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चेरी में मादक सुगंध के साथ एक सुंदर फल है। एक शोध के अनुसार हर चार में से एक व्यक्ति या कहें 25 प्रतिशत लोग इंसोनमिया स्लीपलेसनेस के शिकार हैं और हर पांचवें व्यक्ति को रात में पांच घंटे से ज्यादा नींद ना आने की प्रॉब्लम हो रही है इसी रिसर्च में यह तथ्य भी सामने आए हैं कि चेरी खाने या जूस पीने से व्यक्तियों को अच्छी नींद आती है। चेरी खट्टा-मीठा फल है, जो बहुत टेस्टी है। प्रोटीन और विटामिन से भरपूर यह फल अच्छी नींद के साथ हर उम्र के लोगों के लिए लाभदायक होती है। चेरी या उसका जूस इनटेक करने वाले व्यक्ति को लगभग 17 मिनट ज्यादा नींद आती है।  चेरी त्वचा को पोषण देती है। इसमें मौजूद बीटा कैरोटीन सूरज की यूवी किरणों से त्वचा की रक्षा करने में मदद करता है। साथ ही ड्राय स्किन पर चेरी का पेस्ट कमाल का काम करता है। चेरी के अम्लीय तत्व मृत त्वचा की कोशिकाओं से निजता दिलाने में मदद करती है। इससे त्वचा सॉफ्ट और चमकदार हो जाती है। अच्छी सेहत के लिए सुकूनभरी नींद बहुत जरूरी है। आधुनिक दौर में जिस तरह की बिजी लाइफ स्टाइल, वर्क लोड के बीच प्रॉपर नींद लेना हर वर्ग के लिए मुश्किल होते जा रहा है, वहीं कई समस्याएं मधुमेह, ब्लडप्रैशर, नींद न आना वगैरह खास है। नींद की गोली लेने के कई साइड इफेक्ट हैं, वहीं चेरी प्राकृतिक ऑप्शन है। इसका कोई नुकसान भी नहीं है। सुबह-शाम एक गिलास शुगरलेस चेरी जूस पीने वाले लोगों को सुकूनभरी नींद आती है। वहीं चेरी दिल की बीमारियों में काफी मददगार साबित होती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट की बडी मात्रा होते हैं। आप चाहे वर्किंग वूमन हों चाहे हाउसवाइफ अगर आप इन बातों पर विशेष ध्यान दे कर इन्हें अपनाती हैं तो आप स्फूर्तिवान, ताजगीपूर्ण और फ्रेश दिख सकती हैं।   साभार-khaskhabar.com           

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ड्राई फ्रूट्स में पिस्ता का एक खास स्थान माना जाता है। इसे न केवल स्त्रैक्स में यूज किया जाता है बल्कि खीर, कुल्फी, लस्सी, चॉकलेट्स, सैंडविच और आइसक्रीम में भी पिस्ता डाला जाता है। ये सेहत के लिए फायदेमंद है। हाल ही एक रिसर्च में खुलासा हुआ कि नियमित रूप से पिस्ता खाने से शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा नियंत्रित होने के साथ ब्लड शुगर का लेवल घटता है।आम तौर पर शरीर में खून का लेवल कार्बोहाइड्रेट की अधिकता से बढता है। पिस्ता का सेवन शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को बढने नहीं देता और परिणाम स्वरूप ब्लड में शर्करा की मात्रा नियंत्रित रहती है।भारत जैसे देश में जहां लगभग चार करोड लोग डायबिटीज के शिकार हैं और वर्ष 20-25 तक इसके आठ करोड तक के आंकडे को पार करने की आशंका है, पिस्ते का सेवन डायबिटीज मरीजो की संख्या नियंत्रित कर सकता है। साभार-khaskhabar.com     

