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नई दिल्ली । केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने आज कहा कि वह सामुदायिक रेडियो को टीवी चैनलों के बराबर लाने के लिए विज्ञापनों हेतु एयर टाइम मौजूदा 7 मिनट प्रति घंटा से बढ़ाकर 12 मिनट प्रति घंटा करने के लिए उत्सुक हैं। जावडेकर एक विशिष्ट पहल के तहत एक ही समय प्रसारण करते हुए समस्त सामुदायिक रेडियो स्टेशनों के श्रोताओं को संबोधित कर रहे थे। यह प्रसारण आज सायं 7 बजे और 7:30 के बीच दो समान स्लॉट्स में हुआ। जावडेकर ने कहा कि जहां एक ओर सामुदायिक रेडियो की स्थापना के दौरान होने वाले खर्च का 75 प्रतिशत मंत्रालय द्वारा वहन किया जाता है और उसमें प्रमुख खर्च शामिल होते हैं, वहीं दैनिक परिचालन के खर्च स्टेशन द्वारा वहन किए जाते हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने इंगित किया कि वर्तमान में सामुदायिक रेडियो स्टेशनों को विज्ञापन के लिए 7 मिनट प्रति घंटा एयर टाइम की अनुमति होती है, जबकि टीवी चैनलों को 12 मिनट के एयर टाइम की इजाजत मिलती है। उन्होंने कहा कि वह समस्त रेडियो स्टेशनों को समान समय प्रदान करने के लिए उत्सुक हैं, ताकि उन्हें निधियों की मांग करने की आवश्यकता न हों और स्थानीय विज्ञापनों का प्रसारण सामुदायिक रेडियो स्टेशनों पर किया जा सके। अपनी आरंभिक टिप्प‍णियों में जावडेकर ने कहा कि सामुदायिक रेडियो अपने आप में समुदाय है। उन्हें ‘परिवर्तन के वाहक’ करार देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि ये स्टेशन रोजाना लाखों लोगों तक पहुंच बनाते हैं और मंत्रालय जल्द ही ऐसे रेडियो स्टेशनों की संख्या में वृद्धि करने की योजना लाएगा। जनता से कोरोना वायरस के खिलाफ अपनी जंग जारी रखने का आह्वान करते हुए श्री जावडेकर ने कहा कि हम इसे भी उसी तरह दूर भगाएंगे, जैसे हमने दूसरी बीमारियों को दूर भगाया है। हालांकि उन्होंने कहा कि अब नए तरह के हालात हैं, जिसमें 4 कदम शामिल हैं अर्थात जितना ज्यादा से ज्या‍दा संभव हो सके घर में रहना, बार-बार हाथ धोना, सार्वजनिक स्थानों पर मास्क लगाना और सामाजिक दूरी बरकरार रखना। सामाजिक दूरी और आर्थिक गतिविधि की चुनौतियों के बीच असमंजस के बारे में बोलते हुए श्री जावडेकर ने ‘’जान भी जहान भी’’ का मंत्र दोहराया और कहा कि कंटेनमेंट जोन्स में प्रतिबंध जारी हैं, जबकि ग्रीन जोन्स में आर्थिक गतिविधियां शुरू हो रही हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने सामुदायिक रेडियो स्टेशनों के अपने चैनलों पर समाचारों के प्रसारण से संबंधित प्रमुख मांग का भी जिक्र किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह सामुदायिक रेडियो स्टेशनों पर उसी तरह समाचारों के प्रसारण की अनुमति देने पर विचार करेंगे, जिस प्रकार एफएम चैनलों के साथ किया गया है। उन्होंने इन स्टेशनों को प्रोत्साहित करते हुए कि ये स्टेशन फेक न्यूज की बुराई से निपटने में प्रमुख भूमिका निभा सकेंगे। उन्होंने कहा कि ये स्टेशन ऐसी खबर का संज्ञान लेकर और स्थानीय स्रोतों से उसकी पुष्टि करवाकर कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने इन स्टेशनों को ऐसी खबरों को ऑल इंडियो के साथ भी साझा करने को कहा, ताकि सत्य की पहुंच को व्यापक बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने पीआईबी के अंतर्गत फैक्ट चेक सेल बनाया है और सामुदायिक रेडियो फैक्ट चेक सेल की भूमिका को भी पूर्णता प्रदान कर सकते हैं। केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री द्वारा हाल ही में प्रस्तुत किए गए आत्मनिर्भर भारत पैकेज के बारे में जावडेकर ने कहा कि यह एक समग्र पैकेज है, जिसमें कृषि और उद्योग सहित विविध क्षेत्रों के सुधारों को शामिल किया गया है तथा इस पैकेज का लक्ष्य आयात घटाना और निर्यात बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि पैकेज को लेकर अच्छी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है और जनता इस प्रोत्साहन से प्रसन्न है। साभार-khaskhabar.com

