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पपीता एक फल है। इसके कच्चे और पके फल दोनों ही उपयोग में आते है। कच्चे पपीता का सेवन रोज करने से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है पका पपीता पाचन शक्ति को बढता है। भूख को बढाता है। मोटोपे को कंट्रोल करता है।  पपीते में एंटीऑक्सिडेंट्स न्सूट्रीएंट्स होते हैं, जैसेविटामिन सी, कैरोटीन्स और फ्लेवोनॉइड होता है। यह डायबिटीज की वजह से होने वाली हार्टकी बीमारियों से बचाता है।  पपीता दातों के लिए बहुत लाभकारी होता है। अगर दातों में से खून आता है ता पपीता उसमें भी फायदेमंद है।  पपीता आंखों के लिए भी हितकारी होता है इसमें विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है जिससे रातोंधी नामक रोग नहीं होता साथ ही साथ आंखों की रोशनी भी बढती है। पपीता पेट के लिए वरदान माना जाता है। इसमें पेप्सिन नामक तत्व पाया जाता है, जो भोजन को पचाने में मदद करता है। यह कई बीमारियों से दूर रखता है। गंभीर डायरिया, अपच, बुखार और खेल के दौरान होने वाली इंजरीज का भी इलाज करता है। साथ ही यह त्वचा के लिए भी काफी लाभकारी फल है। इसके खाने या चेहरे पर लगाने से चेहरे की रंगत निखरती है।     साभार-khaskhabar.com           

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पपीता एक फल है। इसके कच्चे और पके फल दोनों ही उपयोग में आते है। कच्चे पपीता का सेवन रोज करने से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है पका पपीता पाचन शक्ति को बढता है। भूख को बढाता है। मोटोपे को कंट्रोल करता है।  पपीते में एंटीऑक्सिडेंट्स न्सूट्रीएंट्स होते हैं, जैसेविटामिन सी, कैरोटीन्स और फ्लेवोनॉइड होता है। यह डायबिटीज की वजह से होने वाली हार्टकी बीमारियों से बचाता है।  पपीता दातों के लिए बहुत लाभकारी होता है। अगर दातों में से खून आता है ता पपीता उसमें भी फायदेमंद है।  पपीता आंखों के लिए भी हितकारी होता है इसमें विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है जिससे रातोंधी नामक रोग नहीं होता साथ ही साथ आंखों की रोशनी भी बढती है।  पपीता पेट के लिए वरदान माना जाता है। इसमें पेप्सिन नामक तत्व पाया जाता है, जो भोजन को पचाने में मदद करता है। यह कई बीमारियों से दूर रखता है।  गंभीर डायरिया, अपच, बुखार और खेल के दौरान होने वाली इंजरीज का भी इलाज करता है। साथ ही यह त्वचा के लिए भी काफी लाभकारी फल है। इसके खाने या चेहरे पर लगाने से चेहरे की रंगत निखरती है।   साभार-khaskhabar.com   

