श्रमिक कल्याण पोर्टल के जरिए संविदा कर्मियों को मिल रहा लाभ
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श्रमिक कल्याण पोर्टल के जरिए संविदा कर्मियों को मिल रहा लाभ
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आजादी के 75 वर्ष पर ‘अमृत महोत्सव’ की शुरुआत, पीएम मोदी भी लेंगे हिस्सा
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CISF Raising Day: All you need to know
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जन्मदिन मनाने गिरिराज जी की शरण में पहुंचीं वसुंधरा राजे
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (आठ मार्च) पर सोमवार को नारी शक्ति को सलाम किया है। उन्होंने महिला सशक्तीकरण की दिशा में काम करने को सरकार के लिए सम्मान की बात बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ट्वीट कर कहा, "अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हमारी अदम्य नारी शक्ति को सलाम। राष्ट्र की महिलाओं की अनेक उपलब्धियों पर भारत गर्व करता है। कई क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण को आगे बढ़ाने के लिए काम करने का अवसर मिलना हमारी सरकार के लिए सम्मान की बात है।" अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी राष्ट्रनिर्माण में महिलाओं की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार हर क्षेत्र में महिला सशक्तीकरण को लेकर प्रतिबद्ध है। साभार-khaskhabar.com
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चंडीगढ़, । हरियाणा सरकार ने एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू करने की घोषणा की, ताकि किसानों को जल्दी फसल का स्टॉक न करना पड़े। गेहूं की खरीद पिछले साल 10 अप्रैल को शुरू हुई थी। गेहूं की खरीद के लिए लगभग 400 छोटे और बड़े खरीद केंद्र स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, किसानों की जरूरतों के अनुसार मंडियों की स्थापना की जाएगी। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि हरियाणा देश का एकमात्र राज्य है, जहां छह फसलें - गेहूं, सरसों, दालें, चना, सूरजमुखी और जौ - न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जाती हैं। पहली बार, एमएसपी पर जौ की फसल की खरीद की जाएगी और इसके लिए सात 'मंडियों' की स्थापना की गई है। चौटाला ने कहा कि अगर पंजाब, राजस्थान और अन्य पड़ोसी राज्य हरियाणा में फसल खरीद के मॉडल को अपनाना चाहते हैं, तो राज्य उनकी सहायता करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य के कम से कम 7.25 लाख किसानों ने गेहूं की बिक्री के लिए 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है। साथ ही, पड़ोसी राज्यों के 1.03 लाख किसानों ने भी इस पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है। साभार-khaskhabar.com
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नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को पहली लिस्ट घोषित कर दी। पहले और दूसरे चरण की कुल 57 सीटों पर घोषित टिकट में सुवेंदु अधिकारी और पूर्व आईपीएस भारती घोष का नाम प्रमुख है। भाजपा ने ममता बनर्जी के खिलाफ नंदीग्राम सीट से सुवेंदु अधिकारी को चुनाव मैदान में उतारा है। सुवेंदु अधिकारी ममता बनर्जी सरकार में ही मंत्री रहे और हाल में टीएमसी छो़ड़कर भाजपा में आए हैं। भाजपा ने डेबरा सीट से चर्चित आईपीएस अफसर रहीं भारती घोष को टिकट दिया है। कभी ममता बनर्जी की करीबी आईपीएस अफसर मानी जा रहीं भारती घोष ने 2017 में पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद बाद भारती ने 2019 में भाजपा ज्वाइन कर घाटल लोकसभा सीट से किस्मत आजमाई थी, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा ने मोयना सीट से क्रिकेटर अशोक विन्दा को टिकट दिया है। बता दें कि पश्चिम बंगाल में कुल आठ चरणों में 294 सीटों के लिए चुनाव होंगे। पहले चरण का मतदान 27 मार्च को होगा। इसी तरह एक अप्रैल, छह अप्रैल, दस अप्रैल, 17 अप्रैल, 22 अप्रैल, 26 अप्रैल और 29 अप्रैल को भी राज्य में मतदान होंगे। वोटों की गिनती दो मई को होगी। साभार-khaskhabar.com
