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स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’ || लखनऊ : अखिलेश का दावा, SIR पर चुनाव आयोग में ही मतभेद, बताया- लोकतंत्र के लिए घातक || चेन्नई : राहुल गांधी अगले महीने तमिलनाडु में कर सकते हैं 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम || उत्तर प्रदेश : गोंडा में मुठभेड़ के बाद तीन गौतस्कर गिरफ्तार, बहराइच में शातिर अपराधी पुलिस की गोली लगने से घायल

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मानसून सत्र के पहले दिन विपक्षी पक्ष ने जमकर हंगामा किया। विरोधी पक्ष ने गुड़िया मामले और कानून-व्यवस्था पर सारा काम रोककर नियम-67 में चर्चा मांगते हुए विपक्ष अपनी जिद पर अड़ा रहा। विपक्ष के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज ने बहुचर्चित गुड़िया मामले की छानबीन में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रश्नकाल को स्थगित करके प्रदेश में कानून-व्यवस्था के बिगड़े हुए हालात पर चर्चा की जाए। हंगामा तेज होने पर स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल ने राज्य सरकार से जवाब आने के बाद ही इसकी अनुमति दे पाने की बात की तो विपक्ष ने इसे मानने से इंकार किया।    हंगामा खत्म न होते देख स्पीकर ने पहले 15 मिनिट के लिए सदन की बैठक को स्थगित कर अपने चैंबर में सत्ता पक्ष व विपक्ष को बुलाया और बात की। लेकिन यहां भी सहमति न बन पाई। दूसरी बार हाउस शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी की। हंगामे के बीच करीब 12 बजकर 5 मिनट पर स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल ने सदन की कार्यवाही को बुधवार को 11 बजे तक स्थगित करने की घोषणा कर दी। साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली।मंगलवार को पीएम नरेंद्र मोदी एक क्राफ्रेंस का संबोधित कर रहे थे।इस दौरान पीएम ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत के विकास को आंदोलन का रूप देना होगा। पीएम मोदी ने इस दौरान महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन का भी जिक्र किया।पीएम ने कहा कि, उस वक्त हर भारतीय आजादी चाहता था, लेकिन महात्मा गांधी ने आंदोलन में लोगों को इस तरह जोड़ने का काम किया कि हर एक किसी को ये समझ आने लगा कि वह स्वयं देश के लिए काम कर रहा है। मोदी ने कहा अब फिर हमें ऐसा ही करना है आ गया है।हम मिलकर काम करेंगे तो हर मुश्किल पार कर सकते है। साभार-khaskhabar.com   

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जयपुर। प्रदेश में बीजेपी की गाड़ी पटरी से उतर गई है और ये खुद भाजपा के नेता भी बंद कमरे में स्वीकार करते हैं। यह कहना है पीसीसी चीफ सचिन पायलट का। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पीसीसी चीफ ने भाजपा पर निशाना साधते हुए किसानों की समस्याओं पर कार्रवाई की मांग रखी।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त को प्रदेश दौरे पर हैं। ऐसे में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी से प्रदेश के किसानों के लिए राहत की घोषणा करने की मांग रखी है। पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने कहा कि देश के अन्य राज्यों में किसानों के कर्ज माफ किए गए हैं तो राजस्थान के किसानों के भी कर्ज माफ किए जाने चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री मोदी से अपने प्रदेश दौरे के दौरान किसानों की कर्ज माफी के साथ ही अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए घोषणा करने की मांग रखी है।    कांग्रेस ने अन्य राज्यों की भांति प्रदेश में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की मांग रखी है। पीसीसी चीफ पायलट ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बीते 2 महिनों से देश के कई राज्यों के दौरा कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कर्नाटक व मध्यप्रदेश में सीएम के चेहरे को लेकर बात कही है। हालांकि यह भाजपा का अंदरूनी मामला है ,लेकिन कांग्रेस प्रधानमंत्री मोदी के प्रदेश दौरे के दौरान राजस्थान में भी चेहरा घोषित करने की मांग करती है।    कांग्रेस ने प्रदेश में अपराधों व भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने कहा कि खान घोटाला मामले में नया खुलासा सामने आया है ,वहीं इससे पहले सरकार खान घोटाले में लिप्त अफसरों को सजा देने की बजाय उन्हें बहाल कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खान घोटाले के साथ ही बिजली के निजीकरण ,एलईडी खरीद में घोटाला,चारागाह भूमि के कन्वर्जन करने और मासूमों के साथ बढ़ते अपराधों को लेकर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशों को दरकिनार कर सरकार 28 जिलों में बेहद कीमती जमीन भाजपा को देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए नोटिफिकेशन भी तैयार कराया जा रहा है।    राजस्थान में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा व कांग्रेस तैयारियों में जुट गई है। एक ओर जहां भाजपा प्रधानमंत्री के दौरे के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी भी किसानों की समस्याओं का मुद्दा उठाते हुए प्रदेश सरकार को घेरने का काम कर रही है।साभार-khaskhabar.com   