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केसर का प्रयोग बिरयानी, खीर, मिठाई और केसर का दूध सौंदर्य उत्पादों में फ्लेवर डालने के लिए किया जाता है। यह आमतौर पर स्वास्थ्य के पूरक पदार्थाे में हाजमें को दरूस्त करने के लिए किया जाता है। केसर का सेवन करने से महिलाओं को मासिक धर्मका समस्याओं से मुक्ति मिलती है। केसर एक सुगंध देने वाला पौधा है। पतली बाली सरीखा केसर 15-25 सेंटीमीटर ऊंचा होता है। पत्तियां संकरी, लंबी और नालीदार होती हैं। इनके बीच से पुष्पदंड निकलता है, जिस पर पुष्प होते हैं। इसका उपयोग मक्खन आदि खाद्य पदार्थों में रंग एवं स्वाद लाने के लिए किया जाता है। चिकित्सा में यह उष्णवीर्य, उत्तेजक, पाचक, वात-कफ नाशक मानी गयी है। इस कारण इसका उपयोग कई तकलीफों में किया जाता है। आयुर्वेदिक नुस्खें, खाद्य व्यंजनों, देव पूजा आदि में तो केसर का उपयोग सालों से होता आ रहा है। बच्चों को सर्दी, जुकाम, बुखार होने पर केसर की एक पंखुडी पानी में घोंटकर इसका लेप छाती, पीठ और गले पर लगाने से आराम होता है। चंदन को केसर के साथ घिसकर इसका लेप माथे पर लगाने से सिर, आंख और मस्तिष्क को शीतलता, शांति और ऊर्जा मिलती है। इससे नाक से रक्त का गिरना बंद हो जाता है और सिर दर्द जल्द दूर होता है। आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों में केसर का विशेष महत्व है। कई अध्ययनों से पता चला है कि गर्भवती महिला को प्रतिदिन दूध में केसर घोलकर पिलाने से जन्म लेने वाले शिशु का रंग गोरा होता है। इतना ही नहीं, यदि मां गर्भावस्था के दौरान केसर का सेवन करती है तो इससे उसका होने वाला बच्चा तंदुरुस्त होता है और कई तरह की बीमारियों से बचा रहता है। कई बार नवजात शिशु को सर्दी जकड लेती है। इससे कभी-कभी उसकी नाक भी बंद हो जाती है जिससे बच्चा मुंह से सांस लेने लगता है और हकलाने लगता है। ऐसी स्थिति में मां के दूध में केसर मिलाकर बच्चे के सिर और नाक पर मलें। इससे बच्चे को काफी आराम मिलता है और उसकी बेचैनी कम हो जाती है। बच्चे को सर्दी हो तो केसर की 1-2 पंखुड़ी 2-4 बूंद दूध के साथ अच्छी तरह घोंटें ताकि केसर दूध में घुल जाए। इसे एक चम्मच दूध में मिलाकर बच्चे को सुबह-शाम पिलाएं। इससे उसे काफी लाभ होगा। माथे, नाक, छाती व पीठ पर लगाने के लिए केसर, जायफल व लौंग का लेप पानी में बनाएं और रात को सोते समय इसका लेप करें।      साभार-khaskhabar.com       

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अगर आप भी आधुनिक जीवनशैली के चलते अपना सौन्दर्य खो रहे हैं या खुद को बुझा बुझा महसूस कर रहे हैं, तो आपको जरूरत है अपने आहार में कुछ बदलाव करने की। सौंदर्य के लिए पोषाहार भी बेहद अहम है। अपनी डाइट में ताजे फल और सब्जियों के जूस, कच्चा सलाद, अंकुरित अनाज, दाल, आर्गेनिक गेहूं एवं चावल बादाम, बीज और दही जैसे प्रकृतिक खाद्य पदार्थो का उपयोग करके अपने शरीर को शुद्ध और मौलिक रूप में बनाए रखा और शरीर को विषैले पदार्थो से संरक्षण प्रदान करें। एक नजर उन पांच बदलावों पर जो आप अपने आहर में लाकर खुद को दे सकते हैं दमकती त्वचा... ये खाद्य पदार्थ आधुनिक जीवनशैली में भी दैनिक खानपान का अभिन्न अंग होनी चाहिए और रिफाइंड, चीनी और चिकनाईयुक्त खाद्य पदार्थो को अपनी डाइट से हटाया जाना चाहिए। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं कि प्रकृतिक भोजन ही आपके बाहरी सौंदर्य में निखार ला सकता है। इनमें आप की बाहरी बनावट और आंतरिक अहसास, दोनों में सकारात्मक प्रभाव दिखाई देता है। इनसे त्वचा निर्मल, कोमल और स्वच्छ बन जाती है।  — स्वस्थ्य शरीर के लिए चीनी, मांसाहार और चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थो पर अपनी निर्भरता कम कीजिए और वसायुक्त अनाज का सेवन बढ़ाई और परिशोधित अनाज और आटे का उपयोग कीजिए।आपके शरीर की आवश्यकता अनुसार चीनी आपको प्रकृतिक फलों से ही प्राप्त हो जाती है। आप विकल्प के तौर पर शहद को भी मिठास के लिए प्रयोग कर सकती है।  — प्रतिदिन ताजे फल और सब्जियों को अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाइए। दही को सौंदर्य उत्पाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है और स्किमड दूध और पनीर आपकी डाइट में शामिल किया जाना चाहिए। सब्जियों को हल्की आंच पर पकाइए।ताजे पत्तियों वाली साग-सब्जियों, ताजे फ्रूट, जूस को अपनी दैनिक आहार में शामिल कीजिए। यह न केवल आपकी महत्वपूर्ण पौषाहार प्रदान करते हैं, बल्कि शरीर में आसानी से पच जाते हैं। यह शरीर को स्वच्छ और निर्मल रखने में भी मदद करते हैं और शरीर में विषैले पदार्थो के जमाव को रोकते हैं। फल और सब्जियों के जूस ताजा लेने चाहिए और इनमें आवश्यकतानुसार साफ ताजा पानी मिला लेना चाहिए।     साभार-khaskhabar.com       

