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चंडीगढ़ । शराब के ठेकों की समय सीमा में 31 मार्च, 2020 के बाद विस्तार किए जाने को रद्द करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने एलान किया कि वित्त विभाग की सिफारिशों के अनुरूप चलते हुए राज्य सरकार लॉकडाउन के 23 मार्च से 6 मई, 2020 तक के समय के दौरान पड़े घाटे के लिए लाइसेंसधारकों के लिए व्यवस्था मुहैया करवाएगी। मुख्यमंत्री ने बरिष्ठ अधिकारियों की तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो कोविड-19 के दौरान ठेके बंद रहने के कारण हुए घाटे का पता लगाएगी। इस कमेटी में प्रमुख सचिव वित्त अनिरूद्ध तिवाड़ी, प्रमुख सचिव ऊर्जा ए. वेनू प्रसाद और आबकारी एवं कर कमिश्नर विवेक प्रताप सिंह शामिल हैं। मंत्री मंडल ने सोमवार को महामारी और कफ्र्य़ू / लॉकडाउन के संदर्भ में राज्य की आबकारी नीति में उचित तबदीलियाँ करने की मंज़ूरी देने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया था। एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग की सलाह के अनुसार आबकारी विभाग की सिफारिशों को स्वीकृत कर लिया है, जिससे शराब के ठेकों की समय सीमा 31 मार्च, 2021 तक बरकरार रखी जा सके। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने मार्च में लॉकडाउन के दौरान 9 दिनों के समय में पड़े घाटे के लिए एम.जी.क्यू. के अनुपात पर आधारित व्यवस्था मुहैया करवाने के लिए वित्त विभाग की सिफारिशें को भी मंज़ूरी दे दी है। इसी तरह वित्त विभाग की सिफारिशों के मुताबिक एक अप्रैल से 6 मई, 2020 के घाटे की समय सीमा के लिए राजस्व, लाइसेंस फीस और एम.जी.आर., दोनों को आबकारी विभाग द्वारा अनुरूप व्यवस्था / फिर निर्धारित किया जा सकता है। यह बताने योग्य है कि साल 2019-2020 के लाइसेंसधारी 31 मार्च, 2020 तक अपना साल मुकम्मल नहीं कर सके क्योंकि 23 मार्च, 2020 को कफ्र्य़ू और लॉकडाउन के लागू हो जाने के कारण 9 दिन ठेके बंद रहे। इस तरह साल 2020-21 के लिए शराब के ठेके जो आबकारी नीति के मुताबिक एक अप्रैल, 2020 को खुलने थे, खोले नहीं जा सके। मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए मंत्री समूह का गठन किया है, जिसमें भविष्य में लॉकडाउन बढ़ाने (साल 2020-21 के दौरान मुकम्मल या कुछ हद तक) की सूरत में किसी किस्म की व्यवस्था करने या लाइसेंसधारकों को किसी किस्म की अन्य शिकायत या समस्या को विचारना शामिल है। मंत्री समूह वित्त मंत्री, शिक्षा मंत्री और आवास एवं शहरी विकास मंत्री पर अधारित होगा, जिसको मुख्यमंत्री द्वारा शराब की बिक्री पर विशेष कोविड सैस लगाने का मुद्दा विचारने के लिए भी कहा है, जैसे कि कई राज्यों ने लॉकडाउन के लम्बे समय तक चलने के कारण सैस लगाने का फ़ैसला पहले ही किया हुआ है। शराब की घरों तक सप्लाई के मुद्दे पर कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा फ़ैसला किया गया कि आबकारी नीति में पहले ही मौजूद उपबंध लागू रहेंगे, परन्तु इस सम्बन्धी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अभिव्यक्त की गई राय का हवाला देते हुए इन विकल्पों के फ़ैसले को लइसेंसधारकों पर छोड़ दिया गया है। बताने योग्य है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा लोक हित पटीशन सम्बन्धी 8 मई, 2020 को सुनाए गए फ़ैसले में शराब की होम डिलीवरी / अप्रत्यक्ष बिक्री संबंधी सुझाव दिया गया था, जिससे लॉकडाउन के दौरान सामाजिक दूरी को बहाल रखा जा सके। इस पहलू को विचारते हुए कि लॉकडाउन के नतीजन आबकारी विभाग द्वारा साल 2020-21 के लिए ठेके की मुकम्मल अलॉटमैंट नहीं की जा सकी, मुख्यमंत्री द्वारा विभाग को राज्य की 2020-21 की आबकारी नीति के अनुसार बाकी बचते ठेकों की नीलामी करने और अगली कार्यवाही के लिए निर्देश दिए गए हैं। कुल 756 ग्रुपों में से 500 को 2019-20 की नीति के अनुसार नवीनीकृत किया गया था, जबकि बाकी बचते 256 ग्रुपों को 186 ग्रुपों को पुर्नगठित कर दिया गया था और इनमें से 89 ग्रुपों की अलॉटमैंट 2020-21 की नीति के अनुसार कर दी गई थी। बाकी बचते 97 ग्रुपों की अलॉटमैंट की जानी अभी बाकी है। यह बताने योग्य है कि पंजाब की साल 2020-21 के लिए आबकारी नीति को मंत्री मंडल द्वारा 31 जनवरी, 2020 को मंज़ूरी दे दी गई थी, जिसके उपरांत विभाग द्वारा इस नीति को लागू करने के लिए बड़े पैमाने पर कदम उठाए गए। परन्तु कोविड-19 की महामारी और इसके मद्देनजऱ लागूू किए गए लॉकडाउन / कफ्र्य़ू के कारण इस नीति पर अमल रुक गया था। पंजाब सरकार द्वारा लॉकडाउन 23 मार्च, 2020 को पहले ही लागू कर दिया गया था, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 24 मार्च, 2020 को संकट प्रबंधन एक्ट, 2005 और सी.आर.पी.