियों में खाने वाला फल है। गर्मी से संबंधित समस्याओं को दूर करती है। लीची की तासीर ठंडी होती है जिसके सेवन से शरीर में पानी का स्तर ठीक प्रकार से बना रहता है और डीहाइडे्रशन की समस्या को दूर करती है। लीची में फाइबर अधिक मात्रा में होता हैं जो मोटापा कम करने में मदद करता है। फाइबर हमारे भोजन को पचाने में सहायक होता है। यह शरीर में मौजूद वायरस और संक्रामक रोगों से लडने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है। स्किन रहे ब्यूटीफुल  लीची के नियामित सेवन से त्वचा में निखार आता है, साथ ही तैलीय त्वचा में पोषण मिलता है। चेहरे पर पडने वाले दाग-धब्बों में कमी आती है पाचन विकारों को दूर करने के लिए लीची के बीज के पाउडर की चाय पीना चाहिए, यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। तंत्रिका तंत्र में होने वाले दर्द में भी राहत मिलती है। लीची में पोटैशियम और तांबा अधिक मात्रा में होते हैं जिसका सेवन करने ब्लडपे्रशर नॉरम बना रहता है। यह दिल की धडकन की अनियमितता अथवा अस्थिरता और बीवी को नियंत्रित रखता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है। लीची एक अच्छा एंटीऑक्सीडेंट है। इसमें मौजूद विटामिन-सी रक्त कोशिकाओं के निर्माण और लौहे के अवशोषण में भी मदद करता है। लीची में आल्ट्रावॉयलेट किरणों से शरीर का बचाव करने की खासियत होती है। विटामिन-सी से भरपूर लीची में स्तन कैंसर से लडने के गुण पाए जाते हैं इसके नियामित सेवन से हमारे शरीर में कैंसर के सेल्स ज्यादा नहीं बढ पाते।     साभार-khaskhabar.com  

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इलायची सुंगधित होने के कारण इसका इस्तेमाल मुख शुद्धि के रूप में किया जाता है। त्यौहारों पर मीठा बनाने के लिए मसालों तथा औषधियों में भी इसका अधिक उपयोग होता है। तो आइए, जानते हैं इलायची के औषधीय गुणों के बारे में... दिखने में छोटी सी इलायची सेहत के लिए काफी लाभकारी है। भोजन में इसके प्रयोग से आप कई स्वास्थ्य समस्याओं से निजात पा सकते हैं। इन दिनों तेज धूप और गर्मी है ऐसे में इस गर्मी से बचने के लिए मुंह में इलायची डालें। यह लू के थपेडों से बचाती है। खाना खाने के बाद इलायची खाने से खाना जल्दी पचता है। दूध या अन्य खाद्य पदाथों के साथ इलायची का सेवन करने से मुख शुद्धि होती है। मुख में इलायची रखकर चूसने से भी मुख की दुर्गध से मुक्ति मिलती है। आधा-आधा ग्राम इलायची और सोंठ के पाउडर में 1 ग्राम शहद मिलाकर चाटने से अथवा इलायची के तेल 4-5 बूंदें शक्कर के साथ लेने से कफजन्य खांसी दूर हो जाती है। इलायची दानों का पाउडर और शक्कर सम भाग में लेकर उसमें थोडा एरंडी का तेल मिलाकर 5 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह सेवन करने से आंखों को ठंडक पहुंचती है और आंखों की ज्योती बढती है। मुंह में छाले हो गए हों तो इलायची पाउडर को शहद में मिलाकर छालों पर लगाने और लार टपकानेसे छाले ठीक हो जाते हैं। इलायची दाना, पीपरामूल और पटोलपत्र सम भाग भाग में लेकर चूर्ण बनाएं। 2-4 ग्राम पाउडर घी के साथ सुबह शाम चाटने से कफजन्य हृदय रोग से राहत मिलती है। साभार-khaskhabar.com        

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हींग को हम रोज खाने का स्वाद बढाने के लिए दाल, सब्जियों में डालते हैं। इससे खाना जायकेदार तो बनता ही हैं साथ ही ये पेट के लिए भी अच्छा रहता है...हीं अपच, पेट ददा्र, दांत दर्द, खांसी, सर्दी कारण सिरदर्द, आदि के गुणों से भरपूर है। यह रूचिकारक, बात-कफ को दूर करने वाली उदर संबंधी रोग, पेट की गैस और कृमियों को नष्ट करने वाली है। हींग को पानी में उबालकर उस पानी से कुल्ले करने से दांत का दर्द कम होता है। यदि आपके दांत में पोल हो, तो पोल में हींग भरने से दांत के कीडे मर जाते हैं और दांत की पीडा दूर हो जाती है। आयुर्वेद में हींग को बहुत ही गुणकारी माना जाता है, बस एक सावधानी रखिये की हींग हमेशा घी में ही तली या भुनी जानी चाहिए। घी में भूनी हुई हींग घी के साथ खाने से गर्भवती महिला को आनेवाला चक्कर सिरचकराना और शूल मिटता है।अगर शरीर पर दाद हो गया तो थोडी सी हींग पानी में घिसकर प्रभावित अंग पर लगाएं, इससे दाद जल्दी ठीक हो जाता है। हींग, सोंठ, और मुलहठी-समान मात्रा में लेकर पीस लें। फिर इसे शहद में मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लें। भोजन के बाद एक गोली मुंह में रखकर दोनों वक्त चूसें। कब्ज से राहत मिलेगी। साभार-khaskhabar.com        

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