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मुंबई। देश के शेयर बाजारों में मंगलवार को तेजी दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 90.40 अंकों की तेजी के साथ 34,443.19 पर और निफ्टी 13.40 अंकों की तेजी के साथ 10,637.00 पर बंद हुए।    बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 78.82 अंकों की तेजी के साथ 34,431.61 पर खुला और 90.40 अंकों या 0.26 फीसदी की तेजी के साथ 34,443.19 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 34,488.03 के ऊपरी और 34,343.41 के निचले स्तर को छुआ।   बीएसई के मिडकैप सूचकांक में गिरावट और स्मॉलकैप सूचकांक  में तेजी रही। बीएसई का मिडकैप सूचकांक 73.64 अंकों की गिरावट साथ 18,173.91 पर और स्मॉलकैप सूचकांक 15.40 अंकों की तेजी के साथ 19,911.17 पर बंद हुआ।   नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी सुबह 21.5 अंकों की तेजी के साथ 10,645.10 पर खुला और 13.40 अंकों या 0.13 फीसदी की तेजी के साथ 10,637.00 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निफ्टी ने 10,659.15 के ऊपरी और 10,603.60 के निचले स्तर को छुआ।   बीएसई के 19 में से आठ सेक्टरों में तेजी रही। रियल्टी (2.88 फीसदी), ऊर्जा (1.08 फीसदी), उपभोक्ता टिकाऊं वस्तुएं (0.81 फीसदी), तेज खपत उपभोक्ता वस्तुएं (0.45 फीसदी) और सूचना प्रौद्योगिकी (0.32 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही।   बीएसई के गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे -दूरसंचार (1.35 फीसदी), उपभोक्ता सेवाएं (0.67 फीसदी), बिजली (0.64 फीसदी), स्वास्थ्य सेवाएं (0.63 फीसदी) और वाहन (0.39 फीसदी)।     साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। देश के उद्योग व कारोबार का प्रमुख संगठन एसोचैम ने रविवार को कहा कि भारतीय गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसीज) भले ही उस समय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं जब बैंकिंग प्रणाली डूबे हुए कर्ज को लेकर जूझ रही हैं, लेकिन निवेश बढ़ाने के लिए इनको नई प्रौद्योगिकी अपनाने की जरूरत है।    ब्रिटिश परामर्शता प्राइसवाटरहाउस (पीडब्ल्यूसी) के साथ मिलकर किए गए अपने अध्ययन का जिक्र करते हुए एसोचैम ने कहा, ‘‘निजी पूंजी के जरिये एनएफसीज के कारोबार में तेजी दिख रही है लेकिन हाइब्रिड वल्र्ड, जहां डिजिटल व फिजिकल का मिश्रण है, में आगे बढऩे के लिए इनको मौजूदा बिजनेस मॉडल में सुधार पर विचार करने की जरूरत है।’’   उद्योग संगठन की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि डूबे हुए कर्ज में बढ़ोतरी को लेकर बैंक अपने बटुए की रस्सी सख्त कर रही है, जिससे भारतीय एनएफसीज को बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिल रही है। लेकिन इनको प्राइवेट इक्विटी निवेश को आकर्षित करने के लिए नए ग्राहकों की आकांक्षाओं के अनुरूप नई प्रौद्योगिकी अपनानी होगी।  साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में जहां गेहूं और तिलहनों की बोआई में देश के किसानों ने थोड़ी उदासीनता दिखाई है वहीं दलहन की खेती के प्रति उनकी दिलचस्पी काफी रही है। देशभर से प्राप्त बोआई के ताजा आंकड़ों में गेहूं और तिलहन फसलों का रकबा पिछले साल के मुकाबले घटा है तो दलहनों का रकबा बढ़ा है। खासतौर से चने के रकबे में जोरदार इजाफा हुआ है।    केंद्रीय कृषि सहकारिता एवं कल्याण विभाग की वेबसाइट पर शुक्रवार को प्रकाशित रबी बोआई के साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में गेहूं की बोआई 283.46 लाख हेक्टेयर भूमि में हुई है, जो कि पिछले साल की समान अवधि के आंकड़े 297.67 लाख हेक्टेयर से 4.77 फीसदी कम है। हालांकि पिछले हफ्ते से सुधार हुआ है क्योंकि पिछले हफ्ते तकरीबन छह फीसदी रकबा पिछले साल के मुकाबले पिछड़ा हुआ था। देश्भर में गेहूं का औसत रकबा 301.74 लाख हेक्टेयर रहता है।    