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सप्त देवालयों से निकाली गई गई शोभायात्रा

मथुरा। वैष्णव पूर्व कुंभ बैठक के अवसर पर सप्त देवालयांे से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। वृंदावन के सप्त देवालय राधारमण, गोपीनाथ, गोविंददेव, मदनमोहन, राधा गोकुलानंद, राधा श्यामसुंदर एवं राधा दामोदार मंदिर साधारण देवालयों से सर्वथा अलग हैं। इन मंदिरों में अधिकांश के विग्रह स्वं प्राकट्य हैं। जिस तरह से बांकेबिहारी मंदिर के श्री विग्रह को संत हरिदास ने प्रकट किया था उसी तरह गोपाल भट्ट स्वामी की भक्ति से प्रभावित हो कर ठाकुर जी शालिग्राम के रूप में प्रकट हुए थे। ये विग्रह राधारमण मंदिर में स्थापित हैं। सप्तदेवालयों में सभी देवालयों की अपनी विशेषता और महत्ता है। शोभायात्रा सप्त देवालयों से प्रारम्भ होकर वृंदावन के प्रमुख मार्गाें से गुजरते हुए मेला क्षेत्र पहुंची। मेला क्षेत्र में लगे विभिन्न अखाडों के सानिध्य से होते हुए यमुना किनारे पहुंची इससे पहले वृंदावन मंे सप्तदेवालयों की भव्य शोभायात्रा का वृंदावनवासियों और दूरदराज से आये भक्तों ने पुष्पवर्षा का जगह जगह जोरदार स्वागत किया। विभिन्न प्रांतों से आये भक्तों के बीच पूजा अर्चना की होड लगी रही। विग्रहों की आरती उतारी गई और मंदिरों के महंतों की सेवा की गई। शोभायात्रा में बग्घीरूपी रूपी डोले में ठाकुर जी के विग्रह विराजमा थे। बैंडबाजों की भक्तिपूर्ण ध्वनि लहरियां वातावरण को भक्ति मय बना रहीं थी। शोभायात्रा में श्रद्धालु मंत्र मुग्ध होकर थिरक रहे थे। इस मनोहारी दृष्य को अपनों में सर्व सर्वदा के लिए लोग बसा लेना चाहिते थे।

 

नारद संवाद

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