BREAKING NEWS

मीडियाभारती वेब सॉल्युशन अपने उपभोक्ताओं को कई तरह की इंटरनेट और मोबाइल मूल्य आधारित सेवाएं मुहैया कराता है। इनमें वेबसाइट डिजायनिंग, डेवलपिंग, वीपीएस, साझा होस्टिंग, डोमेन बुकिंग, बिजनेस मेल, दैनिक वेबसाइट अपडेशन, डेटा हैंडलिंग, वेब मार्केटिंग, वेब प्रमोशन तथा दूसरे मीडिया प्रकाशकों के लिए नियमित प्रकाशन सामग्री मुहैया कराना प्रमुख है- संपर्क करें - 0129-4036474

चंडीगढ़ । पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने प्रवासियों के संकट को और गहरा बनाने और ऐसे गंभीर मुद्दे के सियासीकरन के लिए केंद्र और राज्यों में भाजपा की सरकारों को सीधे तौर पर जि़म्मेदार ठहराया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस का नेतृत्व वाले राज्यों समेत समूची पार्टी संकट की इस घड़ी में प्रवासी कामगारों की सहायता के लिए दिन -रात काम कर रही है और उनकी अपनी सरकार 16 मई तक 178909 प्रवासियों को उनके गृह राज्योंं में भेजने के लिए 149 रेल गाडिय़ों का प्रबंध कर चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रवासी मज़दूरों को उनके घर भेजने के लिए पंजाब में यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। निर्मला सीतारमण की तरफ से बेतुकी टिप्पणी कि सोनिया गांधी को प्रवासी कामगारों की मदद के लिए अपने मुख्यमंत्रियों को कहना चाहिए, पर सख्त प्रतिक्रिया ज़ाहिर करते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि कांग्रेस प्रधान ने इस मुद्दे समेत लॉकडाउन और कोविड से सम्बन्धित अन्य मामलों पर पार्टी के मुख्यमंत्रियों के साथ निरंतर विचार-विमर्श किया। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने निर्मला सीतारमण की उस टिप्पणी को भी पूरी तरह बेबुनियाद और अनुचित करार दिया है जिसमें वित्त मंत्री ने कहा था कि राहुल गांधी को प्रवासी मज़दूरों को मिलने के मौके पर उनके साथ ही चलना चाहिए था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी मज़दूरों की सुध लेने के लिए सडक़ोंं पर उतरे राहुल गांधी पर तंज कसने की बजाय निर्मला सीतारमण को भाजपा के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार के साथ बात करके प्रियंका गांधी की तरफ से प्रवासियों को लाने के लिए बसों को प्रवेश करने की आज्ञा दिलानी चाहिए क्योंकि यू.पी. प्रशासन की तरफ से इन बसों को प्रवेश करने की आज्ञा न देने के कारण यह बसें दिल्ली -यू.पी. सरहद पर रुकी हुर्इं हैं। निर्मला का टिप्पणी को बेसवादी और साफ़ तौर पर राजनीति से प्रेरित बताते कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि देश के वित्त मंत्री को ऐसा शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि हर कांग्रेसी मुख्यमंत्री, नेता और वर्कर इस सुनिश्चत करने में लगा है कि प्रवासी मज़दूरों की इस दु:ख की घड़ी में हर संभव मदद की जाये, जब केंद्र सरकार ने प्रवासी मज़दूरों को उनके ही रहमो -कर्म पर छोड़ा हुआ है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि सोनिया गांधी के ही कहने पर पूरी कांग्रेसी लीडरशिप ऊपर से लेकर नीचे तक प्रवासी मज़दूरों की मदद के लिए कोशिशें कर रही है जोकि अपनी जान जोखिम में डाल कर अपने घरों को जा रहे हैं। उन्होंने निर्मला सीतारमण को याद करवाते हुये कहा कि सोनिया गांधी की तरफ से अपनी पार्टी के सभी राज्यों के इकाईयों को प्रवासी मज़दूरों की रेल टिकटों का खर्चा उठाने संबंधी कहने के बाद ही केंद्र सरकार ने टिकटों की कुल कीमत का 85 प्रतिशत ख़र्च अपने सिर लेने जबकि 15 प्रतिशत राज्यों की तरफ से वहन करने के फ़ैसले का ऐलान किया। यहाँ तक कि यह मज़ाक था कि चार्टिड रेलों की टिकटों की कीमत वसूली जा रही थी बजाय कि ए.सी. दूसरा दर्जा स्लीपर की जो कि प्रवासी मज़दूरों को मुहैया करवाया गया था। उन्होंने कहा कि इस लिए राज्य सरकार की तरफ से मज़दूरों की टिकटों की 100 प्रतिशत कीमत अदा की जा रही है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि सोनिया गांधी के निर्देशों पर कई स्थानों पर कांग्रेस पार्टी के दफ़्तर मज़दूरों और गरीबों को खाना मुहैया करवाने के लिए रसोईयों में तबदील हो गए हैं जबकि पार्टी के विधायक निजी तौर पर इनके यातायात की देख -रेख कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में उन्होंने ख़ुद प्रधानमंत्री को 30 मार्च, 2020 को पत्र लिख कर मज़दूरों की मुश्किलों को भारत सरकार के ध्यान में लाया था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से प्रवासी कामगारों के लिए ऐलाने कथित आर्थिक पैकेज से काफ़ी समय पहले ही पंजाब सरकार की तरफ से राज्य के राशन कार्ड धारकों के बराबर प्रवासी कामगारों को खाने के पैक्ट मुहैया करवाने शुरू कर दिए थे। पंजाब सरकार की तरफ से पहले ही 1 करोड़ सूखे खाद्य पदार्थ के पैक्ट और 2 करोड़ खाद्य पैक्ट गरीबों ज़्यादातर प्रवासी कामगारों के लिए पंजाब में बाँटे जा चुके हैं।   साभार-khaskhabar.com  