सी की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत लॉकडाउन को अमल में लाया गया। लॉकडाउन लागू होने के उपरांत पंजाब सरकार द्वारा बार-बार केंद्र सरकार से अपील की गई कि वह राज्य के कर एवं आबकारी विभाग को शराब के ठेके खोलने के लिए आज्ञा दें, क्योंकि इस स्वरूप राज्य को आबकारी से होने वाली आमदन का नुकसान हो रहा था। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 1 मई, 2020 को जारी किए गए अपने पत्र में जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार 4 मई, 2020 से ठेके खोलने सम्बन्धी आज्ञा दी गई। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी इन दिशा-निर्देशों के बाद विभाग द्वारा 2020-21 की राज्य की आबकारी नीति को ध्यान में रखते हुए इन दिशा-निर्देशों को लागू करने सम्बन्धी समीक्षा की गई। विभाग द्वारा मंत्री मंडल के विचार अधीन लाने के लिए मैमोरेंडम तैयार किया गया, जिसको सलाह लेने के लिए वित्त विभाग को भेजा गया, जो 11 मई, 2020 को प्राप्त हुआ है। यह मुद्दा बाद में 11 मई, 2020 को मंत्री मंडल द्वारा विचारा गया और इस सम्बन्धी कोविड-19 महामारी और इसके नतीजन लागू हुए कफ्र्य़ू / लॉकडाउन के कारण पैदा हुए हालातों को ध्यान में रखते हुए आबकारी नीति में ज़रूरी तबदीलियों के लिए मुख्यमंत्री को सभी अधिकार दे दिए गए थे। साभार-khaskhabar.com

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शिमला । मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि अन्य राज्यों में हिमाचल प्रदेश के लगभग 55 हजार लोग फंसे हुए हैं, जो अपने घर वापस आना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अन्य राज्यों के लगभग 68000 लोग हैं, जो अपने राज्य वापस जाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण प्रदेश में कोविड-19 पाॅजिटिव मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह पूर्व प्रदेश में कोरोना पाॅजिटिव की संख्या 40 थी, परन्तु एक सप्ताह के भीतर यह संख्या बढ़कर 59 हो गई है, जो कि चिंता का विषय है, परन्तु बाहरी राज्यों में फंसे हुए हिमाचलवासियों को हर संभव सहायता प्रदान करना भी प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है।   उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने बाहरी राज्यों से आए लोगों के लिए क्वारंटीन के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए जियो फैंसिंग ऐप विकसित की है।   जय राम ठाकुर ने कहा कि कोरोना महामारी के दृष्टिगत प्रदेश में लगाए गए लाॅकडाउन के कारण प्रदेश की आर्थिकी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने राज्य में आर्थिक गतिविधियां आरम्भ करने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न भागों से राज्य में हजारों लोग वापस आए हैं और उनकी विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता हैं। उन्होंने कहा कि यदि लाॅकडाउन लम्बा चले तो राज्य सरकार ने ऐसे लोगों की टेलेंट मैपिंग करने का निर्णय लिया है, ताकि वे लोग अपने घर में रहना चाहे तो उनकी सेवाओं का उपयोग प्रदेश हित में किया जा सकता है।   उन्होंने कहा कि सेब सीजन आने वाला है और दिल्ली की आज़ादपुर मंडी कोरोना महामारी के कारण बुरी तरह से प्रभावित हुई है, इसलिए उन्होंने बागवानों को उनके उत्पादों को बेचने की सुविधा प्रदान करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का आग्रह किया। उन्होंने लाॅकडाउन अवधि को बढ़ाने का समर्थन किया।   मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि वह पूंजीगत व्यय में कटौती न करंे, लेकिन इसके साथ ही सरकार अपव्यय को रोकने के लिए कठोर कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्र के हर घर में 120 दिन का अकुशल रोजगार सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री शहरी आजीविका गारंटी योजना शुरू की है।   जय राम ठाकुर ने कहा कि इस महामारी के कारण पर्यटन उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इसलिए प्रदेश सरकार ने 6 महीने की अवधि के लिए बिजली मांग शुल्क को खत्म करने का निर्णय लिया है। इसी तरह आबकारी एवं कराधान लाइसेंस शुल्क को माफ किया गया है और बार का लिफ्टिंग कोटा प्रो-राटा के आधार पर होगा। उन्होंने कहा कि सरकार एचपीटीडीसी निगम के कर्मचारियों का वेतन भुगतान कर एचपीटीडीसी को भी सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, टोकन टैक्स और विशेष सड़क कर को 4 महीने के लिए माफ कर दिया गया है तथा निजी वाहनों के पंजीकरण और परमिट आदि के नवीकरण की देरी पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि एचआरटीसी को 55 करोड़ की मदद दी जाएगी।   उन्होंने कहा कि औद्योगिक व्यावसायिक और कृषि उपभोक्ताओं को बिजली खपत शुल्क के भुगतान में छूट दी गई है। अप्रैल, 2020 की खपत के लिए मई 2020 में बिल दिया गया है, जबकि मई महीने का बिल 30 जून तक लंबित कर दिया गया है। इस शुल्क को जुलाई, अगस्त और सितंबर माह 2020 में तीन बराबर किश्तों में लिया जाएगा।   मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व में कोरोना महामारी के विरूद्ध लड़ाई में देश की जीत अवश्य होगी।   साभार-khaskhabar.com

