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नई दिल्ली । इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले तीन वनडे और तीन टी-20 मैचों के लिए आज भारतीय क्रिकेट टीम का चयन होने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जब इंग्लैंड के खिलाफ चयनकर्ता टीम इंडिया का चयन के लिए बैठेंगे तो यह तय है कि विराट कोहली को इन दोनों प्रारूपों की कप्तानी भी दी जा सकती है। जो भारत की सीमित ओवरों की क्रिकेट में नए युग की शुरूआत होगी। एमएस धोनी ने सीमित ओवरों की कप्तानी छोड़ दी और ऐसे में अब टेस्ट कप्तान विराट कोहली को इन दोनों प्रारूपों में टीम की कमान सौंपी जा सकती है। कोहली को कप्तानी का जिम्मा सौंपे जाने को लेकर किसी तरह का संदेह नहीं है लेकिन चयनकर्ताओं के लिये उचित संतुलन बनाते हुए दो टीमों का चयन करना आसान नहीं होगा क्योंकि कई खिलाड़ी अब भी चोटों से जूझ रहे हैं। मुंबई के दो बल्लेबाज रोहित शर्मा और अंजिक्य रहाणे चोटिल होने के कारण बाहर हैं। इससे खराब फार्म में चल रहे शिखर धवन को फिट होने की स्थिति में के एल राहुल के साथ पारी का आगाज करने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। माना जा रहा है कि चयनकर्ता किसी बिल्कुल नये खिलाड़ी पर भरोसा दिखायें। कर्नाटक के राहुल चोटिल होने के कारण न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में नहीं खेल पाये थे जबकि दिल्ली के बल्लेबाज शिखर धवन भी न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान चोटिल हो गये थे। बायें हाथ के बल्लेबाज धवन ने जनवरी में आखिरी बार ऑस्ट्रेलिया में वनडे मैच खेले थे। पहले दो मैचों में फ्लॉप रहने के बाद उन्होंने अगले तीन मैचों में एक शतक और दो अर्धशतक लगाये थे। इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें और अंतिम टेस्ट मैच में तिहरा शतक जडऩे वाले करूण नायर को रहाणे के स्थान पर सीमित ओवरों की टीम में चुने जाने की संभावना है। दूसरे ऑफ स्पिनर जयंत यादव को चोटिल होने के कारण इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी टेस्ट मैच से बाहर रहना पड़ा था। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या चयनकर्ता मैच फिटनेस साबित किये बिना इन दोनों गेंदबाजी आलराउंडरों का चयन करते हैं या नहीं। धोनी भले ही कप्तानी से हट गये हैं लेकिन उन्होंने एक खिलाड़ी के रूप में खुद को उपलब्ध रखा है। चयनकर्ताओं को भी इससे अवगत करा दिया गया है जो कि अन्य दावेदारों पर उन्हें ही तरजीह देंगे।   साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । क्रिकेट इतिहास में जब भी सफल कप्तानों का जिक्र होगा तो उसमें भारत के महेंद्र सिंह धोनी का नाम बेशक आएगा। धोनी का नाम भारत के ही नहीं विश्व के सफलतम कप्तानों की सूची में आता है। धोनी ने बुधवार को भारत की एकदिवसीय और टी20 क्रिकेट टीम के कप्तान पद से अचानक इस्तीफा देकर हर किसी को चौंका दिया।  