Read More

नई दिल्ली । केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डा. हर्ष वर्धन ने कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों में कोविड-19 से मुकाबला करने के लिए समुचित शारीरिक दूरी और व्यावहारिक शिष्टाचार सबसे बड़ी सोशल वैक्सीन है। उन्होंने कहा कि देश बेहतर स्थिति में हैं और हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में शुरूआती उपाय और जोरदार नीति एवं दृढता के साथ उत्साहजनक परिणाम दिखाए हैं। पिछले 14 दिन में कोविड मामलों के दोगुना होने की दर 11.5 प्रतिशत दिन थी वह सुधर कर पिछले 3 दिनों में 13.6 दिन हो गई है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में कोविड की मृत्यु दर 3.1 प्रतिशत है और रिकवरी दर में 37.5 प्रतिशत तक का सुधार हुआ है। शनिवार तक 3.1 प्रतिशत लोग आईसीयू में, 0.45 प्रतिशत लोग वेंटिलेटर पर और 2.7 प्रतिशत लोग ऑक्सीजन पर थे। देश में 17 मई तक कोविड-19 से संक्रमित मामलों की कुल संख्या 90,927 थीं जिनमें से 34,109 लोग स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं। दुर्भाग्य से 2,872 लोगों की मृत्यु हुई हैं। पिछले 24 घंटों में देश में कोविड-19 के 4,987 नये पुष्ट मामले सामने आए है। डा. हर्ष वर्धन ने बताया कि देश में कोविड-19 की जांच क्षमता में वृद्धि होकर प्रतिदिन एक लाख हो गई है और 373 सरकारी एवं 152 निजी प्रयोगशालाओं के द्वारा अब तक 22,79,324 जांच की जा चुकी है। कल एक ही दिन में 90,094 नमूनों की जांच की गई है। पिछले 24 घंटों में देश के 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों- अंडमान निकोबार, अरूणाचल प्रदेश, दादर नगर हवेली, चंडीगढ़, लद्दाख, मेघालय, मिजोरम और पडुच्चेरी में कोविड-19 का एक भी नया मामला सामने नहीं आया हैं। देश में स्वास्थ्य ढ़ाचे की चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कोविड-19 के प्रबंधन और मुकाबला करने के लिए देश में 1,80,473 बिस्तरों की सुविधा के साथ कोविड के 919 विशेष अस्पताल हैं। इसी प्रकार 1,28,304 बिस्तरों के साथ 2,044 विशेष कोविड स्वास्थ्य केंद्र तथा 9,536 क्वारंनटाइन सेंटर और 5,64,632 बिस्तरों की सुविधा के साथ 6,309 कोविड केयर सेंटर उपलब्ध हैं जिनमें आईसीयू, आइसोलेशन बिस्तर आदि सभी सुविधाएं है। केंद्र सरकार ने राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों तथा केंद्रीय संस्थानों को 90.22 लाख एन-95 मास्क और 53.98 लाख पीपीई किट उपलब्ध करवाए है। डा. हर्ष वर्धन ने कहा कि देश सामान्य स्थिति में लौटने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिए लोगों को शारीरिक स्वच्छता के सामान्य उपाय जैसे 20 सेकेंड़ तक साबुन से अथवा एलकोहल युक्त सेंनिटाइजर से हाथ धोना, सार्वजनिक स्थलों पर नहीं थूकना, कार्यस्थलों और लगातार छुई जाने वाली सतहों जैसे टेबल आदि को सेनिटाइज करना, हमेशा सार्वजनिक स्थानों पर फेस कवर उपयोग करना आदि की सलाह दी जा रही है। साथ ही खुद की श्वसन क्रिया को भी सामान्य बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। डा. हर्ष वर्धन ने कहा कि वर्तमान समय में शारीरिक दूरी और व्यावहारिक शिष्टाचार से बढ़कर और कोई बड़ी सोशल वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि एक दूसरे के साथ संपर्क के समय दो गज की दूरी के सिद्धांत को सुनिश्चित किया जाए। साथ ही सामाजिक और अन्य समारोह में एकत्रित होने के बजाय वर्चुअल मीटिंग को चुनना सबसे बेहतर विकल्प है। उन्होंने यह सलाह भी दी कि जब तक अति आवश्यक नहीं हो तब तक यात्रा नहीं की जाए और संक्रमण से बचने के लिए भीड़ भाड़ के स्थानों से बचा जाए।   साभार-khaskhabar.com  

