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स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’ || लखनऊ : अखिलेश का दावा, SIR पर चुनाव आयोग में ही मतभेद, बताया- लोकतंत्र के लिए घातक || चेन्नई : राहुल गांधी अगले महीने तमिलनाडु में कर सकते हैं 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम || उत्तर प्रदेश : गोंडा में मुठभेड़ के बाद तीन गौतस्कर गिरफ्तार, बहराइच में शातिर अपराधी पुलिस की गोली लगने से घायल

संतरा ठंडा, तन और मन को प्रसन्नता देने वाला है। खूबसूरत दिखने की चाह रखने वालों के लिए अच्छी खबर है। इसके लिए मोटी रकम खर्च करने की जरूरत नहीं है। संतरे में मैगनीशियम और पोटेशियम आधिक मात्रा में होती है इसलिए इसका सेवन उच्च रक्तचाप के मरीजों के बहुत लाभदायक होता है। इसलिए आप जल्दी से अपने आहार में संतरे को शामिल करें। एक व्यक्ति को जितने विटामिन सी की आवश्यकता होती है, वह एक नारंगी प्रतिदिन खाते रहने से पूरी हो जाती है। खांसी-जुकाम होने पर नारंगी के रस का एक गिलास नित्य पीते रहने से लाभ होगा।  स्वास्थ्य व सौंदर्य विशेषज्ञों के एक दल का कहना है कि संतरे का पीला रंग सूरज की किरणों से त्वचा को होने वाले नुकसान को कम करता है।  यह त्वचा के लचीलेपन में सुधार भी करता है। बस नियमित रूप से एक गिलास संतरे का जूस पीने से ही आपकी त्वचा से लेकर बाल और नाखूनों में निखार आने लगेगा और आप और भी ज्यादा खूबसूरत नजर आने लगेंगे। एक नए शोध में इसका दावा किया गया है।   साभार-khaskhabar.com

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मथुरा(केके पाठक)। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलने वाले नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में रोटावायरस से होने वाले डायरिया की रोकथाम के लिए एक नई वैक्सीन रोटावायरस वैक्सीन का शुभारंभ उत्तर प्रदेश में जुलाई माह में किया जाएगा इसी के अंतर्गत राज्य स्तरीय प्रशिक्षकों का दो दिवसीय  प्रशिक्षण लखनऊ में आयोजित किया गया इसमें उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के 4 प्रतिभागी बुलाए गए। मथुरा से इस प्रशिक्षण में जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉक्टर राजीव गुप्ता, जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी जितेंद्र सिंह ,अर्बन के चिकित्सा अधिकारी डॉ अनुज चैधरी एवं डब्ल्यूएचओ की एस एम ओ डॉ सुरभि कॉल ने प्रशिक्षण में प्रतिभाग किया। इस राज्य स्तरीय प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक जिले में यह प्रशिक्षण कराया जाएगा तथा  उसके बाद ब्लॉकों में यह प्रशिक्षण कराया जाएगा द्यद्यडायरिया के कारण होने वाली मौतों में रोटावायरस से होने वाले डायरिया भी एक महत्वपूर्ण कारण हैं जिसकी रोकथाम के लिए रोटावायरस वैक्सीन पहले से कई देशों में और भारत में भी कुछ प्रदेशों में बच्चों को दी जा रही थी अब यह रोटावायरस वैक्सीन उत्तर प्रदेश में भी लांच होने जा रही है यह वैक्सीन भी पोलियो ड्राप की तरह ओरल है जिसकी 5 बूंद बच्चों को खुराक के रूप में पिलाई जाएंगी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर शेर सिंह ने बताया वैक्सीन के लांच होने से पहले ही जनपद एवं ब्लाक में प्रशिक्षण पूरा करा लिया जाएगा जिससे कि इस नई वैक्सीन को नियमित टीकाकरण में भली-भांति प्रकार से शामिल किया जा सके और इस वैक्सीन के द्वारा बच्चों को रोटावायरस के कारण होने वाली डायरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाया जा सके। 