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Prime Minister Narendra Modi will address the nation at 8 pm today. This comes a day after he held a six-hour-long marathon meeting with the chief ministers on various aspects of the situation arising out of the pandemic and the nationwide lockdown. The Prime Minister’s Office (PMO) tweeted that the address will take place at 8 pm. This will be PM Modi’s third address to the nation on the Covid-19 lockdown. He had first announced the lockdown in his televised address to the nation on March 24, then announced its extension on April 14. Apart from this, the Prime Minister had also addressed the nation as he asked the country to observe one-day Janta Curfew in March to break the cycle of infection. The Prime Minister announced the 21-day nationwide coronavirus lockdown on March 25 to break the chain of Covid-19 infections in the country. The address comes a day after PM Modi held a video-conference with chief ministers on the Covid-19 situation. The Prime Minister said in the meeting that states will have greater say in determining the extent of restrictions and relaxations after May 17, within a broad national framework while underlining that India faced two challenges - reducing the transmission rate of the coronavirus disease (Covid-19) and resuming public activity gradually. He also emphasised that social distancing remains the “biggest weapon” against the virus till a vaccine is found, and suggested that the lockdown may not be lifted entirely. PM Modi also said that India now had a good sense of the spread of the disease, and urged states to carefully examine specific geographical areas to come up with a road map for the next phase of lockdown. साभार-khaskhabar.com

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इंदौर । कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए उठाए गए एहतियाती कदमों के कारण काम धंधे बंद है और लोग घरों को लौटने के लिए बेताब है। घरों को लौटते मजदूरों की तस्वीरें जो सामने आ रही हैं वह दिल दहला देने वाली हैं। ऐसी ही एक तस्वीर इंदौर के महू से सामने आई है, जहां इंसान ही बैलगाड़ी में बैल बनकर उसे खींचे जा रहा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं जो इंदौर के महू की बताई जा रही है। इस बैलगाड़ी में एक तरफ बैल है तो दूसरी तरफ इंसान बैल बनकर बैलगाड़ी का खींचे जा रहा है, वहीं बैलगाड़ी पर परिवार के दो अन्य सदस्य सवार हैं जो महू से पत्थर मुंडला गांव के लिए निकले हैं। हम्माली का काम करने वाले व्यक्ति का नाम राहुल बताया जा रहा है और वह अपने परिवार के साथ महू में रहकर रोजी-रोटी कमाया रहा था, मगर कोरोना महामारी के कारण सारे काम धंधे बंद हो गए, स्थितियों में उसके लिए वक्त काटना मुश्किल हो गया पूंजी भी खत्म होती गई। बढ़ते आर्थिक संकट के बीच उसने अपने एक बैल को ही बेच दिया, फिर उसे लगा कि अब महू में रहना उसके लिए मुश्किल हो जाएगा, लिहाजा उसने अपने गांव लौटने का मन बना लिया। यह श्रमिक परिवार बैलगाड़ी से ही अपने गांव की तरफ निकल पड़ा। एक बैल होने पर दूसरे बैल की भूमिका परिवार के सदस्य निभा रहे है। रास्ते में मीडिया से जुड़े लोगों ने उससे बात की तो उसका यही कहना था कि एक ही बैल उसके पास है तो उसके पास ऐसा करने अर्थात बैल की तरह बैलगाड़ी को आगे खींचने के अलावा केाई दूसरा रास्ता नहीं है। परिवार में कुल तीन सदस्य हैं जिसमें दो पुरुष हैं। वे दोनों बारी-बारी से बैल बनकर गाड़ी को खींचे जाते हैं। एक बैल की जगह नथकर गाड़ी खंीचता है तो दूसरा सहयोग करता है। जब यह दोनों थक जाते हैं तो महिला भी बैल की भूमिका निभाने लगती है। बैलगाड़ी में एक तरफ बैल की जगह इंसान के होने का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं मगर इसकी आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि करने को तैयार नहीं है। इस वीडियो को तमाम लो साझा भी कर रहे हैं। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ से घोषित किए गए 20 लाख करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक पैकेज को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि यह पैकेज भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए है।यह पैकेज देश को विकास तरफ लेकर जायेगा। उन्होंने कहा कि एमएसएमई के लिए 6 महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे है। वित्त मंत्री ने एमएसएमई के लिए 3 लाख करोड़ के लोन की घोषणा की है। बिना गारंटी के 3 लाख करोड़ का लोन एमएसएमई को मिलेगा। इससे 45 लाख एमएसएमई यूनिटों को फायदा होगा। वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि एनपीए वाली एमएसएमई यूनिट को भी बिना गारंटी के लोन मिलेगा।वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने लॉकडाउन के दौरान 41 करोड़ खातों में 52,606 करोड़ रुपये डाले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार संकटग्रस्त लघु एवं मझोले उद्योगों को इक्विटी के जरिए सपोर्ट करेगी। साथ ही सरकार का लक्ष्य लोकल ब्रांड्स को वैश्विक स्तर पर ले जाने का है। आकार और क्षमता को बढ़ाने की सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं तो उसके लिए फंड्स ऑफ फंड्स का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से 50,000 करोड़ रुपए का इक्विटी इन्फ्यूज़न होगा 25लाख से लेकर 1करोड़ रुपए की इन्वेस्टमेंट कर जो 5करोड़ तक का व्यापार करेगा माइक्रो यूनिट कहलाएगा। स्मॉल के लिए 10करोड़ तक का निवेश और 50करोड़ तक का कारोबार और मीडियम में 20करोड़ तक का निवेश और 100करोड़ तक के टर्नओवर का प्रावधान किया गया है 200 करोड़ से कम वाले में ग्लोबल टेंडर नहीं होंगे। इससे लघु ,सूक्ष्म, मध्यम उद्योगों को लाभ मिलेगा। आत्मनिर्भर भारत की तरफ ये एक और कदम है प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज में एक सुविधा दी गई थी कि 12-12% EPF कर्मचारी और नौकरी देने वाले को भारत सरकार देगी ये पहले तीन महीनों के लिए किया गया था जिसे बढ़ाकर अगले तीन महीने जून, जुलाई और अगस्त तक कर दिया गया है 3,67,000 ऐसी संस्थाओं के 72,22,000 ऐसे कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। इनको कुल मिलाकर 2500 करोड़ का लाभ मिलेगा EPF 12-12% से कम कर अगले तीन महीने तक 10 प्रतिशत कर दिया गया है। जो हमारे सरकारी संस्थान, PSU's और PSE's हैं उनमें ये 12% ही रहेगा इससे कुल मिलाकर 6750 करोड़ का लिक्विडिटी सपोर्ट इनको मिलेगा। इस तरह कर्मचारियों के हाथ में ज्यादा पैसा आएगा साभार-khaskhabar.com  

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शिमला । बाहरी राज्यों से वापस आने के इच्छुक हिमाचलियों को चिकित्सा जांच और संस्थागत क्वारंटीन के उपरान्त ही अपने घर जाने दिया जाएगा। यह बात मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज राज्य सरकार द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए कही। इन नोडल अधिकारियों को देश के अन्य भागों में फंसे लोगों राज्य में वापिस लाने के लिए संबंधित राज्य सरकारों से समन्वय स्थापित करने के लिए नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार देश के विभिन्न भागों में फंसे हिमाचलवासियों की सुरक्षा के प्रति चिंतित हैं उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों कोघर भेजने से पहले उन्हें क्वारंटीन अवधि में रखने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब, महाराष्ट्र और देश के अन्य रेड जोन से आने वाले हिमाचलियों की कोविड-19 के लिए जांच की जाएगी। जय राम ठाकुर ने नोडल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि उन्हें जिन राज्यों का कार्यभार सौंपा गया है, उनके नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए रखें ताकि फंसे हुए हिमाचलियों को वापस लाने का मामला संबंधित राज्यों की सरकार के साथ जल्द से जल्द उठाया जा सके। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को वापस लाने में प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे राज्य के 52,763 लोगों ने कोविड ई-पास के लिए आवेदन किया है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश में फंसे देश के विभिन्न राज्यों के लगभग 63,044 लोग अपने राज्यों को वापिस जाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक अन्य राज्यों के 30,219 लोग यहां से जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में वापस जाने के इच्छुक लोगों को उनकी सुचारू वापसी के लिए सभी संभव सुविधाएं प्रदान की जाएं। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को प्रदेश में ही रहने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए ताकि श्रमिकों के अभाव में विकास परियोजनाएं प्रभावित न हों। जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार के आग्रह पर केंद्र सरकार ने गोवा में फंसे हिमाचल प्रदेश के लोगों को राज्य में वापस लाने के लिए थिविम/मड़गांव/करमाली से ऊना तक विशेष रेलगाड़ी चलाने के लिए सहमति प्रदान की है। यह विशेष रेलगाड़ी 13 या 14 मई, 2020 को गोवा से चलेगी। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु में फंसे हिमाचल प्रदेश के लोगों को वापस लाने के लिए 11 मई को बेंगलुरु से ऊना के लिए एक और स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। राज्य सरकार, केंद्र सरकार से महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, बिहार इत्यादी राज्यों से भी ऐसी ही ट्रेनें शुरू करने का आग्रह करने पर विचार कर रही है ताकि वहां फंसे हिमाचल प्रदेश के लोगों को सुविधा मिल सके। साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली । भारतीय रेलवे कल से ट्रेनों का संचालन शुरू करने जा रहा है। पहले चरण में सिर्फ विशेष ट्रेनों का ही संचालन किया जा रहा है। 15 ट्रेनों के आने-जाने के 30 फेरो से यह संचालन शुरू होगा। नई दिल्ली स्टेशन से डिब्रूगढ़, अगरतला,हावड़ा, पटना,बिलासपुर रांची,भुवनेश्वर, सिकंदराबाद, बंगलुरू, चेन्नईतिरुअनन्तपुराम,मडगांव, मुम्बई सेंट्रल, अहमदाबाद और जम्मू तवी तक ट्रेन चलेगी। वहीं जबकि 20 हज़ार कोच कोविड-19 केयर सेंटर के लिये आरक्षित रहेंगे। साथ ही प्रतिदिन 300 ट्रेन प्रवासी श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलेंगी । रेलवे इसके लिए आज शाम 4 बजे से आरक्षण ऑनलाइन सुविधा शुरू करने जा रहा है।केवल आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर ही बुकिंग होगी और टिकिट विंडो फिलहाल पूरी तरह बंद ही रहेंगी । साथ ही फेस कवर पहनकर और स्क्रीनिंग में कोविड के लक्षण नहीं मिलने पर ही कोई व्यक्ति रेल यात्र कर सकेगा। साभार-khaskhabar.com  

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जयपुर। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करने हेतु मनरेगा की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए अधिकाधिक कार्य प्रारम्भ कर श्रमिकों के नियोजन पर जोर दिया गया जिसके फलस्वरूप लॉकडाउन के कारण जहां 17 अप्रेल तक मात्र 62 हजार श्रमिक नियोजित हुए थे, वहीं आज श्रमिक नियोजन 22 लाख से भी अधिक हो गया है। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत सबसे अधिक भीलवाडा में 2.27 लाख तथा डूंगरपुर में 1.93 लाख से अधिक श्रमिक नियोजित हुए हैं। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत काम मांगने हेतु लोगों को प्रेरित एवं जागरूक किया जा रहा है तथा प्रपत्र-6 भराकर जॉब कार्ड जारी किये जा रहे हैं जिससे श्रमिकों के नियोजन के अधिकतम लक्ष्य को हासिल किया जा सके। पायलट ने बताया कि मनरेगा योजना के तहत स्वीकृत व्यक्तिगत लाभ के कार्यो जैसे खेतों पर मेडबंदी, खेतों का समतलीकरण, केटलशेट निर्माण आदि को प्राथमिकता दी जा रही है जिससे सोशल डिस्टेंसिंग की भी पालना हो सके तथा श्रमिकों को व्यक्तिगत कार्य पूर्ण होने से लाभ भी मिल सके।   साभार-khaskhabar.com  

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शिमला । केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट अफ़ेयर्स राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कोरोना आपदा से राहत देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बनाए गए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज से हिमाचल प्रदेश को लगभग 244 करोड़ से ज़्यादा राशि ट्रांसफ़र कर दिए जाने की जानकारी दी है। अनुराग ठाकुर ने कहा”आज पूरी दुनिया कोरोना वायरस की चपेट में है और इस इस वैश्विक आपदा से निपटने के लिए सभी देश युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं।हमारा देश भी इस से अछूता नहीं है जिसे देखते हुए देश की मोदी सरकार अपने नागरिकों को स्वस्थ व सुरक्षित बनाए रखने के लिए सभी सम्भव उपाय कर रही है।कोरोना आपदा के संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने नेतृत्व में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज का गठन किया गया है जिसके अंतर्गत ग़रीबों,मज़दूरों ,किसानों ,विधवाओं व दिव्यांगजनों के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।पूरे देश में अब तक 39 करोड़ से भी ज़्यादा लोगों को 34 हज़ार 800 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है” ठाकुर ने कहा” हिमाचल प्रदेश में भी ज़रूरतमंदों प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज का पूरा लाभ मिला है।