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खाने में यदि दही न हो तो खाना पूर्ण नहीं होता। यज्ञ, हवन, विवाह संस्कार तथा मंदिरों में प्रसाद आदि के मांगलिक अवसरों पर दही का प्रयोग होता रहा है। वहीं दही को सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें कुछ ऎसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, कब्ज, गैस बीमारियां घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, मटा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की गरमी दूर हो जाती है। डाइजेशन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है।    विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला है कि दही के नियमित सेवन से आंतों के रोग और पेट की बीमारियां नहीं होती हैं तथा कई प्रकार के विटामिन बनने लगते हैं। दही में जो बैक्टीरिया होते हैं, वे लेक्टेज बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं। गर्मी के दिनों में पसीना काफी निकलता है। पसीने की बदबू दूर करने के लिए दही और बेसन मिलाकर शरीर पर मालिश करें तथा कुछ देर बाद स्त्रान करें, इससे पसीने की बदबू दूर हो जाती है।   जैतून के तेल और नींबू के रस के साथ दही को चेहरे पर लगाने से चेहरे का रूखापन समाप्त होता है। मुंह के छालों में दही कम करने के लिए दिन में कई बार दही की मलाई लगाएं। इसके अलावा शहद व दही की समान मात्रा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।    गर्मी के मौसम में दही की छाछ या लस्सी बनाकर पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है। इसे पीकर बाहर निकलें तो लू लगने का डर भी नहीं रहता है। दही को जीरे व हींग का छौंक लगाकर खाने से जोडों के दर्द में लाभ पहुंचता है। यह स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है। दही में ह्वदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की अjत क्षमता है। यह हमारे रक्त में बनने वाले कोलेस्ट्रोल नामक घातक पदार्थ को बढने से रोकता है, जिससे वह नसों में जमकर ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित न करे और हार्टबीट सही बनी रहे। दही में कैल्शियम की मात्रा अधिक पाई जाती है, जो हमारे शरीर में हड्डियों का विकास करती है। दांतों एवं नाखूनों की मजबूती एवं मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में भी सहायक है।   साभार-khaskhabar.com       

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गर्मी में आग बरसाते सूरज और गर्म हवा के थपेड़ों को झेलना काफी मुश्किल होता है। छतरी या चुन्नी जैसी कई चीजों के सहारे आप कुछ देर तो इनका सामना कर सकती हैं, लेकिन ये तरीके आपको लू से नहीं बचा पाएंगे। गर्मी में लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। लू अन्य कई रोगों का भी कारण बनती है। आयुर्वेद में इससे बचने के कई उपाय बताए गए हैं, जिनका इस्तेमाल कर आप लू से बच सकती हैं।  गर्मी में पाचन संबंधी परेशानियां भी बढ़ जाती हैं। इसके अलावा शरीर के अंगों में संकुचन, जोड़ों में दर्द, नजला, जुकाम, नींद की कमी, सूजन, निर्बलता, स्पर्श शून्य, आंखों में जलन, आंखों का लाल होना आदि परेशानियां होती हैं। लू लगने के दौरान वात शमन के उपाय करने चाहिए। वात नाशक द्रव्य, मधुर, देवदार, कौंच सहचरा, सहजना, गिलोय, पुर्ननवा, भृंगराज, वरुण, हल्दी, शतावर, कुलथी आदि पदार्थों का सेवन करना चाहिए। साभार-khaskhabar.com     

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तरबूज में नब्बे फीसदी पानी होता है, इसलिए गर्मी का मुकाबला करने के लिए इससे अच्छा कोई फल नहीं । शायद यही कारण है कि इसका जन्म अफ्रीका के गर्म इलाके में हुआ। तरबूज पर काफी वैज्ञानिक अनुसंधान भी हुए हैं। गर्मी के झुलसते मौसम में तरबूज की तरावट शरीर और मन दोनों को प्रसन्न कर देती है।   तरबूज के सेवन से लू और गर्मी की खुश्की से शरीर की रक्षा होती है। देश के रेतीले रेगिस्तानी इलाके और नदियों के किनारों पर गर्मी के मौसम में तरबूज की फसल पटे दिखाई देती है, फिर भी तरबूज उगाने वाले प्रमुख देशों में भारत का नाम नहीं है।   पीलिया के रोगियों को तरबूज बहुत फायदा पहुंचाता है, क्योंकि यह शरीर में खून बढाता है और खून को साफ भी करता है। जिस वजह से यह चमडी के रोगियों में तरबूज का सेवन करने से लाभ होता है। तरबूज कफनाशक भी है। कहा जाता है कि तरबूज का नियमित सेवन उच्च रक्त-चाप को बढने से रोकता है।    इसके फलों का भार लगभग डेढ-दो किलोग्राम तक होता है। फलों के हल्के-पीले-हरे छिलके पर गाढी हरी धानियां होती हैं। इसका छिलका पतला है, इसलिए अंदर के लाल गूदे का मात्रा ज्यादा होती है। मध्यम आकार और भार वाले फलों की एक जापानी किस्म असाही योमामोतो भी भारत लाई गई है। इसे भारत में उगाने के नतीजे उत्साहजनक नहीं हैं।     साभार-khaskhabar.com       