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जयपुर :जयपुर :राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश के छात्रों को कोटा से आगरा और झांसी ले जाने के लिए 36 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करने की मांग की है। आपको बता दें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोटा से अपने प्रदेश के छात्रों को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बात करके वापिस बुलाया था साभार-khaskhabar.com

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जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना संक्रमण के इस समय में प्रदेशवासियों को राहत देने के लिए एक और मानवीय एवं संवेदनशील निर्णय लिया है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में लॉकडाउन लागू होने के बाद विभिन्न कारणों से दिवंगत हुए लोगों के परिजन अस्थि विसर्जन के लिए जा सकें, इसके लिए विशेष बसें चलाई जाएं। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकार से इन बसों के संचालन पर सहमति के लिए शीघ्र वार्ता की जाए। गहलोत गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास पर कोरोना तथा क्वारेंटीन व्यवस्थाओं को लेकर कोर ग्रुप के साथ समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक है कि लॉकडाउन की पालना के कारण परिजन के निधन के बाद शोकाकुल परिवार अस्थियों का विसर्जन करने नहीं जा पाए। राज्य सरकार इस मार्मिक स्थिति से वाकिफ है। इस मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए ये विशेष बसें चलाने का निर्णय किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य राज्यों से आए प्रवासियों के क्वारेंटीन को लेकर किसी तरह की लापरवाही नहीं हो। जिला स्तर पर वरिष्ठ अधिकारी संस्थागत तथा होम क्वारेंटीन व्यवस्थाओं की लगातार मॉनीटरिंग करें। संस्थागत क्वारेंटीन में लोगों को भोजन, पानी सहित सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। राज्य स्तरीय क्वारेंटीन प्रबंध समिति की अध्यक्ष अतिरिक्त मुख्य सचिव वीनू गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में बेहतर क्वारेंटीन सुविधाओं के लिए 10 हजार से अधिक सेंटरों की व्यवस्था की गई है। राज्य में फिलहाल 7 लाख 18 हजार लोग क्वारेंटीन में हैं। इनमें से 34 हजार संस्थागत क्वारेंटीन में तथा शेष होम क्वारेंटीन में हैं। प्रमुख शासन सचिव सूचना प्रौद्योगिकी अभय कुमार ने बताया कि अब तक करीब 6 लाख लोग क्वारेंटीन अवधि पूरी कर चुके हैं। पुलिस महानिदेशक भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि क्वारेंटीन और लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार कार्यवाही अमल में लाई जा रही है। साभार-khaskhabar.com

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चंडीगढ़ । पंजाब सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी से अपने नागरिकों की सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए मोबाइल फोनों की सफ़ाई और रखरखाव सम्बन्धी विस्तृत एडवाइजऱी जारी की गई है। राज्य सरकार के एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि कोरोनावायरस (कोविड-19) एक दैहिक बीमारी है, जो ज़्यादातर मौकों पर छींक और खाँसी आने पर थूक के बूंदों के द्वारा साँस के ज़रिये अंदर जाने से, पीडि़त व्यक्ति के संपर्क में आने से और संक्रमित चीजों / वस्तुओं को छूने से फैलती है। हालाँकि यह वायरस अलग-अलग चीज़ों की सतह पर अलग-अलग समय तक जीवित रहता है, परन्तु रसायनिक किटाणुनाशकों के इस्तेमाल से यह आसानी से ख़त्म हो जाता है। इसलिए यदि सही जानकारी समय पर मिल जाए, तो कोरोनावायरस महामारी को रोका जा सकता है।   