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बढता वजन करना हो तो रोज सुबह नींबू और शहद मिलाकर गरम पानी पीना चाहिये, ये तो हम सब को मालूम है। लेकिन क्या आप नींबू और शहद पीने के बारे में लाभ जानते हैं....आप को यह जानकर हैरानी होगी कि इन्हें एक साथ पीने से कई तरह की बीमारियां ठीक हो जाती हैं, क्या आपको कफ और खराश की समस्या है...तो आपको नींबू और शहद पानी पीना चाहिये। शहद में एंटी बैक्टीरियल तत्व पाये जाते हैं जो बैक्टीरिया और जम्र्स को साफ करता है। साथ ही गरम पानी भी गले में से कफ को एकदम साफ कर देता है।   हम सब अक्सर सुनते हैं कि सुबह उठते ही गुनगुने पानी में नींबू और शहद पीने से काफी फायदा होता है। एक बात जो सभी कहते है कि इसका सबसे ज्यादा असर मोटापा घटाने में होता है। चलिये जानते हैं इसके और फायदे के बारे में....   पाचन शक्ति  सुबह सुबह उठते ही हल्के गर्म पानी में नींबू शहद मिला कर पीना, पाचन शक्ति बढाने में मदद करता है। यह खाना नहीं पचने से होने वाली दूसरी परेशानियों को भी खत्म करने में मदद करता है।   कब्जी का खातमा  नींबू और शहद का मेल कब्जी को खत्म करने के लिए सबसे अच्छा घरेलुु उपचार है। पेट में जाकर यह कई बिमारियों को खत्म कर पानी की मात्रा की पुर्ती करता है, जिससे कब्जी खत्म हो जाती है। बॉडी एनर्जी  तडके उठते ही नींबू शहद का पानी पीने से आपकी बॉडी को उर्जा मिलती है । इसके अलावा आप अपने मूड में भी तरोताजगी महसुस करेंगे। पूरा दिन फे्रश फील होगा।   मुंह की दुर्गन्ध खत्म  अपने एसीडिक नेचर के कारण नींबू मुंह में होने वाली दूर्गन्ध को भी खत्म करता है। इसके अलावा दातों में मौजुद बैकटेरिया को भी काटता है।     निखरी त्वचा  नींबू से खुन साफ होता है जिसका असर हमारी त्वचा पर दिखता है। वैसे भी कहते हैं कि जितना खुन साफ होगा, उतना ही रंग निखरेगा। तो अपनी त्वचा को कोमल और सुंदर बनाने के लिए नियमित रूप से नींबू और शहद का हल्के गर्म पानी में डाल की सेवन करें।   साभार-khaskhabar.com     

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अनार को सबसे ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक और पोषक तत्वों से भरपूर फल माना जाता है जो स्वाद और जायके से भरपूर है। अनार में भरपूर मात्रा में फाइबर, विटामिन सी, के होता है। अनार को आहार योजना में शामिल करना चाहिए। इससे पेट के आसपास की चर्बी कम हो जाती है।    चेहरे पर स्क्रब अनार के छिलके, मृत त्वचा को निकालने में सहायक होते हैं। इसके इस्तेमाल से ब्लैक और व्हाइट हैड्स निकल जाते हैं, अनार छिलकों का पाउडर बना लें, इसमें ब्राउन सुगर और शहद को मिला लें और चेहरे पर लगाएं, इससे चेहरे पर निखार आता है। अनार में पाएं जाने वाले फोटोकेमिकल्स एरोमाटेज एंजाइम को रोकता है। यह एंजाइम एंड्रोजन हार्मोन को एस्ट्रोजन हार्माेन में बदल देता है जो ब्रेस्ट कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने में अहम भूमिका निभाता है। यह तत्व एरोमाटेज एंजाइम के असर को खत्म कर देता है और कैंसर से बचने में मदद मिलती है। इसके अलावा अनार में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो स्तन कैंसर को रोकने में प्रभावी होते हैं। स्तन कैंसर से पीडित ज्यादातर महिलाएं एरोमाटेज एंजाइम को खत्म करने वाली दवाएं लेती हैं जिससे एस्ट्रोजन हार्मोन का विकास नहीं हो सके।  