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खरबूजा गर्मियों में मिलने वाला फल है। यह पकने पर हरे से पीले रंग के हो जाते हैं, हालांकि यह कई रंगों में उपलब्ध है। मूल रूप से इसके फल लम्बी लताओं में लगते हैं। खरबूजा में विटामिन व मिनरल्स काफी मात्रा पाये जाते हैं। यह वजह है इससे खाने से बॉडी कई सारे लाभ होते हैं। खरबूजे में 95 प्रतिशत पानी होता है, जिससे शरीर को ठंडक तो मिलती ही है।  वजन कम करने में खरबूजा काफी लाभकारी होता है, क्योंकि इसमें शुगर और कैलोरी की मात्रा ज्यादा नहीं होती है। साथ ही यह एंटी-ऑक्सीडेंट विटामिन सी का भी अच्छा स्त्रोत माना जाता है। यह दिल की बीमारी और कैंसर से भी बचाता है। इतना ही नहीं खरबूजे से त्वचा को भी फायदा पहुंचता है। इसमें विटामिन ए पाया जाता है, जो त्वचा को स्वस्थ रखने में मददगार साबित होता है। गर्मियों के मौसम में खरबूजा शरीर की गर्मी और उससे जुडे रोगों को रोक देता है। खरबूजा लंग कैंसर से हमारी बॉडली की रक्षा करने में मदद कर सकता है। साथ ही, इसमें मौजूद विटामिन सी व बिटा-कैरोटेन मिलकर कैंसर रोकने में सहायक हो सकते हैं।   साभार-khaskhabar.com

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अगर आपको जिम में जाने का समय नहीं मिल पाता है तो इसका यह मतलब नहीं कि आप व्यायाम ही छोड़ दे। आप सुबह जागने के बाद तंदरुस्त रहने के लिए घर पर ही कुछ व्यायाम अपना सकते हैं। स्कल्पटासी की संस्थापक व फिटनेस विशेषज्ञ शिवानी पटेल कहती हैं कि आपको कसरत करने के लिए उपकरणों की आवश्यकता नहीं है और यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं, जो आपके घर पर आराम से व्यायाम करने में आपकी मदद करेंगे। - हमेशा याद रखें, पहले वार्मअप करें : व्यायाम से पहले मांसपेशियों में गर्माहट लाना महत्वपूर्ण है, ऐसा नहीं करने से आपकी मांसपेशियों में चोट आ सकती है। आप इसे अपने घर के काम करके वार्मअप कर सकते हैं।   साभार-khaskhabar.com

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 चेरी में मादक सुगंध के साथ एक सुंदर फल है। एक शोध के अनुसार हर चार में से एक व्यक्ति या कहें 25 प्रतिशत लोग इंसोनमिया स्लीपलेसनेस के शिकार हैं और हर पांचवें व्यक्ति को रात में पांच घंटे से ज्यादा नींद ना आने की प्रॉब्लम हो रही है इसी रिसर्च में यह तथ्य भी सामने आए हैं कि चेरी खाने या जूस पीने से व्यक्तियों को अच्छी नींद आती है। चेरी खट्टा-मीठा फल है, जो बहुत टेस्टी है। प्रोटीन और विटामिन से भरपूर यह फल अच्छी नींद के साथ हर उम्र के लोगों के लिए लाभदायक होती है। चेरी या उसका जूस इनटेक करने वाले व्यक्ति को लगभग 17 मिनट ज्यादा नींद आती है।  चेरी त्वचा को पोषण देती है। इसमें मौजूद बीटा कैरोटीन सूरज की यूवी किरणों से त्वचा की रक्षा करने में मदद करता है। साथ ही ड्राय स्किन पर चेरी का पेस्ट कमाल का काम करता है। चेरी के अम्लीय तत्व मृत त्वचा की कोशिकाओं से निजता दिलाने में मदद करती है। इससे त्वचा सॉफ्ट और चमकदार हो जाती है।   साभार-khaskhabar.com