पीएम किसान योजना के 8 लाख 70 हज़ार से भी ज़्यादा लाभार्थियों को 174 करोड़ रुपए से ज़्यादा की राशि उनके खातों में ट्रांसफ़र कर दी गई है।पीएम जनधन योजना के 6 लाख 13 हज़ार से ज़्यादा खाताधारकों के बैंक खातों में 30 करोड़ से ज़्यादा की राशि केंद्र सरकार द्वारा ट्रांसफ़र कर दी गई है। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत 1 लाख 11 हज़ार से अधिक वृद्धों ,विधवाओं और दिव्याँगों को लगभग 5 करोड़ 59 लाख रुपए से अधिक की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है।बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन फंड के 90 हज़ार से अधिक लाभार्थियों को 17 करोड़ 95 लाख से अधिक की आर्थिक मदद केंद्र सरकार द्वारा की गई है ।ईपीएफ़ओ के 3700 से ज़्यादा लाभार्थियों को 8 करोड़ 30 लाख रुपए से ज़्यादा की राशि ट्रांसफ़र कर दी गई है।इसके अतिरिक्त उज्ज्वला योजना के अंतर्गत लगभग 1 लाख 13 हज़ार सिलेंडरों की अब तक बुकिंग हुई थी जिसमें से लगभग 1 लाख 12 हज़ार मुफ़्त गैस सिलेंडर लोगों को वितरित किए जा चुके हैं।हिमाचल प्रदेश के अंदर अब तक लगभग 24 लाख लोगों को 12 हज़ार मीट्रिक टन खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा चुका है।इसके अतिरिक्त लॉकडाउन के प्रथम चरण से अभी तक केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को अप्रैल माह तक विभिन्न मदों के लिए कुल 1,821 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं।   साभार-khaskhabar.com  

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The United States recorded 1,635 coronavirus deaths in the past 24 hours, bringing the total to 78,617, according to the worldometers. The country - hardest hit by the pandemic in terms of the number of fatalities - has now confirmed a total of 1,322,171 cases. Globally, 4,034,574 people have been infected, and the total number of deaths from the disease stands at 276,691. The number of coronavirus cases in Germany increased by 1,251 to 168,551, according to new data from the Robert Koch Institute (RKI) for infectious diseases released today. The reported death toll rose by 147 to 7,369, the tally showed. The number of people in Italy who've died with Covid-19 infections has topped 30,000. The Health Ministry registered 243 deaths on Friday, bringing the total of those who died in the country to 30,201. Italy was the first country in Europe with a major outbreak of the coronavirus. Authorities say many more likely died with the infection at home or in nursing homes without being diagnosed. With 1,327 more cases registered in the 24-hour period ending Friday evening, Italy now tallies 217,185 confirmed coronavirus infections. Singapore saw a drop in its daily tally of new coronavirus cases today as the city-state reported 753 new Covid-19 cases, taking the country's total to 22,460. The Health Ministry said the vast majority of the new cases reported are work permit holders (foreigners) including Indians, living in dormitories. Nepal has reported seven new coronavirus cases, taking the number of infections in the country to 109, the health ministry said today. Nepal is among the nations that has the least number of cases of the deadly coronavirus. The new cases involve three women and four men aged between 17 and 65 years. साभार-khaskhabar.com    

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चंडीगढ़ । पंजाब पुलिस ने अति वांछित गैंगस्टर बलजिन्दर सिंह उर्फ बिल्ला को गिरफ़्तार किया है, जिसका कथित तौर पर पाकिस्तान आधारित केएलएफ के प्रमुख हरमीत सिंह हैप्पी और जर्मनी आधारित केज़ैडएफ के साथ कथित सम्बन्ध थे। एक और नामी गैंगस्टर सुखजिन्दर और बिल्ला गिरोह के पाँच अन्य सदस्यों को भी गिरफ़्तार किया गया, इसके साथ ही पाकिस्तान से तस्करी किए गए अत्याधुनिक हथियारों की बड़ी खेप के साथ-साथ ड्रोनों समेत ड्रग मनी भी कई तरीकों के द्वारा अलग-अलग समय सरहद से तस्करी किए गए थे। डीजीपी पंजाब दिनकर गुप्ता के अनुसार कल चंडीगढ़ से ओ.सी.सी.