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पपीता एक फल है। इसके कच्चे और पके फल दोनों ही उपयोग में आते है। पपीता एक ऐसा फल है जो पूरे साल आसानी से मिल जाता है। भारत के ज्यादातर घरों में पपीते का पौधा लगा होता है। पपीता जितना स्वादिष्ट होता है, यह उतना ही हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी भी है। पपीते के बीज के भी ढेर सारे उपयोग है। पपीता त्वचा और बालों के लिए भी अच्छा होता है। पपीते का उपयोग सलाद के रूप में भी किया जाता है। पपीते में एंटीऑक्सिडेंट्स न्सूट्रीएंट्स होते हैं, जैसेविटामिन सी, कैरोटीन्स और फ्लेवोनॉइड होता है। यह डायबिटीज की वजह से होने वाली हार्टकी बीमारियों से बचाता है। साथ ही यह एलर्जी, गंभीर डायरिया, अपच, बुखार और खेल के दौरान होने वाली इंजरीज का भी इलाज करता है। साथ ही यह त्वचा के लिए भी काफी लाभकारी फल है। इसके खाने या चेहरे पर लगाने से चेहरे की रंगत निखरती है।पपीता आंखों के लिए भी हितकारी होता है इसमें विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है जिससे रातोंधी नमक रोग नहीं होता साथ ही साथ आंखों की रोशनी भी बढती है।कच्चे पपीता का सेवन रोज करने से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है पका पपीता पाचन शक्ति को बढता है। भूख को बढाता है। मोटोपे को कंट्रोल करता है।पपीते में एंटीऑक्सिडेंट्स न्सूट्रीएंट्स होते हैं, जैसेविटामिन सी, कैरोटीन्स और फ्लेवोनॉइड होता है। यह डायबिटीज की वजह से होने वाली हार्टकी बीमारियों से बचाता है।पपीता पेट के लिए वरदान माना जाता है। इसमें पेप्सिन नामक तत्व पाया जाता है, जो भोजन को पचाने में मदद करता है। यह कई बीमारियों से दूर रखता है।गंभीर डायरिया, अपच, बुखार और खेल के दौरान होने वाली इंजरीज का भी इलाज करता है। साथ ही यह त्वचा के लिए भी काफी लाभकारी फल है। इसके खाने या चेहरे पर लगाने से चेहरे की रंगत निखरती है। साभार-khaskhabar.com                 

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मौसम कोई भी हो, नींबू एक ऐसा फल है जो हर घर में हर वक्त मिलता है। यह केवल खाने का स्वाद ही नहीं बढाता बल्कि इसमें कई औषध गुण भी मौजूद हैं तो त्वचा के लिए फायदेमंद होता है और साथ ही विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में होता है।   1नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर रात में सिर में हल्के हाथ से, एक हफ्ते तक रोजाना मालिश कर, सुबह सिर धोने से बालों की खुश्की दूर हो जाती है। यदि मालिश न भी करें तो सिर धोने के पानी में दो नींबू निचोडकर एक हफ्ता लगातार प्रयोग करने से बाल मुलायम होते हैं, उनका झडना कम होता है और खुश्की या रूसी भी कम होती है।नींबू का सौंदर्य फायदा केवल यहीं पर नहीं समाप्ता होता है बल्कि इससे बालों की डैंड्रफ भी साफ हो जाती है। अगर बाल झड रहें हो तो आप नींब के रस में नारियल पानी मिला कर बालों में लगा लीजिये, इससे बाल झडना बंद हो जाएंगे। चेहरा जल जाने पर यदि चेहरे पर काले दाग पड गए हों तो एक टमाटर के गूदे में नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर सुबह-शाम लगाएं और थोडी देर बाद धो लें।नींबू और तुलसी की पत्तियों का रस समान मात्रा में मिलाकर किसी कांच के बर्तन में रख लें और दिन में कम से कम दो बार हल्के हाथ से चेहरे पर लगाएं। कुछ दिन के लगातार इस्तेमाल से चेहरे पर झाइयां या किसी भी प्रकार के निशान मिट जाते हैं।नींबू का रस और गुलाब जल समान मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगाएं, कुछ दिनों के लगातार प्रयोग से चेहरा बेदाग और त्वचा कोमल व स्वच्छ हो जाती है।सुबह स्नान करने से पहले नींबू के छिलकों को चेहरे पर धीरे-धीरे मलकर 2-3 मिनट बाद चेहरे को पानी से धो लें। इसे 10-15 दिन लगातार करने से चेहरे का रंग साफ हो जाता है। यह बाजार में मिलने वाले किसी भी में कराए जाने वाले का काम करेगा।   साभार-khaskhabar.com           