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पुदीना किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं होता है। स्वाद, सेहत और सौंन्दर्य का ऐसा संगम बहुत ही कम पौधों में देखने को मिलता है। पुदीना एक आयुर्वेदक औषधि भी है। पुदीना हरे रंग का एक छोटा सा पौधा होता है, जिसमें विटामिन ए, सी, मिनरल्स, कैल्शियम, आयरन, मैग्रीनिशयम, कॉपर और पौटेशियम पाया जाता है इसलिए यह हमारी सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। अगर आपके चेहरे पर पिंपल है तो पुदीने की कुछ पत्तियों को लेकर पेस्ट बना लें। फिर उसमें 2-3 बूंदे नींबू का रस मिलाकर इसे चेहरे पर कुछ देर के लिए लगाएं। साफ पानी से चेहरा धो लें। कुछ ही दिनों में पिंपल से राहत मिल जाएगी। पुदीने की कुछ पत्तियों को पानी में पीसकर सोने से पहले रोज रात में लगाएं। झाइयों से मुक्ति मिलेगी। मक्खन में कुछ मात्रा पिसी हल्दी मिलाकर पैरों में लगाएं, इससे पैरों के दाग-धब्बे दूर होते हैं। कच्ची गाजर, टमाटर खाएं। इनमें मौजूद विटामिनों से स्किन में निखार आता है।पुदीने की चाय या पुदीने का अर्क यकृत के लिए अच्छा होता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में बहुत ही उपयोगी है।हिचकी में पुदीने के रस को पीने से फायदा मिलता है। अगर आपकी हिचकी बंद न हो तो पुदीने के पत्ते में नींबू का रस मिलाकर लें। साथ ही पुदीने के पत्तों पर शक्कर डालकर चबाएं हिचकी में लाभ होगा। हाई बीपी से रोगी को पुदीने का सेवन करना चाहिए। जब कि लो बीपी के पीडित की पुदीने की चटनी का सेवन करना चाहिए।   साभार-khaskhabar.com         

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संतरा ठंडा, तन और मन को प्रसन्नता देने वाला है। खूबसूरत दिखने की चाह रखने वालों के लिए अच्छी खबर है। इसके लिए मोटी रकम खर्च करने की जरूरत नहीं है। इन दिनों संतरा आसानी से बाजार में मिल रहा है। संतरे में मैगनीशियम और पोटेशियम आधिक मात्रा में होती है इसलिए इसका सेवन उच्च रक्तचाप के मरीजों के बहुत लाभदायक होता है। इसलिए आप जल्दी से अपने आहार में संतरे को शामिल करें। विशेषज्ञों ने बताया कि संतरे में विटामिन सी, पोटैशियम और फोलिक एसिड होती है और यह खूबसूरती के लिए फायदेमंद है। एक रिपोर्ट के अनुसार विटामिन सी कोलाजेन के साथ ही महा पौष्टिक लुटीन के उत्पादन के लिए अनिवार्य है।स्वास्थ्य व सौंदर्य विशेषज्ञों के एक दल का कहना है कि संतरे का पीला रंग सूरज की किरणों से त्वचा को होने वाले नुकसान को कम करता है। संतरे के सेवन से शरीर में ऊर्जा बनी रही है। संतरे में मौजूद फ्रक्टोज, डेक्स्ट्रोज, खनिज एवं विटामिन शरीर में ऊर्जा देने का काम करता है। संतरे के सेवन से शरीर हैल्दी रहता है और शरीर की चुस्ती-फुर्ती भी बढती है।एक व्यक्ति को जितने विटामिन सी की आवश्यकता होती है, वह एक नारंगी प्रतिदिन खाते रहने से पूरी हो जाती है। खांसी-जुकाम होने पर नारंगी के रस का एक गिलास नित्य पीते रहने से लाभ होगा। नियमित रूप से एक गिलास संतरे का जूस पीने से ही आपकी त्वचा से लेकर बाल और नाखूनों में निखार आने लगेगा और आप और भी ज्यादा खूबसूरत नजर आने लगेंगे। एक नए शोध में इसका दावा किया गया है।   साभार-khaskhabar.com             