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जिम जाकर मोटापा कम करने के लिए औसतन हर महीने तीन-चार हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन अगर आप हर दिन सिर्फ आधा घंटा टहलें और यह आसान ट्रिक अपनाएंगे तो वजन घटाना और भी आसान, सस्ता और ताजगी भरा होगा।    गन्ने का जूस पीकर आप आराम से वजन घटा सकते हैं। यह शरीर में बैड कोलेस्ट्रोल का स्तर कम करता है। इसके अलावा इसमें प्रचूर मात्रा में सॉल्यूबल फाइबर होता है। एक गिलास गन्ने के रस में 13 ग्राम डाइटरी फाइबर होता है। इस वजह से पेट आसानी से साफ हो जाता है और शरीर की चर्बी कम होने लगती है। गन्ने में फैट नहीं होता। यह 100 फीसदी प्राकृतिक पेय है। इसमें 111 कैलोरी, 27 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 0.27 ग्राम प्रोटीन होता है, जो वजन कम करने में मददगार होता है। इसके अलावा इसमें फॉसफोरस, कैल्शियम, पोटेशियम और विटामिन ए, बी-कॉम्प्लेक्स भी पाया जाता है। इसमें सिर्फ 30 ग्राम नैचुरल शुगर होती है। यानी वजन कम करने के साथ-साथ यह शरीर को ऊर्जा भी देता है। मगर गन्ने का रस मोटापा कम करने में तभी फायदेमंद होगा जब इसका सेवन सही वक्त पर और सही तरीके से किया जाए। गन्ने का रस खाली पेट ना पिएं। नाश्ता करने के बाद सुबह या 1 बजे से पहले गन्ने का रस पीने से बहुत फायदा होता है। इस वक्त हमारा मेटाबॉलिक रेट सबसे तेज होता है। शाम में इसे पीने से बचें क्योंकि इस वक्त खाना पचाने की प्रकिया धीमी हो जाती है।   साभार-khaskhabar.com        

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खूबसूरती एक अनोखा व दुर्लभ तोहफा होता है जिसकी भी झोली में आता है वह खुशनसीब होता है, इसी खूबसूरती के चलते आए दिन लोग अच्छे अच्छे उपाय इस्तेमाल करते है, तो कभी सुंदरता के लिए ब्यूटी ट्रीटमेंट लेते है जिससे कई लोगों को बीमारी व स्किन डैमेज का शिकार होना प़डता है, तो अच्छा रहेगा की केमिकल फ्री प्रोडक्ट इस्तेमाल करे, इसीलिए आज हम आपके लिए कुछ ऎसे नेचुरल स्Rब व नेचुरल ब्लीच लाएं है जिनसे आप किसी भी बिमारी के संपर्क में नही आएंगे ।  नेचुरल ब्लीच आज के वक़्त में लडकिया खूबसूरत दिखने के लिए क्या क्या नहीं करती, लेकिन असली खूबसूरती वही होती है जो नेचुरल हो, केमिकल ब्लीच से बचने के लिए बेहतर रहेगा की आप घर की बनी ब्लीच का इस्तेमाल करें , घर की ब्लीच बनाने के लिए निम्बू और शहद को बराबर मात्रा में मिलाएं फिर साफ़ चेहरे पर इस मिश्रण को लगाएं और 15 मिनट बाद ठन्डे पानी से चेहरा धो लें। 3 से 4 बार हफ्ते में इस्तेमाल करें इससे आपका चेहरा बेदाग व आकर्षक लगने लगेगा।   साभार-khaskhabar.com

