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नई दिल्ली । मोदी सरकार जल्द ही शादी के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य करने के लिए नया कानून ला सकती है। खबर है कि लॉ कमिशन ने शादी रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य करने के लिए केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसको आधार बनाकर केंद्र सरकार इस ओर जल्द ही कदम बढ़ा सकती है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने देश में शादियों के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाने की बात कही थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश, केरल, बिहार और उत्तर प्रदेश सरकारें इसे लागू कर चुकी हैं। लॉ कमिशन के चेयरमैन जस्टिस बीएस चौहान की अगुवाई में कमिशन ने लॉ मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। इसमें कहा गया है कि बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन ऐक्ट के प्रावधान में शादी के रजिस्ट्रेशन के प्रावधान को शामिल किया जाए। इसके लिए अलग से लॉ की जरूरत नहीं है। बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन ऐक्ट के तहत ही कानून में प्रावधान कर शादी का रजिस्ट्रेशन हो और तमाम तरह के परंपरागत शादी, मैरेज ऐक्ट, पर्सनल लॉ आदि के दायरे में होने वाली शादी का रजिस्ट्रेशन किया जाए। लॉ कमिशन ने अपनी 270 वीं रिपोर्ट में कहा है कि तमाम कानून के बावजूद बहु-विवाह, बाल-विवाह जैसी समाजिक बुराइयां मौजूद है ऐसे में शादी के रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता को लेकर विचार किया जाए।  रिपोर्ट में कहा गया है कि तमाम प्रयास किया गया बावजूद इसके चाइल्ड मैरेज, बहु-विवाह और जेंडर हिंसा जैसी सामाजिक बुराइयां जारी है। फैमिली लॉ, कस्टम और परंपराओं में विभिन्नताओं को देखते हुए लॉ कमिशन ने प्रयास किया है कि एक ऑल इंडिया फ्रेमवर्क के तहत सभी तरह की शादियों को रजिस्टर्ड किया जाए चाहे जिस विधि से शादी हुई हो। दुनिया के कई देशों में शादी अनिवार्य है। भारत में विविधताओं के कारण ऐसा नहीं हो पाया है। बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन ऐक्ट के तहत जिस रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी है उसी रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी है कि वह शादी को रजिस्टर्ड करेगा। साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि कानून में प्रावधान होना चाहिए कि रजिस्ट्रेशन में अगर देरी होगा तो फिर लेट फीस भी लगेगी। इसके लिए प्रावधान दिया गया है कि शादी के एक महीने में रजिस्ट्रेशन कराना होगा साथ ही संबंधित अथॉरिटी की इजाजत से एक साल का वक्त लिया जा सकता है। लेकिन बिना ठोस कारण रजिस्ट्रेशन में देरी होने पर प्रति दिन 5 रुपये की पेनाल्टी लगाई जाए। आपको बता दें कि कुछ राज्यों ने शादी रजिस्टर्ड करने के लिए वेब पोर्टल शुरू किया है। ताकि ऑनलाइन शादी रजिस्टर्ड हो सके। लेकिन जरूरी है कि सेंट्रलाइज्ड नैशनल पोर्टल हो। ताकि रेकॉर्ड रखने में आसानी हो। लॉ कमिशन ने कहा है कि फॉर्म हर भाषा में उपलब्ध होना चाहिए ताकि लोग आसानी से पोर्टल का लाभ उठा सकें। साभार-khaskhabar.com  

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अहमदाबाद । गुजरात के वडनगर में चाय की जिस दुकान पर पीएम मोदी अपने बचपन में चाय बेचते थे उस जगह को नया दिया जाएगा। केंद्र सरकार इस जगह एक पर्यटन स्थल बना सकती है। आपको बता दें कि वडनगर रेवले स्टेशन के एक प्लेटफॉर्म पर चाय की यह दुकान है। गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित मोदी के जन्मस्थान वडनगर को दुनिया के नक्शे पर लाने की व्यापक परियोजना के तहत चाय की इस दुकान को पर्यटन केंद्र में तब्दील करने की योजना है। संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों ने बीते रविवार को शहर का दौरा किया था। अधिकारियों के दल की अगुवाई केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने की। महेश शर्मा ने घोषणा की कि इसे आधुनिक स्वरुप देते हुए इसके मूल सौंदर्य को संरक्षित किया जाएगा। उन्होंने गांधीनगर में संवाददाताओं से कहा, हमारे प्रधानमंत्री की जन्मस्थली होने के साथ ही वडनगर एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक केंद्र है, जहां प्रसिद्ध शर्मिष्ठा झील और एक बावडी है। एएसआई को हाल ही में वहां खुदाई के दौरान एक बौद्ध मठ के अवशेष मिले थे। उत्खनन कार्य अब भी चल रहा है। आपको बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले मोदी रैलियों में अक्सर इस बात का जिक्र करते थे कि वह अपने बचपन के दिनों में वडनगर रेलवे स्टेशन पर अपने पिता के साथ चाय बेचते थे। महेश शर्मा ने कहा कि वडनगर रेलवे स्टेशन में एक छोटी सी चाय की दुकान है, जहां से पीएम मोदी ने अपने जीवन की यात्रा शुरु की थी। हम चाय की उस दुकान को भी पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करना चाहते हैं। हम टी स्टॉल को आधुनिक स्वरुप देते हुए इसके मूल सौंदर्य को भी संरक्षित रखेंगे। हमारा उद्देश्य वडनगर को विश्व पर्यटन के नक्शे पर लाना है। अहमदाबाद मंडल के मंडलीय रेल प्रबंधक (डीआरएम) दिनेश कुमार ने भी पहले कहा था कि वडनगर और मेहसाणा जिले में उससे लगे इलाकों के विकास की पूरी परियोजना 100 करोड़ रुपये से अधिक की होगी। कुमार ने कहा था, वडनगर रेलवे स्टेशन का विकास वडनगर, मोधेरा और पाटन को पर्यटन स्थलों के तौर पर विकसित करने की 100 करोड़ रुपये की परियोजना का एक हिस्सा है।   साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । हालांकि पेट्रोलियम पदार्थों को अभी जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) के दायरे में नहीं लाया गया है। लेकिन पिछले महीने शुरू हुई दैनिक संशोधन व्यवस्था के बाद से पेट्रोल की कीमतों में दो रुपये से अधिक और डीजल की कीमत में एक रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।  देश भर में 16 जून से लागू दैनिक दर संशोधन व्यवस्था के बाद से दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 2.35 रुपये तथा डीजल की कीमत 1.02 रुपये कम हुई है। फिलहाल दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 65.48 रुपये तथा डीजल की कीमत 54.49 रुपये है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत राज्यों के कर के हिसाब से अलग-अलग है, क्योंकि इसे जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) के दायरे में नहीं लाया गया है, जो जम्मू और कश्मीर को छोडक़र देश भर में एक जुलाई से लागू कर दिया गया है।  पहले सरकारी तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) हर पखवाड़े पेट्रोलियम कीमतों की समीक्षा करती थीं, अब इसकी हर रोज तडक़े छह बजे समीक्षा की जाती है।     साभार-khaskhabar.com  

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मुंबई । बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार से कहा कि वह बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को अच्छे आचरण के आधार पर सजा पूरी होने से पहले रिहा करने के अपने फैसले को न्यायोचित ठहराने के संबंध में दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करे। अतिरिक्त लोक अभियोजक प्रजाक्ता शिंदे ने न्यायालय से यह भी कहा कि सरकार ने अपने महाधिवक्ता आशुतोष कुंभाकोनी को मामले में दलील रखने के लिए वकील नियुक्त करने का फैसला किया है। उन्होंने दो सप्ताह के वक्त की मांग की, जिसकी मंजूरी दे दी गई और मामले की सुनवाई एक पखवाड़े तक के लिए टाल दी गई। न्यायाधीश आर. एम. सावंत तथा