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आर जयन, महोबा। उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड़ में ऐला गांव के नत्थू रैदास की पिछले साल कथित तौर पर हुई भूख से मौत का मामला संसद में गूंजने के बाद महोबा जिले के घंडुआ गांव में एक दलित की भूख से हुई कथित मौत को प्रशासन ने अपनी आदतन नकार दिया है, हालांकि पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट में कई दिनों तक खाना न खाने की पुष्टि हुई है।     रविवार को महोबा जिले के खन्ना थाने के घंडुआ गांव में बीमारी के दौरान कई दिनों तक खाना न मिलने से दलित मजदूर छोट्टन (38) की मौत का मामला सुर्खियों में आया, उसे मधुमेह की बीमारी थी। लेकिन उसकी पत्नी उषा के यह कहने पर कि ‘मनरेगा मजदूरी न मिलने से इलाज न करा पाने और कई दिनों तक खाना तक खाना न खाने से उसके पति मौत हुई है, मामला बेहद गंभीर हो गया था।     अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) महोबा महेन्द्र सिंह ने मंगलवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से बताया कि ‘मृतक छोट्टन को मधुमेह की बीमारी थी और उसकी मौत से ही बीमारी से हुई है।’ उन्होंने स्वीकार किया कि ‘मृतक को कई दिनों से खाना नहीं मिला था, लेकिन यह भी संभव है कि वह बीमारी की वजह से खाना न खा सका हो।’ उन्होंने कहा कि ‘फिर भी मृतक के दाह संस्कार के लिए पांच हजार रुपये और परिवार के लिए पचास किलोग्राम अनाज का इंतजाम कर दिया गया है।’     उधर, मृतक की पत्नी उषा का आरोप है कि ‘पिछले एक हफ्ते से घर में एक भी अनाज नहीं था, उसका पति बीमार जरूर था, लेकिन मनरेगा की मजदूरी न मिलने की वजह से वह इलाज नहीं करा सकी और भूख व इलाज के अभाव में पति की मौत हुई है।’     उप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे नरैनी क्षेत्र क्षेत्र के पूर्व विधायक गयाचरण दिनकर ने कहा कि ‘योगी सरकार भूख से दलितों की मौत और आॅक्सीजन से कमी से बच्चों की मौत को तवज्जव देती, बल्कि सड़क दुर्घटना में एक अन्ना जानवर की मौत पर धरती पलटने की कुबत रखती है।’ नरैनी क्षेत्र के सत्तारूढ़ दल भाजपा के विधायक राजकरन कबीर का कहना है कि ‘वह नई कार खरीदने के लिए झांसी में है, इस घटना की कोई जानकारी नहीं है।’ साभार-khaskhabar.com   

