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ठंड के सीजन में गुड का अपना ही महत्व है। यह स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होने के साथ-साथ स्वादिष्ट भी होता है। शरीर को साफ और हैल्दी रख में गुड बहुत ही लाभकारी होता है। गुड में मैग्नीशियम आयरन विटामिन्स आदि की अच्छी मात्रा होती है। जो शरीर के लिए लाभदायक होती है। तो आइये जानते हैं गुड इन गुणों को- गुड मिनरल्स, विटामिन्स और एनर्जी का उत्तम स्त्रोत है। एक टीस्पून गुड में एमजी कैल्शियम, 3 एमजी मैग्नीशियम, 8 पोटैशियम व आयरन पाया जाता है। गुड का रंग जितना अधिक गहरा होता है, उसमें आयरन की मात्रा उतनी अधिक होती है।  गुड खनू में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढाने में मदद करता है इसलिए एनिमिन खून की कमी लोगों को गुड खाने की सलाह दी जाती है। यह कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट है। शक्कर की तुलना में यह धमी गति से रक्त में मिलता है। इसलिए लंबी अवधि तक ऊर्जा प्रदान करता है। गुड खाना पचाने में मदद करता है। यह डायजेस्टिव एंजाइम्स को सक्रिया करता है। और पेट के अंदर पहुंचते ही एसिटिक एसिड में बदलकर पाचन की प्रक्रिया को तेज कर देता है। गुड और देसी घी मिलाकर खाने से शरीर तगडा होता है। इससे रक्तविकार और रक्तपित्त नहीं होता। जिन व्यक्तियों को एसिडिटी की परेशानी है उनको रोज थोडा-सा गुड चूसना चाहिए।  सर्दी के दिनों में गुड, तुलसी और अदरक का काढा बनाकर गर्मागर्म पीना अच्छा रहता है। यह सर्दी-जुकाम से बचाव करता है।   साभार-khaskhabar.com

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सर्दी के मौमस में सभी खुद को बीमारियों से बचने और खुद को फीट रखने के लिए कुछ ना कुछ करते रहते हैं। कुछ लोग अपने खानपान को बदलाव करते है तो कुछ दिनचर्या में। आज महिलाओं को लेकर सर्दी के लिए नया लेख लेकर आए है। सर्दियों में महिलाओं को हर बीमारी से बचने के लिए सौंठ का प्रयोग करना चाहिए। सौंठ अपने रसोई में आसानी से मिल जाती है और ये एक औषधी के रूप में प्रयोग करने वाला मसाला है। खासतौर पर यह प्रसव साली महिलाओं को खिलाया जाता है जो सर्दियों में बच्चे को जन्म देती हैं। इसमें प्रोटीन, स्टार्च, ग्लूकोज कैल्शियम, विटामिन वी और आयरन जैसे गुणों से भरपूर होता है और इसकी तासीर बहुत ज्यादा गर्म होती है जिसका सेवन सर्दी में किया जाता है।   1. दांत दर्द दांत में दर्द होने पर आप सौंठ का प्रयोग कर सकते हैं। दर्द होने पर आधा चम्मच सौंठ पाउडर में एक चुटकी हल्दी मिलाकर जहां दर्द है वहां पर लगाएं। कुछ देर बाद दर्द में आराम मिल जाएगा। 2. कब्ज आने पर यदि किसी को कब्ज हो तो इसे चाय के साथ पीएं एक या दो दिन इसके बाद फायदा जरूर मिलता है। ऐसा करने से सिर्फ दो दिनों में आपकी लंबी कब्ज की परेशानी दूर हो जाएगी। 3. कोल्ड कफ सर्दी के मौसम में ज्यादातर लोगों को कोल्ड-कफ जकड़ लेता है और पूरी सर्दी वो लोग छींकते और खांसते बिता देते हैं। ऐसे में आपको हर दूसरे दिन सौंठ का लड्डू खाना चाहिए। या फिर आधा चम्मच सौंठ पाउडर और मुलेठी पाउडर मिलाकर पानी में उबालकर पीलें। 4. कैंसर अगर किसी को शुरुआती कैंसर के प्रभाव है तो उन्हें सौंठ का सेवन करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सौंठ में कैंसररोधी गुण मौजूद होते हैं जो शरीर में कैंसर कोशिकाओं को बढऩे से रोकते हैं और इस लड़ाई को आसानी से जीत सकते हैं। 5. बॉडी पेन होने पर कभी-कभी काम की वजह से लोगों को शरीर में ऐसा भयंकर दर्द होता है जो पेन किलर के बाद भी आसानी से नहीं जाता। इसके लिए शरीर के दर्द वाले हिस्से में सौठ को पानी में मिलाकर उसका लेप लगाने से आराम मिलता है।     साभार-khaskhabar.com