Read More

चंडीगढ़ । पंजाब में नये मामलों में कमी आने के मद्देनजऱ मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने राज्य में 31 मई तक कर्फ्यू को लॉकडाउन में बदलने का ऐलान किया है। इसी के साथ ही मुख्यमंत्री ने 18 मई से ग़ैर-सीमित जोनों में अधिक से अधिक संभावी ढील देने और सीमित सार्वजनिक परिवहन बहाल करने के भी संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि ग़ैर-सीमित इलाकों में दुकानें और छोटे कारोबार शुरू करने के लिए सीमित जोन सख्ती से सील किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन 4.0 के लिए केंद्र सरकार के नये दिशा -निर्देशों का लेखा -जोखा करके दी जाने वाली छूटों का ऐलान सोमवार तक कर दिया जायेगा। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा के हित में शैक्षिक संस्थाएं फिलहाल बंद रहेंगी। मुख्यमंत्री ने लोगों को और ज्यादा सचेत रहने और उनकी सरकार को सहयोग करने की अपील की क्योंकि राज्य में पिछले 55 दिनों से सख्ती से लागू किये कफ्र्यू को लॉकडाउन में तबदील करके ढील दी जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने विरोधी पक्ष को कोविड के गंभीर मुद्दे पर संकुचित राजनीति न खेलने की अपील की है और संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार के साथ सहयोग करने के लिए कहा जिसका उन्होंने पहले वायदा भी किया था। मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि प्रधानमंत्री की तरफ से माँगे गए सुझाव अनुसार राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को सुझाव भेज कर छूटों देकर राष्ट्रीय लॉकडाउन की सिफ़ारिश की थी जिस को 31 मई तक बढ़ाया जाना चाहिए। केंद्रीय सरकार की तरफ से ग्रीन /ओरेंज /रेड जोन के वर्गीकरण की बजाय सीमित या ग़ैर -सीमित जोन ऐलानने का पक्ष लेते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र को भी यही सुझाव दिया है। उन्होंने बताया कि इस समय पर पूरा जि़ला ही एक जोन है या अधिकांशत: वहां 2यूनिट जैसे नगर निगम का क्षेत्र और ग़ैर -निगम क्षेत्र होते हैं। मौजूदा प्रणाली के मुताबिक जिले के एक हिस्से में कोविड मामलों के कारण पूरे जिले को रेड जोन की श्रेणी में डाल दिया जाता है जिससे वहां उद्योग और दुकानों आदि कारोबार बहुत सी बन्दिशों के तहत आ जाते हैं। उन्होंने इस प्रणाली को ख़त्म करके सीमित इलाके पर आधारित रणनीति को अपनाने के लिए कहा। ‘कैप्टन को सवाल ’ की लड़ी के तौर पर फेसबुक के ज़रिये वार्तालाप के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में नांदेड़ से श्रद्धालुओं और कोटा आदि से विद्यार्थियों के आने से मामलों में एकदम विस्तार हुआ था परन्तु बीते चार दिनों से रोज़मर्रा के नये मामलों में कमी आई है। उन्होंने लोगों की तरफ से दिए सहयोग के लिए भी धन्यवाद किया जिस कारण राज्य कोविड के मामलों पर काबू पा सका है। उन्होंने बताया कि दूसरे कुछ राज्यों के उलट पंजाब में दुगने मामलों की दर 44 दिन है जबकि महाराष्ट्र की 11 दिन की दर है। उन्होंने चेतावनी देते हुये कहा कि अन्य प्रवासी कामगार और एन.आर.आईज़ के पंजाब में दाखि़ल होने से संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में से वापस आने के लिए 60 हज़ार और विदेशों में से पंजाब लौटने के लिए 20 हज़ार पंजाबियों की तरफ से अब तक रजिस्ट्रेशन करवाई जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अपने राज्यों को वापस जाने के इच्छुक प्रवासी कामगार के जाने के लिए ख़र्च और हर सुविधा जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि यह यकीनी बनाने के लिए कि कोई व्यक्ति भूखा न रहे, हर यत्न किया जा रहा है। उन्होंने इस बात से सहमति जताई कि अब तक की गई एक लाख खाद्य पैकटों की बाँट काफ़ी नहीं और इस सम्बन्ध में और कदम उठाए जाने की ज़रूरत है। एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा संस्थान सख्ती से बंद रखे जाएंगे क्योंकि वह बच्चों की जि़न्दगियों को लेकर किसी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहते। उन्होंने कहा कि वह स्कूल जिनके पास बंदोबस्त है, वह ऑनलाइन क्लासों शुरू कर सकते हैं परन्तु यह फीस बढ़ाए बगैर और ट्युूशन फीस के अलावा और कोई चार्ज लिए बिना करना होगा। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बताया कि कि राज्य सरकार ने केंद्र को भेजी अपनी सिफारिशों में हवाई यातायात, ट्रेनों और अंतर-राज्ज़ीय बस सेवा कम संख्या यात्रियों की शर्त के साथ शुरू करने के साथ-साथ कोविड को ध्यान में रखते यात्रियों की कम सामथ्र्य की शर्त के साथ अंतर-जि़ला और जिलों के अंदर बस सेवा और यात्रियों और ड्राईवर के बीच स्क्रीन के प्रबंधों के साथ टैक्सी, कैब, रिक्शा, आटो रिक्शा कम संख्या यात्रियों की शर्त के साथ फिर शुरू करने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री द्वारा बताए राज्स सरकार के अन्य सुझावों में सभी मार्केट और मार्केट कम्पलैकसों में दुकानों खोलने की आज्ञा देना, शहरी क्षेत्रों में बिना किसी पाबंदी के उद्योगों और निर्माण कामों को चलाना और साथ ही सभी चीजों के लिए ई -कामर्स की इजाज़त देना शामिल है। राज्य सरकार के सुझावों के अनुसार निजी और सरकारी, दोनों दफ्तरों को आम दफ़्तरी समय के दौरान पूरे हफ्ते के लिए खुलने की आज्ञा दी जा सकती है। हालाँकि, राज्य 31 मई, 2020 तक शैक्षिक संस्थाओं में अध्यापन दोबारा शुरू करने के हक में नहीं है। मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि राज्य सरकार प्रात:काल 5बजे से शाम 7 बजे तक व्यक्तियों के यातायात पर कोई पाबंदी लगाने के हक में नहीं और यह सुझाव दिया गया कि पाबंदी, अगर कोई है, तो शाम को 7बजे से प्रात:काल 5बजे के बीच लगाई जा सकती है। हालाँकि, राज्य सरकार ऐसी गतिविधियों पर निरंतर रोक के हक में थी जहाँ एक छत के नीचे बड़ी भीड़ होगी जैसे कि शॉपिंग मॉल, सिनेमा घर, विवाह और दावत हॉल, सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक जलसा, धार्मिक स्थान आदि। एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि धान की बुआई की तारीख़ 10 जून से अग्रिम करके 1जून करना संभव नहीं है क्योंकि अभी गेहूँ मंडियों में आ रही है। मुख्यमंत्री ने संगरूर के एक छोटे कारोबारी के सवाल के जवाब में कहा कि हालाँकि उद्योगों के लिए प्रोत्साहन भारत सरकार पर निर्भर करता है और वह केंद्र के पास यह मुद्दा निजी तौर पर उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 18 मई के बाद अधिक से अधिक दुकानों और कारोबार का खुलना यकीनी बनाने के लिए सभी यत्न किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों में इस संबंधी विस्तृत दिशा -निर्देश जारी किये जाएंगे। साभार-khaskhabar.com  