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चंडीगढ़। शहर में पानी का बिल जमा नहीं कराने वाले डिफाल्टर उपभोक्ताओं को नगर निगम ने अंतिम चेतावनी दी है। इसके बाद भी बकाया राशि जमा नहीं करवाई गई तो निगम पानी के कनेक्शन काटने की कार्रवाई करेगा। इसके लिए निगम ने चार टीमों को जिम्मेदारी सौंपी है। जानकारी के अनुसार निगम को वाटर वाटर बिल डिफाल्टरों से कुल 22 करोड़ रुपए वसूलने हैं। अप्रेल में निगम ने करीब 614 डिफाल्टरों के पानी के कनेक्शन भी काटे। सख्ती के बाद निगम अब तक 12 करोड़ रुपए ही वसूलने में कामयाब रहा है और अभी भी 10 करोड़ रुपए वसूलने बाकी हैं। अब निगम ने डिफाल्टर उपभोक्ताओं को अंतिम चेतावनी दी है कि यदि बकाया भुगतान जमा नहीं करवाया तो कनेक्शन काटने का काम शुरू किया जाएगा।   इन गांवों में कालोनियों में सबसे ज्यादा बकाया शहर में सबसे ज्यादा बकाया राशि इंडिस्ट्रयल एरिया फेस-2 व राम दरबार की है। यहां से निगम को साढ़े चार करोड़ रुपए बकाया राशि वसूलनी है। इसके अलावा डड्डूमाजरा कॉलोनी से 87 लाख, मौली जागरां से 86 लाख, मलोया से 70 लाख, पलसौरा से 62 लाख, बापूधाम कॉलोनी से 42 लाख, सेक्टर-25 कॉलोनी से 32 लाख, डड्डूमाजरा गांव से 17 लाख, बडहेड़ी, धनास से आठ लाख व अटावा गांव से 7.2 लाख रुपए की वसूली की जानी है।   इस संबंध में चीफ इंजीनियर एनपी शर्मा का कहना है कि डिफाल्टर उपभोक्ताओं को अंतिम चेतावनी दी गई है कि वे जल्द से जल्द बकाया बिल जमा करवाएं। इसके लिए चार टीमों को भी काम में लगाया गया है। इसके बावजूद यदि बकाया बिल जमा नहीं किया गया तो पानी का कनेक्शन काट दिया जाएगा।   साभार-khaskhabar.com     

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सोलन। जिले में अब जिला प्रशासन ने नायाब बुक हब की शुरूआत की है। यह बुक हब राउंड द क्लॉक यानि 24 घंटे चलेगा। अपनी तरह का यह देश का पहला हब या लाइब्रेरी है। अब तक इसे सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक चलाया जा रहा था। देश की यह पहली लाइब्रेरी है जो पूरे 24 घंटे चलती है। यह लाइब्रेरी पुराने डीसी आॅफिस के टॉप फ्लोर पर शुरू की गई है और पूरी आधुनिक सुविधाओं से लैस है। सबसे खास बात यह है कि यहां पढ़ने आने वाले छात्र ही इसका संचालन भी करेंगे। सरकार व प्रशासन केवल मार्शदर्शन की जिम्मेदारी निभाएगा। यहां जमीन पर बैठकर या आराम से लैट कर या सौफे या टेबल-मेज पर बैठकर हर तरीके से पढ़ाई करने की छूट दी गई है। जल्दी ही कैम्पस को वाई-फाई से कनेक्ट किया जाएगा। फिलहाल यहां 135 छात्रों के एक साथ बैठकर पढ़ने की सुविधा है।    शनिवार-रविवार को होंगे गेस्ट लेक्चरर - इन दो दिन यहां गेस्ट लेक्चरर कराए जाएंगे जिसमें प्रशासनिक अधिकारी, सिविल सर्विस, बैंकिंग, डिफेंस व विभिन्न विभागों के एक्सपर्ट परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को टिप्स देंगे। कैम्पस के पीछे की तरह रेनोवेशन का काम चल रहा है जिसे बाद में रिडिंग रूम का लुक दिया जाने की तैयारी है। अगर ऐसा होता है तो सिटिंग कैपेसिटी दोगुनी हो जाएगी।साभार-khaskhabar.com   