तिलहनों का रकबा पिछले साल के मुकाबले 5.05 फीसदी पिछड़ा है। सभी रबी तिलहनों का रकबा 76.69 लाख हेक्टेयर है जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 80.77 लाख हेक्टेयर था।     सरसों की बोआई 65.25 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के आंकड़े 69.53 लाख हेक्टेयर से 6.15 फीसदी कम है। वहीं, दलहन फसलों की बोआई 154.91 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के रकबे 143.45 लाख हेक्टेयर से 7.99 फीसदी ज्यादा है।     चने की बोआई अब तक  103.80 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल का रकबा 92.13 लाख हेक्टेयर से 12.67 फीसदी ज्यादा है। चने का रकबा राष्ट्रीय औसत 86.81 लाख हेक्टेयेर से भी काफी ज्यादा हो चुका है।    मसूर रकबा 17.04 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है जोकि पिछले साल के 16.56 लाख हेक्टेयर से 2.94 फीसदी अधिक है।     चालू बोआई सीजन (2017-18) में देशभर में रबी फसलों का रकबा पिछले साल के मुकाबले 0.21 फीसदी कम है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक कुल रबी फसलों की बोआई 586.37 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। जो राष्ट्रीय औसत 623.53 लाख हेक्टेयर से काफी ज्यादा है लेकिन पिछले साल के समान अवधि के आंकड़े 587.62 लाख हेक्टेयर से कम है।     साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। ‘नया’ रिलायंस कम्यूनिकेशंस (आरकॉम) देश के सबसे बड़े बी2बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) कंपनी के रूप में उभरेगी, जो ‘वैश्विक और उद्यम व्यवसाय पर केंद्रित’ होगी। रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी ने यह बातें कही।    अंबानी ने द इकॉनमिक टाइम्स से एक विस्तृत साक्षात्कार में यह बातें कही, जो उनका एक दशक में पहला साक्षात्कार है। उन्होंने कहा, ‘‘कंपनी के पास आनेवाले कुछ महीनों में एक मजबूत साझीदार भी होगा।’’   अंबानी ने कहा, ‘‘नया आरकॉम ज्यादा मजबूत होगा और देश का सबसे बड़ा बी2बी कारोबार होगा। आईडीसी (अंतर्र्राष्ट्रीय डेटा सेंटर) शुरू होने को है। इसमें विशाल अवसर है.. इसमें भारत के लिए 400 अरब डॉलर के अवसर हैं और हमारे लिए भी अवसर है।’’   अंबानी ने पिछले महीने आरकॉम के  कर्ज का पूर्ण समाधान हासिल किया था और संपत्तियों की बिक्री कर कंपनी के कर्ज को 25,000 करोड़ रुपये से घटाकर 6,000 करोड़ रुपये करने में सफलता पाई थी।    अंबानी ने कहा, ‘‘मैंने डीओटी (दूरसंचार विभाग) से कहा था कि मैं दूरसंचार क्षेत्र से नहीं निकल रहा हूं। मैं केवल मोबाइल कारोबार बंद कर रहा हूं। हम क्लाउड, आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स), डेटा सेंटर्स, सबमरीन केबल्स कारोबार में हैं।’’   आरकॉम ने रिलायंस जियो के साथ अपने वायरलेस संपत्तियों को बेचने का सौदा किया है, जिसमें टॉवर्स, ऑप्टिक फाइबर केबल नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और मीडिया कंर्वजेंस नोड्स शामिल है।    साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेन्टल एक्सचेंज (आईसीई) में बीते स$त्र में गुरुवार को कॉटन के वायदे में जोरदार उछाल आया, जो कि अमेरिकी फाइबर की मांग में तेजी व डॉलर में आई मजबूती से प्रेरित था। बाजार के जानकारों के मुताबिक विदेशी बाजार में तेजी का घेरलू बाजार को फायदा मिलेगा।    अमेरिका में कॉटन का मार्च वायदा 1.5 फीसदी उछाल के साथ 79.25 से प्रति पाउंड पर बंद हुआ, जोकि सबसे सक्रिय वायदा सौदे में 19 मई के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।    कमोडिटी एनालिस्ट मुंबई के गिरीश काबरा के मुताबिक कच्चे तेल में हाल के दिनों में आई मजबूती से कृत्रिम फाइबर महंगा पड़ेगा। जाहिर है कि इसका फायदा कॉटन फाइबर को होगा, जिससे कॉटन में आगे भी तेजी रहने के संकेत हैं।   