Read More

चंडीगढ़ । पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने राज्य की आईटीआई की छात्राओं को 10 लाख मास्क बनाने के लिए बधाई दी है। तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पंजाब आई.टी.आई. की छात्राओं ने अब तक 10 लाख मास्क बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया है और इतनी बड़ी संख्या में मास्क बनाकर यह छात्राएं देश की सभी आई.टी.आईज़ में से अव्वल रही हैं। उन्होंने कहा कि सिफऱ् 3 लाख मास्क तैयार करने वाले हरियाणा आईटीआई के विद्यार्थी दूसरे स्थान पर हैं। तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि सभी अधिकारियों, प्रिंसिपलों और इंस्ट्रक्टरों ने हमारे आईटीआई विद्यार्थियों को कोविड-19 के विरुद्ध लड़ाई में अपना योगदान देने के लिए अपने घर बैठकर मास्क बनाने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने बताया कि यह बेमिसाल कार्य राज्य की 78 सरकारी आई.टी.आई. में अपैरल ट्रेड की पढ़ाई करने वाली तकरीबन 4500 छात्राओं ने किया है। उन्होंने कहा कि छात्राओं द्वारा मास्क की सिलाई, सेवा के तौर पर की गई है। चन्नी ने आगे कहा कि इन आई.टी.आईज़ के प्रिंसिपलों और स्टाफ ने दान के द्वारा एकत्रित किए गए कच्चे माल को विद्यार्थियों के घरों तक पहुँचाया और फिर देह से दूरी के नियम को बनाए रखने के लिए उनके घरों से ही मास्क एकत्रित किए। तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग वर्मा ने कहा कि सबसे अच्छी बात यह है कि स्थानीय प्रशासन के ग़ैर-सरकारी संगठनों, आईएमसी के चेयरमैन और उद्योगपतियों ने दान के द्वारा कच्चा माल एकत्रित किया। उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य कर्मचारियों, म्यूंसीपल कॉर्पोरेशन, कोविड योद्धाओं और जरूरतमंद व्यक्तियों जैसे आशा वर्करोंं, आंगनवाड़ी वर्करों, किसानों, प्रवासी मज़दूरों को मास्क मुफ़्त बाँटे गए हैं। साभार-khaskhabar.com  

