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कानपुर रेल हादसे के पीछे क्या डॉन दाउद इब्राहिम का हाथ था?

कानपुर रेल हादसे के पीछे क्या डॉन दाउद इब्राहिम का हाथ था?नई दिल्ली । कानपुर रेल हादसे में दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसिया पिछले तीन दिनों से दिल्ली से लिंक तलाशने में जुटी हैं। गौरतलब है कि पिछले वर्ष नवंबर माह में कानपुर में रेल हादसा हुआ था। इस हादसे में करीब 150 लोग मारे गए थे। इसके कुछ दिन बाद ही कानुरर के पास ही एक और रेल हादसा हुआ, इस हादसे में कई लोग मारे गए थे। खुफिया एजेंसियों को शक है कि इस हादसे के पीछे आतंकी संगठन आईएसआई का हाथ है। साउथ दिल्ली के लोधी कॉलोनी स्थित स्पेशल सेल के मुख्यालय पर तीन लोगों जिया-उल-हक, शोएब और जुबेर से पूछताछ की जा रही है। 

ये तीनों जामा मस्जिद इलाके से पकडे गए और ट्रैवल एजेंसियों में काम करते थे। पुलिस को शक है कि पकडे गए इन तीन लोगों में से दो रेलवे ट्रैक उडाने की साजिश में शामिल थे। गौरतलब है कि खुफिया एजेंसियों को जांच में पता चला था कि रेलवे ट्रैक को बम से उडाया गया था। पकडे गए आरोपियों के दो हैंडलर की पहचान भी हो गई है। इनमें से एक का नाम शमशुल हुदा है, जो दुबई में रहता है। दूसरे का नाम बृजकिशोर गिरी है जो नेपाल का गैंगस्टर है। 

शमशुल हुदा के अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम और आईएसआई से संबंध है। हुदा नकली करंसी और वीजा का धंधा करता है। दिल्ली में जो तीन लोग पकडे गए हैं उनमें से एक हुदा का भतीजा है और एजेंट के तौर पर काम करता है। वहीं बिहार के मोतिहारी में भी तीन लोगों को पकडा है। पकडे गए तीन आरोपी उमाशंकर पटेल, मोतीलाल पासवान और मुकेश यादव ने पुलिस को कई जानकारियां दी है। दरअसल इन तीनों को दीपक और उसके चाचा अनिल राम की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दीपक और अनिल राम ने बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में रेलवे ट्रैक पर कुकर बम रखा था। गौरतलब है कि उस बम को गांववालों ने देख लिया और बाद में उसे डिफ्यूज भी कर दिया गया। इससे उनके हैंडलर को लगा कि दोनों ने गद्दारी की है और इसी वजह से उनका कत्ल करा दिया गया। हत्या के आरोप में पकडे गए मोतीलाल पासवान ही वो शख्स है, जिसने कानपुर रेल हादसे में शामिल होने की बात कबूली थी। 

उसने बताया कि वह हमलों को अंजाम देने के लिए पैसे और दूसरी मदद के लिए हुदा और गिरी के संपर्क में था। उन्होंने यह भी कबूला है कि दीपक और अनिल राम के सिर काटने के बाद उसकी तस्वीरें गिरी और हुदा को सबूत के तौर पर भेजे गए। गिरी ने कथित तौर पर उमाशंकर, मोतीलाल और मुकेश को तीन लाख रुपए दिए।

इसके अलावा, फ्लैट, गाडियां और भोजपुरी फिल्म बनाने में मदद देने का आश्वासन भी दिया। गिरी और उसके दो साथियों शंभू और मुजाहिर अंसारी को नेपाल पुलिस ने एक मुठभेड के बाद गिरफ्तार किया था। गिरी की हालत गंभीर है क्योंकि उसे कम से कम चार गोलियां लगी हैं।    

साभार-khaskhabar.com

 

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