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चंडीगढ़ । एक बड़े खुलासे में पंजाब पुलिस ने श्रीनगर (कशमीर) में बीते दिन मुकाबले में मरे हिज़बुल मुजाहदीन कमांडर, रिआज़ अहमद नायकू के नज़दीकी साथी हिलाल अहमद वागे के दो साथियों की बुधवार को अमृतसर से गिरफ़्तारी से आतंकवादी नायकू के अंतर-राज्ज़ीय संपर्क का पता लगाया है। अपराधों की गंभीरता और पंजाब के अलावा केस के सरहद पार प्रभावों को देखते केंद्र ने एनआईए को निर्देश दिया है कि वह इस सारी साजि़श का पर्दाफाश करने के लिए इस मामले की और जांच करें जिसके सम्बन्ध जम्मू -कश्मीर के रास्ते से सरहद पार भी हैं। जि़क्रयोग्य है कि पाबन्दीशुदा आतंकवादी संगठन हिज़बुल मुजाहदीन (एच.एम.) के कमांडर नायकू को बीते दिनों दक्षिणी कश्मीर में सुरक्षा बलों ने मुकाबले में मार दिया था। इससे पहले वागे को 25 अप्रैल को पंजाब पुलिस ने गिरफ़्तार किया था, जिसने बाद में केंद्र और जम्मू कश्मीर सरकार के सामने खुलासा किया था। डीजीपी दिनकर गुप्ता ने कल हुई गिरफ़्तारियों का विवरण देते हुये बताया कि हिज़बुल के आतंकवादी हिलाल अहमद वागे, जिसको अमृतसर से काबू किया गया था, की खोज की गई थी, जहाँ दोनों रिआज़ अहमद नायकू, कश्मीर वादी में हिज़बुल कमांडर के निर्देशों पर अमृतसर से पैसे इकठ्ठा करने आए थे। डीजीपी दिनकर गुप्ता ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से राज्य में नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी की साजि़श का पर्दाफाश करने के साथ-साथ पुलिस ने उनसे 1 किलो हेरोइन समेत 32 लाख रुपए की भारतीय मुद्रा भी ज़ब्त की। उनकी गिरफ़्तारी के समय उनके पास से 20 लाख रुपए नकद बरामद की गई, बाद में बाकी रुपए उनके घरों से ज़ब्त किये गए और फिर अदालत की तरफ से उनको पुलिस रिमांड में भेज दिया गया। डीजीपी ने बताया कि रणजीत सिंह उर्फ चीता, इकबाल सिंह उर्फ शेरा और श्रवण सिंह के निर्देशों पर बिक्रम सिंह उर्फ विक्की हिलाल अहमद को 29 लाख की नकद राशि देने के लिए एक स्कूटी पर रुपए लेकर आया था। गिरफ़्तार किये दोनों मुलजिमों की पहचान बिक्रम सिंह उर्फ विक्की पुत्र सकत्तर सिंह निवासी मकान नं. 39 -सी, गुरू अमरदास ऐवीन्यू, अमृतसर और मनिन्दर सिंह उर्फ मनी पुत्र सकत्तर सिंह निवासी मकान नं. 39 -सी, गुरू अमरदास ऐवीन्यू, अमृतसर के तौर पर की गई है। हिलाल को अमृतसर कमिशनरेट पुलिस की एक अलर्ट टीम ने काबू किया था, जो 25 अप्रैल देर शाम को अमृतसर शहर के मेट्रो मार्ट के नज़दीक एक मोटर साइकिल पर गस्त कर रहा था। थाना सदर, अमृतसर में अवैध गतिविधियां रोकथाम एक्ट 1967 की धाराओंं 10 /11 /13 /17 /18 /20 /21 और एन.डी.पी.एस एक्ट की धारा 21 /61 /85 के अधीन एफआईआर नंबर 135 तारीख़ 25 /04 /2020 को दर्ज किया गया। दोनों मुलजिमों से पूछताछ से आगे यह पता चला कि बिक्रम और मनिन्दर दोनों, उसके चचेरे भाई (आंटी के बेटे) रणजीत सिंह उर्फ चीता, इकबाल सिंह उर्फ शेरा और श्रवण सिंह समेत सरहद पारों नशे और हथियारों की तस्करी करते हैं। डीजीपी ने बताया कि पुलिस टीमें रणजीत सिंह उर्फ चीता निवासी हवेलियाँ नौशहरा ढाला, थाना सराए अमानत खान, जि़ला तरन तारन, इकबाल सिंह उर्फ शेरा निवासी हवेलियाँ नौशहरा ढाला, थाना सराए अमानत खान, जि़ला तरन तारन, श्रवण सिंह पुत्र हरबंजन सिंह निवासी हवेलियां की खोज में थे, जिनकी शमूलियत के जांच के दौरान सामने आई है। साभार-khaskhabar.com