अनार के सेवन से हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को भी कम किया जा सकता है। गर्मियों में सही खान-पान के लिए अनार को भी अपने आहार में शामिल करना चाहिए। इसेस पाचन संबंधी समस्याओं में तो आराम मिलता ही है, साथ ही इसके नियमित सेवन से धमनियों भी ठीक रहती है। आजकल आये दिन स्तन कैंसर के मामले सुने में आते ही रहते हैं। इसलिए डॉक्टर्स ने महिलाओं को स्तन कैंसर से बचने के लिए पूरी जानकारी और इसके अलावा खानपान पर खासतौर पर ध्यान देना चाहिए को कहा है। महिलाओं को स्तन कैंसर से बचने के लिए अनार का खूब सेवन करना चाहिए। वैसे तो अनार गुणकारी फल है। वहीं एक रिसर्च के अनुसार, अनार का स्तन कैंसर में फायदे के बारे में पता लगाया है।   साभार-khaskhabar.com       

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बेसन लगभग हरभारतीय घर की रसोई में मौजूद रहने वाली चीज है। मजे की बात तो ये है कि बेसन का इस्तेमाल हम न सिर्फ खाने में, बल्कि अपने त्वचा को निखारने में भी कर सकते हैं। पुराने जमाने से ही महिलाएं बेसन को चेहरे और बालों पर लगाती आ रही है। बेसन की पकौडे, बेसन की कढी, बेसन की बर्फी तरह-तरह के व्यंजनों में बनाने के लिए लेते हैं। खास बात यह है कि बेसन का इस्तेमाल हम न सिर्फ खाने में, बल्कि अपनी खूबसूरती को निखारे में भी कर सकते हैं। पुराने जमाने से ही महिलाएं बेसन को चेहरे और बालों पर लगाती आ रही हैं। बेसन की सबसे खास बात ये हैं कि वह हर प्रकार की त्वचा और समस्या पर अपना कमाल दिखा सकता है। त्वचा साफ रखने व छिद्रों को टाइट करने के लिहाज से भी बेसन फायेमंद है। इसके लिए बेसन और पेस्ट खीरे के रस को मिलाएं। फिर फेसपैक की तरह ही इसका इस्तेमाल करें। कुछ देर सूखने के बाद ठंड पानी से धो लें। खुले रोमछिद्रों की समस्या दूर हो जाएगी। बेसन को हल्दी के साथ मिलाइए, उसमें सरसों का तेल डाल कर गाढा पेस्ट बनाइए। इसे चेहरे पर लगा कर रगडिये और इसे सप्ताहा में दो बार लगाइये। ऐसे करनेसे चेहरा चमचमाने लगेगा। बेसन को हल्दी और दही के साथ मिलाएं और चेहरे पर 20 मिनट के लिए लगाइए। इसे बाद में दूध और फिर सादा पानी से धो लीजिए। कुछ ही दिनों में आपको अपने चेहरे पर असर दिखेगा। अगर आपके चेहरे पर अनचाहे बाल हों और आप ब्लीच न करना चाहती हों, तो इसके लिए भी बेसन काम कर सकता है। बेसन में थोडा सा नींबू का रस और पानी की कुछ बूंदे मिलाकर उसका गाढा सा पेस्ट बनाए। प्रभावित जगह पर हल्के हाथों से इस पेस्ट को रगडें। फिर कुछ देर चेहरे पर लगे रहने के बाद जब वो सूख जाए तो उसे धो लें।    साभार-khaskhabar.com       