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कई लोग अखरोट को ब्रेन फूड कहते हैं उनका मानना है कि इसको खाने से उनके दिमाग को एनर्जी मिलती है और यादाशत तुरूस्त होती है। इसलिए अखरोट का सेवन लाभकारी होता है। अखरोट के लाभकारी गुण समाएं होते हैं। जो शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हैं और इसमें कई अंदरूनी रोगों से लडने व उनसे बचाव करने की क्षमता होती है। थोडा महंगा है पर कारगर इलाज है अखरोट। अखरोट में ओमोग3 फैटी एसिड्स होते हैं अन्य ड्राईफूट्स की तरह अखरोट के भी लाभ हैं लेकिन ये खास तौर पर याद्दश्त बढाने और कार्डियोवैस्कुलर यानी हृदय संबंधी बीमारियों से बचाने में भी मदद है। अखरोट के फल के बाहृा कठोर आवरण को तोडकर अंदर की गिरी को 10-20 ग्राम की मात्रा में गाय के गुनगुने दूध से नियमित सेवन करने रसायनगुणों से युक्त अर्थात शारीरिक क्षय को रोकने वाला प्रभाव देता है। अगर आपकी सफेद पड चुकी है तो त्वचा को कली कर सकता है। इसे डेली खाने में शामिल करें। बढते वजन को घटाने में बेहद मददगार है। जो लडकियां या लडके अपना वेट लॉस करना चाहते हैं उनके लिए अखरोट का सेवन करना चाहिए। अखरोट में मेलाटोनिन पाया जाता है जो नींद के लिए प्रेरित करता है। जिन लोगों को रात के समय ठीक से नींद न आती हो। उन्हें अच्छी नींद लाने में सहायक है।  साभार-khaskhabar.com       

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हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा हमारा स्नायु तंत्र या स्नायु संस्थान है। इसका काम शरीर से जुडी हुई सभी संवेदनाओं को मस्तिष्क तक पहुंचाना होता है। जिस वक्त हमारा स्नायु संस्थान काम करना बंद कर देता है या उसमें कोई दोष आता है तो लकवा आदि बीमारियों से व्यक्ति ग्रसित हो जाता है।आयुर्वेदिक ग्रंथों में अदरक को सबसे महत्वपूर्ण बूटियों में से एक माना गया है। यहां तक कि उसे अपने आप में औषधियों का पूरा खजाना बताया गया है। यदि इस तंत्र में दुर्बलता आती है, व्यक्ति में निम्न लक्षण देखने को मिलते हैं - वह जल्दी थकता है, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करता है, चक्कर आते हैं, दिल की धडक़न बढती है और अपने शरीर की शक्ति से अधिक शारीरिक श्रम करना और अधिक मानसिक श्रम करने से यह रोग हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति की याददाश्त भी बहुत कम हो जाती है। इसके ईलाज के लिए काली मिर्च, अदरक, पिस्ता, बादाम, किशमिश और अदरक को बराबर मात्रा में मिलाकर इसका एक पेस्ट बना लें। जिसे सुबह-शाम खाने से इस रोग में कमी आती है।अदरक को छांव में सुखाकर उसकी सोंठ बना लें। इस सोंठ में थोडा जीरा और शहद मिलाकर सुबह-शाम चाट लें।त्रिफला और अदरक का रस दोनों को शहद में मिलाकर पीने से स्नायु दुर्बलता में आराम आता है।   साभार-khaskhabar.com         