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गर्मी के में चिपचिपाता पसीना, हवाएं और धूल मिट्टी आदि सब हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाते हें, इसलिए जरूरी है कि गर्मी के मौसम में हमअपने शरीर का खास ध्यान रखें ताकि खूबसूरती बरकरार बनी रहे। गर्मी की चिलचिलाती धूप कहीं आपके हुस्न की रंगत को फीका न कर दे। गर्मी के मौसम में भी अपने रूप का नूर बरकरार रखने के लिए त्वचा और बाल की खास देखभाल करें और पाएं खिली-खिली रंगत और फूलों सी ताजगी। आंखों की देखभाल कई बार धपू से लौटने के बाद, आंखों में जलन होने लगता है। ऐसे में एक टुकडा बर्फ किसी कपडे में लपेट कर आंख पर रगडें, जलन कम हो जाएगी। बालों की देखभाल इन दिनों में सिर पर काफी पसीना आता है इसलिए बाल बहुत जल्दी-जल्दी गंदे हो जाते हैं। बाल अपनी खूबसूरती खोने न पाएं इसलिए इस मौसम में भी इसकी चमक बरकरार रखें गर्मी में पसीने से बाल चिपक जाते हैं और सुंदर चेहरे को भी खराब बना देते हैं, इसलिए अपने चेहरे के अनुरूप किसी भी तरह की चोटी या जूडा बनाएं व लंबे बालों को खुला न छोडे।   साभार-khaskhabar.com 

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पपीता एक फल है। इसके कच्चे और पके फल दोनों ही उपयोग में आते है। कच्चे पपीता का सेवन रोज करने से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है पका पपीता पाचन शक्ति को बढता है। भूख को बढाता है। मोटोपे को कंट्रोल करता है।  पपीते में एंटीऑक्सिडेंट्स न्सूट्रीएंट्स होते हैं, जैसेविटामिन सी, कैरोटीन्स और फ्लेवोनॉइड होता है। यह डायबिटीज की वजह से होने वाली हार्टकी बीमारियों से बचाता है।  पपीता दातों के लिए बहुत लाभकारी होता है। अगर दातों में से खून आता है ता पपीता उसमें भी फायदेमंद है।  पपीता आंखों के लिए भी हितकारी होता है इसमें विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है जिससे रातोंधी नामक रोग नहीं होता साथ ही साथ आंखों की रोशनी भी बढती है। पपीता पेट के लिए वरदान माना जाता है। इसमें पेप्सिन नामक तत्व पाया जाता है, जो भोजन को पचाने में मदद करता है। यह कई बीमारियों से दूर रखता है। गंभीर डायरिया, अपच, बुखार और खेल के दौरान होने वाली इंजरीज का भी इलाज करता है। साथ ही यह त्वचा के लिए भी काफी लाभकारी फल है। इसके खाने या चेहरे पर लगाने से चेहरे की रंगत निखरती है।     साभार-khaskhabar.com           

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पपीता एक फल है। इसके कच्चे और पके फल दोनों ही उपयोग में आते है। कच्चे पपीता का सेवन रोज करने से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है पका पपीता पाचन शक्ति को बढता है। भूख को बढाता है। मोटोपे को कंट्रोल करता है।  पपीते में एंटीऑक्सिडेंट्स न्सूट्रीएंट्स होते हैं, जैसेविटामिन सी, कैरोटीन्स और फ्लेवोनॉइड होता है। यह डायबिटीज की वजह से होने वाली हार्टकी बीमारियों से बचाता है।  पपीता दातों के लिए बहुत लाभकारी होता है। अगर दातों में से खून आता है ता पपीता उसमें भी फायदेमंद है।  पपीता आंखों के लिए भी हितकारी होता है इसमें विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है जिससे रातोंधी नामक रोग नहीं होता साथ ही साथ आंखों की रोशनी भी बढती है।  पपीता पेट के लिए वरदान माना जाता है। इसमें पेप्सिन नामक तत्व पाया जाता है, जो भोजन को पचाने में मदद करता है। यह कई बीमारियों से दूर रखता है।  गंभीर डायरिया, अपच, बुखार और खेल के दौरान होने वाली इंजरीज का भी इलाज करता है। साथ ही यह त्वचा के लिए भी काफी लाभकारी फल है। इसके खाने या चेहरे पर लगाने से चेहरे की रंगत निखरती है।   साभार-khaskhabar.com   