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सेब रोज खाओ और डॉक्टर को दूर भगाओ। सेब पौष्टिक तत्वों से भरा है। ये न केवल बीमारियों से लडने में मदद करता है बल्कि आपके शरीर को भी हैल्दी रखता है। दुनियाभर में सबे के गुणों में बारे में जानकारी देने के लिए यूरोप के कई देशों में एक दिसंबर को ईट ए रेड एप्पल डे बडे जोरों और शोरों से मनाया जाता है। इसमें समारोह में आपको कई अलगअलग के सेब प्रदर्शित किए जाते हैं। तो आइये जानते हैं के गुणों के बारे में आगे की स्लाइड्स पर... सेब फाइबर वाला फल है इसमें प्रोटीन, और विटामिन की संतुलित मात्रा होती है, लेकिन कैलोरी कम होती है। सेब का फल, रस, छिलका, मुरब्बा, आइसक्रीम, जैम, जैली आदि रूपों में सेवन करना स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए लाभकारी माना जाता है। सेब के जूस में कई फायदे होते हैं। इनमें से एक यह भी है कि यह शरीर में कोलेस्टोल के स्तर को सामान्य बनाये रखने में मदद करता है। अगर शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ जाए तो इससे हृदय संबंधी कई रोग हो सकते हैं, इसलिए आप सेब अथवा इसके जूस के नियमित सेवन से स्वंय को इस बीमारी से दूर रख सकते हैं। सेब में फाइबर, जो शरीर में पानी बनाए रखने की बहुत अधिक क्षमता रखता है। अत: सेब खाने से पेट भरा सा लगता है और अनावश्यक भोजन की इच्छा नहीं होती है। डाइटिंग करने वालों के लिए सेब एक उपयोगी फल है।   सेब का जूस कैंसर और ट्यूमर से बचाने में बेहद उपायोगी होता है। खासतौर पर फेफडों के कैंसर से बचाने में सेब के जूस का कोई तोड नहीं। ट्यूमर कोशिकाओं को रोकने में फ्लेवोनॉयड और फेनॉलिक एसिड को बेहद कारगर माना गया है। यह दोनों ही सेब में काफी प्रचुर मात्रा में मिल जाते हैं। सेब के जूस में विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में होता है। यह विटामिन आंखों की रोशनी बढाने में उपयोगी होता है। इसके साथ ही यह आंखों को कई संभावित बीमारियों से बचाता है। सेब स्मरण शक्ति की दुर्बलता, बेहोशी तथा चिडचिडापन अर्थात् मस्तिष्क के रोगों को दूर करने की अचूक औषधि माना गया है। मस्तिष्क व दिल की कमजोरी और घबराहट दूर करने में सेब अचूक इलाज है। साभार-khaskhabar.com         