एक ऐसे देश में जहां संन्यास लिया नहीं जबरन लिवाया जाता रहा है, धोनी ने अपने चरम पर रहते कप्तानी से हटने का फैसला किया और नई मिसाल पेश की। उनका यह फैसला हैरानीभरा रहा जिससे पूरा क्रिकेट जगत सकते में है। धोनी से इस्तीफे की उम्मीद किसी को नहीं थी। मैदान पर कैप्टन कूल के नाम से मशहूर धोनी ने कप्तानी छोडऩे का फैसला भी उतने ही शांत अंदाज में लिया, जिस तरह वे मैदान पर कप्तानी करते रहे हैं। क्रिकेट के सार्वकालिक महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के कहने पर चयनकर्ताओं ने धोनी को टीम की कमान सौंपी थी और धोनी ने सचिन की सिफरिश को शत प्रतिशत सही ठहराया। अपनी पहली परीक्षा में उन्होंने भारत का नाम इतिहास में दर्ज करा दिया। दक्षिण अफ्रीका में हुए पहले टी20 विश्व कप में धोनी पहली बार भारतीय टीम का नेतृत्व कर रहे थे। धोनी ने जीत के सिलसिले को इस तरह शुरू किया कि टीम फाइनल में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को हराकर विजेता बनकर लौटी। इसके बाद धोनी जीत और कप्तानी की नई इबारत लिखते चले गए। टी20 विश्व कप जीत के बाद राहुल द्रविड़ के एकदिवसीय में कप्तानी छोडऩे के बाद धोनी को टीम का कप्तान बनाया गया। धोनी ने इस प्रारूप में भी सफलता के नए आयाम लिखे। 2011 में भारतीय सरजमीं पर खेले गए 50 ओवरों के विश्व कप के फाइनल में धोनी ने छक्का लगाकर 28 साल बाद देश को विश्व कप खिताब दिलाया। अनिल कुंबले ने टेस्ट में टीम की कप्तानी छोड़ी तो धोनी यहां भी जिम्मा लेने को आगे खड़े थे। नवंबर, 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई श्रंखला के चौथे टेस्ट मैच में धोनी को टीम की कमान सौंपी गई। टेस्ट में भी धोनी ने टीम को पहली बार नंबर-1 बनाया। धोनी भारत के इकलौते ऐसे कप्तान हैं जिन्होंने आईसीसी के सभी आयोजनों में टीम को जीत दिलाई है। धोनी की कप्तानी में ही भारत ने 2013 में हुई चैम्पियंस ट्रॉफी पर कब्जा जमाया था। एकदिवसीय में धोनी ने कुल 199 मैचों में टीम का नेतृत्व किया। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फिनिशर माने जाने वाले धोनी ने टीम को कप्तान रहते कुल 110 मैचों में जीत दिलाई जबकि 74 मुकाबलों में उन्हें हार मिली। चार मुकाबले टाई और 11 मैचों का कोई परिणाम नहीं निकला। कप्तान रहते हुए एक बल्लेबाज के तौर पर भी धोनी कामयाब रहे। उन्होंने कप्तान रहते एकदिवसीय में 54 का औसत और 86 के स्ट्राइक रेट से 6,683 रन बनाए।  वे विश्व क्रिकेट में सबसे ज्यादा एकदिवसीय मैचों में कप्तानी करने के मामले में तीसरे नंबर पर आते हैं। उनसे ज्यादा ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग और न्यूजीलैंड के स्टीफन फ्लेमिंग ने एकदिवसीय मैचों में कप्तानी की है। धोनी को क्रिकेट इतिहास में करिश्माई कप्तान भी कहा जाता है। क्रिकेट के मैदान पर उन्होंने कई बार ऐसे जोखिम उठाए जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने 72 टी20 मैचों में टीम की कमान संभाली और 41 जीत टीम को दिलाई और 28 हारों का सामना किया। एक मैच टाई और दो मैचों का परिणाम नहीं निकला। वे टी20 में सबसे ज्यादा मैचों में कप्तानी करने वाले खिलाड़ी हैं। टी-20 में कप्तान रहते उन्होंने 122.60 के स्ट्राइक रेट से 1112 रन बनाए। टी20 में वे बिना अर्धशतक लगाने के बाद सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी हैं। टी20 में उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 48 रन है। पांच साल बाद उन्होंने भारत को एक बार फिर विश्व विजेता बनाया। भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश की संयुक्त मेजबानी में खेले गए 50 ओवरों के विश्व कप में भारत ने धोनी के कप्तान रहते ही जीत हासिल की।  