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खाने में यदि दही न हो तो खाना पूर्ण नहीं होता। यज्ञ, हवन, विवाह संस्कार तथा मंदिरों में प्रसाद आदि के मांगलिक अवसरों पर दही का प्रयोग होता रहा है। वहीं दही को सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें कुछ ऎसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, कब्ज, गैस बीमारियां घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, मटा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की गरमी दूर हो जाती है। डाइजेशन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है।    विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला है कि दही के नियमित सेवन से आंतों के रोग और पेट की बीमारियां नहीं होती हैं तथा कई प्रकार के विटामिन बनने लगते हैं। दही में जो बैक्टीरिया होते हैं, वे लेक्टेज बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं। गर्मी के दिनों में पसीना काफी निकलता है। पसीने की बदबू दूर करने के लिए दही और बेसन मिलाकर शरीर पर मालिश करें तथा कुछ देर बाद स्त्रान करें, इससे पसीने की बदबू दूर हो जाती है।   जैतून के तेल और नींबू के रस के साथ दही को चेहरे पर लगाने से चेहरे का रूखापन समाप्त होता है। मुंह के छालों में दही कम करने के लिए दिन में कई बार दही की मलाई लगाएं। इसके अलावा शहद व दही की समान मात्रा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।    गर्मी के मौसम में दही की छाछ या लस्सी बनाकर पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है। इसे पीकर बाहर निकलें तो लू लगने का डर भी नहीं रहता है। दही को जीरे व हींग का छौंक लगाकर खाने से जोडों के दर्द में लाभ पहुंचता है। यह स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है। दही में ह्वदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की अjत क्षमता है। यह हमारे रक्त में बनने वाले कोलेस्ट्रोल नामक घातक पदार्थ को बढने से रोकता है, जिससे वह नसों में जमकर ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित न करे और हार्टबीट सही बनी रहे। दही में कैल्शियम की मात्रा अधिक पाई जाती है, जो हमारे शरीर में हड्डियों का विकास करती है। दांतों एवं नाखूनों की मजबूती एवं मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में भी सहायक है।   साभार-khaskhabar.com       

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गर्मी में आग बरसाते सूरज और गर्म हवा के थपेड़ों को झेलना काफी मुश्किल होता है। छतरी या चुन्नी जैसी कई चीजों के सहारे आप कुछ देर तो इनका सामना कर सकती हैं, लेकिन ये तरीके आपको लू से नहीं बचा पाएंगे। गर्मी में लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। लू अन्य कई रोगों का भी कारण बनती है। आयुर्वेद में इससे बचने के कई उपाय बताए गए हैं, जिनका इस्तेमाल कर आप लू से बच सकती हैं।  गर्मी में पाचन संबंधी परेशानियां भी बढ़ जाती हैं। इसके अलावा शरीर के अंगों में संकुचन, जोड़ों में दर्द, नजला, जुकाम, नींद की कमी, सूजन, निर्बलता, स्पर्श शून्य, आंखों में जलन, आंखों का लाल होना आदि परेशानियां होती हैं। लू लगने के दौरान वात शमन के उपाय करने चाहिए। वात नाशक द्रव्य, मधुर, देवदार, कौंच सहचरा, सहजना, गिलोय, पुर्ननवा, भृंगराज, वरुण, हल्दी, शतावर, कुलथी आदि पदार्थों का सेवन करना चाहिए। साभार-khaskhabar.com     

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नारद संवाद

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