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चण्डीगढ । हरियाणा राज्य के किसानों को आश्वस्त करते हुए कि उनकी उपज का एक-एक दाना राज्य सरकार द्वारा खरीदा जाएगा, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सरसों की 15 अप्रैल और गेहूं की 20 अप्रैल से होने वाली खरीद के लिए मंडियों और खरीद केंद्रों की संख्या में वृद्धि की घोषणा की। उन्होंने कहा कि गेहूं की खरीद के लिए मंडियों और खरीद केंद्र की संख्या 477 से बढ़ाकर 2000 की गई है और सरसों के 67 खरीद केन्द्र से बढ़ाकर 140 खरीद केन्द्र किए गए हैं ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हों। मनोहर लाल ने यहां एक डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह घोषणाएं कीं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कल केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को आहवान किए जाने के बाद, उन्होंने स्वयं और हरियाणा के राज्यपाल, उप-मुख्यमंत्री, सभी कैबिनेट मंत्रियों और राज्य मंत्री, हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने भी कोरोना वायरस के प्रकोप को फेलने से रोकने के लिए और अर्थव्यवस्था में अपेक्षित मंदी के मद्देनजर वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतू अपने ऐच्छिक कोटे से समेकित निधि (कोनसोलीडेट फंड) में 51 करोड़ रुपये का योगदान करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर एहतियात के तौर पर चरणबद्ध तरीके से किसानों की उपज खरीदने की योजना तैयार की गई है। उन्होंने राज्य सरकार के इस फैसले का तहे दिल से समर्थन करने वाले आढ़तियों का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को भी पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि उन किसानों को प्रोत्साहन दिया जाए जो देरी से अपनी उपज को मंडियों में लेकर आएंगें। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरी उम्मीद है कि केंद्र सरकार जल्द ही इस पर अनुकूल निर्णय लेगी’’। मुख्यमंत्री ने ‘‘मेरी फसल मेरा ब्योरा योजना’’ का उल्लेख करते हुए कहा कि हालांकि राज्य सरकार ने प्रदेश में किसान की फसल का पंजीकरण पूरा कर लिया है, लेकिन कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को उन किसानों के लिए पंजीकरण को फिर से खोलने का निर्देश दिया गया है, जो किसी भी कारण से पहले अपना पंजीकरण नहीं करवा सके। उन्होंने कहा कि ऐसे किसान 19 अप्रैल, 2020 तक पोर्टल पर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों को उनकी उपज की खरीद के 24 घंटों के भीतर उनके बैंक खातों में भुगतान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार सरसों की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदेगी और किसानों द्वारा मंडियों में सरसों की फसल की खरीद पर कोई सीमा नहीं होगी। मनोहर लाल ने राज्य के किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे राज्य सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी के खिलाफ लडऩे के लिए स्थापित कोरोना रिलीफ फंड में अपना योगदान दें। उन्होंने किसान संगठनों और किसान संघों का भी धन्यवाद किया जो इस संकट की घडी में आगे आ रहे हैं और किसानों से फंड में उदारता से योगदान देने का आग्रह कर रहे हैं। राज्य और देश की खाद्यान्न की आवश्यकता को पूरा करने में किसानों के योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने आग्रह किया कि वे मंडियों में अपनी उपज लेते समय सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) बनाए रखें और मास्क का उपयोग करें ताकि कोरोना वायरस से स्वयं को प्रभावित होने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि मंडियों और खरीद केंद्रों में मास्क उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि कोविड-19 के प्रकोप को फैलने से रोका जा सकें। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत तीन महीने का राशन पहले ही डिपो में पहुंचा दिया गया है और सभी गुलाबी, पीला और खाकी कार्ड धारकों को दोगुना राशन निशुल्क दिया जाएगा। इस राशन में चीनी और सरसों का तेल भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, राज्य सरकार ने फैसला किया है कि अब से, गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) कार्ड धारक भी बाजार दरों की तुलना में कम दरों पर डिपो से राशन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस समय जब सरकार और पूरा समाज कोविड-19 का मुकाबला कर रहा है, यह लोगों की जिम्मेदारी है कि वे स्वेच्छा से आगे आएं और समाज के गरीब तबके के लोगों की मदद करें। उन्होंने राहत उपायों में जिला प्रशासन की सहायता के लिए गांवों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक गरीब की देखभाल कर रही है और पिछले सात दिनों में 55 लाख खाद्य पैकेट और 3.50 लाख राशन पैकेट वितरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किए गए आह्वान पर, समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने अब तक कोरोना रिलीफ फंड में लगभग 49 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के 150 कर्मचारियों ने मार्च, 2020 का अपना 100 प्रतिशत वेतन का योगदान दिया है, वहीं 1.82 लाख कर्मचारियों ने एक प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक का योगदान दिया है। एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल कटाई को लेकर हरियाणा में टैऊक्टर व कंबाईन हारवेस्टर इत्यादि मशीनरी की आवाजाही में दिक्कत नहीं होगी बल्कि इस मशीनरी के साथ आने वाले लोगों के आवश्यक टेस्ट करवाते हुए तथा सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और पंजाब से कुछ कंबाईन हारवेस्टर मशीनें हरियाणा में आ चुकी है और इसके अलावा, हरियाणा में 4500 कंबाईन हारवेस्टर मशीनें हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी सभी मशीनों व वाहनों की वर्कशाप और एजेंसी को खुले रहने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि फसल कटाई में किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि राज्य में फसल कटाई व उठान के लिए मनरेगा के श्रमिकों को उपलब्ध करवाया जाएगा। इसके अलावा, राज्य के 200 विभिन्न राहत शिविरों में रह रहे 15000 से अधिक मजदूरों ने भी खेतों में काम करने की इच्छा जताई है। डिजीटल लाइव प्रैस कान्फ्रेंस के दौरान एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि हरियाणा के विधायकों का इस माह का वेतन कोरोना रिलिफ फंड में जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल के लॉकडाउन के संबंध में केन्द्र सरकार जैसा निर्णय लेगी, उसी अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी। कर्मचारियों के वेतन में से स्वेच्छिक रूप से योगदान देने के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि अभी तक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने इस वेबपोर्टल पर सबसे अधिक योगदान दिया है जो अब तक प्राप्त राशि का 50 प्रतिशत से भी अधिक है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा वेबपोर्ट पर पंजीकृत किए गए प्रदर्शन के अनुसार लगभग 70 करोड रूपए की राशि आने की संभावना है। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने 50 से 60 लाख मीट्रिक टन अनाज रखने की सुविधा तैयार की है। इसके अलावा, विभिन्न स्थानों पर भी शेड सुविधा तैयार की गई है जहां पर दो से तीन महीनें के लिए अनाज को रखा जा सकता हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि गुरूग्राम की मंडियों में सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर गुरूग्राम के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिए गए हैं कि वे मंडियों में जाकर इस सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखने में लोगों को समझाएं ताकि कोविड-19 के प्रकोप को फेलने से रोका जा सकें।    साभार-khaskhabar.com

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गांधीनगर। गुजरात में बुधवार सुबह चार और कोरोनोवायरस पॉजिटिव मामले सामने आए। वहीं स्वास्थ्य अधिकारियों ने जानकारी दी कि दो और मौतों के साथ राज्य में कुल मौत का आंकड़ा बढ़कर 16 हो गया है। जामनगर के जीजी अस्पताल में भर्ती एक 14 महीने के बच्चे ने खतरनाक वायरस के चलते दम तोड़ दिया। सूरत के एक पुरुष (65) की भी मंगलवार शाम को कोरोनावायरस से मौत हो गई। मरीज हाइपरटेंशन से पीड़ित था। गुजरात के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव जयंती रवि ने कहा, "स्वास्थ्य अधिकारियों ने शिशु को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन शिशु के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और आखिरकार वह इस वायरस से जिंदगी की जंग हार गया। इसके अलावा सुबह चार और मामले पॉजिटिव पाए गए। भावनगर के 2 पुरुषों (38) और (43) को सर टी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक और पॉजिटिव मामला सूरत में दर्ज हुआ है। इस 70 वर्षीय महिला को मेटास अस्पताल में भर्ती किया गया है। वड़ोदरा के एक 22 वर्षीय युवक को गोटरी में गुजरात मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सोसाइटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। भर्ती किए गए चारों लोग स्थानीय स्तर पर संक्रमित हुए हैं।" रवि ने कहा, "पिछले 24 घंटों में परीक्षण के लिए 932 नमूने लिए गए, जिसमें से 14 पॉजिटिव और 687 नेगेटिव पाए गए। वहीं 231 की रिपोर्ट आने का इंतजार है। बुधवार शाम तक इनमें से अधिकांश के नतीजे आने की उम्मीद है।" अधिकतम नमूने भावनगर (45), अहमदाबाद (40), सूरत (27), राजकोट और गांधीनगर (24 प्रत्येक) में एकत्र किए गए थे। बुधवार के मामलों के साथ, गुजरात में अब कुल 179 पॉजिटिव मामले हैं जिनमें 16 मौतें भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा मामले अहमदाबाद में 83 हैं, इसके बाद सूरत (23), भावनगर (16), गांधीनगर और वड़ोदरा (प्रत्येक में 13), राजकोट (11), पाटन (5), पोरबंदर (3), कच्छ मेहसाणा और गिर-सोमनाथ में दो-दो और पंचमहल, छोटा उदेपुर, जामनगर, मोरबी, आनंद और सबरखा में एक-एक मामले हैं। उन्होंने आगे कहा, "कुल पॉजिटिव मामलों में से, 136 रोगियों की हालत स्थिर बताई गई है। वहीं 25 को छुट्टी दे दी गई है और 2 की स्थिति गंभीर है, वे वेंटिलेटर पर हैं।" उन्होंने आगे कहा, "कुल पॉजिटिव मामलों में से 33 ने अंतर्राष्ट्रीय यात्रा की थी, वहीं 32 ने अंतरराज्यीय यात्रा की थी। बाकी 114 लोग स्थानीय स्तर पर संक्रमित हुए हैं। हमने अब तक कुल 3,972 परीक्षण किए हैं, जिसमें से 3,562 नेगेटिव और 179 पॉजिटिव आए हैं। 231 के परिणाम लंबित हैं।"  साभार-khaskhabar.com  