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हैल्दी जीवन जीना भला कौन चाहता। इसके लिए लोग तरह-तरह के उपाय भी करते हैं। कुछ फल, हरी सब्जियां, दूध का अधिक सेवन करते हैं तो कुछ नियमित अंडा खाते हैं आज जानते हैं कि हमारे आसपास कुछ ऐसी चीजे होती है जिनका सेवन करने से इम्यून सिस्टम को दुरूस्त रख आपके शरीर को ताकतवर बनाने का काम करते हैं। चुंकदर में कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटेशियम और सोडियम में समृद्ध हे फोलिक एसिड और विटामिन सी का अच्छा स्त्रोत है। चुकंदर पौष्टिक होने की वजह से शरीर में कमजोरी को दूर करनेवाला, रक्तशोधक व कई रोगों में फायदा करता है। चुकंदर का सलाद के रूप में अधिक किया जाता है।चुकंदर के रस के साथ गाजर का रस समभाग में मिलाकर पीने से शरीर की ताकत तो बढती है, साथ ही मोटापा नहीं बढता और अनावश्यक चर्बी भी कम होती है।क अध्ययन के आधार पर लाल चुकंदर भी रक्तचाप को कम करती है। इसकी वजह इसमें भरपूर मात्रा में पाया जाने वाला नाइटे्रट है। यह एक ऐसा रसायन है जो पाचन तंत्र में पहुंच कर नाइट्रिक आक्साइड बन जाता है और रक्त प्रवाह को बढाता है तथा रक्तचाप को कम रखता है। यह मासंपेशियों की आक्सीजन की जरूरत को भी कम कर देता है। हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप एक गंभीर बीमारी होती है जो हृदय संबंधी अन्य बीमारियों का भी बडा खतरा पैदा करती हैं।पत्तों के साथ खाने से चुकंदर शरीर में जल्द हजम हो जाता है। चुकंदर के पत्तों का रस गुनगुना गर्म करके कान में डालने से काम का दर्द में लाभ होता है। चुकंदर के पत्तों के रस में शहद मिलाकर दाद पर लगान से दाद ठीक हो जाते हैं।चुकंदर के 100 ग्राम रस में 25 ग्राम सिरका मिलाकर बालों की जडों में लगाने से रूसी खत्म होती है और बालों का झडना भी रूक जाता है।   साभार-khaskhabar.com             

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अंजीर में समाएं औषधिय गुण, करें कई रोगों का नाश अंजीर में अत्यधिक पौष्टिक तत्व होते हैं, जिसमें विटामिन ए, बी और कई मिनरल्स, जैसे कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम शामिल हैं। अंजीर में पोटैशियम होने के कारण यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। इसका प्रयोग अनेक रोगों में औषधि के रूप में भी किया जाता है। इसमें कैल्सियम तथा विटामिन ए और बी काफी मात्रा में पाए जाते हैं। अंजीर के सेवन से कब्ज, एनीमिया, अस्थमा, जुखाम, कमर दर्द, सिरदर्द, बावासीर आदि रोग दूर होती हैं और शरीर में ताकत आती है। अंजीर में कैल्शियम बहुत होता है, जो हड्डियों को मजबूत करने में सहायक होता है। सूखे अंजीर को पानी से उबालकर उसका लेप बनाकर गले पर लगाने से गले के अंदर की सूजन दूर होती है। अंजीर में कैल्शियम बहुत होता है, जो हड्डियों को मजबूत करने में सहायक होता है। यदि आप अपने चेहरे को ग्लो देना चाहते हैं और पिंपल्स से छुटकारा पाना चाहते हैं तो तो ताजे अंजीर को पीसकर चेहरे पर लगाएं और 10 से 15 मिनट तक रखकर चेहरा साफ पानी से धो लें। अंजीर का सेवन करने से थकान दूर होती है, साथ ही यह दिमाग को भी तेज रखता है।     साभार-khaskhabar.com         