Read More

जिनेवा:विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने शनिवार को चेतावनी दी, जैसा कि कुछ देशों में सड़कों पर कीटाणुनाशक का छिड़काव किया जाता है, यह कोरोनोवायरस को खत्म नहीं करता है और यहां तक ​​कि एक स्वास्थ्य जोखिम भी पैदा करता है। वायरस को डिसइंफेक्ट करने के लिए सतहों की सफाई पर एक दस्तावेज में, डब्ल्यूएचओ का कहना है कि छिड़काव अप्रभावी हो सकता है। डब्ल्यूएचओ ने कहा , "गलियों या बाज़ार की जगहों जैसे बाहरी स्थानों पर छिड़काव या फ्यूमिगेशन करना ... COVID-19 वायरस को ख़तम नहीं कर पता क्योंकि धुल और गंदगी डिसइंफेक्टेंट का असर ख़तम कर देते हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि कीटाणुनाशक को व्यक्तियों पर छिड़कना "किसी भी परिस्थिति में रेकमेंडेड नहीं है"।इससे शारीरिक और मानसिक नुकसान हो सकते हैं इनडोर एरिया में भी स्प्रे और फ्यूमिगेशन सीधे नहीं करना चाहिए, बल्कि इसमें कपड़े या वाइप को भिगोकर सफाई करनी चाहिए। साभार-khaskhabar.com  

Read More

जयपुर । पश्चिम बंगाल ने अपने प्रवासियों को राजस्थान से ले जाने के लिए छह ट्रेनों की मंजूरी दी है। ये ट्रेन 18 मई से 3 जून तक बंगाल के विभिन्न जिलों के निवासियों को राजस्थान से लेकर जाएंगी। बिहार एवं उत्तर प्रदेश के लिए भी लगातार टे्रनों का संचालन किया जा रहा है। राज्य सरकार ने यूपी-बिहार जाने वाले श्रमिकों को जल्द से जल्द अपना पंजीकरण कराने का आग्रह किया है जिससे उन्हें इन ट्रेनों के जरिए गंतव्य तक भिजवाया जा सके। बंगाल सरकार द्वारा श्रमिकों को राजस्थान से ले जाने के लिए मंजूर की गई पहली ट्रेन पाली से 18 मई को रवाना होगी। इसके बाद 20, 28 एवं 30 मई को जयपुर से तीन ट्रेने पश्चिम बंगाल जाएंगी। शेष दो ट्रेन 1 एवं 3 जून को जयपुर से बंगाल के श्रमिकों एवं अन्य व्यक्तियों को लेकर रवाना होंगी। राज्य सरकार ने बंगाल के श्रमिकों को जल्द ही अपना रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा है ताकि उनको व्यवस्थित रूप से इन ट्रेनों से रवाना किया जा सके। श्रमिकों के लिए साधनों की लगातार व्यवस्था की जा रही है। वहीं शुक्रवार को उत्तर प्रदेश जाने वाले 102 श्रमिकों को महुवा, दौसा के श्रमिक कैम्प से बसों के माध्यम से भरतपुर होते हुए हाथरस के लिए रवाना किया गया है। इसी प्रकार बस्सी के श्रमिक कैम्पों से भी पांच बसों में उत्तर प्रदेश के 195 श्रमिकों को रवाना किया गया है। साभार-khaskhabar.com

Read More

चंडीगढ़ । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से कृषि सैक्टर के लिए किये ऐलानों को जुमलों की गठरी कह कर रद्द करते हुये पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि आर्थिक पैकेज में संकट में घिरे किसानों को कोई तुरंत राहत नहीं दी गई जो इन मुश्किल हालातों एक के बाद एक दो बड़ी फसलों को संभालने की चुनौतियों से लड़ रहे हैं। आर्थिक पैकेज के अब तक ऐलाने गए तीनों हिस्सों ने समाज के जरूरतमंद वर्गों को निराशा के सिवाय और कुछ नहीं दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्पष्ट तौर पर केंद्र उन लोगों के बचाव के लिए ज़रूरी कदम उठाने में असफल रही है जिनको कोविड संकट केमद्देनजऱ लगाए गये लॉकडाऊन के दौरान संघर्ष करना पड़ रहा है। कैप्टन अमरिदर सिंह ने किसानों के लिए किये ऐलानों में किसानों की मुश्किलों का कोई ठोस हल न करने पर गहरी चिंता ज़ाहिर करते हुये कहा कि किसानों को तत्काल राहत की ज़रूरत है न कि सुधार उपायों की, जो लंबे समय से चले आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक होने के कारण पंजाब को कृषि पक्ष से गेहूँ की कटाई /खरीद के दौरान किसानों के लिए सहायता की ज़रूरत थी जो केंद्र प्रदान करने में असफल रहा। बार -बार विनतियाँ करने के बावजूद केंद्र सरकार ने मंडियों में अपनी उपज देरी से लाने वाले किसानों को बोनस नहीं दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र की तरफ से पूरी सहायता की कमी के बावजूद पंजाब के किसानों ने अपनी हिम्मत और संघर्ष के साथ आगे बढ़ते हुये देश को एक बार फिर गेहूँ की और ज्यादा फ़सल मुहैया करवाई जोकि संकट की इस घड़ी में बहुत ज़रूरी है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य की एजेंसियों ने केंद्र की मदद से बिना निर्विघ्न और सुचारू खरीद को यकीनी बनाने के लिए दिन रात काम किया। कोविड प्रोटोकोल और लेबर की कमी से निपटने के लिए समय से पहले अब राज्य में धान की पनीरी की बीजाई शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक बार फिर केंद्र सरकार ने मदद करने का कोई संकेत नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कृषि सैक्टर के पैकेज के हिस्से के तौर पर वित्त मंत्री को किसानों और सहयोगी क्षेत्रों में काम करने वालों की जि़ंदगी पर सकारात्मक प्रभाव पहनने वाली लम्बे समय की योजनाएँ लाएं जिसकी तुरंत कोई ज़रूरत नहीं है, की बजाय पराली जलाने की रोकथाम के लिए प्रोत्साहन के तौर पर बोनस के साथ-साथ धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में विस्तार करने का ऐलान करना चाहिए था। इस संबंधी राज्य सरकार द्वारा पहले ही माँग की गई थी। प्रवासी मज़दूरों समेत पहले हुए ऐलानों का जि़क्र करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि यहाँ तक कि उनको भी कोई तुरंत ठोस राहत भी नहीं दी गई। दो महीने के मुफ़्त राशन, जोकि किसी भी स्थिति में राज्य सरकारें पहले ही मुहैया करवा रही हैं, से प्रवासी लोगों के बड़े स्तर पर औद्योगिक केन्द्रों और शहरों से पलायन को रोका नहीं जा रहा। उन्होंने कहा कि किसी स्पष्ट प्रोत्साहन जो प्रवासियों को वापस रहने के लिए उत्साहित कर सके, की अनुपस्थिति से लॉकडाऊन के बाद भी देश का औद्योगिक और आर्थिक पुनरूद्धार नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को इस समय विभिन्न वर्गों की ख़ास ज़रूरतों ख़ास कर कोविड लॉकडाउन से प्रभावित होने वाली ज़रूरी ज़रूरतों की तरफ ध्यान देने की अपील की और लम्बे समय के सुधारों को आर्थिक और सामाजिक के पक्ष से चीजें स्थिर होने तक और उपयुक्त समय के लिए छोडऩे की अपील भी की। साभार-khaskhabar.com