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जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि राजस्व में भारी गिरावट की वजह से राज्यों की वित्तीय स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। वित्तीय स्थिति को देखते हुए राजस्थान सरकार को राज्य कर्मियों के मार्च माह के वेतन को आंशिक रूप से स्थगित करने का मुश्किल फैसला लेना पड़ा। ऐसे में राज्यों की आर्थिक स्थिति समझते हुए केन्द्र सरकार की ओर से अत्यावश्यक कदम उठाने चाहिए। गहलोत ने पत्र में लिखा है कि देश के सभी राज्यों को 1 लाख करोड़ का अनुदान शामिल करते हुए आर्थिक पैकेज की घोषणा शीघ्र की जानी चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में वेज एण्ड मीन्स एडवान्स में 30 प्रतिशत की सीमा बढ़ाई है लेकिन विशेष संकटकाल को देखते हुए राज्य सरकारों को ब्याज मुक्त वेज एण्ड मीन्स एडवान्स की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि वे कोविड-19 महामारी से ज्यादा प्रभावी तरीके से निपट सकें। मुख्यमंत्री ने 27 मार्च को प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में दिये गए सुझावों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों को केन्द्र से अपेक्षा है कि भारतीय रिजर्व बैंक एवं केन्द्र के अधीन अन्य वित्तीय संस्थानों के समस्त ऋण जो आगामी समय में देय हैं, उनके भुगतान का पुनर्निधारण करते हुए ब्याज मुक्त आधार पर कम से कम 3 माह का मोरेटोरियम उपलब्ध कराए। साथ ही भारत सरकार के स्तर पर ऋण लेकर राज्यों के विकास के लिए उपलब्ध करवाया जाए। गहलोत ने पत्र में लिखा कि कनाडा जैसे कई देशों में वेज सब्सिडी उपलब्ध कराई है। उसी तर्ज पर भारत सरकार द्वारा यहां भी गैर संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को आजीविका के नुकसान को देखते हुए उन्हें वेज सब्सिडी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने भारत सरकार द्वारा घोषित गरीब कल्याण योजना एवं आर्थिक पैकेज का स्वागत करते हुए जनहित में इसकी शीघ्र क्रियान्विती सुनिश्चित करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कोविड-19 वायरस के प्रसार की सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए केन्द्र से परीक्षण सुविधा में तेजी से वृद्धि करने और डॉक्टरों तथा चिकित्सा कर्मचारियों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों एवं टेस्टिंग किट का युद्ध स्तर पर आयात कर कोरोना संक्रमित रोगियांे की संख्या के आधार पर इसका वितरण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वंेटिलेटर का उचित प्रमाणिकरण कर उसका मूल्य निर्धारण किया जाए ताकि बाजार में आए कम लागत वाले प्रभावी वंेटिलेटर्स की खरीद में आसानी हो। गहलोत ने पत्र में लिखा कि केन्द्र सरकार को आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही के लिए स्पष्ट एवं पारदर्शी अंतर्राज्यीय आपूर्ति श्रंृखला प्रोटोकोल लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में दूसरे राज्यों से आए मजदूर फंसे हुए हैं। इसके अलावा ठेले एवं रेहड़ी चलाने वाले, पंजीकृत निर्माण श्रमिक और कारखानों में काम करने वाले श्रमिक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के दायरे में नहीं आते हैं। ऐसे में उन्हेें भी एनएफएसए लाभार्थियों के समान अनाज उपलब्ध करवाने की व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने मनरेगा के तहत पंजीकृत और सक्रिय मजदूरों को 21 दिन के अग्रिम वेतन भुगतान पर विचार करने का भी आग्रह किया और सुझाव दिया कि अग्रिम भुगतान को मनरेगा साइट पर काम शुरू होने के बाद मजदूरों द्वारा किये जाने वाले काम से समयोजित किया जा सकता है। गहलोत ने राज्य सरकारों को भरोसे में लेकर संघवाद के मूल्यों को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। साथ ही उन्होंने कोविड-19 महामारी से समन्वित एवं ऊर्जावान तरीके से निपटने के लिए संघवाद की भावना की आवश्यकता पर जोर दिया।  साभार-khaskhabar.com

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जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोविड-19 का संक्रमण रोकने के लिए राज्य सरकार हर संभव कदम उठा रही है। प्रदेश में अभी तक 11 हजार 136 कोविड-19 के टेस्ट किये गये हैं। जो केरल के बाद किसी दूसरे राज्य द्वारा किये गये सर्वाधिक टेस्ट हैं। गहलोत शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित समीक्षा बैठक में कोरोना को लेकर वर्तमान स्थिति एवं लॉकडाउन के हालात के बारे में जानकारी ले रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में कोरोना टेस्ट भारत सरकार की संस्था इण्डियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा राज्यों को दी गई गाइड लाइन के तहत किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रेपिड टेस्ट किट के लिए आईसीएमआर ने जिन कम्पनियों को अधिकृत किया है राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा उनसे संपर्क किया जा रहा है। रेपिड टेस्ट किट उपलब्ध होने के बाद प्रदेश में और अधिक संख्या में टेस्ट किये जा सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सही समय पर सही फैसले लिए हैं। पूरे देश में राजस्थान सरकार के इन कदमों की सराहना की जा रही है। कोविड-19 का कम्यूनिटी ट्रंासमिशन रोकने के लिए राज्य सरकार की ओर से किए गए उपायों की सराहना केन्द्र सरकार ने भी की है। उन्होंने इलेक्ट्रोनिक मीडिया, अखबार, सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से अपील की है कि सही जानकारियां आमजन तक पहुंचाएं, ताकि आमजन में भ्रम की स्थिति पैदा नहीं हो। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने समय रहते जो फैसले लिए हैं उन्हें सकारात्मक रूप से आमजन तक पहुंचाया जाए। गहलोत ने होम क्वारंटाइन में रखे गये लोगों से अपील की कि वे क्वारंटाइन के दौरान गाइड लाइन का पालन करें और घर से बाहर नहीं जाएं ताकि दूसरे लोगों में इस वायरस के फैलने का खतरा नहीं हो। उन्होंने कहा कि जो लोग इसका पालन नहीं करेंगे उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के इस प्रकोप के दौरान सामान्य एवं गंभीर बीमारियों वाले मरीजों को भी राज्य में सभी स्तरों के अस्पतालों में उचित इलाज मिले इस बात का पूरा ध्यान रखा जाये। हमें यह ध्यान रखना होगा कि दूसरी बीमारियों वाले मरीज परेशान नहीं हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान राशन की दुकानें खुली रहें और गेहूं की पर्याप्त आपूर्ति हो इस बात का पूरा ध्यान रखा जाये। उन्होंने कहा कि जो गरीब एवं जरूरतमंद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कवर नहीं हो रहे हैं, उन तक राशन पहुंचाया जाए ताकि उन्हें भूखा नहीं रहना पडे़। गहलोत ने कहा कि दवाइयां, किराना, दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की दुकानें खुली रहे साथ ही मसाले, साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, कीटनाशक, सरफेस क्लीनर, चार्जर, बैटरी जैसी आवश्यक वस्तुएं भी लॉकडाउन के दौरान उपलब्ध रहें यह सुनिश्चित किया जाए। बैठक में मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने बताया कि केन्द्र सरकार ने डिस्ट्रीक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) में जमा राशि का 30 प्रतिशत हिस्सा कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए उपयोग करने की अनुमति दे दी है। इस पर राजस्थान सरकार ने भी इस संबंध में आदेश जारी कर दिये हैं। जिन जिलों में यह राशि उपलब्ध है, अब वहां इसका व्यय किया जा सकेगा। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह राजीव स्वरूप ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं की सूची के संबंध में केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन के तहत कई अन्य वस्तुओं एवं गतिविधियों को इसमें शामिल करते हुए राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चैन से जुड़ी ई-कॉमर्स कम्पनियों, होम डिलीवरी कम्पनियों, मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों, गोदाम एवं वेयर हाउस आदि को अनुमति दी गई है। इसके अलावा आयुर्वेदिक, यूनानी एवं होम्योपैथिक दवाओं की आपूर्ति, अस्पताल, क्लिीनिक भी इसमें शामिल हैं। कृषि उपकरणों, फर्टिलाइजर, खाद-बीज की दुकानों, कृषि उपकरणों में काम आने वाले पार्टस आदि की सप्लाई चैन भी लॉकडाउन में बाधित नहीं रहेगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य रोहित कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में अभी तक कोरोना वायरस के कम्यूनिटी ट्रांसमिशन को रोकने में कामयाबी मिली है।  साभार-khaskhabar.com

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जयपुर । राजस्थान में तब्लीगी जमात के कारण कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 154 तक जा पहुंचा है। राजधानी जयपुर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 48 पहुंच गई है, जबकि भीलवड़ा में 26, टोंक में 16, जोधपुर में 10, झुंझुनू में 9 कोरोना पॉजिटिव है। जबकि दो इटली से और 18 कोरोना पॉजिटिव आर्मी कैंप से मिले है। वहीं चूरू में 8, अजमेर में 5, डूंगरपुर में 3, बीकानेर में 2, अलवर में 2 कोरोना पॉजिटिव मिले है।      साभार-khaskhabar.com

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मुंबई। महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के 3 और मामले सामने आए हैं। 2 मामले पुणे से हैं और 1 बुलढाणा से सामने आने के बाद राज्य में कोरोना वायरस पॉजिटिव मामलों की संख्या बढ़कर 338 हो गई है। देश भर में कोरोना वायरस का कहर जारी है। महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यहां पर कोरोना वायरस की चपेट में CISF के 5 जवान भी आ गए हैं। पांचों जवानों का टेस्ट पॉजिटिव आया है। बुधवार को सात लोगों की कोरोना से मौत हो गई। इसमें से 5 मौत मुंबई में ही हुई है।  साभार-khaskhabar.com  

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चंडीगढ़। स्वर्ण मंदिर के पूर्व हजूरी रागी और पदमश्री निर्मल सिंह खालसा का गुरुवार सुबह पंजाब के अमतसर में एक अस्पताल में हदय गति रूकने से मृत्यु हो गई। उनका एक दिन पहले ही कोरोनावायरस परीक्षण पॉजिटिव निकला था। इसके साथ ही कोविड-19 के कारण पंजाब में मरने वालों की संख्या बढ़कर पांच हो गई। 62 वर्षीय निर्मल सिंह हाल ही में यूके से लौटे थे और अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। सांस लेने में दिक्केत और चक्कर आने की शिकायत के बाद उन्हें 31 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 29 मार्च को श्री गुरु रामदास रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में उनका परीक्षण कियर गया इसके बाद उन्हें गुरु नानक अस्पताल में भेजा गया। स्थानीय पुलिस ने अमृतसर में इस घातक वायरस के प्रसार को रोकने के लिए निर्मल सिंह के आस-पास के घरों को सील कर दिया है। निर्मल सिंह पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित होने वाले स्वर्ण मंदिर के पहले हजूरी रागी थे। उन्हेंस 2009 में यह सम्माुन मिला था। अभी विदेश से लौटने के बाद उन्होंने दिल्ली और कुछ अन्य स्थानों पर बड़े धार्मिक आयोजन किए थे।  साभार-khaskhabar.com  