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गाजर न सिर्फ स्वाद में अच्छी होती है बल्कि इसमें आपको तुंदुरूस्त रखने के लिए बहुत सोर खास गुण होते हैं। यह आपको स्वस्थ रखने के साथ-साथ आपकी आंखों की रोशनी को बढाती है। इस मौसम में हमें विटामिन व न्यूट्रिशंस से भरपूर कई चीजें खाने को मिलती हैं और गाजर भी इन्हीं में से एक है। गाजर में विटामिन ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है। गाजर में बीटा-कैरोटीन भी पाया जाता है। गाजर सर्दी जुकाम से लडने में मदद करती है साथ ही यह सर्दियों में आम संक्रमण से बचने में सहायक है। लाल और मीठी गाजर को देखकर हमें इसके हलवे की याद आ जाती है और आये भी क्यों ना इससे बनने वाला हलवा लगता ही लाजवाब है। गाजर में मिनरल, विटामिन और विटामिन ए पाया जाता है, इसलिए इसे त्वचा और आंखों के लिए अच्छा माना जाता है। गाजर का प्रयोग आप सूप बनाने, सब्जियों, हलवा और सलाद के रूप में भी कर सकते हैं। गाजर के जूस को अपनी नियमित आहार का हिस्सा बना लें क्येांकि यह स्वादिष्ट होने के साथ हुत गुणकारी है। तो आइए इस आगे की स्लाइड्स पर जानते हैं गाजर के स्वास्थ्यवर्धक लाभ के बारे में...गाजर में विटामिन ए, विटामिन बी, सी, कैल्शियम और पैक्टीन फाइबर होता है, जो कॉलेस्ट्रोल का लेवल बढने नहीं देता। गाजर को आंखों के लिए बहुत अधिक फायेदमंद माना जाता है क्योंकि यह विटामिन ए का सबसे अच्छा स्त्रोत है। लेकिन गाजर सिर्फ आंखों के लिए ही लाभदायक नहीं है बल्कि इसके अलावा गाजर का नियमित इस्तेमाल आपके बालों और त्वचा के लिए भी बहुत लाभकारी है। गाजर का जूस त्वचा को साफ व चमकदार बनाता है। साथ ही रोजाना गाजर के फ्रेश जूस पीने से एक्नेकी प्रॉब्लम दूर होती है। अगर आपको सर्दी व जुकाम रहता है तो गाजर का जूस लेने से नहीं जुकाम नहीं होगा। गाजर का जूस बॉडी को इम्यूनिटी बढाने का काम करता है और इससे आप जम्र्स व इंफेक्शन वगैरह होने से बचे रहते हैं।     साभार-khaskhabar.com           

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टर में बॉडी को प्राकृतिक रूप से पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं। यही वह वक्त भी है, जब बॉडी की एनजी में बढोतरी होती है और हैल्दी रहने के लिए अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पडता। विंटर में जितने विटमिंस और पौष्टिक तत्व शरीर को मिलते हैं, वे साल भर बॉडी को हैल्दी बनाए रखते हैं। इसलिए भरपूर एनर्जी के लिए चाहिए खूब पोषण। शामिल करें ये कुछ चीजें अपनी डाइट में शामिल करें। अंडें- सुबह के वक्त प्रोटीन का सेवन बेहद लाभकारी है। कार्बोहाइड्रेट युक्त अन्य खाद्य पदार्थो की तुलना में अंडा खाने से लंबे समय तक भूख का एहसास नहीं होता। एक अंडे में सिर्फ 75 कैलोरी होती है और इसमें अन्य महत्वपूर्ण पोषण तत्वों के अलावा लगभग 7 ग्राम तक उच्च गुणवत्तायुक्त प्रोटीन मौजूद है। सलाद  अगर आपको सलाद खाना पसंद है, तो उसमें ताजी हरी पत्तेदार सब्जियों, फल आदि मिलाकर उसे और भी हेल्दी बनाएं, सलाद में लीन प्रोटीन, जैसे- फ्रिश, चिकन आदि भी मिला सकती हैं। ड्रेसिंग के लिए दही या ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करें। शहद आपको हमेशा युवा और ऊर्जावान बनाए रखता है। इसके नियमित सेवन से आपको काम करने काी भरपूर एनर्जी मिलती है, शरीर चुस्त-दुरूस्त बना रहता है और त्वचा कांतिमय बनी रहती है। शहद में भी चीनी की तरह स्वाभाविक रूप से शुगर, मैग्नीशियम, पोटैशियम, सोडियम, सल्फर और आयरन जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं। रोज एक सेब खाएं। कितना ही काम करें, पैरों या शरीर में सूजन की समस्या नहीं होगी। सेब खाने से खून के थक्के कम बनते हैं, इसलिए सूजन नहीं होती। महिलाएं वाइट ब्रेड, आलू, पास्ता, चावल, चीनी, खीर, मिठाई, आइसक्रीम आदि से हमेशा परहेज रखें। अगर खाना ही है, तो ब्राउन ब्रेड, उबला आलू, गेहूं, आटा पास्ता, ब्राउन राइस खाएं और मीठा खाने की इच्छा फल या थोडा सा गुड खा कर पूरी करें। साभार-khaskhabar.com     