न्यायाधीश साधना जाधव की खंडपीठ ने यह आदेश पुणे के सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप भालेकर की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दी, जिसमें उन्होंने सजा भुगतने के दौरान संजय दत्त को कई बार मिले फरलो तथा पेरोल को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने 12 जून को महाराष्ट्र सरकार को अपने फैसले को न्यायोचित ठहराने, अभिनेता को आठ महीने पहले जेल से रिहा करने के लिए विचार में लाए गए मानदंडों तथा उनके प्रति उदारता दिखाने के लिए अपनाई गई प्रक्रियाओं के संबंध में एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। संजय दत्त को मुंबई में मार्च 1993 में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले से जुड़े हथियार रखने के दोष में मुंबई की टाडा अदालत ने छह साल जेल की सजा तथा 25,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। संजय दत्त ने अपनी पूरी सजा पुणे के यरवदा जेल में भुगती। उन्हें 25 फरवरी, 2016 को रिहा कर दिया गया। मुंबई में 1993 में हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों में 257 लोगों की जान गई थी। पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह जानना चाहा था कि क्या उप महानिरीक्षक (कारागार) से परामर्श लिया गया या जेल अधीक्षक ने सिफारिश को सीधे महाराष्ट्र सरकार के पास भेज दिया। न्यायाधीश सावंत ने पूछा, ‘‘अधिकारी यह आकलन कैसे कर सकते हैं कि दत्त का आचरण बढिय़ा था। उन्हें यह आकलन करने का मौका कब मिला, जबकि आधे समय दत्त पेरोल पर जेल से बाहर ही रहे?’’     साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । बीजेपी नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव के बारे में चौंकाने वाला खुलासा किया है। एक अखबार को दिए साक्षात्कार में सुशील मोदी ने यह खुलासा किया। इकोनॉमिक टाइम्स को दिए साक्षात्कार में सुशील मोदी ने कहा कि लालू ने बीजेपी को ऑफर दिया था कि अगर वह बेनामी संपत्ति मामले में मदद करे तो वह नीतीश सरकार को गिराने में उनकी मदद करेंगे। सुशील मोदी ने खुलासा करते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव के कुछ वरिष्ठ सहयोगी बडे भाजपा नेताओं से मिले और उन्हें नीतीश सरकार गिराने में मदद करने का ऑफर दिया। बदले में वे चाहते थे कि बेनामी संपत्ति मामले में निपटने में बीजेपी लालू यादव का सहयोग करे।  सुशील मोदी ने कहा कि बीजेपी ने लालू के इस ऑफर को ठुकरा दिया। साथ ही सुशील मोदी ने कहा कि लालू और नीतीश कुमार में कोई मेल नहीं है, इसी कारण से उनके बीच में मतभेद रहते हैं। सुशील मोदी ने कहा कि यह सरकार लंबे समय तक नहीं चलेगी। उन्होनें कहा कि लालू दागी लोगों को पद दिलवाना चाहते और नीतीश किसी दागी को कैबिनेट में नहीं लेना चाहते। हांलांकि सुशील मोदी ने नीतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, जीएसटी के साथ ही राष्ट्रपति पद के एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का समर्थन कर चुके हैं। सुशील मोदी ने इशारों इशारों में कहा कि अगर नीतीश चाहें तो वे एनडीए में शामिल हो सकते हैं। साथ ही उन्होनें इस बात का भी इशारा किया कि अगर नीतीश सरकार पर कोई खतरा आया तो एनडीए उनकी मदद कर सकती है।   साभार-khaskhabar.com  