भारत ने 28 साल बाद इस विश्व कप पर कब्जा जमाया था। 2015 में हुए विश्व कप में धौनी भारत को सेमीफाइनल तक ले गए। धोनी की कप्तानी में ही भारत ने अब तक खेले गए छह टी20 विश्व कप में हिस्सा लिया और धोनी की कप्तानी में भारत दो बार विश्व कप के फाइनल तक पहुंचा। एक बार टीम विजेता बनी तो 2014 में उपविजेता। 2014 के फाइनल में उसे श्रीलंका ने मात दी। पिछले साल भारत की मेजबानी में हुए टी-20 विश्व कप में भी भारत ने सेमीफाइनल में जगह बनाई, जहां उसे वेस्टइंडीज के हाथों हार का सामना करना पड़ा।  धोनी ने कप्तानी में अपनी सफलता इंडियन सुपर लीग (आईपीएल) में भी जारी रखी। उन्होंने इस समय निलंबित चल रही चेन्नई सुपर किंग्स को दो बार आईपीएल का विजेता बनाया जबकि चार बार उपविजेता बनी। चेन्नई ने धोनी के कप्तान रहते हर साल आईपीएल के सेमीफाइनल में जगह बनाई। धोनी ने दिसंबर, 2014 में टेस्ट से संन्यास ले लिया था। धोनी ने 60 टेस्ट मैचों में टीम की कमान संभाली जिसमें 27 में उन्हें जीत और 18 में हार मिली जबकि 11 मैच ड्रॉ रहे। आईए अब देखते हैं धोनी के वनडे और टी20 में कप्तानी छोडऩे पर दिग्गजों की राय :- धोनी को टी20 और वनडे विश्व कप में सफलता हासिल कराने वाले भारत के कप्तान के रूप में शानदार करिअर की बधाई। मैंने उन्हें आक्रामक खिलाड़ी से सटीक एवं निर्णायक कप्तान के रूप में उभरते देखा है। यह उनकी सफल कप्तानी का जश्न मनाने और उनके फैसले का सम्मान करने का दिन है। सचिन तेंदुलकर (पूर्व भारतीय कप्तान) धोनी ने देश को दो वल्र्ड कप और एक चैम्पियंस ट्रॉफी दिलाई है। वे स्वयं कैसे कप्तानी से हटने का फैसला कर सकते हैं। यह तो चयनकर्ताओं को तय करना चाहिए कि धोनी कप्तान रहे या नहीं। मोहम्मद अजहरुद्दीन (पूर्व कप्तान, भारत) भारत के सबसे सफल कप्तान एमएस धोनी जिन्होंने अपने सपने को हकीकत में बदला और कई लोगों प्रेरणा दी कि ज्यादा सपने देखो, ज्यादा मेहनत करो और ज्यादा बड़े बनो। सेल्यूट आपको। सुरेश रैना (भारतीय ऑलराउंडर) धोनी एक सच्चे लीडर हैं, जिन्होंने कई क्रिकेटर्स को प्रेरणा दी। चैम्पियंस ट्रॉफी के दौरान मुझे ओपनिंग पर भेजकर उन्होंने मेरे करिअर को नई दिशा दी। मोहम्मद कैफ (पूर्व भारतीय बल्लेबाज) टीम इंडिया के कप्तान के रूप में आपकी उपलब्धियों को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। अविश्वसनीय माही, वेलडन। रोहित शर्मा (भारतीय बल्लेबाज) 9 साल तक टीम का नेतृत्व करने और बेहतरीन परिणाम देने के लिए धोनी को सलाम, आप जैसा कप्तान मिलना टीम के लिए शानदार रहा। इरफान पठान (भारतीय ऑलराउंडर) धोनी भारतीय क्रिकेट की जीवित किवदंती हैं। उन्होंने लोगों का शानदार मनोरंजन किया है और देश को दो वल्र्ड कप दिलाए हैं। कृष्णामाचारी श्रीकांत (पूर्व भारतीय कप्तान) सौरव गांगुली के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट को जो ऊंचाई मिली थी धोनी ने उसे और आगे बढ़ाया है। वे चाहते तो एक-दो साल और कप्तानी कर सकते थे। चेतन चौहान (पूर्व भारतीय ओपनर) धोनी को भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक के रूप में याद किया जाएगा। वे बेहतरीन इंसान हैं और अब भी भारतीय क्रिकेट में काफी योगदान दे सकते हैं। मेरी राय में अब कोहली का समय है कि वे तीनों प्रारूप में कप्तानी संभाले। वे सुपरस्टार हैं और चुनौती के लिए तैयार हैं।  