देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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अंगूर एक बलवर्धक एवं सौन्दर्यवर्धक फ ल है। अंगूर फल मां के दूध के समान पोषक है। फलों में अंगूर सर्वोत्तम माना जाता है। यह निर्बल-सबल, स्वस्थ-अस्वस्थ आदि सभी के लिए समान उपयोगी होता है। बहुत से ऐसे रोग हैं जिसमें रोगी को कोई पदार्थ नहीं दिया जाता है। उसमें भी अंगूर फल दिया जा सकता है। पका हुआ अंगूर तासीर में ठंडा, मीठा और दस्तावर होता है। यह स्पर को शुद्ध बनाता है तथा आंखों के लिए हितकर होता है। अंगूर वीर्यवर्धक, रक्त साफ करने वाला, रक्त बढाने वाला तथा तरावट देने वाला फ ल है। अंगूर में जल, शर्करा, सोडियम, पोटेशियम, साइट्रिक एसिड, फ्लोराइड, पोटेशियम सल्फेट, मैग्नेशियम और लौह तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। अंगूर ह्वदय की दुर्बलता को दूर करने के लिए बहुत गुणकारी है । ह्वदय रोगी को नियमित अंगूर खाने चाहिएं। हार्ट-अटैक से बचने के लिए बैंगनी (काले) अंगूर का रस ‘एसप्रिन’ की गोली के समान कारगर है। ‘एसप्रिन’ खून के थक्के नहीं बनने देती है। बैंगनी (काले) अंगूर के रस में ‘फलोवोनाइड्स’ नामक तत्व होता है और यह भी यही कार्य करता है। पोटेशियम की कमी से बाल बहुत टूटते हैं। दांत हिलने लगते हैं, त्वचा ढीली व निस्तेज हो जाती है, जोडों में दर्द व जकडन होने लगती है। इन सभी रोगों को अंगूर दूर रखता है। अंगूर के पत्तों का रस पानी में उबालकर काले नमक मिलाकर पीने से गुर्दों के दर्द में भी बहुत लाभ होता है। गठिया रोग में अंगूर का सेवन करना चाहिए। इसका सेवन बहुत लाभप्रद है क्योंकि यह शरीर में से उन तत्वों को बाहर निकालता है जिसके कारण गठिया होता है। पेट की गर्मी शांत करने के लिए 20-25 अंगूर रात को पानी में भिगों दे तथा सुबह मसल कर निचोडें तथा इस रस में थोडी शक्कर मिलाकर पीना चाहिए।
साभार-khaskhabar.com













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