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सौंफ को मसलों की रानी और पान की जान भी कहा जाता है। सौंफ के दानों का सेवन कर हम अपने मुंह को फ्रेश करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है। लेकिन क्या आप इस बात को जानती हैं कि सौंफ की चाय भी बनती है जो कि कई रोगों से निजात दिलाने में मदद करती है। आइये जानते हैं ऐसी ही कुछ बीमारियों के बारे में जो कि सौंफ की चाय का सेवन करके दूर की जा सकती हैं। सौंफ में तांबा आयरन, पोटेशियम, मैंग्गनीस, जिन्क, कैल्शियम और मैग्नेशियम जैसे मिनरल्स पाये जाते हैं। तो आइये जानते हैं सौंफ खाने के लाभ के बारे में...सौंफ की चाय का सेवन करके आप जॉन्डिस के खतरे को कम कर सकती है, इसी के साथ यह किडनी के कार्य को तेज करके हमारे खून को साफ करती है।सौंफ के छोटे-छोटे दाने हरे होते हैं। आम तौर पर सौंफ छोटी और बडी दो प्राकर की होती है। दोनों ही खुशबूदार होती है। सौंफ का उपयोग अचारों और सब्जियों में को रूचिकर जायेकदार बनाने के अतिरिक्त औषधि के रूप में भी बहुत अधिक होता है। आयुर्वेद के अनुसार सौंफ त्रिदोष नाशक है। रातभर ठीक से ना सोने से हमारी आंखों में सूजन हो जाती है, इसके लिए आप सौंफ की चाय बनाए और फिर रूई इसमें डुबोकर अपनी आंखों को 10 मिनट के लिए सेंके।अगर आपकी बॉडी में किसी तरह की सूजन होती है, इस सूजन को दूर करने के लिए आप वजन को बढने से रोक सकती है। यह आपके मेटोबॉलिज्म को भी बढाती है। इसी के साथ इससे शरीर का फैट भी कम होता है।साभार-khaskhabar.com           