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चंडीगढ़ । अकाली नेता हरसिमरत कौर बादल पर केंद्रीय खाद्य मंत्री को गुमराह करने का दोष लगाते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केंद्र सरकार द्वारा सप्लाई किये गए अनाज की राज्य में वितरण में किसी तरह की देरी किये जाने को सिरे से रद्द किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को केंद्र सरकार द्वारा किये वायदे के उलट दाल की मात्रा 50 फीसदी कम मुहैया करवाई गई है जिसकी अनुपस्थिति के कारण केंद्र के निर्देशों अनुसार गेहूँ का वितरण भी नहीं किया जा सका। मुख्यमंत्री द्वारा केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान द्वारा किये ट्वीट का जवाब दिया गया जिसमें केंद्रीय मंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध करवाए गए राशन की राज्य में वितरण के लिए कहा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र के निर्देशों के अनुसार कफ्र्यू / लॉकडाउन के दौरान योग्य लाभपात्रीयों को गेहूँ और दाल का वितरण किया जाना था परन्तु सच्चाई यह है कि राज्य के गोदामों में गेहूँ पहले ही बड़ी मात्रा में पड़ा हुआ है जबकि केंद्र द्वारा दालों की अपेक्षित सप्लाई नहीं की जा रही। संयोगवश पंजाब के गोदामों में पिछले साल के 100 लाख मीट्रिक टन चावल और 73 मीट्रिक टन गेहूँ के भंडार मौजूदा समय में पड़े हुए हैं जिनमें 135 लाख मीट्रिक टन गेहूँ इस बार और जुड़ जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह खरीदे गये अनाज की ढुलाई को तेज करने के लिए लगातार केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के साथ संपर्क स्थापित कर रहे हैं ताकि यह भंडारण सुविधाओं की कमी के कारण अनाज खुले में खराब न हो जाए। उन्होंने अपनी माँग को दोहराया कि केंद्र सरकार अनाज को खराब होने से बचाने के लिए अनाज को जल्द उठाए खासकर कोविड के बीच लॉकडाउन के इस संवेदनशील समय के मौके पर जब पूरे मुल्क में लाखों गरीब लोगों को राशन मुहैया करवाया जाना अति आवश्यक है। केंद्रीय अनाज के वितरण के मामले सम्बन्धी मुख्यमंत्री ने कहा कि ख़ुद केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल द्वारा किये गए दावों के उल्ट पंजाब को 1 मई, 2020 तक केंद्र की तरफ से 10800 मीट्रिक टन दाल के किये वायदे की जगह केवल 2500 मीट्रिक टन ही मुहैया करवाई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की तरफ से दाल की प्राथमिक उपलब्धता के साथ ही 1 मई, 2020 को ही गेहूँ का वितरण भी राज्य के अंदर शुरू कर दिया गया था और मौजूदा समय 18 जिलों में वितरण का यह काम चल रहा है। लॉकडाउन के दरमियान जि़ंदा रहने के लिए संघर्ष करते लोगों की तत्काल ज़रूरतों की पूर्ति के लिए राज्य सरकार ने सूखे राशन के 15 लाख पैकेट बाँटने के लिए अपने बजट में से खर्र्च किया है और हरेक पैकेट में 10 किलो आटा, 2 किलो दाल और 2 किलो चीनी वितरित की गई है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आगे कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट के तहत हरेक लाभपात्री को प्रति महीना 5 किलो गेहूँ दिया जा रहा है परन्तु पंजाब में सरकार एक ही बार ही छह महीनों का गेहूँ बाँट देती है जिससे हरेक परिवार के मैंबर को 30 किलो गेहूँ मिल जाती है। उन्होंने बताया कि एन.एफ.एस.ए. के अधीन इस साल गेहूँ का आखिरी वितरण फरवरी -मार्च में होने से चार व्यक्तियों के औसतन परिवार को 120 किलो गेहूँ मिल गई परन्तु तत्काल ज़रूरत दाल की थी जो भारत सरकार की तरफ से देरी से सप्लाई की गई और वह भी सीमित मात्रा में दी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि बदकिस्मती से दाल की अनुपस्थिति होने के कारण केंद्रीय पुल की गेहूँ भी नहीं वितरित की जा सकी क्योंकि डीपू होल्डर 10-15 दिन के समय अंदर गेहूँ और दाल बाँटने के लिए लाभपात्रियोंं को दो बार बुला कर एकत्रित नहीं कर सकते थे क्योंकि इससे राशन डिपूओं के बाहर भीड़ जमा हो जानी थी जो सामाजिक दूरी के नियमों का बुरा प्रभाव पड़ता। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार को गेहूँ के साथ वितरित की जाने वाली दाल की समय पर सप्लाई यकीनी बनानी चाहिए थी। मुख्यमंत्री ने हरसिमरत बादल को अपने बेबुनियाद दावों और दोषों के द्वारा केंद्र सरकार और पंजाब के लोगों को गुमराह करना बंद करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री के इन खोखले दावों का उद्देश्य अकालियों के हितों का साथ देना हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे खोखले दावों के गंभीर निष्कर्षों और इनका लोगों के मनोबल पर पडऩे वाले प्रभाव की परवाह किये बिना अकाली पिछले कुछ हफ़्तों से कोविड के गंभीर मसले पर भी संकुचित राजनीति खेल रहे हैं। साभार-khaskhabar.com

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जयपुर। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय यात्रियों, स्मारकों, गाइड्स, होटल्स एवं रेस्टोरेंट्स, टूर ऑपरेटर और अन्य स्टेकहोल्डर्स के लिए उचित दिशा-निर्देश तैयार के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। आधिकारिक दस्तावेज इस महीने के मध्य तक तैयार हो जायेंगे और मंत्रालय द्वारा इसका समर्थन और निरीक्षण किया जाएगा। यह स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देश और टूरिज्म इंडस्ट्री से आने वाले विभिन्न विचारों के अनुरूप होगा। यह जानकारी अतिरिक्त महानिदेशक, पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार, डॉ. रूपिंदर बरार ने दी। राजस्थान सरकार की प्रमुख शासन सचिव पर्यटन, कला और संस्कृति,श्रेया गुहा ने कहा कि पर्यटन विभाग, राजस्थान सरकार रिवाइवल पैकेज तैयार करने पर हेरिटेज होटल एसोसिशियेशन के साथ मिलकर काम कर रही है। आर्थिक रिवाइवल के लिए सरकार द्वारा एक विशेष कार्यबल का गठन किया गया है। विभिन्न सिफारिशों को तैयार करने के लिए होटल और पर्यटन क्षेत्र के साथ चर्चा की गई है। जिनमें से कुछ राज्य के वित्त विभाग को भेजे गए हैं। इसके अलावा वेतन सहायता, बिजली शुल्क माफ करना, राज्य कर प्रतिपूर्ति, बार शुल्क में कमी, सहित अन्य पर भी ध्यान दिया जा रहा है। स्मारकों के लिए पहले से ही दिशा निर्देश बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय, अनिवार्य रूप से ऑनलाइन बुकिंग्स और हाइजिन प्रोटोकॉल के पालन के साथ-साथ गैलेरीज और संग्रहालयों में सीमित प्रवेश पर भी जोर दिया जाएगा। इससे पहले अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में, आईएचएचए के अध्यक्ष, मारवाड़,जोधपुर के महाराजा गजसिंह ने कहा कि विदेशी पर्यटन के आसार धूमिल है, इसलिए घरेलू पर्यटन पर ध्यान केंद्रित करने और प्रत्येक राज्य की विशिष्टताओं और विशेषताओं पर जोर देने के साथ राज्यवार विपणन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। होटल में अधिकतम हाइजिन और सेनिटेशन स्टैंडर्ड्स बनाए रखते हुए एक स्वच्छ छवि का निर्माण करना चाहिए। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों के ऐसे परिवारों के लिए यात्रा कार्यक्रम बनाए जाने चाहिए जो ग्रामीण जीवन का अनुभव करना चाहते हैं। सहायक उद्योगों को विकसित करने की आवश्यकता है ताकि फूड डिलीवरी, हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्शन सहित अन्य सेवाओं में मौजूदा होटल कर्मचारियों को संलग्न किया जा सके। साभार-khaskhabar.com  

