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नई दिल्ली। ‘नया’ रिलायंस कम्यूनिकेशंस (आरकॉम) देश के सबसे बड़े बी2बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) कंपनी के रूप में उभरेगी, जो ‘वैश्विक और उद्यम व्यवसाय पर केंद्रित’ होगी। रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी ने यह बातें कही।    अंबानी ने द इकॉनमिक टाइम्स से एक विस्तृत साक्षात्कार में यह बातें कही, जो उनका एक दशक में पहला साक्षात्कार है। उन्होंने कहा, ‘‘कंपनी के पास आनेवाले कुछ महीनों में एक मजबूत साझीदार भी होगा।’’   अंबानी ने कहा, ‘‘नया आरकॉम ज्यादा मजबूत होगा और देश का सबसे बड़ा बी2बी कारोबार होगा। आईडीसी (अंतर्र्राष्ट्रीय डेटा सेंटर) शुरू होने को है। इसमें विशाल अवसर है.. इसमें भारत के लिए 400 अरब डॉलर के अवसर हैं और हमारे लिए भी अवसर है।’’   अंबानी ने पिछले महीने आरकॉम के  कर्ज का पूर्ण समाधान हासिल किया था और संपत्तियों की बिक्री कर कंपनी के कर्ज को 25,000 करोड़ रुपये से घटाकर 6,000 करोड़ रुपये करने में सफलता पाई थी।    अंबानी ने कहा, ‘‘मैंने डीओटी (दूरसंचार विभाग) से कहा था कि मैं दूरसंचार क्षेत्र से नहीं निकल रहा हूं। मैं केवल मोबाइल कारोबार बंद कर रहा हूं। हम क्लाउड, आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स), डेटा सेंटर्स, सबमरीन केबल्स कारोबार में हैं।’’   आरकॉम ने रिलायंस जियो के साथ अपने वायरलेस संपत्तियों को बेचने का सौदा किया है, जिसमें टॉवर्स, ऑप्टिक फाइबर केबल नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और मीडिया कंर्वजेंस नोड्स शामिल है।    साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेन्टल एक्सचेंज (आईसीई) में बीते स$त्र में गुरुवार को कॉटन के वायदे में जोरदार उछाल आया, जो कि अमेरिकी फाइबर की मांग में तेजी व डॉलर में आई मजबूती से प्रेरित था। बाजार के जानकारों के मुताबिक विदेशी बाजार में तेजी का घेरलू बाजार को फायदा मिलेगा।    अमेरिका में कॉटन का मार्च वायदा 1.5 फीसदी उछाल के साथ 79.25 से प्रति पाउंड पर बंद हुआ, जोकि सबसे सक्रिय वायदा सौदे में 19 मई के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।    कमोडिटी एनालिस्ट मुंबई के गिरीश काबरा के मुताबिक कच्चे तेल में हाल के दिनों में आई मजबूती से कृत्रिम फाइबर महंगा पड़ेगा। जाहिर है कि इसका फायदा कॉटन फाइबर को होगा, जिससे कॉटन में आगे भी तेजी रहने के संकेत हैं।   कॉमर्जबैंक ने भी पिछले दिनों कहा था कि कॉटन की तेजी में कच्चा तेल की कीमतों का भी असर देखा जा रहा है, क्योंकि कच्चे तेल का इस्तेमाल कृत्रिम फाइबर बनाने में होता है।    कमोडिटी विश£ेषक रेलीगेयर के वाइस प्रेसिडेंट अजितेश ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेजी से घेरलू बाजार में भी तेजी देखने को मिलेगी।    वैसे, फसल खराब होने की रिपोर्ट के बाद उत्पादन अनुमान में कमी के कारण घरेलू बाजार में कॉटन में जोरदार तेजी का रुख पहले से ही बना हुआ है।    बाजार के जानकारों के मुताबिक, सटोरियों ने कॉटन में अपने पोजीशन बनाई है जिससे तेजी को सपोर्ट मिला है।    गौरतलब है कि कॉटन उत्पादन, खपत व व्यापार से जुड़े देशों का संगठन इंटरनेशनल कॉटन एडवायजरी कमेटी मंगलवार को जारी 2017-18 के अनुमान में दुनियाभर में कॉटन खपत में करीब तीन फीसदी की बढ़ोतरी की है।   आईसीएसी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले महीने के अनुमान से इस महीने का उत्पादन अनुमान 0.31 फीसदी कम है जबकि खपत अनुमान में कटौती नहीं की गई है। 2017-18 में पिछले साल के मुकाबले इस साल कॉटन उत्पादन 10.61 फीसदी इजाफा इजाफा के साथ 25.43 मिलयन टन रहने का अनुमान है।    