कॉमर्जबैंक ने भी पिछले दिनों कहा था कि कॉटन की तेजी में कच्चा तेल की कीमतों का भी असर देखा जा रहा है, क्योंकि कच्चे तेल का इस्तेमाल कृत्रिम फाइबर बनाने में होता है।    कमोडिटी विश£ेषक रेलीगेयर के वाइस प्रेसिडेंट अजितेश ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेजी से घेरलू बाजार में भी तेजी देखने को मिलेगी।    वैसे, फसल खराब होने की रिपोर्ट के बाद उत्पादन अनुमान में कमी के कारण घरेलू बाजार में कॉटन में जोरदार तेजी का रुख पहले से ही बना हुआ है।    बाजार के जानकारों के मुताबिक, सटोरियों ने कॉटन में अपने पोजीशन बनाई है जिससे तेजी को सपोर्ट मिला है।    गौरतलब है कि कॉटन उत्पादन, खपत व व्यापार से जुड़े देशों का संगठन इंटरनेशनल कॉटन एडवायजरी कमेटी मंगलवार को जारी 2017-18 के अनुमान में दुनियाभर में कॉटन खपत में करीब तीन फीसदी की बढ़ोतरी की है।   आईसीएसी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले महीने के अनुमान से इस महीने का उत्पादन अनुमान 0.31 फीसदी कम है जबकि खपत अनुमान में कटौती नहीं की गई है। 2017-18 में पिछले साल के मुकाबले इस साल कॉटन उत्पादन 10.61 फीसदी इजाफा इजाफा के साथ 25.43 मिलयन टन रहने का अनुमान है।    वहीं, खपत भी 2.85 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 25.22 मिलियन टन रहने का अनुमान है। वैश्विक आयात पिछले साल के 8.11 मिलियन टन के मुकाबले 8.35 मिलियन टन रहने का अनुमान है जबकि निर्यात भी 8.07 से बढक़र 8.35 मिलियन टन रहने की उम्मीद है। अंतिम स्टॉक पिछले साल के 18.77 मिलियन टन के मुकाबले 18.98 मिलियन टन रह सकता है।    आईसीएसी के मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय कीमतें पिछले साल से कम रहने और दूसरे प्रतिस्पर्धी फाइबर के दाम ऊंचे होने से कॉटन की वैश्विक खपत में इजाफा होने की उम्मीद है।    दूसरी तरफ, भारत में कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दिसंबर के अंत में देश के कॉटन उत्पादन 375 लाख गांठ (170 किलोग्राम) रहने का अनुमान जारी किया था। पिछले साल भारत में कॉटन का उत्पादन 2017-18 (अक्टूबर-सिंतंबर) में 345 लाख गांठ रहा था। सीएआई ने देश का कॉटन निर्यात अनुमान को 63 लाख गांठ से घटाकर 55 लाख गांठ कर दिया है। सीएआई ने आयात अनुमान को 17 लाख गांठ से बढ़ाकर 20 लाख गांठ कर दिया है।    साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मसाले अपनी गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं और इसके कारण उनकी मांग में तेजी आती जा रही है। इस कारण सेअप्रैल-सितंबर 2017 के दौरान देश से कुल 8,850.53 करोड़ रुपये मूल्य के 5,57,525 टन मसालों एवं मसाला उत्पादों का निर्यात किया गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान 8,700.15 करोड़ रुपये के 4,50,700 टन मसालों का निर्यात हुआ था। इस तरह से मात्रा में 24 फीसदी की तथा मूल्य में दो फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।   स्पाइसेस बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. ए. जयतिलक ने कहा कि भारतीय मसालों में मिर्च, जीरा, हल्दी, इलायची, लहसुन और मिंट उत्पाद सबसे ज्यादा मांग वाले हैं और वैश्विक बाजारों में गुणवत्ता वाले मसालों की बढ़ती मांग को ये मसाले पूरा करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, इन मसालों को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड की ओर से किए गए प्रयासों से भी निर्यात में काफी बढ़ोत्तरी हुई है।’’   उन्होंने कहा, ‘‘सबसे अधिक संतोषजनक बात यह है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में हो रहे उतार-चढ़ाव तथा दुनिया भर के देशों के कड़े खाद्य सुरक्षा नियमों के बावजूद भारतीय मसालों और मसाला उत्पादों का निर्यात निरंतर बढ़ रहा है।’’   