प्रवक्ता ने कहा मोबाइल फ़ोन के साथ-साथ रिसेप्शन काउन्टरों, मेज़ की ऊपरी सतहों, दरवाज़ों के हैंडल, टॉयलट, की-बोर्ड, माऊस, टैबलेट्स और मेज़ सबसे अधिक छूईं जाने वाली वस्तुएँ हैं। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा इस महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए काम वाले स्थानों / दफ़्तरों की सफ़ाई और चेहरा / मुँह न छूने सम्बन्धी एडवाइजऱी जारी की गई है। उन्होंने बताया कि मोबाइल फ़ोन वायरस के फैलाव का संभावित कारण हो सकता है, जो प्रत्यक्ष रूप से प्रयोग करने वाले व्यक्ति के चेहरे और मुँह के संपर्क में आता है। चाहे हाथ नियमित ढग़ से धोएं और साफ़ किए गए हों, परन्तु यह संक्रमण का एक संभावित स्रोत हो सकता है। एडवाइजऱी में कहा गया है कि मोबाइल पर यदि बहुत ज़रूरी बातचीत करनी पड़ती है तो फिर उसके बाद हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोएं या 70 प्रतिशत आईसोप्रोपाईल अल्कोहल युक्त सैनीटाईजऱ के साथ सैनेटाईज़ करो। मोबाइल फ़ोन को किसी अन्य सतह पर रखने से परहेज़ करें। मोबाइल फ़ोन और अपने चेहरे / मुँह के बीच सीधा संपर्क होने को रोकने के लिए हैडफ़ोन / हैडसैट (तार वाले / बिना तार वाले) का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। यदि संभव हो तो मोबाईन फ़ोन को स्पीकर फ़ोन पर प्रयोग करें। यदि हैडफ़ोन / हैडसैट उपलब्ध नहीं हैं तो स्पीकर फ़ोन का प्रयोग उनके विकल्प के तौर पर किया जा सकता है। अपना मोबाइल फ़ोन / हैडफ़ोन / हैडसैट किसी और के साथ साझा न करें। प्रवक्ता ने आगे कहा कि दफ़्तरों में मोबाइल फ़ोन के प्रयोग की बजाय इंटरकॉम की सुविधा को पहल दी जाए। हालाँकि इंटरकॉम को रोज़ाना किटाणुरहित किया जाए। यह सलाह दी जाती है कि मोबाइल के साथ सम्बन्धित यूजऱ सर्पोट गाईडलाईनज़ को ध्यान से पढ़ा जाए और सम्बन्धित मोबाइल कंपनी की वैबसाईट पर जाकर इन गाईडलाईनज़ (दिशा-निर्देशों) का अपडेटड वजऱ्न देखा जाए। एैपल और सैमसंग दोनों कंपनियों ने अपनी यूजऱ गाईडलाईन को अपडेट किया है, जिसके अनुसार 70 प्रतिशत आईसोप्रोपाईल अल्कोहल या क्लोरॉक्स डिसइंफैक्टिेग वाइप्स के साथ ‘स्विच-ऑफ’ मोड पर मोबाइल फ़ोन की सतह को साफ़ किया जा सकता है। मोबाइल फ़ोन की सतह साफ़ करने के लिए चरण-वार प्रक्रिया संबंधी बताते हुए प्रवक्ता ने कहा कि सफ़ाई से पहले फ़ोन को बंद करो और यदि इसके साथ कोई कवर, सामान और तारें हैं, तो उनको उतार दें। डिवाइस की सतह साफ़ करने के लिए एक नरम, लिंट-फ्री, वॉटर प्रूफ़ वाइप का प्रयोग करें (जैसे कि कैमरा लैंस वाइप आदि)। सफ़ाई वाले कपड़े के कोनों को आईसोप्रोपाईल अल्कोहल या क्लोरॉक्स डिसइंफैक्टैंट की थौड़ी सी मात्रा के साथ गीला करें और फ़ोन के अगले और पिछले हिस्से को अच्छी तरह से साफ़ करें। इस दौरान ब्लीच का प्रयोग नहीं करना चाहिए और किसी भी खुली जगह से नमी को अंदर जाने से रोका जाए। किसी भी तरह का कठोर रसायन ओलेओ-फ़ोबिक स्क्रीन को नुकसान पहुँचा सकता है, जो कि फ़ोन की टच स्क्रीन की सैंस्टीविटी को खऱाब कर सकता है। फ़ोन की स्क्रीन पर कम्प्रेसर या ब्लीच को सीधे तौर पर प्रयोग न करें साभार-khaskhabar.com  