Read More

भारत में कोरोनावायरस से संक्रमित होने वालों की संख्या 86 हजार के आंकड़े के पास पहुंच गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात की जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पिछले 24घंटों में भारत में कोरोना वायरस के 3,970 मामले सामने आए हैं और 103 मौतें हुई हैं। देश में अब कोरोना पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 85,940 है(इसमें 53,035सक्रिय मामले, 30,153ठीक/ डिस्चार्ज/ विस्थापित हो चुके मामले और 2,752मौतें शामिल हैं) साभार-khaskhabar.com

Read More

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि प्रवासी मजदूरों का पैदल अपने गंतव्य के लिए रवाना होना अत्यंत पीड़ादायक है। राज्य सरकार वे सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगी, जिनसे इन श्रमिकों को घर जाने के लिए पैदल चलने की पीड़ा नहीं झेलनी पडे़। उन्होंने इसके लिए सभी जिला कलेक्टरों को तत्काल प्रभाव से तमाम आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि ऎसे श्रमिकों के लिए विशेष शिविर खोले जाएं और इन शिविरों में भोजन, पेयजल एवं शौचालय सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। इन व्यवस्थाओं के लिए उपखण्ड अधिकारी जिम्मेदार होंगे। गहलोत ने रोडवेज के प्रबंध निदेशक को निर्देश दिए हैं कि वे जिला कलेक्टरों की मांग के अनुरूप बसें उपलब्ध कराएं ताकि इनके माध्यम से श्रमिकों को आसानी से निर्धारित स्थान तक पहुंचाया जा सके। जिला कलेक्टर यह भी सुनिश्चित करें कि महत्वपूर्ण मार्गों वाले उपखण्ड अधिकारी के पास मांग के अनुरूप बसें उपलब्ध हों। उन्होंने कहा है कि उपखण्ड अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी श्रमिक सड़क पर पैदल यात्रा नहीं करें। वे इसके लिए निगरानी करवाएंगे जिसमें पुलिस उपाधीक्षक उनका सहयोग करेंगे। श्री गहलोत ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे संवेदनशीलता के साथ इन श्रमिकों की मांग के अनुरूप रोडवेज बसों और विशेष टे्रनों की व्यवस्था सुनिश्चित करें। उत्तरप्रदेश जाने वाले पैदल श्रमिकों की अधिक संख्या को देखते हुए जयपुर, दौसा एवं भरतपुर जिला कलेक्टर रोडवेज बसों के जरिए इन श्रमिकों को भरतपुर स्थित कैम्प में भिजवाएं। बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखण्ड जाने वाले श्रमिकों को रेल द्वारा भेजे जाने के लिए तत्परता से व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने जिला पुलिस अधीक्षकों को भी यह निर्देश दिए हैं कि पुलिस चैक पोस्ट से गुजरने वाले पैदल श्रमिकों को पुलिसकर्मी धैर्य के साथ समझाएं और नजदीकी शिविर में भेजें। उन्होंने कहा कि अनुमति देने वाले राज्यों के श्रमिकों को अंतरराज्यीय सीमा तक छोड़ने के लिए मांग के आधार पर बसें उपलब्ध करवाई जाएं, जिनमें यात्रा के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और स्क्रीनिंग के नियम की प्रभावी रूप से पालना की जाए। जिला कलेक्टरों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि 500 किलोमीटर से अधिक दूरी पर जाने वाले श्रमिकों को रेल से भेजने के लिए उनकी सूचियां तैयार कर परिवहन आयुक्त को उपलब्ध कराएं ताकि वे टे्रनों के लिए उचित समन्वय कर सकें। साथ ही, वे यह भी सुनिश्चित करें कि निर्धारित अन्तर्राज्यीय यात्रा पास अथवा अनापत्ति प्रमाण पत्र से सम्बन्धित कोई भी प्रकरण लम्बित नहीं रहे। साभार-khaskhabar.com