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धनिया भारतीय रसोई में प्रयोग की जाने वाली एक सुंगंधित हरी पत्ती है जो कि भोजन को और भी स्वादिष्ट बना देती है। सामान्यत: इसका उपयोग सब्जी की सजावट और ताजे मसाले के रूप में किया जाता है लेकिन इसका सेवन करने से कई लाभ हैं। धनिया के बीज तो मसालों में पीस कर इस्तेमाल किए ही जाते हैं, इसकी हरी हरी पत्तियों का प्रयोग भी कई तरह से किया जाता है। यह भोजन को जायकेदार बनाने के साथ-साथ विभिन्न तत्वों के बीच संतुलन भी लाती है। इसीलिए यूरोप और एशिया में पिछले सात हजार सालों से भोजन में इसके प्रयोग के प्रमाण मिलते हैं। इसमें लिपिड स्टार्च, पेक्टिन, पायननि, डिपेंटीन, अमीनो एसिड और सिटोस्टेरॉल्स भी पर्याप्त में पाए जाते है। आइए आपको बताते हैं आगे की स्लाइ्डस पर...हरी धनिया को किसी भी व्यंजन में डालने से उस चीज का स्वदा तो बढता ही हैं, लेनिक क्या आप जानते हैं कि धनिया के पत्तों में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों का समावेश भी होता है। हरा धनिया हमारे चेहरे की खूबसूरती को बढाने के लिए भी बहूत ही उपयोगी हैं, यदि आपके चेहरे पर मुंहासे हैं, तो आप थोडी सी हल्दी लेकर उसे धनिया के रस में मिलाएं तथा उसे चेहरे पर नियमित रूप से लगायें। ऐसा करने से चेहरे पर मुंहासों की समस्या दूर हो जाती है और चेहरा साफसुधरा होने लगता है।हरी धनिया में प्रोटीन, वसा, फाइबर, विटामिन सी, कार्बोहाइड्रेट और कैल्शियम, आयर्न, थियामीन जैसे महत्वपूर्ण खनिज पदार्थ भी पाए जाते हैं जो हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी होते हैं। हरा धनिया पीसकर, गंजे पर लेप करें। कुछ दिनों के इस उपचार से बाल आने लगते हैं।   साभार-khaskhabar.com         

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चेरी में मादक सुगंध के साथ एक सुंदर फल है। एक शोध के अनुसार हर चार में से एक व्यक्ति या कहें 25 प्रतिशत लोग इंसोनमिया स्लीपलेसनेस के शिकार हैं और हर पांचवें व्यक्ति को रात में पांच घंटे से ज्यादा नींद ना आने की प्रॉब्लम हो रही है इसी रिसर्च में यह तथ्य भी सामने आए हैं कि चेरी खाने या जूस पीने से व्यक्तियों को अच्छी नींद आती है। चेरी खट्टा-मीठा फल है, जो बहुत टेस्टी है। प्रोटीन और विटामिन से भरपूर यह फल अच्छी नींद के साथ हर उम्र के लोगों के लिए लाभदायक होती है। चेरी या उसका जूस इनटेक करने वाले व्यक्ति को लगभग 17 मिनट ज्यादा नींद आती है।  चेरी त्वचा को पोषण देती है। इसमें मौजूद बीटा कैरोटीन सूरज की यूवी किरणों से त्वचा की रक्षा करने में मदद करता है। साथ ही ड्राय स्किन पर चेरी का पेस्ट कमाल का काम करता है। चेरी के अम्लीय तत्व मृत त्वचा की कोशिकाओं से निजता दिलाने में मदद करती है। इससे त्वचा सॉफ्ट और चमकदार हो जाती है। अच्छी सेहत के लिए सुकूनभरी नींद बहुत जरूरी है। आधुनिक दौर में जिस तरह की बिजी लाइफ स्टाइल, वर्क लोड के बीच प्रॉपर नींद लेना हर वर्ग के लिए मुश्किल होते जा रहा है, वहीं कई समस्याएं मधुमेह, ब्लडप्रैशर, नींद न आना वगैरह खास है। नींद की गोली लेने के कई साइड इफेक्ट हैं, वहीं चेरी प्राकृतिक ऑप्शन है। इसका कोई नुकसान भी नहीं है। सुबह-शाम एक गिलास शुगरलेस चेरी जूस पीने वाले लोगों को सुकूनभरी नींद आती है। वहीं चेरी दिल की बीमारियों में काफी मददगार साबित होती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट की बडी मात्रा होते हैं। आप चाहे वर्किंग वूमन हों चाहे हाउसवाइफ अगर आप इन बातों पर विशेष ध्यान दे कर इन्हें अपनाती हैं तो आप स्फूर्तिवान, ताजगीपूर्ण और फ्रेश दिख सकती हैं।   साभार-khaskhabar.com           

