देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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सर्दी की सब्जियों में सलाद में खीरे, टमाटर के साथ मूली का भी समावेश हो गया है। मूली केवल स्वाद बढाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके चिकित्सकीय गुण इतने अधिक है, न केवल मूली बल्कि इसके पत्ते भी कफ, पित्त और वात तीनों दोषों को नाश करने में मदद करते हैं। मूली को कच्चा खाना विशेष रूप से लाभ देता है। मूली पतली ली जानी चाहिए। ज्यादातर लोग मोटी मूली लेना पसंद करते हैं, क्योंकि वह खाने में मीठी लगती है परन्तु गुणों में पतली मूली अधिक श्रेष्ठ है।
मूली के बारे में यह धारणा है कि यह ठण्डी तासीर की है और खांसी बढ़ाती है। परन्तु यह धारण गलत है। यदि सूखी मूली का काढा बनाकर जीरे और नमक के साथ उसका सेवन किया जाए, तो न केवल खांसी बल्कि दमे के रोग में भी लाभ होता है।
पेट संबंधी रोगों में यदि मूली के रस में अदरक का रस और नींबू मिलाकर नियम से पीया जाए, तो भूख बढती है और विशेष लाभ होता है।
पीलिया आदि होने पर जोकि सामान्यत: लीवर के खराब होने से होता है। मूली का सेवन विशेष लाभ देता है।
साभार-khaskhabar.com













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