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जयपुर। राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला करते हुए उद्योगों को बड़ी राहत दी है। अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि राज्य में अब आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन, दवा, फार्मास्यूटिकल, मेडिकल डिवाइसेज का उत्पादन करने वाली इकाइयों, इनका कच्चा माल तैयार करने वाले, खाद्य पदार्थों, दवा, फार्मास्यूटिकल, मेडिकल डिवाइसेज की पैकेजिंग सामग्री तैयार करने वाली इकाइयों के साथ ही उर्वरकों, कीटनाशकों व बीज आदि की पैकेजिंग सामग्री तैयार करने वाली इकाइयों को भी सषर्त उत्पादन की अनुमति दी जा सकेगी। उन्होंने बताया कि कोल व मिनरल उत्पादक इकाइयों आदि को भी आवष्यक पास, परमिट और अनुमति पत्र जारी किए जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि मंगलवार को एमडी रीको आशुतोष पेडनेकर ने डॉक्टर्स के लिए पीपीई किट तैयार करने वाली सीतापुरा की इकाई बाजिया एक्सपोर्ट को सशर्त स्वीकृति जारी की है। एसीएस उद्योग डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इससे पहले सोमवार को लॉक डाउन अवधि में औद्योगिक इकाइयों व संस्थानों के कार्मिकों और श्रमिकों को बिना कटौती के निर्धारित समय पर डिजीटल प्लेटफार्म पर सीधे खातों में ऑनलाईन या सीधे खातों में हस्तांतरण यानी डीबीटी के माध्यम से या एनईएफटी या आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान करने को कहा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग डॉ. अग्रवाल ने बताया कि उद्योग विभाग ने केन्द्र व राज्य सरकार के गृह विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार लॉक डाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं का विनिर्माण और आपूर्ति करने वाली औद्योगिक इकाइयों को अनुमति के संबंध में परिवर्द्धित आदेश व दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पूर्व आदेशों में पहले चरण में आटा, बेसन, दाल व तेल मिलों व कंटिन्यूअस नेचर की इकाइयों को अनुमति के निर्देश जारी किए गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुमति जारी करते समय विभाग द्वारा जारी निर्देशों और केन्द्र व राज्य सरकार की समय-समय पर जारी एडवाइजरी की भी सख्ती से पालना सुनिश्चित की जानी है। उन्होंने बताया कि दिषा-निर्देशों के अनुसार इकाइयों का संचालन न्यूनतम आवश्यक श्रमिकों से कराने, श्रमिकों का औद्योगिक परिसर या अनुमति प्राप्त परिसर में आवास सुविधा के साथ ही उनके इकाई व आवास परिसर में मेडिकेटेड सेनेटाइजर, साबुन, मास्क के साथ ही अन्य जरुरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने होंगे। इसके साथ ही आवासीय परिसर में उनके रहने, सोने व जीवन यापन के सभी इंतजाम करने होंगे। दोनों ही स्थानों पर सेनेटाइजेशन के साथ ही फ्यूमिगेशन की व्यवस्था करनी होगी। कार्य स्थल व आवास पर सोषियल डिस्टेंस व संपर्क रहित आदान-प्रदान की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही इकाई में किसी के भी वायरस संक्रमण, बुखार, खांसी, जुखाम अथवा अन्य संक्रमण की स्थिति में तत्काल प्रषासन को जानकारी देने के साथ ही चिकित्सकीय जांच करानी होगी। राज्य सरकार व जिला प्रषासन द्वारा जारी एडवायजरी की पालना सुनिष्चित करने को कहा गया है। उद्योग आयुक्त मुक्तानन्द अग्रवाल ने बताया कि जिले की रीको क्षेत्र की इकाइयों को रीको द्वारा व रीको क्षेत्र से बाहर की इकाइयों को महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्रों द्वारा आवष्यक पास, परमिट और अनुमति पत्र जारी किया जा सकेगा वहीं एक से अधिक जिलों की इकाइयों के लिए रीको क्षेत्र में एमडी रीको और रीको से बाहर के क्षेत्र की इकाइयों को कलक्टर के माध्यम से प्राप्त अभिषंषा पर अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग द्वारा अनुमति दी जाएगी। आयुक्त अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश में अब तक राज्य स्तर पर 16 इकाइयों व जिला स्तर पर जिला उद्योग केन्द्रों व रीको कार्यालयोें में 371 इकाइयों ने में संपर्क किया है। कार्मिकों एवं श्रमिकोें में कार्य करने हेतु 155 उद्यमियों ने संपर्क किया है जिसमें अब तक 223 पास जारी की जा चुकी है।  साभार-khaskhabar.com