मिर्च ने 2,125.90 करोड़ रुपये के मूल्य के 2,35,000 टन के निर्यात के साथ सबसे अधिक मांग वाले मसाले के रूप में अपनी स्थिति बरकरार रखी, जबकि पिछले वित वर्ष में इसका 1,65,022 टन निर्यात हुआ था। इस तरह इसकी मात्रा में 42 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई है।    मिर्च के बाद जीरे का नंबर आता है, जिसका 1324.58 करोड़ रुपये मूल्य के 79,460 टन निर्यात हुआ है, जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान 1,104.32 करोड़ रुपये मूल्य के 68,596 टन का निर्यात हुआ था। इस तरह मात्रा में 16 फीसदी और मूल्य में 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।   अगला नंबर हल्दी का था, जिसका 547.63 करोड़ रुपये के 59,000 टन का निर्यात हुआ। हालांकि मिंट उत्पादों के मामले में 1317.40 करोड़ रुपये मूल्य के 11,280 टन का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वित वर्ष की इसी अवधि के दौरान 1,157.45 करोड़ रुपये के 10,850 टन का निर्यात हुआ था और इस तरह मात्रा में चार फीसदी और मूल्य में 14 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।   अप्रैल-सितंबर 2016 की तुलना में छोटी इलायची, जीरा, लहसुन, हींग, इमली और अजवाइन, सरसों, सोआ और खसखस के निर्यात में मात्रा और मूल्य दोनों में वृद्धि दर्ज की गई। मूल्य वर्धित उत्पादों जैसे करी पाउडर, मिंट उत्पादों और मसाला-तेल और तैलीरालों की भी इस अवधि के दौरान मात्रा और मूल्य में वृद्धि हुई है।   बड़ी इलायची, मिर्च, अदरक, सौंफ और धनिया के निर्यात में मात्रा के संदर्भ में वृद्धि हुई है। अप्रैल-सितंबर 2017 के दौरान, 2,230 टन छोटी इलायची, जिसका मूल्य 248.71 करोड़ रुपया था, का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 1,38.96 करोड़ रुपये के 1,624 टन का निर्यात किया गया था। इस तरह इसमें मात्रा में 37 फीसदी और मूल्य में 79 फीसदी वृद्धि हुई।   अप्रैल-सितंबर 2017 के दौरान, 27,040 टन लहसुन की कुल मात्रा का निर्यात किया गया, जिससे 188.54 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई, जबकि पिछले साल 127.62 करोड़ रुपये मूल्य के 15,337 टन का निर्यात किया गया था और इस तरह मात्रा में 76 फीसदी का और मूल्य में 48 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।   मूल्यवर्धित उत्पादों के मामले में, करी पाउडर/पेस्ट का निर्यात पिछले वर्ष के 14,016 टन (278.40 करोड़ रुपये) के मुकाबले 348.88 करोड़ रुपये मूल्य के 17,030 टन का था और इस तरह मात्रा में 22 फीसदी तथा मूल्य में 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।   इस अवधि के दौरान कुल 8,800 टन मसाला-तेल और तैलीरालों का निर्यात हुआ, जिसका मूल्य 1332.22 करोड़ रुपया था, जबकि पिछले वर्ष 1237.06 करोड़ रुपये मूल्य के 6,617 टन का निर्यात हुआ था और इस तरह मात्रा में 33 फीसदी और मूल्य में आठ फीसदी की वृद्धि हुई।    साभार-khaskhabar.com     

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मुंबई। शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में बुधवार को मजबूती का रुख है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह 9.49 बजे 92.49 अंकों की मजबूती के साथ 33,904.75 पर और निफ्टी भी लगभग इसी समय 30.95 अंकों की बढ़त के साथ 10,481.35 पर कारोबार करते देखे गए।    बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 117.35 अंकों की मजबूती के साथ 33,929.61 पर, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 40.45 अंकों की मजबूती के साथ 10,482.65 पर खुला।   साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। सरकार ने शुक्रवार को सभी करदाताओं के लिए जीएसटीआर-1 दाखिल करने की समयसीमा 10 दिनों के लिए बढ़ाकर 10 जनवरी तक कर दी है।    वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पिछले साल या चालू वित्त वर्ष में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करने वाले सभी व्यक्तियों को जुलाई-सितंबर का तिमाही रिर्टन जीएसटीआर-1 फार्म में 10 जनवरी तक दाखिल करना होगा।   