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ड्राई फ्रूट्स में पिस्ता का एक खास स्थान माना जाता है। इसे न केवल स्त्रैक्स में यूज किया जाता है बल्कि खीर, कुल्फी, लस्सी, चॉकलेट्स, सैंडविच और आइसक्रीम में भी पिस्ता डाला जाता है। ये सेहत के लिए फायदेमंद है। हाल ही एक रिसर्च में खुलासा हुआ कि नियमित रूप से पिस्ता खाने से शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा नियंत्रित होने के साथ ब्लड शुगर का लेवल घटता है।आम तौर पर शरीर में खून का लेवल कार्बोहाइड्रेट की अधिकता से बढता है। पिस्ता का सेवन शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को बढने नहीं देता और परिणाम स्वरूप ब्लड में शर्करा की मात्रा नियंत्रित रहती है।भारत जैसे देश में जहां लगभग चार करोड लोग डायबिटीज के शिकार हैं और वर्ष 20-25 तक इसके आठ करोड तक के आंकडे को पार करने की आशंका है, पिस्ते का सेवन डायबिटीज मरीजो की संख्या नियंत्रित कर सकता है। साभार-khaskhabar.com     

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केसर का प्रयोग बिरयानी, खीर, मिठाई और केसर का दूध सौंदर्य उत्पादों में फ्लेवर डालने के लिए किया जाता है। यह आमतौर पर स्वास्थ्य के पूरक पदार्थाे में हाजमें को दरूस्त करने के लिए किया जाता है। केसर का सेवन करने से महिलाओं को मासिक धर्मका समस्याओं से मुक्ति मिलती है। केसर एक सुगंध देने वाला पौधा है। पतली बाली सरीखा केसर 15-25 सेंटीमीटर ऊंचा होता है। पत्तियां संकरी, लंबी और नालीदार होती हैं। इनके बीच से पुष्पदंड निकलता है, जिस पर पुष्प होते हैं। इसका उपयोग मक्खन आदि खाद्य पदार्थों में रंग एवं स्वाद लाने के लिए किया जाता है। चिकित्सा में यह उष्णवीर्य, उत्तेजक, पाचक, वात-कफ नाशक मानी गयी है। इस कारण इसका उपयोग कई तकलीफों में किया जाता है। आयुर्वेदिक नुस्खें, खाद्य व्यंजनों, देव पूजा आदि में तो केसर का उपयोग सालों से होता आ रहा है। बच्चों को सर्दी, जुकाम, बुखार होने पर केसर की एक पंखुडी पानी में घोंटकर इसका लेप छाती, पीठ और गले पर लगाने से आराम होता है। चंदन को केसर के साथ घिसकर इसका लेप माथे पर लगाने से सिर, आंख और मस्तिष्क को शीतलता, शांति और ऊर्जा मिलती है। इससे नाक से रक्त का गिरना बंद हो जाता है और सिर दर्द जल्द दूर होता है। आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों में केसर का विशेष महत्व है। कई अध्ययनों से पता चला है कि गर्भवती महिला को प्रतिदिन दूध में केसर घोलकर पिलाने से जन्म लेने वाले शिशु का रंग गोरा होता है। इतना ही नहीं, यदि मां गर्भावस्था के दौरान केसर का सेवन करती है तो इससे उसका होने वाला बच्चा तंदुरुस्त होता है और कई तरह की बीमारियों से बचा रहता है। कई बार नवजात शिशु को सर्दी जकड लेती है। इससे कभी-कभी उसकी नाक भी बंद हो जाती है जिससे बच्चा मुंह से सांस लेने लगता है और हकलाने लगता है। ऐसी स्थिति में मां के दूध में केसर मिलाकर बच्चे के सिर और नाक पर मलें। इससे बच्चे को काफी आराम मिलता है और उसकी बेचैनी कम हो जाती है। बच्चे को सर्दी हो तो केसर की 1-2 पंखुड़ी 2-4 बूंद दूध के साथ अच्छी तरह घोंटें ताकि केसर दूध में घुल जाए। इसे एक चम्मच दूध में मिलाकर बच्चे को सुबह-शाम पिलाएं। इससे उसे काफी लाभ होगा। माथे, नाक, छाती व पीठ पर लगाने के लिए केसर, जायफल व लौंग का लेप पानी में बनाएं और रात को सोते समय इसका लेप करें।      साभार-khaskhabar.com       