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जयपुर। शताब्दियों से अमर शौर्य और अप्रतिम शक्ति के मूर्तिमान रूप में जिस भूभाग और अमर सांस्कृतिक चेतना का नाम लिया जाता है, वह है राजस्थान। इंग्लैण्ड के विख्यात कवि किप्लिंग का मानना था कि दुनिया में यदि कोई ऎसा स्थान है, जहां वीरों की हड्डियां मार्ग की धूल बनी है तो वह राजस्थान है। यह हमारे इतिहास की सच्चाई है। देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने की परम्परा आज भी राजस्थान में कायम है। 30 मार्च, 1949 को जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय कराकर वृहत्तर राजस्थान संघ बनाया गया था। तब से आज तक यह दिन राजस्थान की स्थापना के रूप में राजस्थान दिवस के तौर पर मनाया जाता है। राजस्थान, भारत का न केवल सबसे विस्तृत भौगोलिक राज्य है बल्कि सबसे खूबसूरत राज्यों में से भी एक है। यहां की संस्कृति दुनिया भर में मशहूर है। राजस्थान की बहुआयामी संस्कृति के निर्माण में विभिन्न समुदायों और शासकों का गहरा योगदान रहा है। इसी विविधता के कारण राजस्थान का नाम आते ही हमारी आंखों के आगे बड़े-बड़े महल और किले, थार रेगिस्तान, ऊंट की सवारी, घूमर, कालबेलिया नृत्य और रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान आने लगते हैं। वीर तो वीर, यहां की वीरांगनाएं भी अपनी माटी के लिए कुर्बानी देने में नहीं झिझकीं। इतिहास गवाह है कि यहां शौर्य और साहस ही नहीं बल्कि हमारी धरती के सपूतों ने हर क्षेत्र में कमाल दिखाकर देश-दुनिया में राजस्थान के नाम कोे चांद-तारों सा चमका दिया। राजस्थान की धरती पर रणबांकुरों ने जन्म लिया है। यहां वीरांगनाओं ने भी अपने त्याग और बलिदान से मातृभूमि को सींचा है। यहां धरती का वीर योद्वा कहे जाने वाले पृथ्वीराज चौहान ने जन्म लिया, जिन्होंने तराइन के प्रथम युद्व में मुहम्मद गौरी को पराजित किया। कहा जाता है कि गौरी ने 18 बार पृथ्वीराज पर आक्रमण किया था, जिसमें 17 बार उसे पराजय का सामना करना पडा था। जोधपुर के राजा जसवंत सिंह के 12 साल के पुत्र पृथ्वी ने तो हाथों से औरंगजेब के खूंखार भूखे जंगली शेर का जबड़ा फाड़ डाला था। राणा सांगा ने सौ से भी ज्यादा युद्व लडकर साहस का परिचय दिया था। पन्ना धाय के बलिदान के साथ बुलन्दा (पाली) के ठाकुर मोहकम सिंह की रानी बाघेली का बलिदान भी अमर है। जोधपुर के राजकुमार अजीत सिंह को औरंगजेब से बचाने के लिए वे उन्हें अपनी नवजात राजकुमारी की जगह छुपाकर लाई थीं। राजस्थान अपनी आन, बान, शान, शौर्य साहस, कुर्बानी, त्याग, बलिदान तथा वीरता के लिए सम्पूर्ण विश्व में ख्यात है। राजस्थान के लोग अपनी मेहनत के लिए जाने जाते हैं। भौगोलिक विषमताओं और प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद यहां के नागरिकों की दृढ इच्छा शक्ति और आपसी सहयोग से प्रदेश का चहुंमुखी विकास हो सका है। राजस्थान में गरीब लोगों की सामाजिक, आर्थिक स्थिति में सुधार, यहां के संसाधनों में वृद्वि के साथ राजनीति, व्यवसाय आदि सभी क्षेत्रों में विकास ही हमारी खुशहाली का प्रतीक है। राजस्थान इस वर्ष अपना 71वां स्थापना दिवस मना रहा है। कला-संस्कृति, पर्यटन, व्यापार, खेल और खेती सभी क्षेत्रों मे देश में सबसे आगे हैं राजस्थानी। राजस्थान देश का सबसे बडा राज्य है। राज्य का क्षेत्रफल 3.42 लाख किलोमीटर है। यह देश के कुल क्षेत्रफल का 10.41 प्रतिशत है। राजस्थान की जनसंख्या 6.86 करोड है और साक्षरता की दर 66.1 प्रतिशत है। राजस्थान रेतीला, बंजर, पर्वतीय और उपजाऊ कच्छारी मिटटी से मिलकर बना है। वर्तमान में राजस्थान में सात सम्भाग, 33 जिले, 295 पंचायत समितियां, 9 हजार 891 ग्राम पंचायतें, 43 हजार 264 आबाद गांव, 184 शहरी निकाय और नगरीय क्षेत्र है। यहां विधान सभा के 200 और लोक सभा के 25 क्षेत्र हैं। राज्य की अर्थ व्यवस्था कृषि एवं उद्योगों पर आधारित है। कृषि और पशु पालन यहां के निवासियों के मुख्य रोजगार हैं। आजादी के बाद इस प्रदेश ने निश्चय ही प्रगति और विकास की ऊचाइयों को छुआ है। वर्षा की अनियमितता के कारण यह प्रदेश अनेकों बार सूखे और अकाल का शिकार हुआ, मगर प्रदेशवासियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी जीना सीखा और अपने बुलन्द हौसले को बनाये रखा। यह सही है कि हमने हर क्षेत्र में प्रगति हासिल की है। स्कूलों की संख्या बढी है। छात्रोंं का नामांकन भी बढा है। राशन सस्ता हुआ है। विदयुत के क्षेत्र में भी हम आगे बढे हैं। विदयुत क्षमता में भी बढोतरी हुई है। गांव-गांव और घर-घर बिजली की रोशनी से प्रज्ज्वलित हुए हैं। सडकों का जाल चहुंओर देखने को मिल रहा है। गांवों को मुख्य सडकों से जोडा गया है। पेयजल के क्षेत्र में अच्छी खासी प्रगति हुई है। गांव-गांव मेें पानी पहुंचाया गया है। लेकिन अभी हमें मेहनत से आगे बढना है। राजस्थान में विकास को निरन्तर गति देनी है। राजस्थान पुरातन कलात्मक और सांस्कृतिक परंपराओं का केंद्र हैं। इसके नाम का तात्पर्य है राजभूमि यानी सत्य, शौर्य और शूरवीरता की भूमि। सम्राट पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप और महाराजा सूरजमल के अप्रतिम शौर्य की भूमि। राजस्थान में भक्ति के चिर-प्रतिमान मीरां, धन्ना, दादू और रामचरण रामस्नेही जैसे भक्त और साधक हुए हैं। भीनमाल में संस्कृत के शिखर महाकवि माघ हुए, वहीं हिंदी और राजस्थानी भाषा को शिखर तक ले जाने वाले अनेक विद्वानों ने इस धरा को धन्य किया है। राजस्थान ने भारतीय कला में अपना योगदान दिया है। यहाँ साहित्यिक परम्परा मौजूद है। चंदबरदाई का काव्य पृथ्वीराज रासो उल्लेखनीय है, जिसकी प्रारम्भिक हस्तलिपि 12वीं शताब्दी की है। मनोरंजन का लोकप्रिय माध्यम ख्याल है, जो एक नृत्य-नाटिका है और जिसके काव्य की विषय-वस्तु उत्सव, इतिहास या प्रणय प्रसंगों पर आधारित है। राजस्थान में प्राचीन दुर्लभ वस्तुएँ प्रचुर मात्रा में हैं, जिनमें बौद्ध