वहीं, जिनका मासिक कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा है, उन्हें जुलाई से अक्टूबर तक का मासिक रिटर्न भी इसी दिन तक दाखिल करना होगा।    दोनों ही रिटर्न दाखिल करने के लिए पहले 31 दिसंबर की आखिरी तिथि तय की गई थी। साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में साल 2016 के नवंबर से साल 2017 के दिसंबर तक 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। खासतौर से पिछले तीन महीनों में अगस्त अंत से कच्चे तेल के दाम में 28 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल यह 67 डॉलर प्रति बैरल पर है।    इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण भूराजनैतिक तनाव, ओपेक और गैर-ओपेक देशों द्वारा उत्पादन में कटौती की समय सीमा का विस्तार, अनुमान से ज्यादा पेट्रोलियम पदार्थों की वैश्विक मांग तथा आपूर्ति की बाधाएं प्रमुख हैं।    आईसीआरए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और समूह प्रमुख (कॉरपोरेट सेक्टर रेटिंग) के. रविचंद्रन ने बताया, ‘‘संवेदनशील पेट्रोलियम पदार्थों पर अंडर रिकवरी (अनुमानित आय और वास्तविक आय का अंतर) 220-250 अरब रुपये (भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत 56-59 डॉलर प्रति बैरल मानते हुए) रहने का अनुमान है, जबकि आईसीआरए के अनुमान के मुताबिक पहले इसके 160-200 अरब रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था। भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत में 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से अंडर-रिकवरी 10 अरब डॉलर बढ़ जाती है तथा आयात बिल में 1.2 अरब डॉलर की बढ़ोतरी होती है।’’   रविचंद्रन ने आगे कहा, ‘‘कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से ओएमसी (सरकारी तेल विपणन कंपनियों) की कार्यशील पूंजी की जरूरत बढ़ जाती है, जिससे उनकी मुनाफाप्रदता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।’’   उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों की खुदरा कीमतों में वृद्धि और खुदरा व थोक बिक्री में निजी आरएंडएम कंपनियों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण तेल विपणन कंपनियों को उनके विपणन मार्जिन पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इस क्षेत्र में वर्तमान संयंत्रों के विस्तार के अलावा नया निवेश अभी भी शुरुआती स्तर पर ही है। हालांकि मध्यम अवधि में निजी कंपनियों द्वारा वाहन ईंधन की खुदरा बिक्री में रुचि देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर रिफाइनिंग और विपणन क्षेत्र की कंपनियों के लिए क्रेडिट दृष्टिकोण स्थिर बना हुआ है।  साभार-khaskhabar.com       

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मुंबई। देश के शेयर बाजारों के शुरुआती कारोबार में शुक्रवार को मजबूती का रुख है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह 9.45 बजे 111.86 अंकों की मजबूती के साथ 33,959.89 पर और निफ्टी भी लगभग इसी समय 30.95 अंकों की बढ़त के साथ 10,508.85 पर कारोबार करते देखे गए।    बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 41.36 अंकों की बढ़त के साथ 33889.39 पर, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 14.45 अंकों की मजबूती के साथ 10,492.35 पर खुला।   साभार-khaskhabar.com   