वहीं, खपत भी 2.85 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 25.22 मिलियन टन रहने का अनुमान है। वैश्विक आयात पिछले साल के 8.11 मिलियन टन के मुकाबले 8.35 मिलियन टन रहने का अनुमान है जबकि निर्यात भी 8.07 से बढक़र 8.35 मिलियन टन रहने की उम्मीद है। अंतिम स्टॉक पिछले साल के 18.77 मिलियन टन के मुकाबले 18.98 मिलियन टन रह सकता है।    आईसीएसी के मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय कीमतें पिछले साल से कम रहने और दूसरे प्रतिस्पर्धी फाइबर के दाम ऊंचे होने से कॉटन की वैश्विक खपत में इजाफा होने की उम्मीद है।    दूसरी तरफ, भारत में कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दिसंबर के अंत में देश के कॉटन उत्पादन 375 लाख गांठ (170 किलोग्राम) रहने का अनुमान जारी किया था। पिछले साल भारत में कॉटन का उत्पादन 2017-18 (अक्टूबर-सिंतंबर) में 345 लाख गांठ रहा था। सीएआई ने देश का कॉटन निर्यात अनुमान को 63 लाख गांठ से घटाकर 55 लाख गांठ कर दिया है। सीएआई ने आयात अनुमान को 17 लाख गांठ से बढ़ाकर 20 लाख गांठ कर दिया है।    साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मसाले अपनी गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं और इसके कारण उनकी मांग में तेजी आती जा रही है। इस कारण सेअप्रैल-सितंबर 2017 के दौरान देश से कुल 8,850.53 करोड़ रुपये मूल्य के 5,57,525 टन मसालों एवं मसाला उत्पादों का निर्यात किया गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान 8,700.15 करोड़ रुपये के 4,50,700 टन मसालों का निर्यात हुआ था। इस तरह से मात्रा में 24 फीसदी की तथा मूल्य में दो फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।   स्पाइसेस बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. ए. जयतिलक ने कहा कि भारतीय मसालों में मिर्च, जीरा, हल्दी, इलायची, लहसुन और मिंट उत्पाद सबसे ज्यादा मांग वाले हैं और वैश्विक बाजारों में गुणवत्ता वाले मसालों की बढ़ती मांग को ये मसाले पूरा करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, इन मसालों को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड की ओर से किए गए प्रयासों से भी निर्यात में काफी बढ़ोत्तरी हुई है।’’   उन्होंने कहा, ‘‘सबसे अधिक संतोषजनक बात यह है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में हो रहे उतार-चढ़ाव तथा दुनिया भर के देशों के कड़े खाद्य सुरक्षा नियमों के बावजूद भारतीय मसालों और मसाला उत्पादों का निर्यात निरंतर बढ़ रहा है।’’   मिर्च ने 2,125.90 करोड़ रुपये के मूल्य के 2,35,000 टन के निर्यात के साथ सबसे अधिक मांग वाले मसाले के रूप में अपनी स्थिति बरकरार रखी, जबकि पिछले वित वर्ष में इसका 1,65,022 टन निर्यात हुआ था। इस तरह इसकी मात्रा में 42 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई है।    मिर्च के बाद जीरे का नंबर आता है, जिसका 1324.58 करोड़ रुपये मूल्य के 79,460 टन निर्यात हुआ है, जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान 1,104.32 करोड़ रुपये मूल्य के 68,596 टन का निर्यात हुआ था। इस तरह मात्रा में 16 फीसदी और मूल्य में 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।   अगला नंबर हल्दी का था, जिसका 547.63 करोड़ रुपये के 59,000 टन का निर्यात हुआ। हालांकि मिंट उत्पादों के मामले में 1317.40 करोड़ रुपये मूल्य के 11,280 टन का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वित वर्ष की इसी अवधि के दौरान 1,157.45 करोड़ रुपये के 10,850 टन का निर्यात हुआ था और इस तरह मात्रा में चार फीसदी और मूल्य में 14 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।   अप्रैल-सितंबर 2016 की तुलना में छोटी इलायची, जीरा, लहसुन, हींग, इमली और अजवाइन, सरसों, सोआ और खसखस के निर्यात में मात्रा और मूल्य दोनों में वृद्धि दर्ज की गई। मूल्य वर्धित उत्पादों जैसे करी पाउडर, मिंट उत्पादों और मसाला-तेल और तैलीरालों की भी इस अवधि के दौरान मात्रा और मूल्य में वृद्धि हुई है।   