शिलालेख, जैन मन्दिर, किले, शानदार रियासती महल ,मस्जिद व गुम्बद शामिल हैं। राजस्थान मेलों और उत्सवों की रंगीली धरती है। यहाँ की एक कहावत प्रसिद्ध हैं सात वार, नौ त्यौहार। यहाँ के मेले और पर्व राज्य की संस्कृति के परिचायक हैं। यहां लगने वाले पशु मेले व्यक्ति और पशुओं के बीच की आपसी निर्भरता को दिखाते हैं। राज्य के मेलों में पुष्कर का कार्तिक मेला, परबतसर और नागौर के तेजाजी का मेला और डिग्गी के कल्याणजी का मेले को गिना जाता हैं। यहाँ तीज का लोकपर्व सबसे महत्वपूर्ण है। श्रावण माह के इस पर्व के साथ त्यौहारों की श्रृंखला आरम्भ होती है, जो गणगौर तक निरन्तर चलती हैं। राजस्थान में मुश्किल से कोई महीना ऎसा जाता होगा, जिसमें धार्मिक उत्सव न हो। सबसे उल्लेखनीय व विशिष्ट उत्सव गणगौर है, जिसमें महादेव व पार्वती की मिट्टी की मूर्तियों की पूजा महिलाओं द्वारा की जाती है। गणगौर माता के विसर्जन की शोभायात्रा देखते ही बनती है। राजस्थान की यह सबसे बड़ी खासियत है कि यहां हिन्दू और मुसलमान, दोनों एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं। इन अवसरों पर उत्साह व उल्लास का बोलबाला रहता है। देश-विदेश से तीर्थयात्री पुष्कर में मुक्ति की खोज में आते हैं, वहीं अजमेर स्थित सूफी आध्यात्मवादी ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह दुनियाभर की पवित्रतम दरगाहों में से एक है। उर्स के अवसर पर लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से दरगाह पर जियारत करने यहां आते हैं। इसी कारण राजस्थान को फेस्टिवल टूरिज्म का प्रमुख केंद्र कहना अतिश्योक्ति नहीं है। पुष्कर मेला तो देश के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु पुष्कर आकर पवित्र सरोवर में डुबकी लगाते हैं। स्वदेशी हो या विदेशी, राजस्थानी संस्कृति हर किसी का मन चुटकियों में मोह लेती है। आखिर किसका मन नहीं करेगा, मनमोहक कालबेलिया नृत्य देखने का। सभ्यता और सुंदरता को एक साथ जोड़ने में राजस्थानी पोशाक के आगे कुछ नहीं टिकता। महिलाओं के लिए पारंपरिक राजस्थानी कपड़े शालीन, सभ्य, सुंदर और आरामदायक होते हैं, वहीं पुरुषों के सिर पर बंधेज की पगड़ी अनूठी होती है। राजस्थान के वर्तमान परिदृश्य में सनातन संस्कृति की रक्षा का प्रयास हम सबकी जिम्मेदारी है। हर हाथ को काम मिले। हर मानव अपनी अस्मिता और आत्मसम्मान से जिए। हर स्त्री का सम्मान हो। जब ऎसा वातावरण सृजित होगा, तभी सच्चे मायने मे राजस्थान दिवस होगा। इस बार हमें नये संकल्पों के साथ आगे बढना है। प्रदेश में विकास के सपनों को साकार करना है। देश हित के लिए एक जुट रहना है। राजस्थान हमारे देश का अद्भुत प्रदेश है। यहां के लोगों ने भारतीय संस्कृति को संजो रखा है। यहां के शहर, कस्बे और गांव अलग-अलग विशेषताओं वाले हैं। राजस्थानी लोक गीत आत्मा को छू लेते हैं। समूचा राजस्थान भारतीय संस्कृति का प्रतीक प्रतीत होता है। क्षेत्रीय आधार पर आपसी विषमता को दूर करने में यहां के मारवाडी लोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। मारवाडियों को अपनी जडों को सिंचित करने के लिए आगे आना चाहिए। क्षेत्र के विकास में योगदान देना चाहिए। प्रवासी राजस्थानियों का आर्थिक व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त करने में महत्वपूर्ण योगदान रहता है। राजस्थान जैसे पर्वतीय, मरूस्थलीय और मैदानी क्षेत्र के बहु विविधता वाले राज्य की परिश्रमशीलता, साम्थर्यता, सौन्दर्यता, नैतिकता, त्याग और शक्ति के कारण राजस्थान दुनिया का केन्द्र बिन्दु रहा है। राजस्थान दिवस मनाने का तात्पर्य केवल यहीं तक सीमित नहीं है कि हम पुरातन इतिहास का ही बखान करें बल्कि वर्तमान हालातों पर नजर बनाए रखकर राजस्थान को बचाए रखने में अपनी भूमिका का निर्वहन करें। अभी हाल के दिनों में प्रदेश ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए जो एक जुटता, धैर्य और आपसी सद्भाव का जो जज्बा दिखाया, वह बेहद ही सराहनीय और प्रंशसनीय है। प्रदेशवासियों ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए मिल-जुल कर प्रयास कर राज्य को निरोग राजस्थान बनाने में बेहतर पहल की है। मैं प्रदेशवासियों की एकता के आगे नतमस्तक हॅूं। समूची दुनिया जब कोरोना जैसी भीषण बीमारियों से जूझ रही है तो ऎसे में हमारा कर्तव्य और दायित्व अधिक बढ़ जाता है कि हम इस अव्यवस्था को सुधारने की भरपूर कोशिश करें। राजस्थान की भूमि भी इस महाव्याधि से अछूती नहीं है। हमारे यहां भी कुछ लोग कोरोना से पीडित हैं। हमें व्यापक कार्य से इस महारोग को परास्त करना है। जनजागृति फैलानी है और आपसी समझ बढ़ानी है। राजस्थान प्रदेशवासियाें ने कोरोना संकट में एक जुटता दिखाकर मिशाल पेश की है। लोगों की मदद करने के हमारे आव्हान के बाद एक दिन में मुख्यमंत्री सहायता कोष में 21 करोड रूपये की राशि जनसमुदाय द्वारा आना, बेहद ही प्रशंसनीय है। इस तरह की एकता और सहयोग की भावना निश्चित रूप से हम सभी को मजबूत कर रही है और कोरोना को हराने में हम सभी सफल होंगे।    साभार-khaskhabar.com