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मुंबई। देश के शेयर बाजारों में बुधवार को गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 98.80 अंकों की गिरावट के साथ 33,911.81 पर और निफ्टी 40.75 अंकों की गिरावट के साथ 10,490.75 पर बंद हुआ।    बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 76.71 अंकों की तेजी के साथ 34,087.32 पर खुला और 98.80 अंकों या 0.29 फीसदी की गिरावट के साथ 33,911.81 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 34,137.97 के ऊपरी और 33,839.51 के निचले स्तर को छुआ।   सेंसेक्स के 30 में से 7 शेयरों में तेजी रही। सन फार्मा (6.89 फीसदी), डॉ. रेड्डी (1.71 फीसदी), महिंद्रा एंड महिंद्रा (0.77 फीसदी), विप्रो (0.69 फीसदी) और हिन्दुस्तान यूनीलीवर (0.48 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही।   सेंसेक्स के गिरावट वाले शेयरों में भारती एयरटेल (1.62 फीसदी), आईसीआईसीआई बैंक (1.53 फीसदी), लार्सन एंड टूब्रो (0.87 फीसदी), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (0.85 फीसदी) और बजाज-ऑटो (0.82 फीसदी) प्रमुख रहे।   बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक में भी गिरावट रही। बीएसई का मिडकैप सूचकांक 33.30 अंकों की गिरावट के साथ 17,673.64 पर और स्मॉलकैप सूचकांक 63.52 अंकों की गिरावट के साथ 19,048.28 पर बंद हुआ।   नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी सुबह 0.45 अंकों की मामूली गिरावट के साथ 10,531.05 पर खुला और 40.75 अंकों या 0.39 फीसदी की गिरावट के साथ 10,490.75 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निफ्टी ने 10,552.40 के ऊपरी और 10,469.25 के निचले स्तर को छुआ।   बीएसई के 19 में से एक सेक्टर, स्वास्थ्य सेवा (1.84 फीसदी) में तेजी रही।    बीएसई के गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे - तेल और गैस (0.81 फीसदी), ऊर्जा (0.73 फीसदी), पूंजीगत वस्तुएं (0.72 फीसदी), रियल्टी (0.63 फीसदी) और बैंंकिंग (0.62 फीसदी)।   बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 1,204 शेयरों में तेजी और 1,554 में गिरावट रही, जबकि 190 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ।   साभार-khaskhabar.com       

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कोलकाता। अप्रैल से नवंबर की अवधि के दौरान देश के तैयार इस्पात उत्पादन में 5.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है, जो कि 6.96 करोड़ टन रही, जबकि  इस दौरान उपभोग में 4.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जोकि 5.6 करोड़ टन रही। इस्पात मंत्रालय की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।    मंत्रालय के संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘2017 के अप्रैल-नवंबर की अवधि में तैयार इस्पात का उत्पादन 6.9 करोड़ टन रहा, जोकि पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 5.1 फीसदी अधिक है। इस दौरान देश में इस्पात का उपभोग 4.2 फीसदी बढक़र 5.6 करोड़ टन हो गया।’’   चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में सेल, राष्ट्रीय इस्पात निगम लि., टीएसएल, एस्सार, जेएसडब्ल्यू स्टील लि. और जिंदल स्टील एंड पॉवर लि. ने मिलकर कुल 4.02 करोड़ तैयार इस्पात का उत्पादन किया, जोकि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 9 फीसदी अधिक है।    रिपोर्ट में कहा गया कि इस साल नवंबर में तैयार इस्पात का उत्पादन 83 लाख टन रहा, जो कि इसके पिछले महीने की तुलना में 9.7 फीसदी कम है, लेकिन पिछले साल के समान माह की तुलना में 6.4 फीसदी अधिक है।    रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘2017 की अप्रैल-नवंबर की अवधि के दौरान कच्चे इस्पात का उत्पादन 6.67 करोड़ टन रहा, जोकि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 4.5 फीसदी अधिक है।’’ साभार-khaskhabar.com       

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नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

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हमारी बात

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राइन फॉल्स, स्विस सीढ़ियाँ और बुज़ुर्ग घुटने: नाव की सैर बनी ओलंपिक प्रतियोगिता!

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