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जहां ठंडक एक सुखद एहसास देती है, वहीं छोटी-मोटी मगर परेशान करने वाली परेशानियां का सामना करना पडता है। सर्दी की हवाओं का असर ही कुछ ऐसा होता है कि खांसी, जुकाम जैसेछोटी-छोटी आम बीमारियों से बच्चे तो बच्चे बडे भी नहीं बच पाते। कुछ घरेलू सुरक्षात्मक उपाय जिनसे ठंड की समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। चाय में तुलसी के पत्ते, अदरक और कालीमिर्च डालकर पकाएं। इसे पीने से सर्दी खांसी से राहत मिलती है। कभी जुकाम, हरारत, गले की खराश होने की स्थिति में तुलसी की पत्ती 10-15, 5-7 दाने काली मिर्च, अदरक 10 ग्राम तथा मुलहठी 5 ग्राम कूटकर 250 ग्राम पानी में उबालें जब पानी आधा रह जाये तो छानकर 1 चम्मच चीनी डालकर गर्मा गरम चाय की तरह पी लें। दोनों समय सुबह-शाम लेने से 2-3 दिनों में रोगों से मुक्ति मिल जायेगी।जो लोग धूप का सेवन नहीं करते उन्हें सफेद दाग होने की आशंका होती है। धूप सेवन का समय सुबह और शाम का ही ज्यादा अच्छा रहता है। सर्दी, जुकाम, खांसी जैसे रोगों को दूर करने के लिए धूप में रखकर पानी पीएं। धूप में रखकर ही फल खाएं तो बीमारी से तुरंत छुटकारा पा सकते हैं।ठंड होने के कारण प्यास कम लगती है, लेनिक शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है। अत: भरपूर पानी पीएं। इस मौसम में उबला या प्यूरीफाई किया हुआ पानी ही पीएं। वरना आप बीमारियों से घिर सकते हैं। गरम दूध में हल्दी पाउडर, सोंठ पाउडर और शहद मिलाकर पीने से सर्दी, खांसी और बदन दर्द से आराम मिलता है।   साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। आजकल के ज्यादातर लोगों में सबसे गंभीर बीमारी हार्ट अटैक सामने आ रही है। अगर देखा जाए तो इस बीमारी की कोई उम्र सीमा नहीं हैं। यह बीमारी हमारे जीवनशैली यानी हमारे लाइफस्टाइल की वजह से होती हैं। तनाव इस बिमारी की मुख्य वजह हैं।  इस बीमारी का शिकार लोगों का ईलाज में लाखों रुपए लग जाते है। वहीं इस बीमारी का ईलाज आप 60 सेकंड में घर में भी कर सकते है वो भी मिर्च से।जी हां, मिर्च ऐसी चीज है अगर खाने में ना हो खाना ही बेस्वाद लगता है। और अगर यह खाने में ज्यादा हो जाए तो भी खाने वाले का बुरा हाल। अब बताते है कि लाल मिर्ची के इस्तेमाल से हार्ट अटैक पर केवल 60 सेकंड में काबू पाया जा सकता हैं।दरअसल एक मशहूर डॉक्टर जॉन क्रिस्टोफर का कहना हैं की, मैंने आज तक जितने भी हार्ट अटैक मरीजो के घर गया हूं उनमे से कोई भी मरा नहीं हैं। मैं उन्हें लाल मिर्च की चाय पिलाता हूं (एक कप गर्म पानी में एक चम्मच लाल मिर्च) और वह मिंटो में अपने पैरो पर खडे हो जाते हैं।   साभार-khaskhabar.com