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नींबू स्फूर्तिदायक और रोग निवारक फल है। जैसा कहा गया है कि रोज एक सेब खाओ और डॉक्टर को दूर भगाओ, उसी तरह रोज 10 बूंदे नींबू की पियो और डॉक्टर को दूर भगाओ। इसका रंग हरा या पीला तथा स्वाद खट्टा होता है। इसके रस में 5 प्रतिशत साइट्रिक अम्ल होता है। इसमें फ्लेवनॉयड्स होते हैं जो पाचन तंत्र को ठीक रखते हैं। यही वजह है कि पेट खराब होने पर नींबू पानी पिलाया जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर में पोप्टिक अल्सर नहीं बनने देता है। नींबू में मौजूद विटामिन सी और पोटेशियम घुलनशील होते हैं। जिसके कारण ज्यादा मात्रा में इसका सेवन भी नुकसानदायक नहीं होता। साफ-सुथरी और दमकती त्वचा के लिए भी यह अच्छा ऑप्शन है। इसमें मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा की कोशिकाओं को सुरक्षित रखते हैं, दाग हल्के करते हैं और त्वचा को अल्ट्रावॉयलेट किरणों से दूर रखते हैं। रोजाना एक गिसाल गुनगुना नींबू पानी के इस्तेमाल से शरीर में मौजूद अतिरिक्त फैट को कम करता है। नींबू में ए, बी और सी विटामिनों की भरपूर मात्रा है-विटामिन ए अगर एक भाग है तो विटामिन बी दो भाग और विटामिन सी तीन भाग। विटामिन सी से भरपूर नींबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने के साथ ही एंटी आक्सीडेंट का काम भी करता है और कोलेस्ट्रोल भी कम करता है। साभार-khaskhabar.com                 

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मॉडर्न लाइफस्टाइल के चलते हमारी खाने पीने की आदत काफी बदल गई है। हम पौष्टिक चीजें खाने की बजाय स्वाद को अधिक प्राथमिकता देने लगे हैं, जैसे- जंक फूड्स, तली भुनी चीजें, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट, आइस्क्रीम आदि। खानपान में गडबडी के चलते शरीर में कैल्शियम की कमी एक आम समस्या हो गई है,जो आगे चलकर स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। शरीर के स्वस्थ और संतुलित विकास के लिए हर उम्र मेें कैल्शियम की आवश्यकता होती है। बढते बच्चों के शरीर, दांतों के आकार और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए भी कैल्शियम जरूरी है।   कैल्शियम बॉडी की प्रत्येक कोशिश को कैल्शियम की जरूरत इसलिए होती है, क्योंकि हमारी बॉडी में स्किन, नाखून, बाल और मल के जरिए रोज ही कैल्शियम की कुछ मात्रा नष्ट होती रहती है। इसलिए कैल्शियम की कुछ मात्रा नष्ट होती रहती है। इसलिए कैल्शियम का संतुलन बनाए रखने के लिए इसकी रोज ही पूर्ति कर ली जाए, तो अच्छा रहता है। यदि ऐसा नहीं होगा, तो हमारा शरीर हड्डियों से कैल्शियम लेने लगेगा। नतीजा बाहर से भले ही हम कमजोर ना लगें, लेकिन अन्दर ही अन्दर हड्डियाँ खोखली हो जाएंगी और शरीर कमजोर और कमजोर हड्डियाँ कई तरह की पेरशानियाँ पैदा करती हैं, जैसे- जरा-सी चोट लगने पर ही फ्रैक्चर हो सकता है। यही नहीं, कैल्शियम हृदय, मांसपेशियों, ब्लड क्लॉटिंग के लिए भी बेहद जरूरी होता है। इसके अलावा कैल्शियम मांसपेशियों के कई काम में मदद करता है। जैसे- कैल्शियम नर्वस सिस्टम के संदेश मस्तिष्क तक पहुंचाने में सहायक है, जैसे- यदि आपने किसाी गरम वस्तु को छू लिया है, तो मस्तिष्क तुरंत एक संदेश भेजेगा, जिससे आपके मुंह से आह!... आउच! की आवाज आएगी और आप अपने हाथ का जल्दी से दूर हटा लेंगे।सब्जियाँ- गाजर, भिंडी, अरबी, मूली, मेथी, करेला और चुकंदर।   डेयरी उत्पाद- दूध व दूध से बनी चीजों को कैल्शियम का प्रमुख स्त्रोत माना जाता है। हर रोज दूध का सेवन शरीर में कैल्शियम की मात्रा बनाए रखने में मददगार होता है। मां का दूध नवजात शिश के लिए कैल्शियम का सर्वोत्तम स्त्रोत है, जो उनमें कैल्शियम की पूर्ति करता है और स्वस्थ रखता है। ये सभी प्राकृतिक रूप से कैल्शियम प्रदान करनेवाले तत्व हैं, ये पदार्थ तुरंत शरीर के द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं, इन्हें अपनी रोजमर्रा की डायट में शामिल कर हम कैल्शियम की कमी से होने वाले नुकसानों से बच सकते हैं। साभार-khaskhabar.com         

