देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। एमवीडीए सचिव कार्यालय के जनसूचना अधिकारी को जानबूझ कर जनसूचना अधिकार के तहत मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराना भारी पड गया है। राज्य सूचना आयोग उत्तर प्रदेश ने यह भी माना है कि अपीलकर्ता को जानबूझ कर भ्रामक सूचनाएं दी गईं। जिससे क्षुब्ध होकर अपीलार्थी को राज्य जन सूचना आयोग तक आना पडा। राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती के आदेश से प्रतिपक्षी जनसूचना अधिकारी कार्यालय सचिव मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण नरेन्द्र सिंह चैहान के वेतन से 25 हजार रुपये की धनराशि अर्थदण्ड के रूप में वसूल की जाएगी।
नियमानुसार जनसूचना अधिकारी कार्यालय सचिव मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण मथुरा से इस धनराशि की वसूली तीन महीने के अंदर किए जाने के आदेश भी दिए गए हैं। साथ ही यह भी आदेशित किया गया है कि यह आदेश का अनुपालन नहीं होता है तो अर्थदंड की वसूली उससे भू राजस्व के बकाये के रूप में की जाएं। कृष्णा नगर निवासी बाल किशन अग्रवाल ने 28 सितम्बर 2018 को जन सूचना अधिकारी कार्यालय सचिव मथुरा वृंदावन प्राधिकरण मथुरा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगी थी।
वांछित सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराए जाने पर उन्होंने 25 अक्टूबर 2018 को प्रथम अपील की। प्रथम अपील का भी नियमानुसार निस्तारण नहीं किया गया। जिससे क्षुब्ध होकर बालकिशन अग्रवाल ने 24 दिसंबर 2018 को आयोग के समक्ष द्वितीय अपील आयोजित की।
11 फरवरी 2022 को जन सूचना आयोग उत्तर प्रदेश में बालकिशन अग्रवाल की अपील पर सुनवाई हुई। प्रतिपक्षी जनसूचना अधिकारी कार्यालय सचिव मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण को न्यायहित में अंतिम अवसर के साथ आदेशित किया गया कि वह तीन अगस्त 2018 के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की तिथि के 15 दिन के अंदर मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराएं, तथा अगली सुनवाई तिथि में भेजी गई सूचना की छाया प्रति का साक्ष्य प्रस्तुत करें। विलंब के संबंध में अपना लिखित स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत करें। अन्यथा की स्थिति में उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
सुनवाई के दौरान मौजूद रहे वादी बालकिशन अग्रवाल ने लिखित बयान में कहा कि अभी तक उन्हें जो सूचनाएं उपलब्ध कराई हैं वह भ्रमित करने वाली हैं। तीन साल सात महीने बाद भी आवेदनकर्ता को सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अपीलकर्ता को जानबूझ कर सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। 28 सितम्बर 2018 से दो मई 2022 तक प्रतिपक्षी जनसूचना अधिकारी कार्यालय सचिव मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण मथुरा को भ्रामक सूचना अपीलार्थी को देने का दोषी मानते हुए 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 25 हजार रुपये का अर्थदण्ड अधिरोपित किया जाता है।













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