यू. टीम, काऊंटर इंटेलिजेंस जालंधर यूनिट और कपूरथला पुलिस ने एक साझे अभियान के अंतर्गत यह गिरफ़्तारियाँ की हैं, गिरफ़्तार किए गए मुलजि़मों की पहचान बलजिन्दर सिंह उर्फ बिल्ला मंड्याला (निवासी मंड्याला, गुरदासपुर), सुखजिन्दर सिंह (निवासी गाँव कमोके ब्यास, अमृतसर) के अलावा कपूरथला के मोहत शर्मा, लवप्रीत सिंह, मंगल सिंह और मनिंदरजीत सिंह उर्फ हैप्पी और लवप्रीत सिंह उर्फ लवली (निवासी अमरकोट, वलटोहा तरन तारन) के तौर पर की गई है। जि़क्रयोग्य है कि बलजिन्दर सिंह बिल्ला मंड्याला 18 से अधिक आपराधिक मामलों जैसे कत्ल, कत्ल की कोशिश और हथियारों /नशों की तस्करी आदि में शामिल था। गिरफ़्तार किए गए सभी मुलजि़मों को अलग तौर पर रखा गया है क्योंकि डॉक्टरों की एक विशेष टीम द्वारा कोविड -19 के लिए टैस्ट किए जा रहे हैं। श्री गुप्ता ने बताया कि पुलिस की टीमों ने इन मुलजि़मों के पास से पाकिस्तान से तस्करी किए गए बहुत ही अत्याधुनिक हथियार बरामद किए हैं। इस बरामदगी में दो 30 बोर की ड्रम मशीन गन्नें, तीन पिस्तौल (सिग साउर मार्का वाले जर्मनी में बने), दो गलोक पिस्तौल (ऑस्ट्रिया में बने), दो 30 बोर पिस्तौल, एक 32 बोर का पिस्तौल, एक 315 बोर राईफल, 341 जीवित कारतूस, दो ड्रम मैगज़ीनें, 14 पिस्तौल मैगज़ीनों के साथ तीन लाख आठ सौ अठरह रुपए और एक सौ ऑस्ट्रेलियन डॉलर की ड्रग मनी शामिल है। इसको किसी आपराधिक गिरोह द्वारा अत्याधुनिक हथियारों के सबसे बड़ी बरामदगी में से एक करार देते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि सिग साऊर पिस्तौल वास्तव में संयुक्त राज्य के सबसे चुने हुए नेताओं खासकर राष्ट्रपति की रक्षा करने वाले यूएस सीक्रेट सर्विस के सदस्यों द्वारा इस्तेमाल की जातीं हैं। डीजीपी ने कहा कि अब तक प्राथमिक जांच की गई है, बिल्ला मंड्याला से बरामद किये गए ज़्यादातर हथियार विभिन्न खेपों में भारत-पाक सरहद पार से आए थे। पुलिस नाजायज़ हथियारों की सप्लाई चेन में आतंकवादियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। प्रवक्ता ने आगे खुलासा किया कि कुछ नकली दस्तावेज़ों के साथ टोयोटा फारचूनर, एटीओस लावा और ऑल्टो कारों को भी आपराधियों के पास से बरामद किया गया। पुलिस को यह भी पता लगा है कि एस.टी.एफ. पंजाब द्वारा 24 सितम्बर, 2019 को सरहद पार से फिऱोज़पुर सैक्टर के ममदोट क्षेत्र में ए.के.-47 राईफलों वाली खेप का एक हिस्सा आपराधिक गिरोह बिल्ला मंड्याला के साथ भी सम्बन्धित था। गिरफ़्तारियों का विवरण देते हुए डीजीपी ने बताया कि एआईजी ओसीसीयू गुरमीत चौहान को भरोसेयोग्य जानकारी मिली थी कि अति वांछित गैंगस्टर ‘बिल्ला मंड्याला’ अपने साथी के साथ मिल कर कपूरथला क्षेत्र में नाजायज़ हथियारों की बड़ी खेप के साथ पनाह ले रहा था, जिसका अलग-अलग किस्मों के आतंकवादी और आपराधिक कामों में इस्तेमाल किया जाना था। डीएसपी ओसीसीयू बिक्रम बराड़ को एआईजी काऊंटर इंटेलिजेंस जालंधर, हरकमलप्रीत सिंह खॅख और एसएसपी कपूरथला सतिन्दर सिंह के सहयोग से तुरंत मिशन का काम सौंपा गया। पुलिस टीमों ने सुल्तानपुर लोधी थाने के दादविंडी और मोठांवाला क्षेत्र के आसपास घेराबन्दी की और गिरफ़्तारियाँ की। इन सभी 6 के खि़लाफ़ थाना सुल्तानपुर लोधी कपूरथला में आईपीसी की धारा 384, 465,467, 468, 471, 473, 489, यू.ए.पी.ए. की धारा 13, 18 और हथियार एक्ट की धारा 25 के अधीन केस दर्ज किया गया है। प्राथमिक पड़ताल के दौरान बलजिन्दर सिंह बिल्ला मंड्याला ने खुलासा किया है कि वह मिजऱ्ा और अहमद्दीन समेत अलग- अलग पाकिस्तान आधारित हथियारों और नशा तस्करों के संपर्क में था और उसने उनके पास से खासकर फिऱोज़पुर क्षेत्र में पहले भी बहुत से हथियारों और नशों की खेपें प्राप्त की थीं। मिजऱ्ा पिछले दिनों कथित तौर पर पाकिस्तान और भारत में स्थित खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स के संचालकों के लिए भारत-पाक सरहद पर कूरियर के तौर पर काम कर रहा था और उसने कई हथियारों की खेपों को सफलतापूर्वक भारतीय क्षेत्र में भेजा था। बिल्ला मंड्याला ने यह भी खुलासा किया कि वह गैंगस्टर गुरप्रीत सिंह सेखों के के संपर्क में था, जो इस समय पटियाला जेल में बंद है और वह जर्मनी और पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों के संपर्क में होने का संदिग्ध है। गुरप्रीत सेखों एक ‘ए’ श्रेणी का गैंगस्टर है जो पहले केएलएफ के प्रमुख हरमिन्दर सिंह मिंटू के संपर्क में रहा था, जिसकी कुछ साल पहले मौत हो गई थी। साभार-khaskhabar.com  

