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नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेन्टल एक्सचेंज (आईसीई) में बीते स$त्र में गुरुवार को कॉटन के वायदे में जोरदार उछाल आया, जो कि अमेरिकी फाइबर की मांग में तेजी व डॉलर में आई मजबूती से प्रेरित था। बाजार के जानकारों के मुताबिक विदेशी बाजार में तेजी का घेरलू बाजार को फायदा मिलेगा।
अमेरिका में कॉटन का मार्च वायदा 1.5 फीसदी उछाल के साथ 79.25 से प्रति पाउंड पर बंद हुआ, जोकि सबसे सक्रिय वायदा सौदे में 19 मई के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।
कमोडिटी एनालिस्ट मुंबई के गिरीश काबरा के मुताबिक कच्चे तेल में हाल के दिनों में आई मजबूती से कृत्रिम फाइबर महंगा पड़ेगा। जाहिर है कि इसका फायदा कॉटन फाइबर को होगा, जिससे कॉटन में आगे भी तेजी रहने के संकेत हैं।
कॉमर्जबैंक ने भी पिछले दिनों कहा था कि कॉटन की तेजी में कच्चा तेल की कीमतों का भी असर देखा जा रहा है, क्योंकि कच्चे तेल का इस्तेमाल कृत्रिम फाइबर बनाने में होता है।
कमोडिटी विश£ेषक रेलीगेयर के वाइस प्रेसिडेंट अजितेश ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेजी से घेरलू बाजार में भी तेजी देखने को मिलेगी।
वैसे, फसल खराब होने की रिपोर्ट के बाद उत्पादन अनुमान में कमी के कारण घरेलू बाजार में कॉटन में जोरदार तेजी का रुख पहले से ही बना हुआ है।
बाजार के जानकारों के मुताबिक, सटोरियों ने कॉटन में अपने पोजीशन बनाई है जिससे तेजी को सपोर्ट मिला है।
गौरतलब है कि कॉटन उत्पादन, खपत व व्यापार से जुड़े देशों का संगठन इंटरनेशनल कॉटन एडवायजरी कमेटी मंगलवार को जारी 2017-18 के अनुमान में दुनियाभर में कॉटन खपत में करीब तीन फीसदी की बढ़ोतरी की है।
आईसीएसी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले महीने के अनुमान से इस महीने का उत्पादन अनुमान 0.31 फीसदी कम है जबकि खपत अनुमान में कटौती नहीं की गई है। 2017-18 में पिछले साल के मुकाबले इस साल कॉटन उत्पादन 10.61 फीसदी इजाफा इजाफा के साथ 25.43 मिलयन टन रहने का अनुमान है।
वहीं, खपत भी 2.85 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 25.22 मिलियन टन रहने का अनुमान है। वैश्विक आयात पिछले साल के 8.11 मिलियन टन के मुकाबले 8.35 मिलियन टन रहने का अनुमान है जबकि निर्यात भी 8.07 से बढक़र 8.35 मिलियन टन रहने की उम्मीद है। अंतिम स्टॉक पिछले साल के 18.77 मिलियन टन के मुकाबले 18.98 मिलियन टन रह सकता है।
आईसीएसी के मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय कीमतें पिछले साल से कम रहने और दूसरे प्रतिस्पर्धी फाइबर के दाम ऊंचे होने से कॉटन की वैश्विक खपत में इजाफा होने की उम्मीद है।
दूसरी तरफ, भारत में कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दिसंबर के अंत में देश के कॉटन उत्पादन 375 लाख गांठ (170 किलोग्राम) रहने का अनुमान जारी किया था। पिछले साल भारत में कॉटन का उत्पादन 2017-18 (अक्टूबर-सिंतंबर) में 345 लाख गांठ रहा था। सीएआई ने देश का कॉटन निर्यात अनुमान को 63 लाख गांठ से घटाकर 55 लाख गांठ कर दिया है। सीएआई ने आयात अनुमान को 17 लाख गांठ से बढ़ाकर 20 लाख गांठ कर दिया है।
साभार-khaskhabar.com













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