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जम्मू। जम्मू एवं कश्मीर सरकार द्वारा संविधान के अनुच्छेद 35 ए पर जताई जा रही चिंताओं के बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को संविधान के मुद्दों में उलझने के बजाए आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जितेंद्र सिह ने यह बातें अमरनाथ यात्रा को सफल बनाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और सरकारी अधिकारियों के अभिनंदन कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने कहा, हमारा ध्यान पानी और बिजली जैसी लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा, यह सभी मुद्दे आम आदमी की पहली जरूरतें हैं जिसके लिए संवैधानिक मुद्दे समेत अन्य मुद्दे बाद में आते हैं।   अनुच्छेद 35ए को लेकर कश्मीर में विपक्ष के विरोध के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री ने कहा कि विपक्ष को यह विशेषाधिकार हासिल है कि वह विवादित मुद्दों को उठाए लेकिन सरकार का काम यह है कि वो विपक्ष के इस हंगामे से अपना ध्यान न भटकाए और आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में अपनी पूरी शक्ति लगा दे। जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की विचारधारा अलग है लेकिन दोनों का साझा संकल्प है कि इन सब बातों से भटकना नहीं है। इसके बजाए पूरा ध्यान जम्मू एवं कश्मीर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा चलाई जा रही नई प्रगतिशील योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।   उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार जम्मू, कश्मीर और लद्दाख, राज्य के तीनों इलाकों पर समान ध्यान देने के लिए प्रतिबद्ध है और अब यह राज्य के लोगों पर है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं। इस साल की कुछ परीक्षाओं के बारे में बताते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस साल कश्मीर घाटी के 9 छात्रों ने आईआईटी में दाखिला पाया है और साथ ही पिछले कुछ सालों से कश्मीर के छात्र सिविल सेवा के लिए भी चयनित हुए हैं।जितेंद्र सिंह ने कहा कि समय आ गया है जब जम्मू के युवा मोदी सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे अवसरों का लाभ उठाएं। अतीत में हुई नाइंसाफियों का रोना रोते रहने या हारी हुई मानसिकता के लिए अब कोई जगह नहीं है। सिंह ने कहा अनुच्छेद 35 ए पर भाजपा और पीडीपी की अलग अलग राय है जिसमें जम्मू एवं कश्मीर के लोगों को विशेषाधिकार और सुरक्षा हासिल है। पीडीपी इस अनुच्छेद को सुरक्षित रखना चाहती है और भाजपा देश के सभी नागरिकों के लिए समान विशेषाधिकार चाहती है।     साभार-khaskhabar.com     

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मुंबई। केंद्रीय वित्त और रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को कहा कि नोटबंदी के बाद देश के तमाम हिस्सों में माओवादियों और जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों को पैसों की किल्लत को मजबूर हो गए है। साथ ही जेटली ने दावा किया कि नोटबंदी के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी में हिस्सा लेने वाले प्रदर्शनकारियों की संख्या में भी कमी आई है। जेटली ने कहा, नोटबंदी से पहले कश्मीर की सडक़ों पर हजारों की संख्या में पत्थरबाज इकट्ठे होते थे लेकिन अब ऐसे प्रदर्शनों में 25 पत्थरबाज भी शामिल नहीं होते। उन्होंने कहा नोटबंदी के बाद जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में माओवादियों को पैसे की किल्लत हो गई है।    पहले जो धन अर्थव्यवस्था के बाहर समानांतर ढंग से चल रहा था, वह औपचारिक बैंकिग सिस्टम में आ गया। न्यू इंडिया के बीजेपी के स्वप्न पर उन्होंने कहा, हम रक्षा, ग्रामीण विकास और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना चाहते हैं। हमारे पास विश्वस्तरीय सार्वजनिक संस्थान होने चाहिए ताकि गोरखपुर त्रासदी जैसी शर्मनाक घटनाएं न हों। वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार 7-7.5 प्रतिशत के विकास दर से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि विकास दर को रफ्तार देने के लिए सरकार देश हित में सख्त फैसले लेती रहेगी, जैसा कि 2014 में सत्ता में आने के बाद अब तक लिया गया है। जेटली ने केंद्र की सत्ता में 3 साल पूरा कर चुकी बीजेपी की अगुआई वाली सरकार की तमाम उपलब्धियों को गिनाया। उन्होंने जीएसटी लागू करने, नोटबंदी, दिवालियापन पर नया कानून, बेनामी लेन-देन से जुड़े कानूनों में संशोधन, स्पेक्ट्रम और प्राकृतिक संसाधनों के ईमानदारी से आवंटनों और तमाम देशों के साथ दोहरे कराधान को रोकने के लिए किए समझौतों का मोदी सरकार की उपलब्धियों के रूप में जिक्र किया।   साभार-khaskhabar.com     