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केसर का प्रयोग बिरयानी, खीर, मिठाई और केसर का दूध सौंदर्य उत्पादों में फ्लेवर डालने के लिए किया जाता है। यह आमतौर पर स्वास्थ्य के पूरक पदार्थाे में हाजमें को दरूस्त करने के लिए किया जाता है। केसर का सेवन करने से महिलाओं को मासिक धर्मका समस्याओं से मुक्ति मिलती है। केसर एक सुगंध देने वाला पौधा है। पतली बाली सरीखा केसर 15-25 सेंटीमीटर ऊंचा होता है। पत्तियां संकरी, लंबी और नालीदार होती हैं। इनके बीच से पुष्पदंड निकलता है, जिस पर पुष्प होते हैं। आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों में केसर का विशेष महत्व है। कई अध्ययनों से पता चला है कि गर्भवती महिला को प्रतिदिन दूध में केसर घोलकर पिलाने से जन्म लेने वाले शिशु का रंग गोरा होता है। इतना ही नहीं, यदि मां गर्भावस्था के दौरान केसर का सेवन करती है तो इससे उसका होने वाला बच्चा तंदुरुस्त होता है और कई तरह की बीमारियों से बचा रहता है। कई बार नवजात शिशु को सर्दी जकड लेती है। इससे कभी-कभी उसकी नाक भी बंद हो जाती है जिससे बच्चा मुंह से सांस लेने लगता है और हकलाने लगता है। ऐसी स्थिति में मां के दूध में केसर मिलाकर बच्चे के सिर और नाक पर मलें। इससे बच्चे को काफी आराम मिलता है और उसकी बेचैनी कम हो जाती है। यह उत्तेजक, वाजीकारक, यौनशक्ति वर्धक, त्रिदोष नाशक, वातशूल शमन करने वाली है। इतना ही नहीं, यह मासिक धर्म ठीक करने वाली, त्वचा को निखारने वाली, रक्तशोधक, प्रदर और निम्न रक्तचाप को ठीक करने वाली भी है। कफ का नाश करने, मन को प्रसन्न रखने, मस्तिष्क को बल देने वाली, हृदय और रक्त के लिए हितकारी भी है। इसका उपयोग आयरुवेद और यूनानी नुस्खों में भी किया जाता है। महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द को दूर करने के लिए 2-2 रत्ती केसर दूध में घोलकर दिन में तीन बार देना फायदेमंद होता है। इसका उपयोग मक्खन आदि खाद्य पदार्थों में रंग एवं स्वाद लाने के लिए किया जाता है। चिकित्सा में यह उष्णवीर्य, उत्तेजक, पाचक, वात-कफ नाशक मानी गयी है। इस कारण इसका उपयोग कई तकलीफों में किया जाता है। आयुर्वेदिक नुस्खें, खाद्य व्यंजनों, देव पूजा आदि में तो केसर का उपयोग सालों से होता आ रहा है। बच्चों को सर्दी, जुकाम, बुखार होने पर केसर की एक पंखुडी पानी में घोंटकर इसका लेप छाती, पीठ और गले पर लगाने से आराम होता है। चंदन को केसर के साथ घिसकर इसका लेप माथे पर लगाने से सिर, आंख और मस्तिष्क को शीतलता, शांति और ऊर्जा मिलती है। इससे नाक से रक्त का गिरना बंद हो जाता है और सिर दर्द जल्द दूर होता है। केसर दूध पौरुष व कांतिवर्धक होता है। जाड़े में गर्म व गर्मी में ठंडे दूध के साथ केसर के उपयोग की सलाह दी जाती है। चोट लगने पर या त्वचा के झुलस जाने पर केसर का लेप लगाने से आराम मिलता है। पेट से जुड़ी अनेक परेशानियां, जैसे अपच, दर्द, वायु विकार आदि में केसर काफी उपयोगी साबित होती है। संतान गोरी चाहिए ।   साभार-khaskhabar.com         