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नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को कहा कि उसने 325 करोड़ रुपये के धनशोधन मामले की जांच के संबंध में, शिनगो प्लांटेशन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों हितेश पटेल और सुरेश एन पटेल को गिरफ्तार किया है। यहां एक ईडी अधिकारी ने कहा कि पीएमएलए की धाराओं के तहत दोनों निदेशकों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने दोनों की गिरफ्तारी के लिए तमिलनाडु स्थित लगभग 20 समूह के एक नेटवर्क का प्रयोग किया।
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नई दिल्ली । कोरोना महामारी के कारण पिछले एक साल से सुप्रीम कोर्ट में वि़डियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चल रही सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत अब 15 मार्च से हाईब्रिड फिजिकल सुनवाई शुरू करने जा रही है। 5 मार्च को जारी एक परिपत्र (सकरुलर) के अनुसार, शीर्ष अदालत प्रायोगिक आधार पर हाइब्रिड मोड के माध्यम से मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को सूचीबद्ध अंतिम सुनवाई या नियमित मामलों की शुरूआत करेगी।
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नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, पंचायती राज और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शनिवार को फिर किसान आंदोलन को लेकर विपक्षी दलों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अन्नदाता का अहित करके राजनीतिक मंसूबे को पूरा करना ठीक नहीं है। किसान आंदोलन की मंशा पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अपना स्थान है और मतभेद का भी महत्व है, लेकिन क्या विरोध देश को नुकसन पहुंचाने की कीमत पर किया जाना चाहिए। तोमर ने कहा कि क्या इस आंदोलन से किसानों का भला होगा, इस पर कोई विचार नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) के निर्देश पर मैंने कृषि मंत्री के नाते किसान संगठनों के प्रतिनिधयों से 12 बार लंबी चर्चा की है। कई आवश्यक विषयों पर संशोधन का प्रस्ताव भी दिया। लोकसभा और राज्यसभा में भी मैंने सरकार के पक्ष को रखा। संसद में हर दल के सदस्य ने इस विषय पर बात रखी, लेकिन एक भी सदस्य ने कृषि सुधार बिल में किस बिंदु पर आपत्ति है या इसमें क्या कमी है, यह नहीं बताया।" मंत्री तोमर यहां भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूसा परिसर स्थित सी. सुब्रमण्यम सभागार में आयोजित एग्रीविजन के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, "देश में लंबे समय से कृषि के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। कृषि के क्षेत्र में निवेश बढ़े, किसानों पर लगी बंदिशें दूर हो, किसान अपनी उपज मनचाहे स्थान पर, मनचाहे दाम पर बेच सके और वे महंगी फसलें उगाकर अपनी आय बढ़ा सकें, इसके लिए जो कानूनी आवश्यकता थी उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार ने कृषि सुधार कानून बनाकर पूरा किया है।" किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर चल रही मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री ने कहा, "आज उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ फसल प्रबंधन करना और किसानों की आय बढ़ाना हमारा सबसे बड़ा ध्येय है।" कार्यक्रम में तोमर ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कृषि छात्रों के आयाम एग्रीवीजन द्वारा कृषि, कृषि छात्रों की समस्याएं एवं शोध की दिशा में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। इस मौके पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्रों, वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसान एवं श्रेष्ठ उद्यमियों भी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में एक स्मारिका एवं ई-बुलेटिन का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम को आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा, अभाविप के राष्ट्रीय संयोजक आशी चौहान ने भी संबोधित किया। साभार-khaskhabar.com