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धर्मशाला। विधानसभा अध्यक्ष, विपिन सिंह परमार ने कहा कि सरकार, बाहरी राज्यों फंसे प्रदेश के लोगों के प्रति संवेदशील है और मुश्किल की घड़ी में उनके साथ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने लोगों से अपील की है कि जो लोग जहां हैं वहीं बने रहें, जिससे कोरोना वायरस की चेन को तोड़ा जा सके। उन्होंने लोगों से संयम रखने और लोगों से घरों में ही बने रहने की भी अपील की। अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश अनाज, खाद्यनों, फल-सब्जी, गैस और दवाई इत्यादि की कोई कमी नहीं है और प्रदेश के सभी लोगों को दैनिक उपयोग की सभी वस्तुएं मिलती रहें, इसके लिए सरकार ने पुख्ता इंतजाम किये हैं। उन्होंने कहा गरीब दिहाड़ीदारों तथा प्रवासी मजदूरों को भी राशन इत्यादि उपलब्ध करवाने के निर्देश दिये गये हैं। परमार ने शनिवार को भवारना में 50 जरूरत मंद परिवारों को राशन के वैग, मास्क और सेनिटाईजर वितरित किये। उन्होंने कहा पूरे देश में लॉक डाउन, हम सभी सुरक्षा के लिए है और सभी को लॉक डाउन तथा कर्फ्यू के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों की अनुपालना करनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश के लोगों से आहवान किया कि अपनी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें, ताकि इस संक्रमण को हराया जा सके। उन्होंने लोगों से अफवाहों से दूर रहने का आहवान किया। इस अवसर पर भवारना पंचायत के उपप्रधान तनु भारती, अंकुर कटोच उपस्थित रहे।    साभार-khaskhabar.com

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चंडीगढ़ । हरियाणा के लिए बड़ी खुशी की बात है कि कोरोना वायरस से संक्रमित 20 मरीजों में से 6 लोग अब पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं, जिसमें 5 व्यक्ति गुरुग्राम जिले के और एक व्यक्ति फरीदाबाद जिले का है। इसके साथ ही राहत की बात यह है कि प्रदेश में अभी तक कोरोना के कारण किसी व्यक्ति की जान नहीं गई है। यह जानकारी यहां हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आयोजित स्वास्थ्य विभाग राज्य के सभी जिला स्तर के अधिकारियों व मैडिकल कालेजों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान दी गई। बैठक में हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज भी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि गुरुग्राम जिले में जो 10 पॉजिटिव केस थे, उनमें से अब पांच का सैंपल नेगेटिव आ गया है, अर्थात पांच का इलाज हो गया है और वे अब संक्रमित नहीं रहे। जिले में जो सबसे पहला पॉजिटिव केस था, उसका टेस्ट भी अब नेगेटिव आ गया है। इसी प्रकार, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फरीदाबाद में 3 पॉजिटिव केस थे, जिसमें से आज 1 का टेस्ट नेगेटिव आ गया है, इसका मतलब है कि अब फरीदाबाद में कुल 2 संक्रमित मरीज ही रह गए हैं। मुख्यमंत्री ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के काम में लगे स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों विशेष तौर पर गुरुग्राम और फरीदाबाद जिला प्रशासन के अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की और कोरोना से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए पूर्ण रूप से समर्पित ‘कोविड-19’ अस्पताल बनाने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने जिला स्तर के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिला में विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक टीम बनाकर तैयार रखें ताकि जरूरत पडऩे पर कोरोना की महामारी व स्वास्थ्य विभाग द्वारा उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों बारे आपस में विचार-विमर्श कर सही निर्णय लिया जा सके। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे कोई ऐसी ‘मोबाइल-एप’बनाएं जिससे ‘होम क्वारंटाइन’ किए गए लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और उनके लिए निर्धारित किए गए स्थान से दूर जाते ही सरकार को पता चल सके ताकि इस एप के माध्यम से राज्य सरकार को उसकी सूचना मिल जाएगी तथा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गृह मंत्री अनिल विज ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि ‘होम क्वारंटाइन’ किए गए लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जाए तथा संबंधित थाना का एसएचओ नियमित तौर पर उनकी चैकिंग करें, अगर कोई नियमों का उल्लंघन करता पाया जाए तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।    साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। हजारों प्रवासी मजदूर अपने मूल राज्यों के लिए सैकड़ों किमी पैदल चलने के लिए मजबूर हो गए, जिसपर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कथित रूप से 21 दिन की राष्ट्रव्यापी घोषणा करने से पहले कोई उचित तैयारी नहीं करने का आरोप लगाया। सिब्बल ने ट्वीट किया, "मोदीजी क्यों? जनता कर्फ्यू के लिए, चार दिन पहले नोटिस और 21 दिन के लॉकडाउन के लिए सिर्फ चार घंटे का नोटिस। लॉकडाउन से पहले कोई तैयारी नहीं। प्रवासी बिना भोजन, अपने घर पहुंचने के लिए 200 किमी तक पैदल चल रहे हैं। राजमार्गों पर फंसे लाखों लोग अस्पष्ट और अक्षम हैं।" पिछले तीन दिनों से, हजारों मजदूर अपने पैतृक गाँवों और कस्बों तक पहुँचने के लिए बसों में सवार होने की उम्मीद में दिल्ली-उत्तर प्रदेश की सीमा का चक्कर लगा रहे हैं। रविवार को, भारत में कुल कोरोनावायरस मरीज 979 तक बढ़ गए, जिसमें 25 की मौत हुईं।  साभार-khaskhabar.com

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