माइकल क्लार्क (पूर्व कप्तान, ऑस्ट्रेलिया) मैं धोनी को उनके बतौर कप्तान शानदार करिअर के लिए बधाई देता हूं। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने टी20 विश्व कप, वनडे विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी जीती। अनुराग ठाकुर (पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष) यहां तक कि सर्वकालिक महान कप्तानों में से एक ने फैसला कर लिया कि अब बहुत हो चुका। शाबाश धोनी एक अविश्सनीय कप्तानी दौर के लिए। साभार-khaskhabar.com  

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मुझे याद नहीं आता कि 88 वर्षों के इतिहास में कभी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष और सचिव को सर्वोच्च न्यायालय ने बर्खास्त किया हो, लेकिन यह कदम चौंकाता नहीं। यह तो होना ही था। पिछली जुलाई में अदालत द्वारा लोढ़ा समिति की बोर्ड में पुनर्सुधार संस्तुतियों को स्वीकार किए जाने के बाद यह तय था कि दिन बहुरेंगे। मगर तब से लगातार बीसीसीआई यही कोशिश करती रही कि कहीं कोई बच निकलने का रास्ता मिल जाए।  एक के बाद एक तिकड़म लगाई जाती रही। कांग्रेसी राजनेता और देश के सबसे महंगे वकील कपिल सिब्बल की सेवाएं ली गईं। बोर्ड सदर ने पारदर्शिता लाने के लिहाज से कैग से ऑडिट करने की संस्तुतियों के मामले में आईसीसी को भी घसीटने की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजनेता सांसद और बोर्ड के सदर अनुराग ठाकुर की कोशिश और उनका झूठा हलफनामा गले की फांस बन गया। तय था कि दो जनवरी को जो आदेश आएगा, वह देश में क्रिकेट संचालित करने वाली संस्था की चूलें हिला कर रख देगा और यही हुआ भी। सदर और सचिव ही नहीं, बल्कि जिन राज्य संघों में संस्तुतियां लागू करने में आनाकानी की गई, वहीं के भी अधिकारी बर्खास्त हो गए। ठाकुर की हालत यह है कि अदालत की अवमानना के आरोप में उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। राजनीति में शुचिता और ईमानदारी की बात करने वाली भाजपा के ठाकुर ने जिस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने में लगातार अड़ंगा लगाया, वह वाकई शर्मनाक रहा।  अहंकार, पदलोलुपता, हठधर्मिता क्या कुछ नहीं देखा देश ने ठाकुर एंड कंपनी में। ऊपर से तुर्रा यह कि बर्खास्तगी के बाद हिमाचल क्रिकेट संघ के भी अध्यक्ष ठाकुर ने जिस अंदाज में यह कहा कि उनका संघर्ष बोर्ड की स्वायत्तता के लिए है और वह जारी रहेगा, वह बता रहा था कि पूंछ जल गई लेकिन ऐंठन नहीं गई। ठाकुर किस स्वायत्तता की बात कर रहे हैं कि कोई पदाधिकारी दो पद नहीं संभाल सकता, 70 वर्ष उम्र की समयसीमा, किसी पदाधिकारी का नौ वर्ष से अधिक कार्यकाल नहीं, बोर्ड में खिलाडिय़ों का प्रतिनिधित्व, खिलाड़ी संघ को मान्यता, एक राज्य एक वोट आदि। कहां से गलत हैं? ठाकुर ने अपने वीडियो में बखान किया कि बोर्ड ने क्रिकेट को ऊंचे पायदान तक पहुंचाया है। एक से बढक़र एक का श्रेय पुराने खिलाडिय़ों की चयन समिति और खिलाडिय़ों को है न कि खेल की समझ रखने वाले बोर्ड अधिकारियों को।  