Read More

चमोली। बदरीनाथ धाम के कपाट आज शुक्रवार सुबह चार बजकर 30 मिनट पर खोल दिए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से भगवान बदरी विशाल की प्रथम पूजा-अर्चना कराई गई। इस दौरान वहां पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मुख्य पुजारी रावल के साथ बहुत सीमित लोग ही मौजूद रहे। ऑनलाइन बुक हो चुकी पूजाओं को यात्रियों की ओर से उनके नाम से संपादित किया जाएगा। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब कपाट खुलते वक्त धाम में श्रद्धालु मौजूद नहीं थे। सबसे पहले बदरीनाथ मंदिर के सिंहद्वार के द्वार वेद मंत्रों की ध्वनि के साथ खोले गए। द्वार के ताले की चाबी देवस्थानम बोर्ड के द्वारा खोली गई। इसके बाद मंदिर के गर्भ गृह के द्वार के खोले गए। मंदिर खुल जाने के बाद उद्घाटन समारोह में मौजूद सभी लोगों ने पूजा कर भगवान बद्री विशाल से जल्द ही संसार को कोरोना मुक्त करने की कामना की। भगवान बदरी विशाल के गर्भ गृह के द्वार खुलते ही बदरीनाथ के रावल ईश्वरी प्रसाद नम्बूदरी ने गर्भ गृह में सबसे पहले प्रवेश किया। शीतकाल में जिस ऊनी घृत कम्बल को भगवान को ओढ़ाया गया था, उसे रावल ने श्रद्धा पूर्वक निकाला। इसके बाद रावल ने पवित्र जलों से भगवान का स्नान करवाया और भव्य अभिषेक किया। इस दौराना सभा मंडप में धर्माधिकारी और अपर धर्माधिकारी वेद पाठी मंत्रोच्चार करते रहे। पुजारी रावल के अलावा धर्माधिकारी, अपर धर्माधिकारी, सीमित संख्या में ही हक हकूकधारी और देवस्थानम बोर्ड के अधिकारी, कर्मचारी मौजूद रहे। इस दौरान वहां पर मौजूद लोंगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मास्क पहने देखा गया। उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि कोरोना लॉकडाउन के मद्देनजर सोशल डिस्टेंसिंग सहित सरकारी एडवाइजरी का पालन किया गया। मास्क पहने गए एवं साफ-सफाई का ध्यान रखा गया। उन्होंने कहा, "कपाट खुलने के बाद वेद मंत्रों की ध्वनियों से बदरीशपुरी गुंजायमान जरूर हो गई तथा मंदिर फूलो की सजावट के साथ बिजली की रोशनी से जगमगा रहा था। इस यात्रा वर्ष कोरोना महामारी को देखते हुए चार धाम यात्रा शुरू नहीं हो सकी है। केवल कपाट खोले गए हैं। कपाट खुलने को लेकर देवस्थानम बोर्ड ने तैयारियां पूरी कर ली थी।" जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने कहा, "धाम परिसर में सामाजिक दूरी का पूरी तरह से पालन किया जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति को मास्क पहनना जरूरी होगा। निर्देश जारी किए गए हैं कि लॉकडाउन की अवधि तक धाम में पहुंचे पुजारियों को बिना प्रशासन की अनुमति के बदरीनाथ क्षेत्र से अन्यत्र जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।" कपाट खुलने के मौके पर रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी सहित देवस्थानम बोर्ड के प्रभारी अधिकारी बी.डी.सिंह, नायब तहसीलदार प्रदीप नेगी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, अपर धर्माधिकारी सत्यप्रसाद चमोला, थानाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, अभिसूचना निरीक्षक सूर्य प्रकाश शाह आदि मौजूद रहे। इससे पहले गुरुवार को घड़ा तेल कलश यात्रा के साथ बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी बदरीनाथ धाम पहुंचे। योग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर में कुबेर जी, उद्धव जी और गरुड़ जी की विशेष पूजाएं हुईं। हक-हकूकधारियों ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए भगवान को पुष्प अर्पित किए। भक्तों ने भगवान बदरीनाथ से कोरोना संकट से निजात दिलाने की कामना की। गौरतलब है कि पूर्व में धाम के कपाट खोलने की तिथि 30 अप्रैल तय हुई थी। लेकिन कोरोना संकट के कारण कपाट खोलने की तिथि 15 मई तय की गई । केदारनाथ धाम के कपाट विधि-विधान और पूजा अर्चना के बाद बीते 29 अप्रैल को खोल दिए गए थे। वहीं, विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट रविवार को अक्षय तृतिया के मौके पर वैदिक मंत्रोच्चारण व पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। गंगोत्री धाम के कपाट 12.35 व यमुनोत्री के कपाट ठीक दोपहर 12.41 पर खोले गए।  साभार-khaskhabar.com