बड़ी इलायची, मिर्च, अदरक, सौंफ और धनिया के निर्यात में मात्रा के संदर्भ में वृद्धि हुई है। अप्रैल-सितंबर 2017 के दौरान, 2,230 टन छोटी इलायची, जिसका मूल्य 248.71 करोड़ रुपया था, का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 1,38.96 करोड़ रुपये के 1,624 टन का निर्यात किया गया था। इस तरह इसमें मात्रा में 37 फीसदी और मूल्य में 79 फीसदी वृद्धि हुई।   अप्रैल-सितंबर 2017 के दौरान, 27,040 टन लहसुन की कुल मात्रा का निर्यात किया गया, जिससे 188.54 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई, जबकि पिछले साल 127.62 करोड़ रुपये मूल्य के 15,337 टन का निर्यात किया गया था और इस तरह मात्रा में 76 फीसदी का और मूल्य में 48 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।   मूल्यवर्धित उत्पादों के मामले में, करी पाउडर/पेस्ट का निर्यात पिछले वर्ष के 14,016 टन (278.40 करोड़ रुपये) के मुकाबले 348.88 करोड़ रुपये मूल्य के 17,030 टन का था और इस तरह मात्रा में 22 फीसदी तथा मूल्य में 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।   इस अवधि के दौरान कुल 8,800 टन मसाला-तेल और तैलीरालों का निर्यात हुआ, जिसका मूल्य 1332.22 करोड़ रुपया था, जबकि पिछले वर्ष 1237.06 करोड़ रुपये मूल्य के 6,617 टन का निर्यात हुआ था और इस तरह मात्रा में 33 फीसदी और मूल्य में आठ फीसदी की वृद्धि हुई।    साभार-khaskhabar.com     

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मुंबई। शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में बुधवार को मजबूती का रुख है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह 9.49 बजे 92.49 अंकों की मजबूती के साथ 33,904.75 पर और निफ्टी भी लगभग इसी समय 30.95 अंकों की बढ़त के साथ 10,481.35 पर कारोबार करते देखे गए।    बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 117.35 अंकों की मजबूती के साथ 33,929.61 पर, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 40.45 अंकों की मजबूती के साथ 10,482.65 पर खुला।   साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। सरकार ने शुक्रवार को सभी करदाताओं के लिए जीएसटीआर-1 दाखिल करने की समयसीमा 10 दिनों के लिए बढ़ाकर 10 जनवरी तक कर दी है।    वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पिछले साल या चालू वित्त वर्ष में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करने वाले सभी व्यक्तियों को जुलाई-सितंबर का तिमाही रिर्टन जीएसटीआर-1 फार्म में 10 जनवरी तक दाखिल करना होगा।   वहीं, जिनका मासिक कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा है, उन्हें जुलाई से अक्टूबर तक का मासिक रिटर्न भी इसी दिन तक दाखिल करना होगा।    दोनों ही रिटर्न दाखिल करने के लिए पहले 31 दिसंबर की आखिरी तिथि तय की गई थी। साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में साल 2016 के नवंबर से साल 2017 के दिसंबर तक 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। खासतौर से पिछले तीन महीनों में अगस्त अंत से कच्चे तेल के दाम में 28 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल यह 67 डॉलर प्रति बैरल पर है।    इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण भूराजनैतिक तनाव, ओपेक और गैर-ओपेक देशों द्वारा उत्पादन में कटौती की समय सीमा का विस्तार, अनुमान से ज्यादा पेट्रोलियम पदार्थों की वैश्विक मांग तथा आपूर्ति की बाधाएं प्रमुख हैं।    