नई दिल्ली । अब आपको दिल्ली से मुंबई जाने या आने के लिए आकाश में उडऩे की जरूरत नहीं पड़ेगी, आपको प्लेन से भी पहले रेल मार्ग से पहुंच सकेंगे। फिलहाल दिल्ली से मुंबई प्लेन से सफर करने में लगभग दो घंटे का समय लगता है, जबकि ट्रेन से सफर करने पर 15 घंटे से अधिक का समय, मगर आने वाले समय में दिल्ली से मुंबई तक का सफर ट्रेन से आप मात्र 70 मिनट में पूरा करेंगे। दरअसल, भारत सरकार दिल्ली, मुंबई समेत 6 शहरों के बीच हाइपरलूप ट्रेन चलाने का विचार कर रही है। हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी ने भारत के सामने एक हायपर लूप ट्रेन का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी कंपनी हाइपरलूप वन के चेयरमैन एलन मस्क ने भारत सरकार को प्रस्ताव दिया है कि चेन्नई से बेंगलुरू के बीच ट्रैवल पॉड्स के जरिए 1200 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से लोग यात्रा कर सकेंगे। हाल ही में कंपनी ने भारत में यह सुविधा शुरू करने में रुचि दिखाई है। अगर केंद्र सरकार इसकी मंजूरी देती है तो भविष्य में 6 शहरों के बीच ये ट्रेन दौड़ेगी। हाइपर लूप ट्रेन चेन्नई से बेंगलुरु, चेन्नई से मुंबई, पुणे से मुंबई, बेंगलुरु से तिरुवनंतपुरम तथा मुंबई से दिल्ली बीच चलाई जाएगी। हाइपरलूप वन के सीईओ बिपॉप ग्रेस्टा इस संबंध में सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मिले थे और भारत में एक पायलट परियोजना स्थापित करने का औपचारिक प्रस्ताव रखा था। प्लेन से भी तेज चलने वाली यह ट्रेन ‘हाइपरलूप ट्यूब’ के भीतर कम दबाव वाले क्षेत्र में चलेगी। इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बुलेट ट्रेन से दोगुनी रफ्तार से चलेगी। यह ट्रेन चुंबकीय तकनीक से लैस ट्रैक पर चलेगी। यह ट्रेन वैक्यूम ट्यूब सिस्टम से गुजरने वाली कैप्सूल जैसी हाइपरलूप 750 मील (1224 किलोमीटर) प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है। एक ट्यूब के भीतर ‘हाइपरलूप’ को उच्च दबाव और ताप सहने की क्षमता वाले इंकोनेल से बने बेहद पतले स्की पर स्थिर किया जाता है। इस स्की में छिद्रों के जरिये दबाव डालकर हवा भरी जाती है। जिससे कि यह एक एयर कुशन की तरह काम करने लगता है। स्की में लगे चुंबक और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक झटके से ‘हाइपरलूप’ के पॉड को गति दी जाती है। हाइपरलूप ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि इसके आने से पैसेंजर्स के लिए ट्रैवल कॉस्ट में भी कमी आएगी। जिन पिलर्स पर ट्यूब के भीतर पॉड या ट्रेन दौड़ाने का प्रस्ताव है, उन पर भविष्य में सोलर पैनल्स और विंडमिल्स लगाए जा सकते हैं और इससे ट्रांसपॉर्टेशन कीमत भी किफायती रहेगी। यह पॉड सिस्टम मैग्नेटिक होगा और इसमें केवल सफर की शुरुआत में एनर्जी चाहिए होगी और इससे पॉड या ट्रेन 200 मील तक की स्पीड टॉप लेवल पर रहते हुए पूरा कर कर सकेंगे। एक ‘हाइपरलूप’ पॉड में 6 से 8 लोग सफर कर सकते हैं। 1 किलोमीटर लाइन बिछाने में फिलहाल 300 करोड़ रुपये का खर्च आ रहा है। साभार-khaskhabar.com
Read MoreBREAKING NEWS