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पटना। बिहार के सीमांचल जिले सहित राज्य के 18 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य सरकार राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाने का दावा कर रही है, परंतु अभी भी कई ऐसे इलाके हैं जहां के लोगों को राहत पहुंचने का इंतजार है। बिहार में बाढ़ से 1.21 करोड़ से ज्यादा की आबादी प्रभावित है, जबकि बाढ़ की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या बढक़र 253 तक पहुंच गई है। राज्य के अररिया जिले में 57 लोग, सीतामढ़ी में 31, पश्चिमी चंपारण में 29, कटिहार में 23, पूर्वी चंपारण में 19, मधुबनी, सुपौल एवं मधेपुरा में 1313, किशनगंज में 11, दरभंगा में 10, पूर्णिया में 9, गोपालगंज में 8, मुजफ्फरपुर, शिवहर एवं सहरसा में 44, खगडिय़ा में 3, सारण में 2 में एक व्यक्ति की मौत हुई है। अब तक 7,21,704 लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाके से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है और 1358 राहत शिविरों में 4,21,824 व्यक्ति शरण लिए हुए हैं।   आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, राज्य के 18 जिलों के 164 प्रखंडों की 1.21 करोड़ से ज्यादा की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। बाढ़ की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में पिछले 24 घंटे के दौरान बाढ़ से 50 लोगों की मौत हुई है, जिस कारण इस वर्ष बाढ़ से मरने वालों की संख्या रविवार तक 253 तक पहुंच गई है। अधिकारियों का कहना है, बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी से घिरे 6.25 लाख से ज्यादा लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके अलावा इन क्षेत्रों में 1,336 राहत शिविर खोले गए हैं, जिसमें करीब 4.22 लाख से ज्यादा लोग शरण लिए हुए हैं।    1,879 सामुदायिक रसोई खोली गई है, जिसमें लोगों को लंगर की तरह खाना खिलाया जा रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, प्रभावित जिलों में लगातार सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम लगी हुई है। इन 18 जिलों में एनडीआरएफ की 28 टीम के 1,152 जवान अपनी 118 नौकाओं और एसडीआरएफ की 16 टीम के 446 जवान अपनी 92 नौकाओं तथा सेना के 630 जवान एवं 70 नौकाओं के साथ राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई हैं।एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम के साथ चिकित्सकों का चलंत दस्ता भी प्रभावित इलाकों में लगा हुआ है। इसके अलावे कई सरकारी और निजी नावों को भी राहत और बचाव कार्य में लगाया गया है। वैसे राहत की बात है कि पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य के सीमांचल क्षेत्रों में कहीं भी बारिश नहीं हुई है। इस बीच सीमांचल के क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी घटने की सूचना है। आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने दावा किया कि सभी प्रभावित क्षेत्र में आवश्यक दवाएं, ब्लीचिंग पाउडर एवं सर्पदंश से संबंधित दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करा दी गई हैं।     साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। सरकार ने जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) रिटर्न दाखिल करने की तिथि 25 अगस्त तक के लिए बढ़ा दी है। इसकी घोषणा शनिवार को की गई। इससे पहले जीएसटी फाइल करने वाली वेबसाइट ने पूर्व निर्धारित अंतिम तिथि से एक दिन पहले तकनीकी गड़बडिय़ों के कारण काम करना बंद कर दिया था। जीएसटीआर-3बी दाखिल करने की तिथि एक जुलाई से लेकर 20 अगस्त तक निर्धारित की गई थी, जिसमें माल की आवाजाही और उधार/भुगतान के आंकड़े दाखिल करना है। वित्त मंत्रालय द्वारा दाखिल बयान में कहा गया, अंतिम समय पर रिटर्न दाखिल करने वालों को कुछ तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ा।   हालांकि सरकार ने करदाताओं को पहले ही चेताया था कि अंतिम तिथि से पहले ही रिटर्न फाइल कर दें, ताकि अंतिम समय पर किसी तकनीकी परेशानी से बच सकें। बयान में कहा गया, चूंकि यह जीएसटी के तहत दाखिल किया जाने वाला पहला रिटर्न है, इसलिए करदाताओं और कर पेशेवरों ने रिटर्न फाइल करने के लिए कुछ और वक्त मुहैया कराने की मांग की है। इसमें आगे कहा गया, वहीं, बाढ़ से पीडि़त राज्यों ने भी जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। जम्मू और कश्मीर ने समय बढ़ाने की मांग की थी, क्योंकि वहां जीएसटी देर से लागू हुआ।   बयान में कहा गया कि इन मुद्दों को देखते हुए जीएसटी कार्यान्वयन समिति (इसमें केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी शामिल हैं) ने जुलाई की फाइलिंग की अंतिम तिथि को उन करदाताओं के लिए जो इस महीने ट्रांस1 में ट्रांजिशन क्रेडिट का लाभ नहीं लेना चाहते हैं, 25 अगस्त तक बढ़ाने का फैसला किया है। वहीं, जो करदाता इस महीने ट्रांस 1 (ट्रांजिसन क्रेडिट) का लाभ लेना चाहते हैं, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 28 अगस्त निर्धारित की गई है।   देश भर के व्यापारियों को शनिवार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जब वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) फाइल करने वाली वेबसाइट ने जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के अंतिम दिन से एक दिन पहले कुछ समय के लिए काम करना बंद कर दिया। एसोचैम के अध्यक्ष (स्पेशल टास्क फोर्स ऑन जीएसटी) प्रतीक जैन ने आईएएनएस को बताया, दोपहर 12 बजे के बाद से ही जीएसटी की वेबसाइट रुक-रुक कर चल रही थी। इससे व्यापारियों के बीच काफी उलझन पैदा हो गई। हमारे कई ग्राहकों ने बताया कि इस गड़बड़ी के कारण वे रिटर्न दाखिल नहीं कर सके। अगर ऐसा आगे भी जारी रहता है तो सरकार को जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की तिथि अगले कुछ दिनों के लिए बढ़ा देनी चाहिए।   जीएसटी की वेबसाइट पर लगी नोटिस में कहा गया, यह सेवा 19 अगस्त को दोपहर 2 बजे से 2.45 बजे तक उपलब्ध नहीं है। कृपया बाद में आएं। अगस्त महीने के रिटर्न का विवरण दाखिल करने की अंतिम तिथि 20 सितंबर है। पुणे के चाटर्ड एकाउंटेंट प्रीतम महूरे ने बताया, इस स्थिति से करदाता तनाव में है। महज दो हफ्ते पहले ही जीएसटीआर-3बी फार्म फाइलिंग के लिए उपलब्ध कराया गया था। उम्मीद के मुताबिक यह करदाताओं द्वारा फाइल किया गया पहला जीएसटी होता और इसी हफ्ते से करदाताओं ने जीएसटीआर-3बी फाइल करना शुरू किया था।एसकेपी बिजनेस कंसल्टिंग के भागीदार जिगर दोषी ने बताया, अगर समरी रिटर्न फाइल करने में सिस्टम बैठ गया है तो अगले कुछ महीनों में स्थिति काफी डरावनी प्रतीत हो रही है। क्योंकि हमें अंदाजा नहीं है कि उस समय क्या होगा, जबकि करदाताओं द्वारा इनवाइस अपलोड करते हुए विस्तृत जीएसटी रिटर्न फाइल किया जाएगा। अगस्त महीने का समरी रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 20 सितंबर निर्धारित है, जिसे सरकार ने शनिवार को अगले 5 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। जीएसटीआर 3बी के अलावा करदाताओं को तीन फार्म और फाइल करने हैं, जिनमें जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-2 और जीएसटीआर-3 है। जुलाई माह के लिए ये तीनों फार्म क्रमश: 1 सितंबर से 5 सितंबर के बीच, 6 सितंबर से 19 सितंबर के बीच और 11 सितंबर से 15 सितंबर के बीच फाइल करने हैं।   साभार-khaskhabar.com     