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विंटर में बॉडी को प्राकृतिक रूप से पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं। यही वह वक्त भी है, जब बॉडी की एनजी में बढोतरी होती है और हैल्दी रहने के लिए अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पडता। विंटर में जितने विटमिंस और पौष्टिक तत्व शरीर को मिलते हैं, वे साल भर बॉडी को हैल्दी बनाए रखते हैं। जैसे-जैसे मौसम बदलता है, कुछ मौसमी बीमारियां शुरू हो जाती हैं। जैसे गर्मी में लू लगने और सनबर्न जैसी परेशानियां होती हैं, वहीं सर्दियों में सर्दी जुकाम जैसी आम परेशानियां घेरली हैं। इसलिए सर्दी मौसम में भी शारीरिक गतिविधियों को बनाए रखना और सक्रिय रहना जरूरी होता है।  तो आइये जानने सर्दी से बचने के और फिट रहने के कुछ टिप्स-सर्दियों में वेट कम करना यदि मुश्किल प्रतीत होता हो तो अवसादग्रस्त ना हों। क्योंकि जितना सोचेंगे, उतना ही परेशान होंगे और वजन घटाना और मुश्किल होता जाएगा। अपने मौजूदा वजन को ही बरकरार रखने की कोशिश करें। उससे ज्यादा वजन ना बढे, इस बात ध्यान रखें।   सर्दियों में प्यास कम लगती है, लेकिन बॉडी को हाइडे्रट करने के लिए कुछ-कुछ वक्त पर पानी पीना जरूरी है। सर्दियों में मौसम रूखा भी होता है, इसमें स्किन की स्वाभाविक नमी कम होती जाती है। इसे पानी से ही संतुलित किया जा सकता है।भूख लगी हो तो ड्राई फ्रूट्स खा सकते हैं, लेकिन कम मात्रा में। अखरोट सेलेनियम का अच्छा स्त्रोत है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है, साथ ही अवसाद से बचाता है। इसलिए इस मौसम में अखरोट का सेवन करें। विंटर में कब्ज या भारीपन से बचने के लिए फाइवरयुक्त खाद्य पदार्थ अवश्य लें। सैलेड्स में अलग प्रकार की सब्जियों-फलों को शामिल करें और इसमें कुछ नए प्रयोग करके इन्हें टेस्टी बनाएं। फैटी सैलेड ड्रेसिंग ना करें, क्योंकि इससे सैलेड के पौष्टिक तत्वों में कमी आ जाती है।   खाने की मात्रा पर ध्यान दें। कम मात्रा में दिन में कम से कम 3 बार खाना खाएं। टेस्टी होने के साथ ही खाना ताजा होना चाहिए।    साभार-khaskhabar.com

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वैसे तो जोडों में दर्द किसी भी मौसम में हो सकता है, परन्तु कई बार सर्दियों में यह समस्या ज्यादा दिखती है। हड्डी और जोडों का दर्द बहुत तकलीफदेह हो सकता है। हड्डी और जोडों की बीमारियों से दर्द और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। बदलते मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी उम्रदराज लोगों को झेलनी पडती है। लेकिन अब ऐसा नहीं है। आज जोडों का दर्द एक ऐसी समस्या बन गया है कि इससे कोई भी अछूता नहीं रहा।  जैसे-जैसे मौसम में ठंडक बढती जा रही है, तकरीबन लोगों में जोडों के दर्द की परेशानियां भी बढती जा रही हैं। इनमें से कुछ समस्याओं के लिए सर्जरी की आवश्कता होती है। लेकिन अधिकांश समस्याएं घरेलू उपाचर और दवाओं से ठीक हो जाती हेैं। इसमें ठंड से बचना ही सबसे बेहतर उपाय है। इसके अलावा व्यायाम करें और शरीर को चुस्त रखें।  खान-पान का विशेष ध्यान रखें-: सर्दी के मौसम में सभी को खान-पान का पूरा ध्यान रखना चाहिए। लेकिन मधुमेह और हृदयरोग से पीडित लोगों को विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है। ठंड के कारण सर्दियों में वसायुक्त खाना जैसे पराठें या अन्य तली चीजों का सेवन बढ जाता है। साथ ही मौसम की पसंदीदा गुड, गजक भी लोग अधिक खाने लगते हैं, जिससे शरीर में शुगर की मात्रा बढ जाती है। ऐसे में तले और अधिक मीठे भोजन का सेवन कम कर दें। इससे रक्तचाप बढ सकता है और गंभीर समस्या भी होनी संभव है।   इस मौसम में शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाएं। इसके लिए खाने में मौसमी फल और सब्जियां जैसे- पपीता, गाजर, टमाटर, पालक तथा अमरूद आदि को अवश्य शामिल करें। शरीर में गर्माहट बनाए रखने के लिए अदरक, लहसुन, काली मिर्च, दालचीनी, केसर, तिल तथा गुड का सेवन करें।   खाने में हरी सब्जियां जैसे- पालक, सरसों, बथुआ, मूली-पत्ता आदि लेने से शरीर के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होगा। अधिक ठंडी चीजों का सेवन न करें। परंतु दही को भोजन में शामिल कर सकते हैं।     साभार-khaskhabar.com  