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चंडीगढ़ । पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री स. बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा है कि महाराष्ट्र सरकार ने नांदेड़ में फंसे श्रद्धालुओं की स्क्रीनिंग सही तरीके से नहीं की। महाराष्ट्र सरकार की इस गलती के कारण ही पंजाब में कोरोना पॉजि़टिव मरीज़ों की संख्या इतनी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस सम्बन्धी महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश तोपे के साथ टेलिफ़ोन पर बातचीत की है और पंजाब सरकार द्वारा नाराज़गी व्यक्त की है। पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए स. सिद्धू ने कहा कि यदि महाराष्ट्र सरकार द्वारा इस सम्बन्धी पंजाब सरकार को समय पर बता दिया जाता तो पंजाब सरकार द्वारा इन श्रद्धालुओं की इससे भी ज़्यादा उचित स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रबंध किए जा सकते थे। महाराष्ट्र सरकार द्वारा इन श्रद्धालुओं का सिफऱ् शारीरिक बुख़ार ही चैक किया गया। पंजाब सरकार को इन लोगों के कोरोना पॉजि़टिव या नेगेटिव होने संबंधी मुकम्मल विवरण देने चाहिए थे। जिससे इनको लाने और रखने के लिए अलग तौर पर प्रबंध किए जाते। उन्होंने कहा कि सबको पता है कि इस बीमारी की शुरुआत ही महाराष्ट्र में हुई है और वहाँ से सरकार की नालायकी के कारण यह देश का सबसे अधिक प्रभावित राज्य बन गया है। उन्होंने भरोसा दिया कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य के लोगों के स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए हर संभव यत्न करने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्टों में तेज़ी लाने के लिए मौजूदा सरकारी लैबोरेटरियों के सामथ्र्य में वृद्धि की जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय सी.एम.सी. अस्पताल में भी इन टेस्टोंं की जांच होने लगेगी। इसके अलावा पंजाब सरकार द्वारा निजी लैबोरेटरियाँ डॉ. लाल पैथ लैब्ज़, तुली लैब्ज़ अमृतसर साहिब और अन्य कंपनियों के साथ भी समझौता किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही पंजाब में प्रतिदिन 6000 से ज्य़ादा लैब टेस्ट होने शुरू हो जाएंगे। इस मौके पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए स. सिद्धू ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पंजाब सरकार को कोई सहायता नहीं दी जा रही है। कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए राज्य को अब तक सिफऱ् 71 करोड़ रुपए ही जारी किए गए हैं, जो कि बहुत कम हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ तक केंद्र सरकार ने पंजाब को जी.एस.टी. की बकाया राशि जो कि 4400 करोड़ रुपए है भी जारी नहीं की है। उन्होंने आगे बताया कि पंजाब सरकार द्वारा श्रद्धालुओं को उनके घरों में ही एकांतवास करने संबंधी भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा आईसोलेशन सैंटरों में भी हर तरह की सुविधा मुहैया करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में इस बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए हर सरकारी अधिकारी और कर्मचारी दिन रात काम कर रहा है, जिस कारण स्थिति पूरी तरह काबू में है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वह अपने घरों के अंदर ही रहें और पंजाब सरकार द्वारा जारी सभी हिदायतों की पालना करें। साभार-khaskhabar.com

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चंडीगढ़ । पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने शनिवार को ऐलान करते हुये कहा कि राज्य के सभी जि़लों में अब ग्रीन और ओरेंज जोनों में आज से दुकानें सुबह 9 से दोपहर 1बजे तक खुलेंगी। रेड और सीमित जोनों में कोई भी छूट नहीं दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा समय प्रात:काल 7 से 11 बजे तक दुकानें खोलने के फ़ैसले को बदलने का फ़ैसला विभिन्न जि़लों से लोगों की तरफ से दुकानें प्रात:काल 9 बजे के बाद खोंलने की की जा रही माँग के कारण किया गया है। उन्होंने कहा कि बदला हुआ समय लोगों की सहलूत को देखते किया गया है। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह मामला मंत्रीमंडल की मीटिंग में भी विचारा गया था और इस बात पर सहमति बनी थी कि लोगों के हितों को ध्यान में रख कर छूट का समय बदला जाये। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने मुख्य सचिव को कहा कि समय में तबदीली संबंधी नोटिफिकेशन करने संबंधी डिप्टी कमिश्नरों को ज़रुरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए जाएँ। ‘सख्ती से राहत देने’ संबंधी अपनी नीति पर चलते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने स्पष्ट किया कि ज़रूरी वस्तुएँ लेने के लिए यदि कोई भी व्यक्ति अपने घर से बिना मास्क पहने बाहर निकला तो उसके खि़लाफ़ सख्त कार्यवाही की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पुलिस को बिना मास्क बाहर निकलने वालों का चालान करने की सख््त हिदायतें की हुई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कफ्र्यू में ढील सख्त प्रोटोकोल के साथ ही मिलेगी जिसको लोगों की तरफ से अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि लोगों के जीवन को सुविधा बनाने के लिए राहत मुहैया करवाई गई है और बिना वजह बाहर न निकला जाये। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पुलिस को कफ्र्यू का उल्लंघन या अमन -कानून व्यवस्था को भंग करने वालों के विरुद्ध सख्ती से पेश आने के हुक्म दिए। उन्होंने चेतावनी देते हुये कहा, ‘हम ऐसी कार्यवाहियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।’ उन्होंने कहा कि राज्य में धारा 144 लागू होने के कारण इस सम्बन्ध में किसी तरह की ढील की इजाज़त नहीं दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार बाहरी राज्यों में फंसे पंजाबियों को वापस लाने और यहाँ प्रवासी मज़दूरों समेत फंसे ओर लोगों को उनके घर भेजने के लिए सभी उचित प्रबंध करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मसले पर अन्य राज्यों के साथ नजदीकी से तालमेल कायम करके काम कर रही है और वह केंद्र सरकार को भी विशेष रेल गाड़ीयां चलाने की अपील कर चुके हैं जो अगले कुछ दिनों तक चलेंगी क्योंकि इस समय पर रेलवे दक्षिणी भारत से प्रवासी कामगारों को लाने के प्रबंधों में जुटा हुआ है। साभार-khaskhabar.com  

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श्रीनगर| जम्मू एवं कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में रविवार को आतंकवादियों को पकड़ने के लिए पैरा कमांडो सहित सुरक्षाबलों ने अभियान शुरू किया है। अधिकारी ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि आधी रात के बाद से यहां आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच चल रहे गतिरोध के मद्देनजर अब पैरा कमांडों को ऑपरेशन में शामिल करते हुए 'फस्ट लाइट इंटरवेंशन' शुरू किया गया है। इंटेलिजेंस के एक शीर्ष अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "एक घर को आतंकवादी किसी बंकर की तरह इस्तेमाल कर रहे थे, उसके अंदर सेना के तीन जवान और दो स्थानीय पुलिसकर्मी भी मौजूद हैं। देर रात 12 बजे दोनों और से गोलीबारी रूक गई है।" उन्होंने आगे कहा, "ऐसी परिस्थिति में पैरा कमांडो को बुलाया गया है, जिनके द्वारा कमरे में बेहद सावधानी के साथ ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा है।" सूत्रों ने आईएएनएस को यह भी बताया कि इलाके में नागरिक जीवन और संपत्ति को कोई क्षति ना पहुंचे इसके लिए चुपचाप ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए घर के भीतर गए सुरक्षाकर्मियों के साथ अभी तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है। सुरक्षाबलों ने कुपवाड़ा जिले की हंदवाड़ा तहसील के रजवार वन क्षेत्र में कथित रूप से घने जंगल में छिपे आतंकवादियों के खिलाफ शनिवार को इस ऑपरेशन की शुरुआत