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जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान की दूसरे राज्यों के साथ सीमाओं पर प्रवासियों के प्रवेश को रोका नहीं गया है बल्कि अंतर-राज्यीय आवागमन को सुगम बनाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। जिन लोगों को ई-पास जारी हो चुके हैं, उनके राजस्थान में प्रवेश पर कोई रोक नहीं है। इसी प्रकार, राजस्थान में फंसे हुए अन्य राज्यों के प्रवासी भी भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार अनुमति लेकर अपने स्थान पर जा सकते हैं। गहलोत ने कहा किराज्य सरकार की प्राथमिकता लोगों का जीवन बचाना और कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकना है। उन्होंने कहा कि अंतर-राज्यीय तथा अंतर-जिला एवं जिले के अंदर आवागमन को सुगम बनाने के लिए अनुमति देने की प्रक्रिया को अधिक बेहतर बनाने के लिए भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार शुक्रवार को ही स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) जारी किया गया है। उन्होंने ई-पास की अनुमति के लिए जिला स्तर पर विशेष सैल बनाने के निर्देश दिए। ज्ञातव्य है कि लॉकडाउन के तीसरे चरण के लागू होेने के समय राजस्थान के 10 जिले ग्रीन जोन में थे, जो संक्रमण बढ़ने से घटकर 2 रह गए हैं। इस कारण श्रमिकों एवं अन्य प्रवासियों के आवागमन की प्रक्रिया को तर्कसंगत बनाया गया है। साथ ही, आपात स्थिति में राजस्थान में अंतर-जिला आवागमन के लिए कलक्टर एवं उपखण्ड अधिकारी (एसडीएम) को पास जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। मुख्यमंत्री ने दूसरे राज्यों के श्रमिकों से अपने गृह राज्य के लिए पैदल नहीं निकलने की अपील करते हुए कहा कि वे बिना अनुमति लिए प्रस्थान ना करें। निर्धारित प्रक्रिया अपनाकर अनुमति प्राप्त करने वाले श्रमिकों के लिए राजस्थान सरकार उनके गृह राज्य से एनओसी प्राप्त कर उचित प्रबंध कर रही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में लगभग 18 लाख लोग अंतर-राज्यीय आवागमन के लिए रजिस्टर करा चुके हैं, जिनमें से 11 लाख लोग प्रदेश में आने वाले हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों को यहां आना तब तक संभव नहीं है, जब तक लॉकडाउन समाप्त होने पर नियमित रूप से सड़क, हवाई एवं रेलवे सेवाएं शुरू नहीं हो जाएं। गहलोत ने कहा कि आवागमन के लिए प्राथमिकता उन लोगों को मिलनी चाहिए जो धार्मिक यात्रा, पर्यटन, व्यापार या अस्थाई रूप से किसी दूसरे राज्य में गए और अचानक लॉकडाउन के कारण वहां फंस गए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने भी ऐसे लोगों को अपने गृह स्थान जाने के लिए यह छूट दी है। शेष प्रवासियों से पुनः आग्रह है कि धैर्य बनाए रखें और अपने स्थान पर रहें। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति दूसरे राज्य में आएगा उसे 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन की असुविधा का सामना करना पडे़गा, इसलिए जल्दबाजी नहीं करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल प्रवासी बंधु ही नहीं पूरे प्रदेश और देश में सभी लोग लॉकडाउन के कारण मानसिक रूप से परेशान हैं। इसका अहसास हम सभी को और राज्य सरकार को भी है। एक तरफ लोगों का जीवन बचना सर्वोपरि है तो आजीविका का महत्व भी कम नहीं है। इसीलिए प्रदेश में मॉडिफाइड लॉकडाउन लागू करके संक्रमण को रोकने और आमजन जीवन को पटरी पर लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। गहलोत ने कहा कि क्वारेंटाइन से घबराने की आवश्यकता नहीं इसमें संदिग्ध व्यक्ति को अपने निवास या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित स्थान पर 14 दिन के लिए परिवार से बचकर अलग कमरे में रहना है। उन्होंने कहा कि क्वारेंटाइन का हव्वा खड़ा करने की जरूरत नहीं है। कोरोना को लेकर समाज में किसी प्रकार की भ्रांतियां नहीं फैलनी चाहिए। इस संक्रमण से अधिकांश लोग ठीक हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में है और अब तक डेढ़ लाख से अधिक सैम्पल की जांच की जा चुकी है, जो देश में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में चिकित्सा सुविधाओं के आधारभूत ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है। प्रतिदिन 10 हजार से अधिक सैम्पल टेस्ट करने की क्षमता विकसित कर ली गई है और पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर और आईसीयू बेड उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि यह संतोष की बात है कि अब तक इनकी जरूरत नहीं पड़ी है। गहलोत ने कहा कि प्रदेश में पॉजिटिव मरीजों की संख्या अधिक दिख रही है क्योंकि हमने बड़ी संख्या में जांच की हैं। यह अच्छा प्रयास है कि संक्रमित व्यक्ति के बारे में जानकारी सामने आए क्योंकि तभी संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सकेगा। अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भी यही मान्यता है कि अधिक से अधिक लोगों के सैम्पल लेकर जांच की जाए। यह कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है।   साभार-khaskhabar.com  

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