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बदलते मौसम की वजह से वायरल, गले का इन्फैक्शन, जोडों में दर्द, डेंगू, मलेरिया, निमोनिया, अस्थमा, आथ्रईटिस, दिल व त्वचा से सम्बन्धित समस्याएं अधिक बढ जाती हैं। अगर इस मौसम का लुत्फ उठाना है, तो अपनी दिनचर्या को मौसम के अनुरूप ढालना बेहद जरूरी है। अस्थमा से पीडित और बुजुर्ग धुंध छंटने के बाद हीबाहर निकलें। दवाएं और इनहेलर वक्त पर लेते रहें। ऐलर्जी से पीडित लोग साबुन, डिटजैंट और ऊनी कपडों के सीधे सम्पर्क से बचें। ठंडे, खट्टे, तले व प्रिजर्वेटिव खाने के सेवन से इस मौसम में संक्रमण की आशंका कहीं अधिक बढ जाती है। इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए विटामिन सी से भरपूर फलों एवं ताजा दही का सेवन करें। हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ-साथ फाइबरयुक्त भोजन को भी एहमियत दें। मौसमी फल-सब्जियां जरूर खाएं, बासी खाना या पहले से कटी हुई फल-सब्जियां ना खाएं। कभी खाली पेट शरीर को कम जो करता है। ऐसे में वायरल इन्फैक्शन का डर ज्यादा रहता है। इस मौसम में स्किन पर भी काफी प्रभाव पडता है। स्किन में रूखापन बढ जाता है। इसलिए अधिक मसालेदार और तलाभुना खाना ना खाएं, क्योंकि यह स्किन को खुश्क बनाता है। जिन्हें ऐंजाइना या स्ट्रोक हो चुका हो, उन्हें इस मौसम में नियमित रूप से दवा लेनी चाहिए और सर्दियां शुरू होते ही एक बार चैकअप करा लेना चाहिए। डॉक्टर की सलाह से जरूरी दवा साथ रखें।   साभार-khaskhabar.com  

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सर्दी की सब्जियों में सलाद में खीरे, टमाटर के साथ मूली का भी समावेश हो गया है। मूली केवल स्वाद बढाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके चिकित्सकीय गुण इतने अधिक है, न केवल मूली बल्कि इसके पत्ते भी कफ, पित्त और वात तीनों दोषों को नाश करने में मदद करते हैं। मूली को कच्चा खाना विशेष रूप से लाभ देता है। मूली पतली ली जानी चाहिए। ज्यादातर लोग मोटी मूली लेना पसंद करते हैं, क्योंकि वह खाने में मीठी लगती है परन्तु गुणों में पतली मूली अधिक श्रेष्ठ है।  मूली के बारे में यह धारणा है कि यह ठण्डी तासीर की है और खांसी बढ़ाती है। परन्तु यह धारण गलत है। यदि सूखी मूली का काढा बनाकर जीरे और नमक के साथ उसका सेवन किया जाए, तो न केवल खांसी बल्कि दमे के रोग में भी लाभ होता है। पेट संबंधी रोगों में यदि मूली के रस में अदरक का रस और नींबू मिलाकर नियम से पीया जाए, तो भूख बढती है और विशेष लाभ होता है। पीलिया आदि होने पर जोकि सामान्यत: लीवर के खराब होने से होता है। मूली का सेवन विशेष लाभ देता है।   साभार-khaskhabar.com 