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डोक ला डोक ला । सिक्किम बॉर्डर पर चीन के साथ तनातनी बढती जा रही है। 1962 के बाद पहली बार भारत बॉर्डर पर जवानों की संख्या बढ़ा रहा है। भारत ने सिक्किम के पास के इलाके में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए और ज्यादा सैनिकों को नॉन-कांबेटिव मोड में लगाया है, जहां करीब एक महीने से भारतीय सैनिकों का चीनी जवानों के साथ गतिरोध बना हुआ है। यह दोनों सेनाओं के बीच साल 1962 के बाद से सबसे लंबा इस तरह का गतिरोध है। सूत्रों के मुताबिक चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की ओर से दो भारतीय बंकरों को तबाह करने और आक्रामक रुख अपनाने के बाद भारत ने इलाके में और अधिक सैनिकों को तैनात किया है। गैर-लड़ाकू मोड या नॉन-कांबेटिव मोड में बंदूकों की नाल को जमीन की ओर रखा जाता है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध से पहले के घटनाक्रम का पहली बार ब्योरा देते हुए सूत्रों ने कहा कि पीएलए ने एक जून को भारतीय सेना से डोका ला के लालटेन में साल 2012 में स्थापित दो बंकरों को हटाने को कहा था, जो चंबी घाटी के पास और भारत-भूटान-तिब्बत ट्राईजंक्शन के कोने में पड़ते हैं। कई साल से इस क्षेत्र में गश्त कर रही भारतीय सेना ने 2012 में फैसला किया था कि वहां भूटान-चीन सीमा पर सुरक्षा मुहैया कराने के साथ ही पीछे से मदद के लिए दो बंकरों को तैयार रखा जाएगा। सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना के अग्रिम मोर्चों ने उार बंगाल में सुकना स्थित 33 कोर मुख्यालय को चीन द्वारा बंकरों के लिए दी गयी चेतावनी के बारे में सूचित किया था। हालांकि सूत्रों ने कहा कि छह जून की रात को दो चीनी बुलडोजरों ने बंकरों को तबाह कर दिया था और दावा किया कि यह इलाका चीन का है और भारत या भूटान का इस पर कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि तैनात भारतीय सैनिकों ने चीनी जवानों और मशीनों को इलाके में घुसपैठ करने या और अधिक नुकसान पहुंचाने से रोक दिया। टकराव वाली जगह से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित पड़ोस के ब्रिगेड मुख्यालय से अतिरिक्त बलों को आठ जून को भेजा गया जिस दौरान झाड़प की वजह से दोनों पक्षों के सैनिकों को मामूली चोट आईं। इलाके में स्थित पीएलए के 141 डिवीजन से उसके सैनिक पहुंचने लगे जिसके बाद भारतीय सेना ने भी अपनी स्थिति को मजबूत किया।   साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । जीएसटी लागू होने के बाद कार के बाद अब बाइक के भी दाम में कटौती हुई है। सबसे बड़ी दो पहिया वाहन विनिर्माता कंपनी हीरो मोटो कॉर्प ने अपने कुछ मॉडल के दाम में 1,800 रुपये तक की कटौती की है। कंपनी ने यह फैसला ग्राहकों को माल एवं सेवा कर का लाभ देने के मकसद किया है। कंपनी के जारी एक बयान के अनुसार सर्वाधिक बिकने वाले मॉडलों के दाम में 400 से 1,800 रुपये की कटौती की गई है। आपको बता दें कि वास्तिवक लाभ विभिन्न राज्यों में अलग-अलग है जो जीएसटी और जीएसटी के पहले की दरों पर निर्भर है। कुछ महंगे खंड के मॉडलों के दाम में कुछ बाजारों में 4,000 रुपये तक की कटौती होगी। बयान के अनुसार हरियाणा जैसे एक या दो राज्यों में कुछ मॉडलों के दाम बढ़ सकते हैं। इसका कारण जीएसटी पूर्व दरों का कम होना है। कंपनी विभिन्न मोटरसाइकिल बेचती है जिसकी कीमत 1.1 लाख रुपये से लेकर 40,000 रुपये के बीच है। इससे पहले, शनिवार को कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर, जेएलआर और बीएमडब्ल्यू ने विभिन्न मॉडलों के दाम 2,300 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये से अधिक की कटौती की। वहीं दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनी इंडिया यामहा मोटर ने देश भर में वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) लागू होने के बाद अपने उत्पादों की नई कीमतें तय कर दी हैं जो आज से ही प्रभावी हो गई हैं। कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (बिक्री एवं विपणन) रॉय कुरियन ने कहा कि यामहा एक देश, एक बाजार, एक कर के जरिए लाए गए बदलाव का स्वागत करती है।   साभार-khaskhabar.com  