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करौली। ग्राम पंचायत चन्देलीपुरा व आसपास के क्षेत्र के लोग लगभग 3 वर्षौ से बिजली विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनके यहाँ आज तक लाइट की व्यवस्था नही की गई है।    ग्रामीणों की समस्या को देखते हुये आज सपोटरा विधायक व उपनेता प्रतिपक्ष रमेश मीना ने बिजली विभाग के मुख्य अभियंता को ज्ञापन सौंप इस समस्या से अवगत कराया। ज्ञापन मे सपोटरा विधायक मीना ने कहा कि ग्रांम पंचायत चन्देलीपुरा, मनाखुर, नवलपुरा तथा आसपास के क्षेत्र के लोगो को डिमांड नोटिस जमा कराये हुये 3 वर्ष हो गये है लेकिन ग्रांम पंचायत मे पूरी तरह से बिजली व्यवस्था नही की गई है जिससे ग्रामीणों को काफी समस्या का सामना करना पडता है। ज्ञापन देते समय विधायक मीना ने कहा कि बिजली आज के समय मे बहुत जरुरी है क्योंकि बिजली बिना कोई भी कार्य नही होता हैं। इस पर बिजली विभाग के मुख्य अभियंता ने ग्रांम पंचायत चन्देलीपुरा मे शीघ्र ही बिजली व्यवस्था सुचारु रूप से चालू कराने का आश्वासन दिया।साभार-khaskhabar.com   