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चंडीगढ़ । पंजाब सरकार ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, नयी दिल्ली में सुविधा केंद्र स्थापित किया है जिससे विशेष उड़ानों के द्वारा विदेशों से वापस आ रहे पंजाबियों को राज्य में उनके सम्बन्धित जिलों में भेजने के लिए मदद की जायेगी जहाँ उनको संस्थागत एकांतवास में रहना पड़ेगा। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि इस सुविधा केंद्र में यातायात की सुविधा का बंदोबस्त किया गया जिससे विदेशों में फंसे एन.आर.आईज़ और पंजाबियों की उनके गृह जिलों में सुविधाजनक वापसी को यकीनी बनाया जा सके जहाँ उनको 14 दिनों के लिए एकांतवास में रहने के लिए रुकना पड़ेगा और कोविड के लिए टैस्ट भी लिया जायेगा। जिन व्यक्तियों के टैस्ट नेगेटिव पाये जाएंगे, उनको दो और हफ़्तों के स्वै-एकांतवास के लिए घर भेज दिया जायेगा जबकि पॉजिटिव पये जाने वालों को देखभाल /इलाज के लिए एकांतवास केन्द्रों में भेज जायेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘वन्दे मातरम मिशन ’ के अंतर्गत 20,000 पंजाबियों और एन.आर.आईज़ की घर वापसी की उम्मीद है और इनमें बहुत से उड़ानों के द्वारा नयी दिल्ली पहुँच रहे हैं। उन्होंने बताया कि हवाई अड्डे पर स्थापित किया गया सुविधा केंद्र बिना किसी हफड़ा-दफड़ी या दुविधा के बेहतर तालमेल यकीनी बनाऐगा। उन्होंने कहा कि विदेशों में से पंजाब में अपने पैतृक स्थानों पर वापस आने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने वालों की सुरक्षित वापसी के लिए अलग-अलग देशों में कोआरडीनेटर उसी तजऱ् पर नियुक्त किये गए हैं, जिस तरह उनकी सरकार द्वारा विशेष श्रमिक रेलों के द्वारा प्रवासी कामगारों के आने -जाने की सुविधा के लिए नोडल अफ़सर नियुक्त किये गए हैं। प्रवासी भारतीय मामलों संबंधी कैबिनेट मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी ने बताया कि इन लोगों के एकांतवास के लिए सम्बन्धी जिलों के होटलों के अंदर उचित प्रबंध किये गए हैं और जो विद्यार्थी और प्रवासी होटलों का ख़र्च नहीं उठा सकते, उनके लिए एकांतवास की सुविधा मुफ़्त उपलब्ध करवाई जायेगी। प्रवासी भारतीय मामलों संबंधी सचिव श्री राहुल भंडारी ने बताया कि इंदिरा गांधी अंतर-राष्ट्रीय एयरपोर्ट में सुविधा केंद्र दिन के 24 घंटे काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि बीते कल यू.एस.ए से अमृतसर में एक फ्लाइट पहुँची थी जबकि अगामी हफ्ते में प्रवासी पंजाबियों /एन.आर.आईज़ को लाने के लिए दिल्ली और अमृतसर में कई फ्लाईटें पहुँचेंगी। उन्होंने बताया कि सुविधा केंद्र राज्य के परिवहन विभाग के साथ संपर्क रख रहा है जिससे पंजाब वापस आने वाले लोगों को उनके पैतृक जिलों तक समय पर और सुचारू ढंग से पहुँचाने को यकीनी बनाया जा सके। साभार-khaskhabar.com  

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चंडीगढ़। कोविड के खि़लाफ़ अग्रिम पंक्ति की जंग को और तेज़ करते हुये पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में सरकार ने आज महामारी के विरुद्ध अपनी लड़ाई के दायरे में प्राईवेट अस्पतालों को लाने के लिए एक ऑर्डीनैंस नोटीफायी किया है। पंजाब क्लिनीकल अस्टैबलिशमैंटज़ (रजिस्ट्रेशन एंड रैगूलेशन) आर्डीनैंस, 2020 की धारा 1 की उप धारा के अंतर्गत नोटिफिकेशन के द्वारा 50 बिस्तरों से अधिक के सामथ्र्य वाले सभी अस्पतालों को ऑर्डीनैंस के उपरोक्त उपबंधों अधीन लाया गया है। यह कदम 10 अप्रैल को मंत्रीमंडल की मीटिंग की तरफ से लिये गये फ़ैसले की राह पर उठाया गया है। आज यहाँ यह प्रगटावा करते हुये मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह ऑर्डीनैंस प्राईवेट अस्पतालों को रजिस्ट्रेशन और रैगूलेशन के लिए पेशेवार ढंग से उचित विधि मुहैया करवाएगा जिससे सहूलतों और सेवाओं के कम से -कम मापदण्डों की पालना