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अजवायन में सेहत का राज छिपा है। दादी मां के नुस्खे बिना अजवायन के पूरे नहीं होते। बडे काम की ये छोटी सी चीजें सेहत का बखूबी ध्यान रखती हैं। जिसे तरह इनकी थोडी सी मात्रा अच्छी सेहत के लिए काफी है उसी प्रकार छोटी-छोटी समस्याओं पर समय रहते ध्यान दिया जाएतो वे बडी नहीं होती है। ठंड के सीजन में सर्द से बचने के लिए अजवायन एक सफल औषधि है।  पेट की गैस में दे आराम-: अजवायन के साथ काला नमक, सौंठ तीनों को मिक्स कारके पीस लें। फिर मिक्स चूर्ण को खाने के बाद फॉकने पर अजीर्ण, अशुद्ध वायु का बनना व ऊपर चढना बंद हो जाएगा। अजवायन की ताजा पत्ती में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व और विटामिन है। विटामिन सी, विटामिन ए, कैल्शियम और मैगनीज, लोह, और साथ ही युक्त ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्त्रोत पाया जाता है। अजवायान पीसकर और उसमें खीरे के रस को मिला लें। इस पेस्ट को फेस पर लगाएं, यकीन मानये चेहरे की झाइयों पर लगाने से फायदा होगा। अजवायन को रात में चबाकर गरम पानी पीने से सुबह पेट साफ हो जाता है। अजवायन की पत्ती का दिलकश स्वाद होता है। अजवायन की पत्ती में एंटी बैक्टीरियल गुण है जो संक्रमण से लडने में मदद करता है।  साभार-khaskhabar.com           

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औषधीय गुणों से भरपूर लहसुन सिर्फ खाने में स्वाद ही नहीं बढाता बल्कि आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है और वैसे भी भारतीय रसोईघर में लहसुन से मिल जायेगा और सर्दियों के सीजन में तो यह बहुत ही लाभकारी होता है। इसमें विटामिन, प्रोटीन, खनिज, लवण और फॉस्फोरस, आयरन व विटामिन ए, बी व सी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। तो आज लहसुन के कुछ स्वास्थ्य संबंधी गुणों के बारें में जानते हैं...   लहसुन बैक्टिरीअल और वायरल संक्रमण को रोकने में बहुत कारगार साबित होता है। यह फंगस, यीस्ट और कीडा से इन्फेक्शन को रोकने में मदद करता है।अगर आप अपने बढते मोटापे से परेशान है तो अपनाएं ये लहसुन की दो कलियां को अच्छे से भून लें और फिर उसमें जीरा सैंधा नमक मिलाकर चूर्ण बना लें। इसको आप रोजाना खाली पेट गर्म पानी से लें। कुछ ही दिनों में मोटापा कम हो जाएगा। लहसुन कानों में दर्द हो, तो लहुसन के तेल को गर्म करके दो बूंदें रोजाना दो बार 5 दिनों तक कानों में डालें। लहसुन में मौजूद जर्मेनियम, सेलेनियम और सल्फर तत्व दर्द उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करने में सक्षम हैं। लहसुन का तेल तैयार करने के लिए लहसुन की 3 कलियों को कूटकर आधा कप ऑलिव ऑयल तेल में मिलाकर धीमी आंच पर 2 मिनट के लिए पकाएं। छालनकर 2 हफ्तों तक फ्रिज में रखें इस्तेमाल में लानेसे पहले हल्का-सा गर्म कर लें। एजोइन यौगिक रक्त का थक्का बनाने में मदद करता है। जिनको हृदय संबंधी बीमारी होती हैं और रक्त का थक्का बनने में देर होता है उनके लिए यह बहुत मददगार है।साभार-khaskhabar.com           

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वैसे तो लौंग को गरम मसाले के तौर पर रसोई में जाना जाता है। लेकिन लौंग लोकप्रिय मसाला हैं और किचन में यह बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखती है। कई लोग तो इसे मुंह को ताजा रखने के लिए काम में लेते हैं साथ ही लौंग से आप हिचकियां रोकने और सिरदर्द को दूर रखने के लिए काम ले सकते हैं। वहीं लौंग में उच्चतम एंटीऑक्सीडेंट जो एलर्जी, माउथवॉश में एंटीसेप्टिक के रूप में उपयोगी साबित होती है। लौंग का तेल से मुंहासे के रोगियों को फायदेमंद साबित होता है। यह झुर्रियों में, उम्र बढने के प्रभाव को कम करने में भी लाभकारी है। लौंग के तेल से चेहरे की कायाकल्प हो जाती है। पानी में 3-4 लौंग उबालकर पीने से सिर दर्द दूर हो जाता है। हिचकियां आने पर 2-3 लौंग चबाएं और ऊपर से थोडा सा पानी पी लें, फायदा होगा। नासूर होने पर हल्दी में लौंग पीस कर लगाने से नासूर समूल नष्ट हो जाता है। कई बार आंखों के सफेद हिस्से में रोग हो जाता है। ऐसे में तांबे के बर्तन में लौंग पीस कर और उसमें थोडा शहद मिला कर खाने से लाभ होता है।  आंखों की पुतलियों पर कई बार छोटी-छोटी बारीक फुंसियां हो जाती हैं। इन फुंसियों पर यदि लौंग पीसकर लगाई जाए तो वे बैठ जाती हैं और सूजन कम होती है। साभार-khaskhabar.com         