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अगर आप भी आधुनिक जीवनशैली के चलते अपना सौन्दर्य खो रहे हैं या खुद को बुझा बुझा महसूस कर रहे हैं, तो आपको जरूरत है अपने आहार में कुछ बदलाव करने की। सौंदर्य के लिए पोषाहार भी बेहद अहम है। अपनी डाइट में ताजे फल और सब्जियों के जूस, कच्चा सलाद, अंकुरित अनाज, दाल, आर्गेनिक गेहूं एवं चावल बादाम, बीज और दही जैसे प्रकृतिक खाद्य पदार्थो का उपयोग करके अपने शरीर को शुद्ध और मौलिक रूप में बनाए रखा और शरीर को विषैले पदार्थो से संरक्षण प्रदान करें। एक नजर उन पांच बदलावों पर जो आप अपने आहर में लाकर खुद को दे सकते हैं दमकती त्वचा... ये खाद्य पदार्थ आधुनिक जीवनशैली में भी दैनिक खानपान का अभिन्न अंग होनी चाहिए और रिफाइंड, चीनी और चिकनाईयुक्त खाद्य पदार्थो को अपनी डाइट से हटाया जाना चाहिए। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं कि प्रकृतिक भोजन ही आपके बाहरी सौंदर्य में निखार ला सकता है। इनमें आप की बाहरी बनावट और आंतरिक अहसास, दोनों में सकारात्मक प्रभाव दिखाई देता है। इनसे त्वचा निर्मल, कोमल और स्वच्छ बन जाती है।  — स्वस्थ्य शरीर के लिए चीनी, मांसाहार और चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थो पर अपनी निर्भरता कम कीजिए और वसायुक्त अनाज का सेवन बढ़ाई और परिशोधित अनाज और आटे का उपयोग कीजिए।आपके शरीर की आवश्यकता अनुसार चीनी आपको प्रकृतिक फलों से ही प्राप्त हो जाती है। आप विकल्प के तौर पर शहद को भी मिठास के लिए प्रयोग कर सकती है।  — प्रतिदिन ताजे फल और सब्जियों को अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाइए। दही को सौंदर्य उत्पाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है और स्किमड दूध और पनीर आपकी डाइट में शामिल किया जाना चाहिए। सब्जियों को हल्की आंच पर पकाइए।ताजे पत्तियों वाली साग-सब्जियों, ताजे फ्रूट, जूस को अपनी दैनिक आहार में शामिल कीजिए। यह न केवल आपकी महत्वपूर्ण पौषाहार प्रदान करते हैं, बल्कि शरीर में आसानी से पच जाते हैं। यह शरीर को स्वच्छ और निर्मल रखने में भी मदद करते हैं और शरीर में विषैले पदार्थो के जमाव को रोकते हैं। फल और सब्जियों के जूस ताजा लेने चाहिए और इनमें आवश्यकतानुसार साफ ताजा पानी मिला लेना चाहिए।     साभार-khaskhabar.com       