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नोएडा। यूपी एसटीफ,नॉएडा ने अनिल दुजाना गैंग के 3 शातिर अपराधियों अंकित इटावा, बब्बल ग़ाज़ियाबाद, विशाल रावत, हाथरस को मुठभेड़ के दौरान थाना दनकौर एरिआ से बीती रात गिरफ़्तार करके पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो कुख्यात गैंगो सुंदर भाटी और अनिल दुजाना के बीच सरिया चोरी को लेकर होने जा गैंगवार को रोकने में सफलता प्राप्त की है।    पकड़े गये तीनों शातिर अपराधी अनिल दुजाना गैंग के है। ये सुंदर भाटी गैंग के सरिया चोरी के काम को संचालित करने वाले 2 लोगों की हत्या के प्रयास में थे। इन तीनों अभियुक्तों पर वाहन लूट, सरिया चोरी हत्या के प्रयास जैसे कई अभियोग इटावा, ग़ाज़ियाबाद और गौतमबुद्धनगर में दर्ज है।साभार-khaskhabar.com  

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करनाल। लगातार हो रही बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। पिछले 2 दिनों से हो रही बारिश ने किसानो की फसल बर्बाद कर दी है। करनाल के गाँव सिंगड़ा में धान की सैंकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। किसानों का कहना है कि हमने कुछ दिन पहले ही अपनी धान की फसल की रोपाई की थी। दो दिन बारिश ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है और उनके पशुओं का चारा तक भी पानी में डूब गया है।    किसानों को कहना है कि निकासी का कोई भी साधन नहीं है । इस वजह से हर साल यहां सैंकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो जाती है । इसका काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसान जनकराम का कहना था कि पिछले कई दिनों से हम सूखे से और बिजली से लड़ रहे थे लेकिन दो दिन की बारिश ने और मुसीबतें बढ़ा दी है लेकिन कोई भी अधिकारी हमारी सुनने वाला नहीं है कोई भी हमारी ओर ध्यान नहीं दे रहा है।साभार-khaskhabar.com  

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कपूरथला। दो दिन से हो रही लगातार मूसलाधार बारिश के चलते बरसाती नाले ओवर फलो होने से इलाके दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए है, जिससे किसानों की फसले जलमग्न होने के चलते लाखों रूपये का नुकसान हो गया है। गांवों में बाढ़ का पानी आने से किसान व इलाके के लोगों में दहशत का माहौल है। किसानों द्वारा बिजाई की गई फसले पानी में डूब गई है। कई गांवों को जाने वाले रास्ते बाढ़ के पानी के कारण डूब गए है जिससे लोगों को जाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं जिला प्रशासन द्वारा बरसाती पानी से निपटने के लिए पुख्ता प्रबंध के दावे किए गए थे, लेकिन दावे हकीकत से कोसो दूर नजर आए। इलाके के गांव संगोजला, खुखरैण, खानगाह, धारीवाल बेट, भवानीपुर, खुसरोपुर के अलावा आसपास लगते अनेकों गांवों में भुलत्थ से निकलते बरसाती नाले का पानी ओवर फलो होने से उक्त गांवों को बाढ़ की चपेट में ले लिया है। वहीं डिप्टी कमिश्नर कपूरथला मोहम्मद तायब का कहना है कि प्रशासन द्वारा पानी के चपेट में आए गांवों को राहत पहुंचाने के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है और ड्रेनज विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंच गए है। बाढ़ आने के कारण किसानों की हजारों एकड़ फसले पानी में डूब गई है तथा बाढ़ का पानी घटने की बजाए बढ़ रहा है जिससे उक्त गांवों के लोगों के चेहरो पर चिंता सता रही है और वह भगवान से दुआ कर रहे है कि बरसात बंद हो जिसके चलते पानी का स्तर कम हो। विडंबना यह है कि मूसलाधार बारिश लगातार जारी है।   