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पटना। बिहार के सीमांचल जिले सहित राज्य के 18 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य सरकार राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाने का दावा कर रही है, परंतु अभी भी कई ऐसेे इलाके हैं जहां के लोगों को राहत पहुंचने का इंतजार है। बिहार में बाढ़ से 1.21 करोड़ से ज्यादा की आबादी प्रभावित है, जबकि बाढ़ की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या बढक़र 202 तक पहुंच गई है। आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया, ‘‘राज्य के 18 जिलों के 164 प्रखंडों की 1.21 करोड़ से ज्यादा की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। बाढ़ की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।’’ राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में पिछले 24 घंटे के दौरान बाढ़ से 49 लोगों की मौत हुई है, जिस कारण इस वर्ष बाढ़ से मरने वालों की संख्या शनिवार तक 202 तक पहुंच गई है।    अररिया में सबसे ज्यादा 42 लोगों की मौत हुई है, जबकि किशनगंज में 11, पूर्णिया में नौ, कटिहार में सात, पूर्वी चंपारण में 11, पश्चिमी चंपारण में 29, दरभंगा में 10, मधुबनी में 12, सीतामढ़ी में 31, शिवहर में चार, सुपौल में 13, मधेपुरा में नौ, गोपालगंज व सहरसा में चार-चार, मुजफ्फरपुर में एक, खगडिय़ा में तीन तथा सारण में दो व्यक्ति की मौत हुई है।अधिकारियों का कहना है, ‘‘बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी से घिरे 6.25 लाख से ज्यादा लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके अलावा इन क्षेत्रों में 1,336 राहत शिविर खोले गए हैं, जिसमें करीब 4.22 लाख से ज्यादा लोग शरण लिए हुए हैं। 1,879 सामुदायिक रसोई खोली गई है, जिसमें लोगों को लंगर की तरह खाना खिलाया जा रहा है।’’    आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘प्रभावित जिलों में लगातार सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम लगी हुई है। इन 18 जिलों में एनडीआरएफ की 28 टीम के 1,152 जवान अपनी 118 नौकाओं और एसडीआरएफ की 16 टीम के 446 जवान अपनी 92 नौकाओं तथा सेना के 630 जवान एवं 70 नौकाओं के साथ राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई हैं।’’ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम के साथ चिकित्सकों का चलंत दस्ता भी प्रभावित इलाकों में लगा हुआ है। इसके अलावे कई सरकारी और निजी नावों को भी राहत और बचाव कार्य में लगाया गया है। वैसे राहत की बात है कि पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य के सीमांचल क्षेत्रों में कहीं भी बारिश नहीं हुई है। इस बीच सीमांचल के क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी घटने की सूचना है। आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने दावा किया कि सभी प्रभावित क्षेत्र में आवश्यक दवाएं, ब्लीचिंग पाउडर एवं सर्पदंश से संबंधित दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करा दी गई हैं। साभार-khaskhabar.com     

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नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

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हमारी बात

स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको  ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’

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Bollywood


विविधा


शंखनाद

राइन फॉल्स, स्विस सीढ़ियाँ और बुज़ुर्ग घुटने: नाव की सैर बनी ओलंपिक प्रतियोगिता!

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