आईसीआरए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और समूह प्रमुख (कॉरपोरेट सेक्टर रेटिंग) के. रविचंद्रन ने बताया, ‘‘संवेदनशील पेट्रोलियम पदार्थों पर अंडर रिकवरी (अनुमानित आय और वास्तविक आय का अंतर) 220-250 अरब रुपये (भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत 56-59 डॉलर प्रति बैरल मानते हुए) रहने का अनुमान है, जबकि आईसीआरए के अनुमान के मुताबिक पहले इसके 160-200 अरब रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था। भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत में 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से अंडर-रिकवरी 10 अरब डॉलर बढ़ जाती है तथा आयात बिल में 1.2 अरब डॉलर की बढ़ोतरी होती है।’’   रविचंद्रन ने आगे कहा, ‘‘कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से ओएमसी (सरकारी तेल विपणन कंपनियों) की कार्यशील पूंजी की जरूरत बढ़ जाती है, जिससे उनकी मुनाफाप्रदता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।’’   उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों की खुदरा कीमतों में वृद्धि और खुदरा व थोक बिक्री में निजी आरएंडएम कंपनियों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण तेल विपणन कंपनियों को उनके विपणन मार्जिन पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इस क्षेत्र में वर्तमान संयंत्रों के विस्तार के अलावा नया निवेश अभी भी शुरुआती स्तर पर ही है। हालांकि मध्यम अवधि में निजी कंपनियों द्वारा वाहन ईंधन की खुदरा बिक्री में रुचि देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर रिफाइनिंग और विपणन क्षेत्र की कंपनियों के लिए क्रेडिट दृष्टिकोण स्थिर बना हुआ है।  साभार-khaskhabar.com       

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मुंबई। देश के शेयर बाजारों के शुरुआती कारोबार में शुक्रवार को मजबूती का रुख है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह 9.45 बजे 111.86 अंकों की मजबूती के साथ 33,959.89 पर और निफ्टी भी लगभग इसी समय 30.95 अंकों की बढ़त के साथ 10,508.85 पर कारोबार करते देखे गए।    बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 41.36 अंकों की बढ़त के साथ 33889.39 पर, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 14.45 अंकों की मजबूती के साथ 10,492.35 पर खुला।   साभार-khaskhabar.com   

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मुंबई। देश के शेयर बाजारों में बुधवार को गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 98.80 अंकों की गिरावट के साथ 33,911.81 पर और निफ्टी 40.75 अंकों की गिरावट के साथ 10,490.75 पर बंद हुआ।    बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 76.71 अंकों की तेजी के साथ 34,087.32 पर खुला और 98.80 अंकों या 0.29 फीसदी की गिरावट के साथ 33,911.81 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 34,137.97 के ऊपरी और 33,839.51 के निचले स्तर को छुआ।   सेंसेक्स के 30 में से 7 शेयरों में तेजी रही। सन फार्मा (6.89 फीसदी), डॉ. रेड्डी (1.71 फीसदी), महिंद्रा एंड महिंद्रा (0.77 फीसदी), विप्रो (0.69 फीसदी) और हिन्दुस्तान यूनीलीवर (0.48 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही।   सेंसेक्स के गिरावट वाले शेयरों में भारती एयरटेल (1.62 फीसदी), आईसीआईसीआई बैंक (1.53 फीसदी), लार्सन एंड टूब्रो (0.87 फीसदी), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (0.85 फीसदी) और बजाज-ऑटो (0.82 फीसदी) प्रमुख रहे।   बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक में भी गिरावट रही। बीएसई का मिडकैप सूचकांक 33.30 अंकों की गिरावट के साथ 17,673.64 पर और स्मॉलकैप सूचकांक 63.52 अंकों की गिरावट के साथ 19,048.28 पर बंद हुआ।   नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी सुबह 0.45 अंकों की मामूली गिरावट के साथ 10,531.05 पर खुला और 40.75 अंकों या 0.39 फीसदी की गिरावट के साथ 10,490.75 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निफ्टी ने 10,552.40 के ऊपरी और 10,469.25 के निचले स्तर को छुआ।   बीएसई के 19 में से एक सेक्टर, स्वास्थ्य सेवा (1.84 फीसदी) में तेजी रही।    बीएसई के गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे - तेल और गैस (0.81 फीसदी), ऊर्जा (0.73 फीसदी), पूंजीगत वस्तुएं (0.72 फीसदी), रियल्टी (0.63 फीसदी) और बैंंकिंग (0.62 फीसदी)।   बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 1,204 शेयरों में तेजी और 1,554 में गिरावट रही, जबकि 190 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ।   साभार-khaskhabar.com       

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कोलकाता। अप्रैल से नवंबर की अवधि के दौरान देश के तैयार इस्पात उत्पादन में 5.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है, जो कि 6.96 करोड़ टन रही, जबकि  इस दौरान उपभोग में 4.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जोकि 5.6 करोड़ टन रही। इस्पात मंत्रालय की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।    मंत्रालय के संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘2017 के अप्रैल-नवंबर की अवधि में तैयार इस्पात का उत्पादन 6.9 करोड़ टन रहा, जोकि पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 5.1 फीसदी अधिक है। इस दौरान देश में इस्पात का उपभोग 4.2 फीसदी बढक़र 5.6 करोड़ टन हो गया।’’   चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में सेल, राष्ट्रीय इस्पात निगम लि., टीएसएल, एस्सार, जेएसडब्ल्यू स्टील लि. और जिंदल स्टील एंड पॉवर लि. ने मिलकर कुल 4.02 करोड़ तैयार इस्पात का उत्पादन किया, जोकि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 9 फीसदी अधिक है।    रिपोर्ट में कहा गया कि इस साल नवंबर में तैयार इस्पात का उत्पादन 83 लाख टन रहा, जो कि इसके पिछले महीने की तुलना में 9.7 फीसदी कम है, लेकिन पिछले साल के समान माह की तुलना में 6.4 फीसदी अधिक है।    रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘2017 की अप्रैल-नवंबर की अवधि के दौरान कच्चे इस्पात का उत्पादन 6.67 करोड़ टन रहा, जोकि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 4.5 फीसदी अधिक है।’’ साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। रिलायंस जियो 399 रुपये या इससे अधिक का रिचार्ज करने पर 3,300 रुपये तक का ‘अप्रत्याशित कैशबैक’ मुहैया कराएगी। उद्योग सूत्रों ने यह जानकारी दी है।    यह कैशबैक 400 रुपये के माइजियो कैशबैक वाउचर के रूप में, वॉलेट से 300 रुपये के इंस्टैंट कैश वाउचर के रूप में तथा ई-कॉमर्स कंपनियों के 2,600 रुपये के डिस्काउंट वाउचर के रूप में मिलेगा।    इसके अलावा शुक्रवार की रात को कंपनी ने हैप्पी न्यूू इयर 2018 ऑफर के तहत दो नए प्लान लांच किए थे, जिसमें ग्राहकों को अधिक डेटा का लाभ मिलता है।  साभार-khaskhabar.com       

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सैन फ्रासिस्को। गूगल ने एप्पल के जाने माने चिप डिजाइनर जॉन ब्रुनो को अपने यहां नियुक्त किया है। जॉन ब्रुनो क्यूपर्टिनो स्थित एप्पल में सिलिकॉन एनालिसिस ग्रुप चलाते थे।   जानकारी के अनुसार, ब्रुनो 2012 से आईफोन सीरीज के चिप्स पर काम कर रहे हैं।   शनिवार को जारी रपट में कहा गया, ‘‘गूगल द्वारा पिक्सेल फोन जैसे उपभोक्ता उपकरणों के लिए खुद के चिपसेट डिजाइन करने के लिए यह भर्ती की गई है।’’   उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, ब्रुनो ने ग्राफिक्स बनाने से काम करना शुरू किया था और वह एप्पल से जुडऩे के पहले एएमडी में चिप मैन्युफैक्चर में मुख्य इंजीनियर के तौर पर कार्यरत थे।   इस नियुक्ति के साथ, गूगल का लक्ष्य खुद के चिप्स बनाने का है।   गूगल हाल में पिक्सल 2 स्मार्टफोन में ‘पिक्सल विजुअल कोर’ चिप का उपयोग कर रहा है।   गूगल के पिक्सल और नेक्सस दो डिवाइस हैं, जिन्हें सबसे अच्छे सॉफ्टवेयर अनुभव के लिए जाना जाता है।   सैमसंग के डिजिटल ट्रेंड्स की रपट के अनुसार, ‘‘यदि गूगल खुद के चिप बनाता है तो वह काफी तेज होगा। इससे गूगल के फोन ग्राहकों के बीच लंबा रास्ता तय करेंगे।’’   गूगल ने इसके पहले एप्पल से कई चिप इंजीनियरों की नियुक्ति की है, जिसमें मनु गुलाटी, वोंजाई (ग्रेगोरी) चोई और टायो फडेलू शामिल हैं।   साभार-khaskhabar.com     