इलाके के किसान रणजीत सिंह, सोहन लाल, बलविंदर सिंह, बलजीत सिंह, हरजिंदर सिंह, हरपाल सिंह, करनैल सिंह, मनजीत सिंह, करतार सिंह का कहना है कि दो दिन से हो रही लगातार बारिश के चलते दरिया ब्यास में भी पानी काफी तेजी के साथ बढ़ रहा है और बरसाती नाले जो पानी की निकासी के लिए बनाए गए है वह तेज बारिश के चलते ओवर फलो हो गए है जिस कारण उक्त नालों का पानी खेतों में दो-तीन फुट भर गया है जिससे बिजाई की गई फसले पानी की चपेट में आने से डूब गई है। जिस कारण किसानों का लाखों रूपये का नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि अगर बारिश न रूकी तो आसपास के अनेकों गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते है।    किसानों ने बताया कि बारिश के चलते मंडियों में पड़ी मक्कई की फसल खराब होने से किसानों को भारी नुकसान जहां उठाना पड़ा वहीं अब बाढ़ के आने से किसानों द्वारा खेतों में बिजाई की गई फसलें डूब गई है किसानों को दोहरी मार पड़ रही है। अगर बारिश न रूकी तो दरिया ब्यास का भी कहर किसानों पर कभी भी टूट सकता है? दरिया ब्यास का जलस्तर भी बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहा है। मंड क्षेत्र में दर्जनों गांव दरिया ब्यास के साथ लगते है जहां पर किसानों की हजारों एकड़ जमीन पर फसलों की बिजाई की हुई है साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ। नगर निगम गृहकर, जलकर व सपत्ति कर बढ़ाने की तैयारी में है। आठ साल पहले करों का पुर्ननिधारण किया गया था। नगरीय निकायों की आय में बढ़ोत्तरी को लेकर शासन ने प्रत्येक दो वषों में सपत्ति कर, गृहकर व जलकर आदि के पुर्ननिधारण किए जाने को लेकर आवश्यक निर्देश दिए है। इसके लिए नगर निगम अधिनियम की उपविधि में आवश्यतानुसार संशोधन करने की कार्रवाई किए जाने को शासन ने कहा है। स्थानीय निकायों को उत्तर प्रदेश सरकार ने जल्दी से जल्दी गृहकर की दरों का पुनरीक्षण करने और शहरी क्षेत्र के सभी मकानों को कर के दायरे में लाने का निर्देश दिया है। सरकार ने स्थानीय नगरीय निकायों को कहा है कि गृहकर, सपति कर व जलकर का पुनरीक्षण कर अपने वित्तीय संसाधनों को मजबूत करें जिससे कि बेहतर जन सुविधाएं दी जा सकें।      गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकायों में ज्यादातर ने बीते पांच सालों से अपने गृह कर की दरों का पुनरीक्षण नहीं किया है। इसके चलते नगरीय निकायों की आमदनी में बढ़त न के बराबर हो रही है। अधिकांश स्थानीय निकाय जन सुविधाओं के नाम पर खर्च कर पाने की स्थिति में ही नही हैं। लखनऊ नगर निगम की स्थिति भी ऐसी ही है। यहां तक कि नगर निगम अपने वेतन भत्तों के मद के लिए भी राज्य सरकार पर निर्भर है। विशेष सचिव रमाकांत पांडेय ने स्थानीय निकाय निदेशालय व समस्त नगर निगमों को इस बाबत पत्र लिखा है। इसके मुताबिक मुख्य सचिव के आदेश के अंतर्गत प्रदेश की सभी नगर निकायों की आय में नियमित वृद्धि के लिए सपत्ति करए जलकर व गृहकर आदि के पुनर्निधरण की कार्रवाई कई वर्षो से नहीं की गई है। जिससे निकायों के वित्तीय स्त्रोतों में बढ़ोत्तरी नहीं हो पा रही है और विकास कार्य प्रभावित हैं। साभार-khaskhabar.com    

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करनाल। कारसा डोड गांव के मानसिक तनाव में एक पूरे परिवार के जहरीला पदार्थ खा लिया। किसी मानसिक तनाव के चलते पति पत्नी और दोनों बच्चो ने कल देर रात को जहर खा लिया था जिसमें पति-पत्नी की मौत हो गई जबकि दोनों बच्चों की हालत गंभीर है।  घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने ही सभी को करनाल के एक निजी हस्पताल में भर्ती करवाया था। दोनों बच्चों की की हालत नाजुक है। वही सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जाँच शुरू कर दी। वही फ़िलहाल मृतक दोनों पति पत्नी के शव को पुलिस ने कब्जे में लेकर करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एंव हॉस्पिटल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साभार-khaskhabar.com  

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नारद संवाद

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