के साथ-साथ आम व्यक्ति को सही तरीके से सेहत सेवाओं देने के लिए इन अस्पतालों के कामकाज की पारदर्शिता को यकीनी बनाया जा सके। ऑर्डीनैंस के उपबंधों को लागू करने के लिए स्वास्थ्य व परिवार कल्याण के प्रशासनिक सचिव की अध्यक्षता अधीन स्टेट कौंसिल फॉर क्लिनीकल अस्टैबलिशमैंटज़ का गठन किया जायेगा और स्वास्थ्य व परिवार कल्याण के डायरैक्टर इसके मैंबर सचिव होंगे। इस कौंसिल के सदस्यों में स्वास्थ्य सेवाएं (परिवार कल्याण) के डायरैक्टर, स्वास्थ्य सेवाओं (सोशल इंशोरैंस) के डायरैक्टर और राज्य सरकार की मान्यता प्राप्त विभिन्न इलाज प्रणालियों के डायरैक्टर जिनमें आयुर्वैदिक डायरैक्टर, होम्योपैथिक विभाग के प्रमुख के अलावा पंजाब मैडीकल कौंसिल के प्रमुख, पंजाब डैंटल कौंसिल के प्रमुख, पंजाब नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्ट्रार और पंजाब स्टेट फार्मेसी कौंसिल के रजिस्ट्रार शामिल हैं। भविष्य में ऐसी और इलाज प्रणाली का गठन होने की सूरत में उसे भी प्रतिनिधित्व दिया जायेगा। कौंसिल के सदस्यों में इलाज की आयुर्वैदिक और युनानी प्रणालियों के बोर्ड की कार्यकारिणी की तरफ से एक-एक प्रतिनिधि शामिल किया जायेगा। इसी तरह इंडियन मैडीकल कौंसिल की प्रांतीय इकाई और पैरा -मैडीकल के क्षेत्र में से एक-एक मैंबर को राज्य सरकार नामज़द करेगी। राज्य स्तरीय उपभोक्ता ग्रुपों या स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में काम कर रही प्रतिष्ठित ग़ैर -सरकारी संस्थाओं से दो सदस्यों के अलावा एक लॉ अफ़सर को राज्य सरकार की तरफ से इसके सदस्यों के तौर पर नामज़द किया जायेगा। ऑर्डीनैंस के मुताबिक केंद्र सरकार या क्लिनीकल स्थापति (रजिस्ट्रेशन और रैगूलेशन) एक्ट 2010 के अंतर्गत स्थापित राष्ट्रीय कौंसिल की ज़रूरत के अनुसार क्लिनीकल संस्थाओं के लिए पंजाब स्टेट कौंसिल को पंजाब स्टेट मास्टर रजिस्ट्रर तैयार रखने, राष्ट्रीय रजिस्ट्रेशन को अपडेट करने सम्बन्धी मासिक वापसी (रिटरन) भेजने और राष्ट्रीय कौंसिल में प्रतिनिधित्व का काम सौंपा गया है। इसके साथ ही 100 बिस्तरों या इससे अधिक सामथ्र्य वाले इलाज संस्थानों की रजिस्ट्रेशन के लिए राज्य स्तरीय एक रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी भी गठित की गई है जिसमें डायरैक्टर स्वास्थ्य व परिवार कल्याण चेयरमैन के तौर पर उनके साथ डिप्टी डायरैक्टर स्वास्थ्य व परिवार कल्याण के अलावा राज्य सरकार की तरफ से कानून अफ़सर और डायरैक्टर स्वास्थ्य व परिवार कल्याण के नोडल अफ़सर को सदस्यों के तौर पर नामज़द किया जायेगा। इसी तरह हर जिले में रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी होगी जिसमें सम्बन्धित सिवल सर्जन चेयरमैन के तौर पर जबकि जि़ला परिवार कल्याण अफ़सर, जि़ला अटार्नी का एक प्रतिनिधि और सम्बन्धित जिले का नोडल अफ़सर सदस्यों के तौर पर जिले में 100 या इससे अधिक सामथ्र्य वाली क्लिनीकल संस्थाओं को छोड़ कर क्लिनीकल संस्थाओं की रजिस्ट्रेशन का काम देखेंगे। यह ऑर्डीनैंस पंजाब को राज्य स्तरीय समर्थ अथॉरिटी भी मुहैया करवाता है जिसका नेतृत्व स्वास्थ्य व परिवार कल्याण के प्रशासनिक सचिव बतौर चेयरपर्सन करेंगे और इसके साथ ही डायरैक्टर स्वास्थ्य सेवाएंं (परिवार कल्याण) और एक लॅा अफ़सर राज्य सरकार द्वारा सदस्यों के तौर पर नामज़द किये जाएंगे। इस अथॉरिटी को राज्य स्तरीय रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी और जि़ला रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी के हुक्मों के खि़लाफ़ अपीलों सुनने के अलावा अन्य पंजाब सरकार द्वारा निर्धारित की गई अन्य जिम्मेदारियों को निभाने का काम सौंपा गया है। साभार-khaskhabar.com  