वैसे माननीय ठाकुर यह भूल चुके हैं कि देश में इस खेल को पहले स्थान पर पहुंचाने के लिए क्रिकेट प्रेमियों को श्रेय जाता है, जो यह जानते हुए भी कि टेस्ट मैच अनीर्णित होगा, चार दशक पूर्व मैच के अंतिम दिन भी मैदान ठसाठस रखते थे। श्रेय उस मीडिया खासकर भाषायी मीडिया को जाता है, जिन्होंने आम जन को क्रिकेट पढऩा सिखाया। सबसे ऊपर तो बोर्ड को आभार मानना चाहिए, रेडियो की हिंदी कमेंट्री का जिसने हल जोत रहे बैल के गले में लटके ट्रांजिस्टर पर विविध भारती के गानों से दूर कर किसान को चौके-छक्के की ओर मोड़ दिया। इस लोकप्रियता को दोनों हाथों से बोर्ड ने भुनाया। वो बोर्ड, जो 1987 के विश्व कप की मेजबानी के लिए रिलायंस के आगे हाथ फैलाने पर मजबूर हुआ कि उसके पास एक करोड़ विदेशी मुद्रा तक नहीं थी, वहीं सरकार से प्रसारण अधिकार की बपौती खत्म कर बोर्ड को जगमोहन डालमिया ने 1996 विश्व कप के सफल आयोजन से जो मालामाल किया कि फिर मुड़ कर नहीं देखा।  बोर्ड यदि दुनिया का सबसे समृद्ध क्रिकेट संघ है, तो इसके लिए स्वर्गीय डालमिया और फिर आईपीएल की अवधारणा लेकर आए ललित मोदी को श्रेय देना चाहिए। ठाकुर बताएं कि पारदर्शिता का कब पक्षधर रहा है बोर्ड। खिलाड़ी नौकर और बोर्ड मालिक की भूमिका में ही रहे हैं। ठाकुर जी जांघिए में ही होंगे जब अस्सी के दशक में खिलाड़ी संघ की पहल करने का खामियाजा दिलीप वेंगसरकर और श्रीकांत को देश की कप्तानी से हाथ धोकर भुगतना पड़ा था। अगला दशक मैच फिक्सिंग जैसे धतकर्मों से भरा रहा। बोर्ड में श्रीनिवासन युग ने तो इस खेल की ऐसी-तैसी करके रख दी और सर्वोच्च न्यायालय का दखल इसी दौरान तब हुआ जब स्पॉट फिक्सिंग घोटाले ने बोर्ड की छवि तार-तार करके रख दी। अपने दामाद के पापों को छुपाने के लिए श्रीनिवासन ने जिस बेशर्मी के साथ अपने खास उच्च न्यायालय के दो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की जांच समिति गठित करने के नाम पर लीपापोती की कोशिश की और जिस तरह से दामाद मयप्पन सहित आरोपियों को बरी किया, उसके खिलाफ अदालत में जो मामला गया उसकी ही यह परिणति हुई दो जनवरी को। ठाकुर और अरुण जेटली यदि मुखर होते तो श्रीनिवासन को, जिसके दुबई-कराची से गहरे संपर्क रहे हैं, इस्तीफा देना पड़ जाता और जो फिर बाद में जो घटा, न घटता। यही कारण है कि इस मामले में भाजपा की भी कम किरकिरी नहीं हुई है। पाकिस्तान के साथ 2022 तक सीरीज को लेकर एमओयू पर श्रीनिवासन ने ही हस्ताक्षर किए थे। इसमें राष्ट्रवादी पार्टी के इन नेताओं की भी सहमति न रहती तो ऐसा कभी नहीं होता।  क्या ठाकुर बोर्ड से संबद्ध इकाइयों के भ्रष्टाचारों पर पर्दा डालने को स्वायत्तता मानते हैं? क्रिकेट प्रेमी पूछ रहे हैं कि हैदराबाद, गोवा, जम्मू एवं कश्मीर, झारखंड आदि के स्टेडियम निर्माण में किए गए घोटालों का उन्होंने कभी संज्ञान लिया? क्या कार्रवाई हुई उन पर? स्वयं अनुराग घिरे हैं धर्मशाला स्टेडियम और होटल निर्माण को लेकर विवादों में। राज्य संघों को भेजी गई विपुल राशि का बोर्ड ने हिसाब मांगने की कभी जहमत उठाई? ठाकुर यह भी बताएं कि देश के राज्य क्रिकेट संघों से उनके कितने जिले जुड़े हैं? बोर्ड यह भी बताए कि आईपीएल प्रसारण अधिकार दिलाने की एवज में करोड़ों की राशि शरद पवार