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दुनियाभर में सबे के गुणों में बारे में जानकारी देने के लिए यूरोप के कई देशों में एक दिसंबर को ईट ए रेड एप्पल डे बडे जोरों और शोरों से मनाया जाता है। इसमें समारोह में आपको कई अलगअलग के सेब प्रदर्शित किए जाते हैं। सेब फाइबर वाला फल है इसमें प्रोटीन, और विटामिन की संतुलित मात्रा होती है, लेकिन कैलोरी कम होती है। सेब का फल, रस, छिलका, मुरब्बा, आइसक्रीम, जैम, जैली आदि रूपों में सेवन करना स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए लाभकारी माना जाता है। सेब रोज खाओ और डॉक्टर को दूर भगाओ। सेब पौष्टिक तत्वों से भरा है। ये न केवल बीमारियों से लडने में मदद करता है बल्कि आपके शरीर को भी हैल्दी रखता है।  सेब के जूस में कई फायदे होते हैं। इनमें से एक यह भी है कि यह शरीर में कोलेस्टोल के स्तर को सामान्य बनाये रखने में मदद करता है। अगर शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ जाए तो इससे हृदय संबंधी कई रोग हो सकते हैं, इसलिए आप सेब अथवा इसके जूस के नियमित सेवन से स्वंय को इस बीमारी से दूर रख सकते हैं।  सेब में फाइबर, जो शरीर में पानी बनाए रखने की बहुत अधिक क्षमता रखता है। अत: सेब खाने से पेट भरा सा लगता है और अनावश्यक भोजन की इच्छा नहीं होती है। डाइटिंग करने वालों के लिए सेब एक उपयोगी फल है।  सेब का जूस कैंसर और ट्यूमर से बचाने में बेहद उपायोगी होता है। खासतौर पर फेफडों के कैंसर से बचाने में सेब के जूस का कोई तोड नहीं। ट्यूमर कोशिकाओं को रोकने में फ्लेवोनॉयड और फेनॉलिक एसिड को बेहद कारगर माना गया है। यह दोनों ही सेब में काफी प्रचुर मात्रा में मिल जाते हैं। सेब के जूस में विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में होता है। यह विटामिन आंखों की रोशनी बढाने में उपयोगी होता है। इसके साथ ही यह आंखों को कई संभावित बीमारियों से बचाता है। सेब स्मरण शक्ति की दुर्बलता, बेहोशी तथा चिडचिडापन अर्थात् मस्तिष्क के रोगों को दूर करने की अचूक औषधि माना गया है। मस्तिष्क व दिल की कमजोरी और घबराहट दूर करने में सेब अचूक इलाज है। साभार-khaskhabar.com 

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कील-मुंहासे व पिंपल केवल चेहरे तक ही सीमित नहीं रहते बल्कि यह सीने, गले तथा पीठ पर भी हो जाते हैं। आमतौर पर पीठ पर पिंपल ज्यादा होते हैं। इनके होने के पीछे का कारण हार्मोन है, जो ज्यादा सीबम पैदा करते हैं और पिंपल बनाते हैं। अगर आप भी चाहती हैं कि आपकी पीठ बिल्कुल साफ और बेदाग दिखे, तो कुछ ऎसे घरेलू उपचार हैं जिनकी मदद से आप पीठ पर होने वाले मुंहासे से छुटकारा पा सकती हैं। अपनाएं यह घरेलू उपचार।  कीली-मुंहासे, चेहरे पर धब्बे, मुंहासों के निशान लम्बे समय तक कच्चो नारियल का पानी लगाने से मिट जाते हैं। यदि नारियल का पानी उपलब्ध नहीं हो तो दूध में बताशा पीसकर मिलायें। इस मिश्रण को चेहरे पर मल लें। एक घंटे बाद ताजा पानी से धो लें। अवश्यक लाभ होगा। कीली-मुंहासे, चेहरे पर धब्बे, मुंहासों के निशान लम्बे समय तक कच्चो नारियल का पानी लगाने से मिट जाते हैं। यदि नारियल का पानी उपलब्ध नहीं हो तो दूध में बताशा पीसकर मिलायें। इस मिश्रण को चेहरे पर मल लें। एक घंटे बाद ताजा पानी से धो लें। अवश्यक लाभ होगा।  हल्दी- तीन चम्मच हल्दी और पानी मिला कर गाढ़ा पेस्ट तैयार करके रात में उसे पीठ पर लगाएं। सुबह गरम पानी और मेडिकेटेड सोप से नहाएं। इसको दो हफ्ते लगातार करें, असर जरूर होगा। साभार-khaskhabar.com