Read More

नई दिल्ली| केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत 1.87 लाख पंचायतों में 2.33 करोड़ ग्रामीणों को काम की पेशकश की गई है। केंद्रीय मंत्री सीतारमण ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा, "प्रवासी श्रमिकों को लाभान्वित करने के लिए 1.87 लाख पंचायतों में 2.33 करोड़ ग्रामीणों को मनरेगा के तहत काम प्रदान किया गया है और उन्हें सक्रिय रूप से नामांकित किया जा रहा है।" सरकार ने 13 मई (2020) तक मई 2019 की तुलना में 40 से 50 प्रतिशत अधिक 14.62 करोड़ कामकाज का सृजन किया। उन्होंने कहा, "इससे अपने गृह राज्यों में लौट आए प्रवासी मजदूरों को काम पाने में मदद होगी।" केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वे राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) का इस्तेमाल आश्रय स्थापित करने और शहरी गरीबों को भोजन व पानी उपलब्ध कराने के लिए करें और इसमें प्रवासी मजदूरों को भी शामिल करें। वित्त मंत्री ने कहा कि इस उद्देश्य के लिए 11 हजार करोड़ रुपये भेजे गए हैं। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) ने अब तक तीन करोड़ मास्क और 1.20 लाख लीटर सैनिटाइजर्स प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान रोजगार पैदा करने के लिए 7 हजार 200 नए एसएचजी का गठन किया गया है। साभार-khaskhabar.com  

Read More

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस में दिन ब दिन कोरोना संक्रमित जवानों की संख्या बढ़ती जा रही है। करीब दो महीने में अब तक एक आईपीएस अधिकारी सहित 140 से ज्यादा पुलिस जवान कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। हालांकि महकमे ने इससे बचने के लिए भी तमाम हितकारी कदम उठाये हैं। इन आंकड़ों में अधिकांश हवलदार सिपाही, दारोगा और इंस्पेक्टर शामिल हैं। एडिश्नल डीसीपी स्तर के 2015 बैच के युवा आईपीएस और कोरोना पॉजिटिव पाये गये अधिकारी शाहदरा जिले में तैनात हैं। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने अपने एक बहादुर सिपाही अमित राणा (भारत नगर थाना) को भी कोरोना संक्रमण के चलते खो दिया है। दिल्ली पुलिस के सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित जवान मध्य दिल्ली में मिले हैं। यहां चांदनी महल थाने में ही कई जवान एक साथ कोरोना संक्रमित मिलने से हड़कंप मच गया था। हालांकि अब इन जवानों में से कई ड्यूटी पर वापिस भी लौट आये हैं। दिल्ली पुलिस के लिए यह थोड़ी सकून भरी खबर है। अपने जवानों की कोरोना से हिफाजत के लिए दिल्ली पुलिस ने कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी है। कोरोना संक्रमित जवानों को लाने ले जाने के लिए विशेष किस्म के 6 वाहन भी तैयार किये गये हैं। बुधवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने उन तमाम सरकारी अस्पतालों के नामों का भी उल्लेख कर दिया, जिनमें कोरोना संक्रमित जवानों के इलाज के विशेष इंतजाम किये गये है। इन अस्पतालों में प्रमुख हैं लोक नायक, राम मनोहर लोहिया, एम्स, सफदरजंग, मैक्स हॉस्पिटल साकेत, राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी, एम्स झज्जर, पीजीआई सोनीपत, ईएसआईसी साहिबाबाद यूपी इत्यादि प्रमुख हैं। इन सभी अस्पतालों में कुछ बिस्तर दिल्ली पुलिस को कोरोना संक्रमित जवानों अफसरों के लिए सुरक्षित रखने को कहा गया है। ताकि आपात स्थिति में पुलिस जवान को इलाज की जरुरत के वक्त दाखिले में वक्त जाया न हो। दिल्ली पुलिस के कोरोना पॉजिटिव जवानों की देखभाल का सीधा जिम्मा अब विशेष आयुक्त ट्रैफिक ताज हसन के कंधों पर होगा। जो कोरोना संक्रमित जवान से लेकर उसके परिवार तक का ख्याल रखेंगे। साथ ही अस्पतालों में तत्काल कोरोनो संक्रमित जवानों के दाखिले का इंतजाम कराने वाली टीम में विशेष पुलिस आयुक्त महिला सुरक्षा नुजहत हसन को भी तैनात किया गया है। साभार-khaskhabar.com

Read More

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

स्वतंत्रता सेनानी पं. हुकम सिंह गौतम की पुण्यतिथि मनाई

Read More

Bollywood


विविधा


शंखनाद

पुरानी कहावत और नया भारत

Read More