के दामाद सुले को बतौर स्वेट (पसीना) मनी कैसे दी गई? शशि थरूर को मंत्रीमंडल से क्यों इस्तीफा देना पड़ा था? उनकी महरूम पत्नी सुनंदा पुष्कर मौत से पहले कौन सा राज खोलने वाली थीं आईपीएल का? उसको भी उपकृत करने के लिए करोड़ों की रकम कैसे दी गई? ये तमाम सवाल अभी तक अनुत्तरित हैं। मुद्गल समिति की जांच रिपोर्ट में संदिग्ध 15 खिलाडिय़ों और प्रशासकों की जो सूची बंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी थी, उसका क्या हुआ? देश यह जानने के लिए बैचेन है। 19 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय की ओर से बोर्ड के कामकाज के संचालन हेतु जो समिति गठित होगी, उम्मीद है कि उसमें सभी काबिल ही नामित होंगे और बोर्ड का पुनर्सुधार देश के अन्य सभी खेल संघों के लिए लाइट हाउस का काम करेगा और केंद्र सरकार जो भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़े हुए है, सफाई अभियान में पूरा सहयोग और समर्थन देगी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चुप्पी कम खलने वाली नहीं है। उनको भी कोर्ट के आदेशानुसार गुजरात क्रिकेट संघ के सदर पद से तत्काल इस्तीफा देना चाहिए, समय की यही मांग भी है।  साभार-khaskhabar.com  

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मेलबोर्न । मैन ऑफ द मैच अनुभवी खब्बू स्पिनर ब्रेड हॉग (22/3) की बेहतरीन गेंदबाजी की बदौलत मेलबोर्न रेनेगेड्स ने रविवार (1 जनवरी) को ऑस्ट्रेलिया के घरेलू टी20 टूर्नामेंट बिग बैश लीग (बीबीएल) में डकवर्थ लुईस नियम के आधार पर मेलबोर्न स्टार्स को 7 रन से हरा दिया। टॉस हारने के बाद रेनेगेड्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में चार विकेट पर 171 रन बनाए। कैमरून व्हाइट ने 43 गेंदों पर चार चौकों व दो छक्कों की मदद से नाबाद 64 रन ठोके। वेस्टइंडीज के टॉम कूपर ने 36, कप्तान आरोन फिंच ने 30 और ओपनर के रूप में उतरे सुनील नरेन ने 21 रन की पारी खेली। बोलैंड, स्टोइनिस, जेम्स फॉकनर व एडम जम्पा ने 1-1 विकेट लिया। जवाब में स्टार्स की टीम को बरसात के कारण 18 ओवर में 159 रन का संशोधित लक्ष्य मिला। स्टार्स की टीम नौ विकेट पर 151 रन तक ही पहुंच सकी। स्टार्स की ओर से इंग्लैंड के ल्यूक राइट ने सर्वाधिक 45 रन बनाए। उन्होंने 40 गेंदों पर चार चौके लगाए। फॉकनर ने 25, कप्तान डेविड हसी ने 20, स्टोइनिस ने नाबाद 18 और केविन पीटरसन ने 15 रन का योगदान दिया। हॉग ने तीन और कूपर, क्रिस ट्रेमैन व कैमरून स्टीवेनसन ने 1-1 विकेट झटका। नरेन को चार ओवर में 26 रन की कीमत में एक भी विकेट नहीं मिला।  पर्थ । बीबीएल में रविवार को ही खेले गए एक अन्य मुकाबले में पर्थ स्कॉर्चर्स ने सिडनी थंडर को 50 रन से करारी मात दी। टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए पर्थ ने चार विकेट पर 177 रन बनाए। इयान बेल ने 38 गेंदों पर दो चौकों व दो छक्कों की बदौलत सर्वाधिक 45 रन बनाए। मिशेल मार्श ने नाबाद 44, माइकल क्लिंगर ने 38 व एश्टन टर्नर ने 20 रन की पारी खेली। कप्तान एडम वोजेस तीन रन पर रिटायर्ड हर्ट हो गए। क्लिंट मैके, पैट कमिंस, क्रिस ग्रीन व शेन वाटसन ने 1-1 विकेट लिया। जवाब में सिडनी की टीम आठ विकेट पर 127 रन ही बना सकी। कमिंस ने सबसे ज्यादा 39 रन बनाए। विकेटकीपर जे लेंटन ने 16, बेन रोहरर ने 15, ग्रीन ने नाबाद 14 और पैटरसन ने 11 रन का योगदान दिया। कप्तान वाटसन तीन रन ही बना पाए। डेविड विली ने दो और टर्नर, रिचर्डसन, मिशेल जॉनसन, एंड्रयू टाई व मार्श ने 1-1 विकेट निकाला। मार्श को उनके हरफनमौला खेल के लिए मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार दिया गया। साभार-khaskhabar.com  