की थी। गौरतलब है कि छिपे हुए आतंकवादियों को खत्म करने के लिए इलाके में भारतीय सेना के चार जवानों की जान चली गई, इसमें कमांडिंग ऑफिसर, 21 राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट के मेजर समेत 2 जवान और जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक जवान शामिल है। मुठभेड़ में 2 आतंकवादी भी मारे गए एनकाउंटर में 21 राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए। वो पहले भी कई सफल आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन्स का हिस्सा रह चुके थे। साभार-khaskhabar.com  

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चंडीगढ़ । पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने स्वास्थ्य विभाग को राज्य में 15 मई तक रोज़मर्रा के 6000 आर.टी. -पी.सी.आर कोविड टेस्टिंग करने के लिए कहा है जबकि विभाग ने मई के आखिर तक रोज़मर्रा के 5800 टैस्टों का लक्ष्य निश्चित किया था। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्य में घर वापसी करने वाले पंजाबियों के बाहरी राज्यों में हुए टैस्टों को ही आधार मान लेने की बजाय अपने स्तर पर टैस्ट करने की हिदायत की। पंजाब वापस लौटने वालों में से बड़ी संख्या में लोगों का टैस्ट पॉजिटिव आने का जि़क्र करते हुये मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बाहरी राज्यों में फंसे हुए जिन पंजाबियों के टैस्ट सम्बन्धी राज्योंं में हुए हैं, पंजाब उन टैस्टों पर भरोसा नहीं कर सकता। गुरुद्वारा नांदेड़ साहिब में भी कुछ सेवकों के टैस्ट पॉजिटिव आने का हवाला देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि अकालियों का दावा कि नांदेड़ में कोई भी केस पॉजिटिव नहीं था और श्रद्धालु वापसी समय पर या पंजाब पहुँचने पर इस रोग के शिकार हो गए, गल्त साबित हुआ है। उन्होंने एक बार फिर विरोधी पक्ष को ऐसे गंभीर मसले पर घटिया राजनीति बंद करने के लिए कहा। मंत्रीमंडल की वीडियो कॉन्फ्ऱेंस के ज़रिये हुई मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड के विरुद्ध राज्य की लड़ाई का यह महत्वपूर्ण समय है। मंत्रीमंडल की मीटिंग के दौरान राज्य सरकार की कोरोना के विरुद्ध जंग और तेज़ करने के लिए कई क्रमबद्ध फ़ैसले लिए गए। स्वास्थ्य विभाग को टेस्टिंग का सामथ्र्य बढ़ाने के लिए अगामी योजना तैयार करने के हुक्म देते हुये मुख्यमंत्री ने भयानक स्थिति के लिए तैयार रहने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि उन्होंने पहले ही मुख्य सचिव को कह दिया था कि वह टैस्टों का सामथ्र्य 20000 प्रति दिन तक बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के साथ तालमेल करें जिससे प्रवासियों की आमद वाली स्थिति से निपटा जा सके। भारत सरकार के नये दिशें निर्देशों को देखते हुये भी आने वाले कुछ हफ़्तों में अन्य राज्यों से कईयों के राज्य में लौटने की उम्मीद है। मुख्य सचिव ने कहा कि रैपिड टेस्टिंग जब शुरू हो गई तो यह भी कम से -कम 2 लाख तक करने की ज़रूरत होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बाबा फऱीद यूनिवर्सिटी फरीदकोट के उप कुलपति को भी कहा कि वह जालंधर में भी टैस्ट करने की व्यवस्था स्थापित करने की संभावना तलाशे जिसके लिए सरकार तुरंत 1 करोड़ रुपए का अनुदान मंज़ूर करने को तैयार है। टैस्ट सहूलतें बढ़ाने संबंधी मुख्यमंत्री के निर्देश दो दिनों बाद आए जब उन्होंने अन्य राज्यों से पंजाब लौटने वालों को सख्ती से एकांतवास पर भेजने के आदेश किये और महाराष्ट्र से लौटने वालों में से 292 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। कुछ मंत्रियों की तरफ से आए सुझावों के जवाब में मुख्यमंत्री इसके साथ सहमत हुए कि अन्य राज्यों से लौटने वालों को सम्बन्धित गाँव के सरपंच और पंचायत के साथ तालमेल करके घर में ही एकांत में रखने के प्रस्ताव की समीक्षा की जाये। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कैबिनेट को बताया कि पंजाबियों को घर लाने के लिए सहायता देने के लिए उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर अफसरों को हरेक राज्य के साथ तालमेल के लिए नियुक्त किया है। स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने मुख्यमंत्री को विश्वास दिलाया कि सभी लम्बित पड़ी टैस्ट रिपोर्टें आने वाले एक या दो दिनों में आ जाएंगी जिससे संभावित पॉजिटिव मामलों की शिनाख्त और उनके इलाज में देरी से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि निजी लेबों के साथ भी तालमेल बढ़ा कर टैस्टों की संख्या बढ़ाने के प्रबंधों को अंतिम रूप दिया जा रहा है और राज्य भर में से 2000 सैंपल लेकर उनको आज भेजे गए। कैबिनेट की तरफ से पैरोल में वृद्धि को मंजूरी राज्य में मौजूदा हालातों के मद्देनजऱ कैबिनेट की तरफ से उन कैदियों जिनको 7 साल या इससे कम सज़ा सुनाई गई है, के लिए महामारी और आपदाओं के दौरान पैरोल की मियाद 16 हफ़्तों से बढ़ाने की मंज़ूरी दी गई। मंत्रीमंडल की तरफ से मौजूदा सख्त हालात में सुप्रीम कोर्ट के लम्बे समय तक पैरोल सम्बन्धी दिए सुझाव के अनुसार पंजाब गुड्ड कंडक्ट परिजनरज़ एक्ट 1962 में उचित संशोधनों की मंज़ूरी दी गई। सरकारी मैडीकल कॉलेजों के लिए आउटसोर्सिंग के आधार पर नियुक्तियों को मंज़ूरी कोविड -19 के विरुद्ध जंग में राज्य की टेस्टिंग सुविधा और मैडीकल तैयारियों को आगे और बल देने के लिए मंत्रीमंडल की तरफ से आउटसोर्सिंग के आधार पर पटियाला, अमृतसर और फरीदकोट के सरकारी मैडीकल कालेजों में महत्वपूर्ण पदों के लिए विभिन्न नियुक्तियोंं को मंज़ूरी दी गई। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि नियुक्तियाँ जिनको वित्त विभाग ने पहले ही छह महीनों के लिए मंज़ूरी दे दी है, सरकारी मैडीकल कॉलेजों को वायरल टेस्टिंग लैबोरेटरियों, आइसोलेशन वार्डों आदि में ज़रूरी स्टाफ की नियुक्ति करने के समर्थ बनाऐंगी जिससे वह दिन -रात काम कर सकेंगे। साभार-khaskhabar.com  

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प्योंगयांग ,उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग 20 दिनों के बाद नजर आए हैं। उन के स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर लग रही अटकलों के बीच शुक्रवार को वह सार्वजनिक तौर पर सामने आए। उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी ने इस बात की जानकारी दी।  

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस से देश में मरीजों की संख्या बढती जा रही है। पिछले करीब एक महीने से लॉकडाउन लागू है। देश में सबकुछ बंद पड़ा हुआ है, लोग घरों में हैं, फैक्ट्रियों में ताले लटके हैं। इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ा है और जीडीपी की गति पूरी तरह से थम गई है। अर्थव्यवस्था के सामने आ रही इन्हीं चुनौतियों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से चर्चा की। यहां रघुराम राजन ने कहा कि इस वक्त गरीबों की सहायता करना जरूरी है, जिसके लिए सरकार के करीब 65 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत एक बड़ी भूमिका निभा सकता है, नए वर्ल्ड ऑर्डर में भारत अपना स्थान बना सकता है। शक्तिहीन लोगों को शक्तिशाली नेता अच्छा लगता है, हम एक विभाजित समाज के साथ कहीं नहीं पहुंच सकते हैं। रघुराम राजन ने बताया कि आज स्वास्थ्य, नौकरी के लिए अच्छी व्यवस्था करने की जरूरत है। वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था को लेकर रघुराम राजन ने कहा कि मुझे लगता है कि ग्लोबल आर्थिक सिस्टम में कुछ गलत तो है, लोगों के पास नौकरी नहीं है, इनके पास नौकरी है उनको आगे की चिंता है, आय का असमान वितरण हो रहा है अवसरों का सही वितरण करना होगा। इस चर्चा में राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय समाज की व्यवस्था अमेरिकी समाज से काफी अलग है, ऐसे में सामाजिक बदलाव आवश्यक है। हर राज्य का अलग तरीका है, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश को एक नजरिए से नहीं देख सकते हैं। भारत में हमेशा सत्ता कंट्रोल करना चाहती है, जो काफी लंबे वक्त से जारी है। राहुल ने कहा कि आज जिस तरह की असमानता है, वह काफी चिंता वाला विषय है। भारत और अमेरिका में इस तरह का अंतर है, क्योंकि इसे ही खत्म करना काफी जरूरी हो जाता है। अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने कहा कि हमारे पास लोगों के जीवन को बेहतर करने का तरीका है, फूड, हेल्थ एजुकेशन पर कई राज्यों ने अच्छा काम किया है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती लोअर मिडल क्लास और मिडल क्लास के लिए है जिसके पास अच्छे जॉब नहीं होंगे। आज वक्त की जरूरत है कि लोगों को सिर्फ सरकारी नौकरी पर निर्भर ना रखा जाए, उनके लिए नए अवसर पैदा किए जाएं। साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली । देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या बढती जा रही है।कोरोना वायरस के इलाज कैसे किया जाए इसको लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की गई। कोर्ट में दाखिल याचिका में मरीज के इलाज के दौरान हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजीथ्रोमाइसिन के इस्तेमाल के साइड इफेक्ट का सवाल उठाया गया। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या हम एक्सपर्ट हैं? अदालत ने कहा कि हम इलाज के विधि को लेकर आदेश पारित नहीं कर सकते हैं । अदालत ने बताया कि याचिका को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के सामने बतौर रिप्रजेंटेशन के तौर पर पेश किया जाना चाहिए और ICMR उस पर विचार करेगा।सुप्रीम कोर्ट में यूएस बेस्ड डॉक्टर ने एक संगठन की ओर से अर्जी दाखिल कर कहा कि कोरोना मरीज के इलाज के दौरान उक्त दवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है और इसके साइ़ड इफेक्ट का खतरा है। अदालत से कहा गया कि कोरोना मरीज के इलाज के लिए तय गाइडलाइंस में बदलाव किया जाए। याचिकाकर्ता ने यूएस से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होते हुए कहा कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजीथ्रोमाइसिन का व्यापक इस्तेमाल कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज के दौरान किया जा रहा है ये चिंता का विषय है। डॉक्टर कुणाल ने बताया कि जिन दोनों ड्रग्स का इस्तेमाल इलाज के लिए हो रहा है वह प्राथमिक साक्ष्य और किस्सों पर आधारित साक्ष्य है और इसका कोई प्रत्यक्ष साइंटिफिक साक्ष्य नहीं है।कोविड 19 नए किस्म का वायरस है और इस पर अभी बेहद कम रिसर्च सामने आया है। इस तरह से अगर उक्त दवाओं के कोरोना मरीज का इलाज होगा तो इससे हानिकारक साइड इफेक्ट का खतरा बना रहेगा । ऐसे में निर्देश दिया जाए कि कोरोना के मरीज के इलाज के लिए तय गाइडलाइंस में बदलाव किए जाए। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या कोर्ट ये कह सकता है कि अमुक विधि से इलाज हो? क्या हम एक्सपर्ट हैं? अदालत ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि हम इस मामले में आदेश पारित नहीं कर सकते । अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वह याचिका को रिप्रजेंटेशन के तौर पर ICMR के सामने रखा जाए ICMR इस पर विचार करेगा। साभार-khaskhabar.com

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