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केला पूजा-पाठ से लेकर ब्यूटी प्रॉडक्टस तक में इस्तेमाल किया जाता है। खाना खाने के बाद केला खाने से भोजन आसानी से पच जाता है। अपच के मरीजों के लिए भी यह अच्छा रहता है। रोज सुबह एक केला और एक गिलास दूध पीने से वजन कंट्रोल में रहता है और बार-बार भूख भी नहीं लगती। केला खाने से हाई ब्लड प्रेशर और यूरिन की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है कच्चे केले को दूध में मिलाकर लगाने से त्वचा निखर जाती है और चेहरे पर भी चमक आ जाती है। गर्भावस्था में महिलाओं के लिए केला बहुत अच्छा होता है क्योंकि यह विटामिन से भरपूर होता है। केले को मैश करके बालों में लगाने से बाल नर्म, मुलायम और चमकदार हो जाते हैं।    साभार-khaskhabar.com

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मेवे का प्रयोग उत्तम औषधि के रूप में किया जाता है। क्येांकि मेवा स्वाद की नहीं बल्कि सेहत की दृष्टि से भी उतनी ही फायदेमंद हैं। काजू में मैग्नीशियम पाया जाता हैं जो उच्च रक्तचाप को कम करने में और दिल के दौररे को रोकने में मदद करता है। काजू कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी संतुलित रखता है। काजू में प्रोटीन की मात्रा काफी होती है जो बॉडी व हड्डियों को मजबूत बनाती है। चाहे मिठाई में काजू कतली हो या फिर दूसरे पकवानों में काजू का इस्तेमाल। काजू किसी भी आम डिश को शाही बना सकता है। अब जब काजू हमें इतना पसंद ही है तो इससे होने वाले लाभ के बारे में भी जान लेना चाहिए। काजू में प्रोटीन, खनिज लवण, लौह, फाइबर, फोलेट, मेग्नीशियम, फॉस्फोरस, सेलेनियम, और तांबा का अच्छा स्त्रोत है। काजू का तेल, स्कर्वी मस्सा और रिंगवर्म के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आप प्रतिदिन 7-10 काजू का सेवन कर सकते हैं।   काजू खाने से मसूडों और दांतों को स्वस्थ रखता है। काजू में मोनो सैचुरेटड फैट होता है जो की दिल को स्वस्थ रखता है ओर दिल की बीमारियों के खतरे को कम करते में मदद करता है। काजू में एंटी ओक्सिडेंट भी होते हैं जो कैंसर से बचाव करता है।   काजू पाचन शाक्ति को बढाता है। इससे भूख भी कहीं अधिक लगती है। आंतों में भरी गैस कम किया जा सकता है।   काजू में पाए जानवाले फाइटो-केमिक्लस कैंसर और दूसरे बीमारियों से सुरक्षा करते हैं। जिन महिलाओं को मेनोपॉज है उन्हें तनाव, स्ट्रेस होनो एक आम सा समस्या है। उन महिलाओं को रोजाना एक काजू खाना चाहिए। काजू में पर्याप्त मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है। काजू में अधिक एनर्जी होती है और इसमें अधिक मात्रा में फाइबर होता है। इसलिए इसको खाने से शरीर का वजन संतुलित रहता है। त्वचा के लिए भी काजू अच्छा होता है। काजू को दूध में मिलाकर पेस्ट बना लें फिर इसे त्वचा पर लगाएं, इससे त्वचा खूबसूरत और मुलायम बनती है। काजू को डेली खाने से बालों के झडने की समस्या कम हो जाती है।   साभार-khaskhabar.com          

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