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सौंफ को मसलों की रानी और पान की जान भी कहा जाता है। सौंफ के दानों का सेवन कर हम अपने मुंह को फ्रेश करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है। लेकिन क्या आप इस बात को जानती हैं कि सौंफ की चाय भी बनती है जो कि कई रोगों से निजात दिलाने में मदद करती है। आइये जानते हैं ऐसी ही कुछ बीमारियों के बारे में जो कि सौंफ की चाय का सेवन करके दूर की जा सकती हैं। सौंफ में तांबा आयरन, पोटेशियम, मैंग्गनीस, जिन्क, कैल्शियम और मैग्नेशियम जैसे मिनरल्स पाये जाते हैं। तो आइये जानते हैं सौंफ खाने के लाभ के बारे में...सौंफ की चाय का सेवन करके आप जॉन्डिस के खतरे को कम कर सकती है, इसी के साथ यह किडनी के कार्य को तेज करके हमारे खून को साफ करती है।सौंफ के छोटे-छोटे दाने हरे होते हैं। आम तौर पर सौंफ छोटी और बडी दो प्राकर की होती है। दोनों ही खुशबूदार होती है। सौंफ का उपयोग अचारों और सब्जियों में को रूचिकर जायेकदार बनाने के अतिरिक्त औषधि के रूप में भी बहुत अधिक होता है। आयुर्वेद के अनुसार सौंफ त्रिदोष नाशक है। रातभर ठीक से ना सोने से हमारी आंखों में सूजन हो जाती है, इसके लिए आप सौंफ की चाय बनाए और फिर रूई इसमें डुबोकर अपनी आंखों को 10 मिनट के लिए सेंके।अगर आपकी बॉडी में किसी तरह की सूजन होती है, इस सूजन को दूर करने के लिए आप वजन को बढने से रोक सकती है। यह आपके मेटोबॉलिज्म को भी बढाती है। इसी के साथ इससे शरीर का फैट भी कम होता है।साभार-khaskhabar.com           

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नींबू स्फूर्तिदायक और रोग निवारक फल है। जैसा कहा गया है कि रोज एक सेब खाओ और डॉक्टर को दूर भगाओ, उसी तरह रोज 10 बूंदे नींबू की पियो और डॉक्टर को दूर भगाओ। इसका रंग हरा या पीला तथा स्वाद खट्टा होता है। इसके रस में 5 प्रतिशत साइट्रिक अम्ल होता है। इसमें फ्लेवनॉयड्स होते हैं जो पाचन तंत्र को ठीक रखते हैं। यही वजह है कि पेट खराब होने पर नींबू पानी पिलाया जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर में पोप्टिक अल्सर नहीं बनने देता है। नींबू में मौजूद विटामिन सी और पोटेशियम घुलनशील होते हैं। जिसके कारण ज्यादा मात्रा में इसका सेवन भी नुकसानदायक नहीं होता। साफ-सुथरी और दमकती त्वचा के लिए भी यह अच्छा ऑप्शन है। इसमें मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा की कोशिकाओं को सुरक्षित रखते हैं, दाग हल्के करते हैं और त्वचा को अल्ट्रावॉयलेट किरणों से दूर रखते हैं। रोजाना एक गिसाल गुनगुना नींबू पानी के इस्तेमाल से शरीर में मौजूद अतिरिक्त फैट को कम करता है। नींबू में ए, बी और सी विटामिनों की भरपूर मात्रा है-विटामिन ए अगर एक भाग है तो विटामिन बी दो भाग और विटामिन सी तीन भाग। विटामिन सी से भरपूर नींबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने के साथ ही एंटी आक्सीडेंट का काम भी करता है और कोलेस्ट्रोल भी कम करता है। साभार-khaskhabar.com                 

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मॉडर्न लाइफस्टाइल के चलते हमारी खाने पीने की आदत काफी बदल गई है। हम पौष्टिक चीजें खाने की बजाय स्वाद को अधिक प्राथमिकता देने लगे हैं, जैसे- जंक फूड्स, तली भुनी चीजें, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट, आइस्क्रीम आदि। खानपान में गडबडी के चलते शरीर में कैल्शियम की कमी एक आम समस्या हो गई है,जो आगे चलकर स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। शरीर के स्वस्थ और संतुलित विकास के लिए हर उम्र मेें कैल्शियम की आवश्यकता होती है। बढते बच्चों के शरीर, दांतों के आकार और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए भी कैल्शियम जरूरी है।   