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बर्लिन। जर्मनी में चल रहे लॉकडाउन के बावजूद पिछले कुछ हफ्तों से कोविड-19 महामारी के नए मामलों में फिर से वृद्धि देखने को मिल रही है। यहां एक दिन में कोरोना के 11,912 मामले दर्ज हुए हैं। रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट (आरकेआई) ने इसकी घोषणा की है। गुरुवार को सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते संक्रमण और कोविड-19 वेरिएंट्स के प्रसार के चलते चांसलर एंजेला मार्केल और संघीय राज्यों ने बुधवार को कम से कम 28 मार्च तक लॉकडाउन की अवधि को बढ़ाए जाने की बात पर अपनी सहमति व्यक्त की है। इस दौरान पांच चरणबद्ध क्रम से धीरे-धीरे दुकानें वगैरह खोली जाएंगी।
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मुंबई। सफेद सोना यानी कपास की खेती इस साल किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हुई है। वैश्विक बाजार में रूई के दाम में आई तेजी के बाद देश में कपास का भाव इसके एमएसपी से 15 फीसदी से ज्यादा तेज हो गया है और किसान अब सरकारी एजेंसी की खरीद के मोहताज नहीं रह गए हैं। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अतुल गणत्रा कहते हैं कि सफेद सोना वाकई इस साल किसानों के लिए सोना बन गया है। सरकार ने कपास (लंबा रेशा) का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,825 रुपये प्रति क्विंटल और मध्यम रेशा वाली कपास का एमएसपी 55,15 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। कारोबारियों ने बताया कि गुजरात में कपास का भाव 6,500 रुपये प्रति क्विंटल है। गणत्रा ने आईएएनएस को बताया कि बीते तीन साल के बाद रूई में इतनी बड़ी तेजी आई है, जिससे अगले सीजन में कपास की खेती के प्रति किसानों की दिलचस्पी निस्संदेह बढ़ेगी और कपास की बुवाई के रकबे में पिछले साल के मुकाबले कम से कम 10 फीसदी का इजाफा होगा। रूई का भाव अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर बीते 25 फरवरी को 95.57 सेंट प्रति पौंड तक उछला था, जो 11 जून 2018 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है, जब आईसीई पर रूई का भाव 96.49 सेंट प्रति पौंड तक चढ़ा था। हालांकि रूई का भाव इस साल के ऊंचे स्तर से टूटकर गुरुवार को 88 सेंट प्रति पौंड पर आ गया फिर भी रूई का भाव करीब तीन साल के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने बताया कि रूई का भाव काफी ऊंचा हो गया था, जिसके बाद मुनाफावसूली हावी होने के कारण कपास के दाम में गिरावट आई है, हालांकि फंडामेंटल अभी भी मजबूत है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रूई के दाम में बीते एक सप्ताह के दौरान आई गिरावट के बाद भारतीय बाजार में में भी नरमी आई है। अतुल गणत्रा ने बताया कि जब वैश्विक बाजार में कॉटन 95 सेंट के ऊपर चला गया था, तब भारतीय कॉटन यानी रूई और अमेरिका के कॉटन के दाम में 14 सेंट का अंतर था जो अब घटकर सात सेंट रह गया है, जिससे निर्यात मांग जो बीते दिनों बढ़ी थी उसमें नरमी आ गई है। उन्होंने बताया कि कॉटन का भाव गुजरात में बीते दिनों जहां 47,000 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी में 356 किलो) हो गया था, वहां अब घटकर 4,600 रुपये प्रति कैंडी पर आ गया है। गणत्रा ने बताया कि फरवरी के आखिर तक भारत का काटन निर्यात 34 लाख गांठ (एक गांठ में 170 किलो) हो चुका था और व्यक्तिगत तौर पर उनका अनुमान है कि चालू सीजन में भारत से 60 लाख गांठ तक निर्यात करेगा, हालांकि एसोसिएशन का अनुमान अब तक 54 लाख गांठ ही है, लेकिन इस महीने होने वाली बैठक में सदस्यों के बीच विचार-विमर्श किया जाएगा। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के अनुसार, देश में रूई का उत्पादन चालू कॉटन सीजन 2020-21 (अक्टूबर-सितंबर) में 360 लाख गांठ है, पिछले साल का बकाया स्टॉक 125 लाख गांठ और आयात 14 लाख गांठ को मिलाकर कुल आपूर्ति 499 लाख गांठ रहेगी, जबकि घरेलू खपत मांग 330 लाख गांठ और निर्यात 54 लाख गांठ होने के बाद 30 सितंबर 2021 को 115 लाख गांठ कॉटन अगले सीजन के लिए बचा रहेगा। हालांकि कपड़ा मंत्रालय के तहत गठित कमेटी ऑनफ कॉटन प्रोडक्शन एंड कन्जंप्शन (सीओसीपीसी) के अनुसार, देश में चालू सीजन 2020-21 में कॉटन का उत्पादन 371 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जिसमें से 28 फरवरी 2021 तक 294.73 लाख गांठ कॉटन की आवक हो चुकी थी। साभार-khaskhabar.com
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