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आंवला एक ऐसा फल है, जिसमं अनेक औषधी गुण पाए जाते हैं। आंवला अनेक बीमारियों से दूर रखने में हमारी मदद करता है, यह हमें कई रोगों बचता है। आवंला का नियमित सेवन करनेसे शरीर में विटामिन सी की कमी नहीं होती है, जिससे विटामिन सी की कमी से शरीर में विटामिन सी की कमी नहीं होती है, जिससे विटामिन सी की कमी से होनेवाली परेशानियां हमें नहीं सताती है। आंवला, कसैला, मधुर, शीतल, त्रिदोषनाशक होता है। यह अम्लरस के कारण वात को, मधर व शीतवीर्य के कारण पित्त को और रूक्ष तथा कषाय होनेे के कारण कफ को नष्ट करता है। इसलिए यह त्रिदोषनाशक है। इसके नियमित सेवन से आंखों की रोशनी बढती है। हृदय की कमजोरी : आधा भोजन करने के बाद 6-7 चम्मच ताजे आंवले का रस आधे ग्लास पानी में मिलाकर पीएं। फिर शेष भोजन करें। इस प्रकार 21 दिन तक करने से हृदय की कमजोरी दूर होती है। नकसीर : यदि नकसीर किसी प्रकार बंद न हो, तो ताजे आंवले का रस नाक मे टपकाएं, नकसीर बंद हो जाएगी। जिन्हें अक्सर नकसीर की शिकायत रहती है। उन्हें हर रोज आंंवले का सेवन या सिर पर आंवले का लेप करना चाहिए। मधुमेह : ताजे आंवले के रस में थोडा नमक मिलाकर पीने से मधुमेह कुछ महीने में ही ठीक हो जाता है। उल्टी: आंवले के रस मे चंदन या पीपर का चूर्ण डालकर शहद के साथ चाटने से उल्टी बंद होती है। रक्तस्राव : चोट लगने पर रक्तस्त्राव हो रहा हो, तो उस स्थान पर ताजे आंवले का रस लगाएं। इससे रक्त बहना बंद हो जाता है। साभार-khaskhabar.com   

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आंवला एक ऐसा फल है, जिसमं अनेक औषधी गुण पाए जाते हैं। आंवला अनेक बीमारियों से दूर रखने में हमारी मदद करता है, यह हमें कई रोगों बचता है। आवंला का नियमित सेवन करनेसे शरीर में विटामिन सी की कमी नहीं होती है, जिससे विटामिन सी की कमी से शरीर में विटामिन सी की कमी नहीं होती है, जिससे विटामिन सी की कमी से होनेवाली परेशानियां हमें नहीं सताती है। आंवला, कसैला, मधुर, शीतल, त्रिदोषनाशक होता है। यह अम्लरस के कारण वात को, मधर व शीतवीर्य के कारण पित्त को और रूक्ष तथा कषाय होनेे के कारण कफ को नष्ट करता है। इसलिए यह त्रिदोषनाशक है। इसके नियमित सेवन से आंखों की रोशनी बढती है।  हृदय की कमजोरी : आधा भोजन करने के बाद 6-7 चम्मच ताजे आंवले का रस आधे ग्लास पानी में मिलाकर पीएं। फिर शेष भोजन करें। इस प्रकार 21 दिन तक करने से हृदय की कमजोरी दूर होती है। नकसीर : यदि नकसीर किसी प्रकार बंद न हो, तो ताजे आंवले का रस नाक मे टपकाएं, नकसीर बंद हो जाएगी। जिन्हें अक्सर नकसीर की शिकायत रहती है। उन्हें हर रोज आंंवले का सेवन या सिर पर आंवले का लेप करना चाहिए। मधुमेह : ताजे आंवले के रस में थोडा नमक मिलाकर पीने से मधुमेह कुछ महीने में ही ठीक हो जाता है। उल्टी: आंवले के रस मे चंदन या पीपर का चूर्ण डालकर शहद के साथ चाटने से उल्टी बंद होती है। रक्तस्राव : चोट लगने पर रक्तस्त्राव हो रहा हो, तो उस स्थान पर ताजे आंवले का रस लगाएं। इससे रक्त बहना बंद हो जाता है। साभार-khaskhabar.com               

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