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लाल कलर की राजमा को किडनी बीन्स के नाम से भी जाना जाता है। राजमा भारतीय परिवारों में बहुत चाव से खाया जाता है, राजमा चावल के तो लोग दीवाने होते हैं। राजमा दाल स्वाद के साथ-साथ ये स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है। राजमा खाने में जितना स्वादिष्ट होता है, उतना ही यह हमारी सेहत के लिए लाभकारी है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम और फाइबर काफी मात्रा में पाया जाता है...जो हमारे ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखते हैं। इसके अलावा राजमा हमें कई तरह की बीमारियों से भी निजात दिलाती है। राजमा में खूब सारा प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और आयरन आदि जैसे ढेर सारे पोषक तत्व मिले होते हैं। अगर आप वेजिटेरियन हैं तो राजमा को अपने खाने में शामिल करें। राजमा में सिर्फ फाइबर और प्रोटीन ही नहीं होता बल्कि काफी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स इम्यून सिस्टम को बढाते हैं और फ्री रेडिकल्स से इसे मुक्त रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि एंटीऑक्सीडेंट्स में एंटी-एजिंग तत्त्व भी पाए जाते हैं।राजमा में काफी मात्रा में फाइबर पाया जाता है, इसलिए ये कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने में मदद करता है। इसमें मौजूद सोल्यूबल फाइबर पेट में जाने पर जेल बन जाता है जो कोल्स्ट्रॉल को बाइंड कर लेता है और सिस्टम में उसके अवशोषण को रोकता है। जिससे कि ब्लड को लेस्ट्रॉल लेवल कम हो जाता है।राजमा खाने से दिमाग को बहुत लाभ होता है। इसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन के पाया जाता है। जोकि नर्वस सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है। साथ ही ये विटामिन बी का भी अच्छा स्त्रोत है, जोकि मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए बहुत जरूरी है। ये दिमाग को पोषित करने का काम करता है।अगर आपको कब्ज की समस्या रहती है तो ऐसे में आप राजमा क सेवन कर सकती हैं। वैसे तो अधिकतर लोग इसे सब्जी के रूप में खाते हैं, लेकिन आप इसको उबाल कर सलाद के तौर पर भी खा सकती हैं। यह कब्ज की समस्या को ठीक करती हैं।राजमा में उच्च मात्रा में आयरन मौजूद होता है, जिस वजह से यह ताकत देने का काम करता है शरीर के मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा के लिए आयरन की जरूरत होती है, जो राजमा खाने से पूरी हो जाती है, साथ ही ये शरीर में ऑक्सीजन के सर्कुलेशन को बढाता है।     साभार-khaskhabar.com       

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लाल रंग का रसीला स्ट्रोबेरी अपनी मनमोहक खुशबू व स्वाद के कारण विश्व का सर्वाधिक लोकप्रिय फल माना जाता है। स्ट्रॉबेरी का नाम सुनते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है। कई लोग इसे बहुत पसंद करते हैं मगर कुछ लोगों को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं। इसका कई रूपों में उपयोग किया जाता है। स्ट्रॉबेरी का मिल्क शेक हो या फिर आइसक्रीम स्ट्रॉबेरी का मीठा दही या फिर जैम, किसी भी रूप में क्यों न हो, स्ट्रॉबेरी अपनी मनमोहक सुगंध के कारण पुरे विश्व का सर्वाधिक लोकप्रिय फल है। आइये जानते हैं स्ट्रॉबेरी खाने के लाभ के बारे में...स्ट्रॉबेरी में विटामिन सी होता है जो कि आपके दिनभर की विटामिन सी की कमी को पूरा करती है। यह एक आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढा सकती है, जिससे आप दिन भर लगन से काम कर सकें।स्ट्रॉबेरी न्यूटीएंट और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर है। विटामिन सी होने की वजह से यह आपके इम्यून सिस्टम को बडाने में मदद करती है। यह कैटरेक्ट मोतियाबिंद होने से रोकती है और कॉर्निया व रेटिना को स्ट्रॉन्ग बनाती है। यह कैन्सर से भी बचाती है। पौटेशियम की वजह से यह ब्लडपे्रशर संतुलित रखती है। फाइबर होने की वजह से यह पाचन तंत्र को ठीक रखती है।स्ट्रॉबेरी ना केवल स्वाद में ही लाजवाब होती है मगर इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं। दरअसल हाल ही में हुए एक अध्ययन में पता चला है कि स्ट्रॉबेरी हमारे भीतर हृदय रोगों और मधुमेह का विकास नहीं होने देती।स्ट्रॉबेरी में फैट फ्री और लो कैलोरी वाली होती है जिसमें ना तो शक्कर होती है और ना ही सोडियम। रोजाना डेढ कप स्ट्रॉबेरी खाने से आपको बाहर का कोई स्नैक्स खाने की जरूरत नहीं पडेगी जिससे वजन नियंत्रण में रहेगा।     साभार-khaskhabar.com           

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