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शिमला । मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए निर्देश दिए कि संस्थागत क्वारंटीन में रखे गए लोगों की नियमित चिकित्सा जांच सुनिश्चित बनाने के साथ-साथ एक्वारंटीन केंद्रों में पर्याप्त सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डाॅक्टरों की टीम क्वारंटीन केंद्रों का दौरा अवश्य करे ताकि वहां रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। बुजुर्गो और लंबी बीमारी से पीड़ित मरीजों को सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं और जरूरत पड़ने पर उन्हें स्वास्थ्य संस्थानों में स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ने पर होटलों को भी संस्थागत क्वारंटीन केंद्रों के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। इससे इन केंद्रों में रहने वाले लोगों का मनोबल भी बढ़ेगा। जय राम ठाकुर ने कहा कि जिला प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि देश के अन्य हिस्सों से आने वाले हिमाचलियों के घर पहुंचने से पहले ही पंचायती राज संस्थाओं के चुने हुए प्रतिनिधियों को उनकी सूचना उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कर्मी बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की घर वापसी से पहले ही ऐसे लोगोें के घरों का दौरा करें ताकि उसके परिवार के सदस्यों को शारीरिक दूरी बनाने के महत्व के बारे में जागरूक किया जा सके। स्वास्थ्य कर्मियों और पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे घरों में अलग कमरों और शौचालयों की उचित सुविधा हो। यदि सुविधा उपलब्ध नहीं हो तो ऐसे लोगों को नजदीक के पंचायत घर, युवक मंडल भवन, महिला मंडल भवन और सामुदायिक केंद्रों में स्थानांतरित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रवासी मजदूरों की सुविधा के लिए प्रदेश में राष्ट्रीय योजना ”वन नेशन-वन राशन कार्ड“ शुरू की है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रवासी मजदूरों को दो माह तक निःशुल्क खाद्य सामग्री मिले। उन्होंने कहा कि जिन मजदूरों के पास राशन कार्ड नहीं है, उन्हें भी प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम गेहूं या चावल और प्रति माह एक किलोग्राम दाल निःशुल्क दी जाएगी। जय राम ठाकुर ने कहा कि संस्थागत व होम क्वारंटीन से बाहर आने वाले लोगों को अन्य लोगों को को कोविड-19 के बारे में जागरूक बनाने के लिए ब्रांड एंबेसडर के रूप में कार्य करने के लिए प्रेरित करने के प्रयास किए जाने चाहिए। मुख्य सचिव अनिल खाची ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर, पुलिस महानिदेशक एस.आर. मरडी, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य आर.डी. धीमान, प्रधान सचिव जे.सी. शर्मा, ओंकार शर्मा व संजय कुंडू भी इस अवसर पर उपस्थित थे। साभार-khaskhabar.com  

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चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार ने लोगों की सुविधा को देखते हुए यात्रियों को एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने के लिए विभिन्न रूटस को संचालित करने का निर्णय लिया है और इस संबंध में हरियाणा सरकार ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और यूटी चंडीगढ़ को सहमति के लिए पत्र लिखा है ताकि लोगों को आवागमन सुविधाएं प्रदान की जा सके। इस संबंध में जानकारी देते हुए हरियाणा के परिवहन विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नए दिशानिर्देशों के तहत अंतरराज्यीय आवागमन के लिए यात्री वाहनों और बसों को आपसी सहमति से चलाने के लिए अनुमति दी गई है। इसी के मद्देनजर, हरियाणा राज्य