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हैदराबाद । प्रो बैडमिंटन लीग (पीबीएल) के तीसरे संस्करण का आगाज उम्मीद के मुताबिक बेहद रोमांचक अंदाज में हुआ। बीते वर्ष रीयो ओलम्पिक के फाइनल में एक-दूसरे का सामना कर चुकीं भारत की पी. वी. सिंधु और स्पेन की कैरोलीना मारिन अपनी-अपनी टीमों के लिए पीबीएल के मौजूदा संस्करण में एक बार फिर एक-दूसरे के सामने थीं। हैदराबाद हंटर्स की ओर से खेल रहीं सर्वोच्च विश्व वरीयता प्राप्त मारिन ने चेन्नई स्मैशर्स की सिंधु को तीन सेटों तक खिंचे संघर्षपूर्ण मुकाबले में मात दी।  सिंधु ने भी जोरदार संघर्ष की बानगी पेश की, लेकिन अंतत: वे 8-11, 14-12, 2-11 से हार गईं। मारिन पहले गेम से ही लय में नजर आ रही थीं और उन्हें सिंधु से पहला गेम छीनने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। लेकिन दूसरे गेम में सिंधु ने अहम समय पर जोरदार संघर्ष किया और जीत हासिल कर मैच को तीसरे निर्णायक गेम तक खींच ले गईं। लेकिन तीसरे गेम में सिंधु जैसे लय से पूरी तरह भटक गईं और मारिन ने एकतरफा अंदाज में यह गेम जीतकर मैच अपने नाम कर लिया और अपनी टीम हैदराबाद को बढ़त दिला दी। इसके बाद टोमी सुगियार्तो ने पुरुष एकल में बीसाई प्रणीत को हराकर चेन्नई को 1-1 से बराबरी दिलाई। ब्रिटेन के क्रिस और गैबी एडकॉक की पति-पत्नी की जोड़ी ने मिश्रित युगल में जीत दर्ज की। इसे चेन्नई ने अपना ट्रंप मैच रखा था जिससे उसे दो अंक मिले और वह 3-1 से आगे हो गया। ऐसे में हैदराबाद के राजीव ओसेफ ने पुरुष एकल में तानोंगसाक सीनसोबूनसुक के खिलाफ 11-6 11-8 11-6 से जीत दर्ज करके स्कोर 2-3 कर दिया। हैदराबाद के पास पुरुष युगल का मैच ट्रंप मैच बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इस मैच में बून हियांग तान और कियोंग तान ने जीत दर्ज करके उसे 4-3 से जीत दिलाई। इससे पहले भारतीय बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष अखिलेश दास गुप्ता ने लीग का उद्घाटन किया।  साभार-khaskhabar.com  

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अबु धाबी। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबु धाबी में 15 से 24 नवंबर तक आयोजित होने वाले अबु धाबी टी10 टूर्नामेंट के लिए टिकटों की बिक्री आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। शेख जायेद स्टेडियम में होने वाले इस टूर्नामेंट को अगले पांच साल तक अबु धाबी में आयोजित कराने का फैसला किया गया है।  

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नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

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राइन फॉल्स, स्विस सीढ़ियाँ और बुज़ुर्ग घुटने: नाव की सैर बनी ओलंपिक प्रतियोगिता!

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