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मुंबई। बीते सप्ताह शेयर बाजार ऐतिहासिक तेजी के साथ बंद हुए, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की गुजरात और हिमाचल प्रदेश में मिली जीत का योगदान रहा और सेंसेक्स और निफ्टी अब तक की सर्वाधिक ऊंचाई पर बंद हुए।    साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 477.33 अंकों या 1.42 फीसदी की तेजी के साथ 33,940.30 पर तथा निफ्टी 159.75 75 अंकों या 1.54 फीसदी की तेजी के साथ 10,493 पर बंद हुआ। बीएसई के मिडकैप सूचकांक में 3.52 फीसदी तथा स्मॉलकैप सूचकांक में 4.51 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।    भाजपा को दो राज्यों में विधानसभा चुनावों में मिली जीत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार का हौसला बढ़ा है, जिसके साल 2019 के आम चुनावों तक साहसिक सुधारों को जारी रखने की उम्मीद बढ़ी है।    सोमवार को सेंसेक्स 138.71 अंकों या 0.41 फीसदी की तेजी के साथ 33,601.68 पर बंद हुआ। मंगलवार को वैश्विक बाजारों में तेजी से घरेलू बाजार को सहारा मिला और सेंसेक्स 235.06 अंकों या 0.7 फीसदी की तेजी के साथ 33,836.74 पर बंद हुआ। बुधवार को मुनाफावसूली के कारण शेयर बाजार दवाब में आए और सेंसेक्स 59.36 अंकों या 0.18 फीसदी की गिरावट के साथ 33,777.38 पर बंद हुआ।    गुरुवार को वैश्विक बाजार में आई गिरावट के असर से सेंसेक्स 21.10 अंकों या 0.06 फीसदी की गिरावट के साथ 33,756.28 पर बंद हुआ। कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन शुक्रवार को सेंसेक्स 184.02 अंकों या 0.55 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ ऐतिहासिक ऊंचाई 33,940.30 पर बंद हुआ।    बीते सेंसेक्स के तेजी वाले शेयरों में प्रमुख रहे - आईसीआईसीआई बैंक (4.27 फीसदी), एचडीएफसी (0.23 फीसदी), विप्रो (3.9 फीसदी), भारती एयरटेल (2.33 फीसदी), एनटीपीसी (1.41 फीसदी) और हीरो मोटोकॉर्प (7.72 फीसदी)।    सेंसेक्स के गिरावट वाले शेयरों में- डॉ. रेड्डीज (1.64 फीसदी), एचडीएफसी (0.84 फीसदी) और कोल इंडिया (1.86 फीसदी) प्रमुख रहे।    व्यापक आर्थिक मोर्चे पर, देश के नियार्त में नवंबर में एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 30.5 फीसदी की तेजी दर्ज की गई और कुल 26.2 अरब डॉलर का निर्यात किया गया। इस दौरान माल के आयात में भी एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 19.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और देश का व्यापार घाटा 3.2 फीसदी बढक़र 13.83 अरब डॉलर रहा।    वैश्विक मोर्चे पर, अमेरिका में हाउस ऑफ रिप्रजेंटिटिव ने बुधवार को ऐतिहासिक कर विधेयक पारित कर दिया। इस बिधेयक के पारित होने से कॉरपोरेट कर की दर 35 फीसदी से घटकर 21 फीसदी हो गई।    चीन के केंद्रीय बैंक ने रिवर्स रेपो रेट और रिवर्स रेट में 14 दिनों की अवधि के लिए 5 आधार अंकों की बढ़ोतरी की। जापान की सरकार ने अपने विकास दर के अनुमान को चालू वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष के लिए बढ़ा दिया है, जो कि क्रमश: 1.9 फीसदी और 1.8 फीसदी हैं। इसमें जापान में घरेलू मांग में वृद्धि का सबसे अधिक योजदान रहा।    साभार-khaskhabar.com     

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