ने विभिन्न नियमित रूटस पर बसों को चलाने के लिए प्रस्ताव रखा है जिसके तहत विभिन्न राज्यों के लिये हरियाणा के विभिन्न शहरों से बसों को चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, इन राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी आग्रह किया गया है कि वे हरियाणा के विभिन्न रूट्स पर चलाए जाने वाली बसों के अतिरिक्त हरियाणा में वे अपने अन्य रूट्स के संचालन का भी सुझाव भी शीघ्र दे। उन्होंने बताया कि इन राज्यों के परिवहन विभाग को पत्र लिखकर उनकी सहमति के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के लिए फरीदाबाद से अलीगढ़ व वापसी, गुरुग्राम से अलीगढ़ व वापसी, पानीपत से बरेली वाया मुरादाबाद व वापसी और गुरुग्राम से मथुरा व वापसी के रूट्स शामिल है। ऐसे ही, राजस्थान के लिए गुरुग्राम से जयपुर और वापसी, राजस्थान के लिए हिसार से अजमेर और वापसी, पंजाब राज्य के लिए करनाल से अमृतसर और वापसी, हिमाचल प्रदेश के लिए अंबाला-पंचकूला-शिमला व वापसी, उत्तराखंड राज्य के अंबाला-यमुनानगर-देहरादून और वापसी, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के लिए गुरुग्राम से चंडीगढ़ व वापसी, दिल्ली के लिए पंचकूला से दिल्ली और वापसी तथा मध्य प्रदेश राज्य के लिए ग्वालियर व वापसी के रूटों का प्रस्ताव है। साभार-khaskhabar.com  

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मुंबई| अभिनेत्री व पर्यावरणविद जूही चावला कोरोनावायरस महामारी के चलते जारी लॉकडाउन में किसानों की मदद के लिए आगे आईं हैं। मुंबई से कुछ दूरी पर उनकी एक कृषि भूमि है, जहां विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा जैविक खेती का अभ्यास किया जाता है। जूही ने अब इस मौसम में धान की खेती करने के लिए इसे भूमिहीन किसानों के लिए खोल दिया है। अभिनेत्री ने कहा, "चूंकि हम अभी लॉकडाउन में हैं, ऐसे में मैंने भूमिहीन किसानों को खेती करने के लिए अपनी जमीन देने का फैसला लिया है। वे यहां इस मौसम में धान की खेती कर सकते हैं और बदले में उत्पाद का एक छोटा सा हिस्सा अपने लिए रख सकते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "यह कोई नई बात नहीं है। पुराने जमाने में लोग इसी तरह से खेती करते थे। यह एक अच्छी बात है। हमारे किसानों को मिट्टी, हवा, जमीन के बारे में शहर में रहने वाले लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा पता है।" जूही ने अपने लोगों से धान की इस खेती पर नजर रखने को कहा है, ताकि इन्हें उगाने के लिए केवल जैविक पद्धतियों का ही उपयोग किया जाए और किसी भी तरह का कोई भी रसायन फॉर्म में न घुसने पाए। उन्होंने कहा, "यह हम सभी के लिए बेहतर है। हमारे लिए भी और हमारे किसानों के लिए भी। हम कठिन नहीं बल्कि स्मार्ट तरीके से काम कर रहे हैं। इस लॉकडाउन ने मेरे दिमाग में कुछ अच्छे ख्यालात डाले।" साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली :स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार देश में पिछले 24 घंटों में 5,609 कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आए हैं और 132 मौतें हुई हैं। देश में कुल मामलों की संख्या अब 1,12,359 हो गई है, जिसमें 63,624 सक्रिय मामले और 3,435 मौतें शामिल हैं। भारत सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर श्रेणीकृत, नियोजित और अग्रसक्रिय दृष्टिकोण से कोविड-19 के रोकथाम, नियंत्रण और प्रबंधन के लिये उपाय किये हैं। इन उपायों की नियमित रूप से उच्चतम स्तर पर समीक्षा और निगरानी की जा रही है। भारत कोविड-19 की गति को धीमी करने में आगे बढ़ा है और इसका असर कोविड-19 के मामलों के आंकड़ों से परिलक्षित होता है। विश्व