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ज्‍योतिष में काले तिलों को अचूक शास्त्र कहा गया है। कहते हैं कि इनका उपयोग विधि सम्मित कर लिया जाए तो तुरंत शुभफल मिलने लगते हैं।    प्रतिदिन एक लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें काले तिल डाल दें। अब इस जल को शिवलिंग पर ऊँ नम: शिवाय मंत्र जप करते हुए चढ़ाएं। जल पतली धार से चढ़ाएं और मंत्र का जप करते रहें। जल चढ़ाने के बाद फूल और बिल्व पत्र चढ़ाएं। मनचाही इच्छाए पूरी होने की संभावना प्रबल हो जाती है।   कुंडली में शनि के दोष हों या शनि की साढ़ेसाती या ढय्या चल रही हो तो किसी पवित्र नदी में हर शनिवार काले तिल प्रवाहित करना चाहिए। इस उपाय से शनि के दोषों की शांति होती है।दूध में काले तिल मिलाकर पीपल पर चढ़ाएं। इससे बुरा समय दूर हो सकता है। यह उपाय हर शनिवार को करना चाहिए।    काले तिल का दान करें। इससे राहु-केतु और शनि के बुरे प्रभाव समाप्त हो जाते हैं। कालसर्प योग, साढ़ेसाती, ढय्या, पितृ दोष आदि में भी यह उपाय किया जा सकता है। साभार-khaskhabar.com     

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कलौंजी भी आयुर्वेदिक औषधि है, जो हमारे शरीर को कई तरह के रोगों से बचाती है और शरीर के अतिरिक्त वजन को घटाने में मदद करती है। इसे ब्लड प्रेशर भी कम हुआ। सबसे बडी बात यह है कि इसका कोई साइड-इफेक्ट नहीं होता है। इसे महत्वपूर्ण चिकित्सक हर्ब माना जाता है। तो आइये जानते हैं काली रंग की दिखने वाली कलौंजी खाने से होने वाले फायदे के बारे में...जिन लोगों की त्वचा पर सफेद धाग हो गये हों तो उन्हें रोजाना सुबह उठकर नहार मुंह चुटकी भर कलौंजी खानी चाहिए। दागों पर कुछ ही समय में कालापन आता जाएगा।कलौंजी में मौजूद एंटी आक्सीडेंट कैंसर जैसी घातक बीमारी से व्यक्ति को बचाव करती है।  सर्दी-जुकाम की परेशानी है तो इसके बीजों को गरम कीजिए और मलमल के कपडे में बांधिए फिर इसे सूघते रहिये, दो दिन में ही जुकाम की शिकायत खत्म हो जायेगी।   साभार-khaskhabar.com     

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खीरा हेल्थ के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। ये सेहत के साथ-साथ सौंदर्य में बहुत फायदेमंद होता है। कम फेट व कैलोरी से भरपूर खीरे का सेवन आपको कई रोगो से बचाने में सहायता करता है। खीरे को आप कई तरह से खा सकते हैं, जैसे सलाद, जूस, सैंडवीच, या यूं ही नमक छिडक कर भी खा सकते हैं। खीरे के स्वास्थ्यवद्र्धक और सौन्दर्यवद्र्धक गुण दोनों अनगिनत होते हैं जैसे...आयुर्वेद के मुताबिक पेट में गर्मी होने के वजह से मुंह से बदबू निकलता है, खीरा पेट को शीतलता प्रदान करने में मदद करता है।अगर मुंह से बदबू आती है तो आप कुछ देर के लिए मुंह में खीरे के टुकडा रख लें क्योंकि यह जीवाणुओं को मारकर धीरे-धीरे बदबू निकलना कम कर देता है।  साभार-khaskhabar.com           

