मथुरा । अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगरा आये योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री उ.प्र. सरकार ने पंडा प्रथा को खत्म करने के ब्यान की कड़े शब्दों में निन्दा की। और कहा कि इस ब्यान की भारतवर्ष के सभी तीर्थ पुरोहितों की तरफ से मैं कड़े शब्दों में निन्दा करता हूं अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा इस मुद्दे को लेकर आगामी 11 जून को मथुरा में महासभा के समस्त पदाधिकारियांे की एक बैठक आयोजित किये जाने की जानकारी दी और कहा कि इस बैठक के दौरान आये तीर्थ पुरोहितों के द्वारा योगी आदित्यनाथ के ब्यानों को लेकर अग्रिम कदम उठाने की रणनीति तैयार की जायेगी और साथ ही यह आन्दोलन देशव्यापी स्तर तक किया जायेगा। योगी आदित्यनाथ यदि ब्राह्मणों को कमजोर समझ रहे है तो ये उनकी भूल है। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि तीर्थ पुरोहित अपने यजमानांे से कई पीढ़ियों से जुड़े होते हैं। यह रिश्ता दोनों का आपस में बहुत घनिष्ठ होता है जिसे शब्दों में व्यान नहीं किया जा सकता। एैसे में प्रदेश के मुख्य पद पर विराजमान योगी आदित्यनाथ के द्वारा तीर्थ पुरोहितों के लिए एैसे शब्दों का प्रयोग करना गैर जिम्मेदाराना प्रकृति का द्योतक है। जिसके लिए महन्त योगी आदित्यनाथ को अपने ब्यान पर माफी मांगनी चाहिये। यदि ऐसा ही रहा तो जिस भरोसे के साथ केन्द्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ आयी है, ज्यादा दिन नहीं टिक सकेगी, सरकार का काम अच्छी व्यवस्थाए उपलब्ध कराना है ना कि पूजा पाठ कराना। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महेश जी पाठक ने कहा कि मुख्यमंत्री के द्वारा जिस पंडा समाज के विषय में एैसी भाषा का प्रयोग कर टिप्पणी की गयी है उन तीर्थ पुरोहितों के बिना विश्व विख्यात ब्रज चैरासी कोस की 40 दिवसीय यात्रा यजमान अपने तीर्थ पुरोहित के बिना नहीं करता है। ये यजमान की श्रद्धा और अपने तीर्थ पुरोहित के प्रति आस्था का प्रतीक है कि आज भी यजमान तीर्थ स्थल पर आने से पूर्व अपने तीर्थ पुरोहित से अनुमति प्राप्त करता है। साथ ही बिना तीर्थ पुरोहित के सहयोग से वह तीर्थ स्थल पर पूजन कार्य भी नहीं करता है और अपनी बहुमूल्य वस्तुऐं भी अपने पंडा के घर पर रखता है और सम्पूर्ण पत्र व्यवहार भी अपने पंडा के पते पर ही करता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस पार्टी के जुड़कर मुख्यमंत्री के पद पर पहंुचे है उस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह भी जब कभी मथुरा आते हैं तो यहां पर अपने तीर्थ पुरोहित पुरूषोत्तमलाल तिवारी चतुर्वेदी के माध्यम से ही पूजन कार्य सम्पन्न कराते हैं। वहीं बीतें दिनों भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने बद्रीनाथ धाम की यात्रा और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा केदारनाथ धाम की यात्रा के दौरान वहां के तीर्थ पुरोहितों के द्वारा ही पूजन किया था। एैसे में जब कि भारत के दो मुख्य पदों पर आसीम प्रतिष्ठित व्यक्तियों के द्वारा तीर्थ पुरोहितों के सहयोग से पूजन किया गया तो प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर आसीन होने के दौरान योगी आदित्यनाथ के द्वारा तीर्थ पुरोहितों के विषय में एैसे ब्यान देना औचित्यहीन है। सर्व विदित है कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा जी भी अपने तीर्थ पुरोहित के यहां छः माह तक स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान मथुरा में रहे थे। शिवाजी महाराज भी अपने तीर्थ पुरोहित के यहां रहे थे। आज जो भी तीर्थ विद्यमान है उनको ख्याति वहां के तीर्थ पुरोहित के द्वारा ही मिली है। यह सब जानते हुए भी इस तरह का ब्यान यह दर्शाता है कि वह ब्राह्मण विरोधी है जबकि स्वयं मुख्यमंत्री महोदय एक मठ के मठाधीश है और उनके द्वारा तीर्थ पुरोहित या पंडागिरी को समाप्त किया जाये, कहना दुर्भाग्यपूर्ण है। पत्रकार वार्ता के दौरान अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नवीन नागर, महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मुकेश स्वामी, महासभा के महावन शाखा के अध्यक्ष कृष्ण कुमार शर्मा गुड्डू, कृष्ण स्वरूप मिश्र महावन, गिरधारीलाल पाठक, राकेश तिवारी, योगेन्द्र चतुर्वेदी, कमल चतुर्वेदी, प्रदीप पाठक, संजीव चतुर्वेदी, अनिल चतुर्वेदी, मुकुन्दलाल चतुर्वेदी बंैक वाले, संजय एल्पाइन, मोहित चतुर्वेदी, आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
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