में प्रति लाख जनसंख्या पर 62.3 मामलों के मुकाबले भारत में प्रति लाख जनसंख्या पर केवल 7.9 मामले हैं। इसी तरह प्रति लाख जनसंख्या में भारत की औसत मृत्यु दर 0.2 है जबकि विश्व में औसत मृत्यु दर 4.2 बनती है। मृत्यु के कम आंकड़ों से समय पर मामलों की पहचान और मामलों के क्लीनिकल प्रबंधन का पता चलता है। क्लीनिकल प्रबंधन और रोगियों के स्वस्थ होने पर ध्यान केंद्रित करने से स्वस्थ होने की दर में सुधार हुआ है। पुष्ट मामलों में से 39.6 प्रतिशत स्वस्थ हुए हैं और वर्तमान में उनकी संख्या 42,298 है। इससे यह स्मरण होता है कि ये रोग साध्य है और क्लीनिकल प्रबंधन के निर्देशों के अनुसार किए जा रहे भारत के प्रयास कारगर हैं। यह भी देखा गया है कि कुल सक्रिय मामलों के लगभग 2.9 प्रतिशत रोगियों को ऑक्सीजन की जरूरत होती है। है। 3 प्रतिशत सक्रिय रोगियों को आईसीयू में रखा जाता है और 0.45 प्रतिशत रोगियों को वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है। भारत कोविड के विशेष स्वास्थ्य ढांचे को उन्नत बनाने पर ध्यान दे रहा है। साभार-khaskhabar.com  

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शिवमोग्गा :11 मई को कांग्रेस पार्टी द्वारा PMCARES फंड पर किए गए ट्वीट पर कर्नाटक के शिवमोग्गा में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज। FIR में उनकी पहचान सोशल ​मीडिया अकाउंट हैंडलर के रूप में की गई है। कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा पीएम केयर फंड पर सवाल उठाने पर सोनिया गांधी पर FIRहोना BJP की तानाशाही राजनीति का जीता-जागता सबूत है। FIR होना यह दर्शाता है कि BJP PMकेयर फंड के खर्चे पर जवाबदेही को लेकर घबराई हुई है और FIR करके जवाबदेही पारदर्शिता को जेल में डालना चाहती है और शूली पर चढ़ना चाहती है. साभार-khaskhabar.com

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जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजकीय चिकित्सालयों में जन्म लेने वाली नवजात बालिकाओं को निःशुल्क दिये जाने वाले ‘इंदिरा प्रियदर्शिनी बेबी किट‘ वितरण कार्यक्रम की शुरूआत सोमवार को मुख्यमंत्री निवास से की। गहलोत ने जनाना हॉस्पिटल, जयपुर से आई दो प्रसुताओं सोनम एवं मीनाक्षी की नवजात बालिकाओं को पिंक कलर के किट सौंपे। इस अवसर पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा, राज्य मंत्री, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. सुभाष गर्ग, अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य रोहित कुमार सिंह, एमडी, नेशनल हैल्थ मिशन नरेश कुमार ठकराल एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। जयपुर जिले के राजकीय चिकित्सा संस्थानों में जन्म लेने वाली बालिकाओं को सोमवार से पिंक कलर का बेबी किट मिलना शुरू हो जायेगा। अन्य जिलों में अगले कुछ दिनों में किट वितरण कार्यक्रम शुरू कर दिया जायेगा। उल्लेखनीय है कि बच्चे के जन्म लेते ही उसे पुराने कपड़ों में लपेटने से होने वाले इंफेक्शन के खतरे को रोकने और नवजात को हाइपोथर्मिया से बचाने के लिए वर्ष 2019-20 के राज्य बजट में इसकी घोषणा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने की थी। शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से नवजात बालकों को भी जुलाई 2020 से नीले रंग का किट वितरित किया जायेगा। योजना के तहत प्रतिवर्ष राजकीय चिकित्सा संस्थानों में जन्म लेने वाले करीब 11 लाख से अधिक नवजात बालक-बालिकाओं को इंदिरा प्रियदर्शिनी बेबी किट दिये जायेंगे। इस पर प्रतिवर्ष करीब दस करोड़ रूपये खर्च होंगे। साभार-khaskhabar.com

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