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गुलाब जल त्वचा के लिए हर तरह से उपयोगी माना गया है, इसकी सुंगध से हर किसी का मन प्रफुल्लित हो उठता है। इसमें पाए जानें वाले औषधिय गुणों के कारण आज के समय में इसका उपयोग सौदंर्य प्रसाधान में बहुतायात किया जाता है। लेकिन क्या ये जरूरी है कि बाजार में मिलने वाला गुलाबजल आपकी त्वचा के लिए सही ही उतरे, क्योंकि आज के समय में उपयोग की जानें वाली हर वस्तुओं में मिलावट देखने को मिलती है। चाहे फल या सब्जियां हो या फिर कोई भी प्रकार के महंगे प्रॉडक्ट सभी में मिलावट देखी जा सकती है। भले ही बाजार में मिलने वाला गुलाब जल महंगा होने के साथ कितनी ही अच्छी ब्रांड वाला क्यों न हो, उसमें कुछ न कुछ मिलावट जरुर की गई होती है। अच्छा होगा कि आप अपने घर पर खुद ही गुलाब की पंखुडियों से गुलाब जल तैयार कर लें। यहां पर एक आसान सा तरीका है जिसकी सहायता से आप गुलाब जल तैयार कर सकती हैं। आइये जानते हैं वह तरीका-बनाने की विधि — अच्छा होगा कि आप ताजी गुलाब की उन पंखुडियों का प्रयोग करें, जिन पर कीटनाशकों या रसायनों का छिड़काव न किया गया हो। अपने घर पर ही गुलाब उगाएं और उसका प्रयोग करें। — सूरज उगने के दो या तीन घंटे के बाद ही गुलाब तोड़ लें। — गुलाब की केवल पंखुडियों का प्रयोग करें न कि उसके तने और पत्तियों का। — गुलाब को धोएं जिससे कीड़े और धूल साफ हो जाए और फिर उसे फिल्टर किये हुए पानी में डालें। — पंखुडियों को पूरी तरह से पानी में डुबो दें और पानी को ढंक कर हल्की आंच पर चढ़ा दें। अब पानी को भाप बन कर उठने दें और धीरे—धीरे उसे वैसे ही छोड़ दें। — आप देखेंगी कि पंखुडियों का रंग उतर चुका है और पानी का रंग पंखुडियों का रंग ले चुका है। पंखुडियां पानी में तैरना शुरु हो जाएंगी। — बचा हुआ पानी छान लें और उसे एक शीशी में डाल कर फ्रिज में रख दें।   साभार-khaskhabar.com     

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अनन्नास पाचक तत्वों से भरपूर, शरीर को शीघ्र ही ताजगी देने वाला, हृदय व मस्तिष्क को शक्ति देने वाला कृमि नाशक, स्फूर्ति दाई फल है। ये वर्ण में निखार लाता है। गर्मी में इसके उपयोग से ताजगी व ठंडक मिलती है। आयुर्वेद के ग्रंथों में इसके गुणों की व्यापाक रूप से चर्चा की गई है और इसके सेवन को अत्यधिक फायदेमंद और बलदायक बताया गया है। अनन्नास के पौधों में जनवरी-फरवरी में फल लगना आरम्भ होता है। इसे नवम्बर तक मार्केट में फलों की दुकानों पर सजे देखा जा सकता है। अनन्नास बतौर फल खने के अलावा रस, शर्बत, मुरब्बा के रूप में भी सेवन किया जाता है। यदि पेट में अजीर्ण हो तो पके अनन्नास के छोटे-छोटे टुकडे करके सेंधा नमक और कालीमिर्च का चूर्ण लगाकर खाने से लाभ मिलता है। इस प्रकार अनन्नास ग्रहण करने से पेट के कृमि हफ्ते भर में निकल जाते हैं। जिन बच्चों को पेट में अक्सर कृमि हो जाते हैं, उन्हें उक्त प्रकार से अनन्नास अवश्य दें।अस्थमा के रोगियों को सुबह-दोपहर खाली पेट अनन्नास का रस लेने से फायदा होता है।अनियमित माहवारी हो, तो इसके रस का नियमित सेवन करने से माहवारी सामान्य हो जाती है।शोधों के मुताबिक दिन में 3 बार अनन्नास खाने से बढती उम्र के साथ कम होती आंखों की रोशनी का खतरा कम हो जाता है।   साभार-khaskhabar.com             

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नारद संवाद

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राइन फॉल्स, स्विस सीढ़ियाँ और बुज़ुर्ग घुटने: नाव की सैर बनी ओलंपिक प्रतियोगिता!

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