कैल्शियम बॉडी की प्रत्येक कोशिश को कैल्शियम की जरूरत इसलिए होती है, क्योंकि हमारी बॉडी में स्किन, नाखून, बाल और मल के जरिए रोज ही कैल्शियम की कुछ मात्रा नष्ट होती रहती है। इसलिए कैल्शियम की कुछ मात्रा नष्ट होती रहती है। इसलिए कैल्शियम का संतुलन बनाए रखने के लिए इसकी रोज ही पूर्ति कर ली जाए, तो अच्छा रहता है। यदि ऐसा नहीं होगा, तो हमारा शरीर हड्डियों से कैल्शियम लेने लगेगा। नतीजा बाहर से भले ही हम कमजोर ना लगें, लेकिन अन्दर ही अन्दर हड्डियाँ खोखली हो जाएंगी और शरीर कमजोर और कमजोर हड्डियाँ कई तरह की पेरशानियाँ पैदा करती हैं, जैसे- जरा-सी चोट लगने पर ही फ्रैक्चर हो सकता है। यही नहीं, कैल्शियम हृदय, मांसपेशियों, ब्लड क्लॉटिंग के लिए भी बेहद जरूरी होता है। इसके अलावा कैल्शियम मांसपेशियों के कई काम में मदद करता है। जैसे- कैल्शियम नर्वस सिस्टम के संदेश मस्तिष्क तक पहुंचाने में सहायक है, जैसे- यदि आपने किसाी गरम वस्तु को छू लिया है, तो मस्तिष्क तुरंत एक संदेश भेजेगा, जिससे आपके मुंह से आह!... आउच! की आवाज आएगी और आप अपने हाथ का जल्दी से दूर हटा लेंगे।सब्जियाँ- गाजर, भिंडी, अरबी, मूली, मेथी, करेला और चुकंदर।   डेयरी उत्पाद- दूध व दूध से बनी चीजों को कैल्शियम का प्रमुख स्त्रोत माना जाता है। हर रोज दूध का सेवन शरीर में कैल्शियम की मात्रा बनाए रखने में मददगार होता है। मां का दूध नवजात शिश के लिए कैल्शियम का सर्वोत्तम स्त्रोत है, जो उनमें कैल्शियम की पूर्ति करता है और स्वस्थ रखता है। ये सभी प्राकृतिक रूप से कैल्शियम प्रदान करनेवाले तत्व हैं, ये पदार्थ तुरंत शरीर के द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं, इन्हें अपनी रोजमर्रा की डायट में शामिल कर हम कैल्शियम की कमी से होने वाले नुकसानों से बच सकते हैं। साभार-khaskhabar.com         

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ज्‍योतिष में काले तिलों को अचूक शास्त्र कहा गया है। कहते हैं कि इनका उपयोग विधि सम्मित कर लिया जाए तो तुरंत शुभफल मिलने लगते हैं।    प्रतिदिन एक लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें काले तिल डाल दें। अब इस जल को शिवलिंग पर ऊँ नम: शिवाय मंत्र जप करते हुए चढ़ाएं। जल पतली धार से चढ़ाएं और मंत्र का जप करते रहें। जल चढ़ाने के बाद फूल और बिल्व पत्र चढ़ाएं। मनचाही इच्छाए पूरी होने की संभावना प्रबल हो जाती है।   कुंडली में शनि के दोष हों या शनि की साढ़ेसाती या ढय्या चल रही हो तो किसी पवित्र नदी में हर शनिवार काले तिल प्रवाहित करना चाहिए। इस उपाय से शनि के दोषों की शांति होती है।दूध में काले तिल मिलाकर पीपल पर चढ़ाएं। इससे बुरा समय दूर हो सकता है। यह उपाय हर शनिवार को करना चाहिए।    काले तिल का दान करें। इससे राहु-केतु और शनि के बुरे प्रभाव समाप्त हो जाते हैं। कालसर्प योग, साढ़ेसाती, ढय्या, पितृ दोष आदि में भी यह उपाय किया जा सकता है। साभार-khaskhabar.com     

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