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मथुरा। नकली कीटनाषकों ने वैज्ञानिकों के नुस्खे को भी बेअसर कर दिया है। किसानों ने लगातार कृष वैज्ञानिकों के बताये गये तरीके से धान और तिल की फसल में कीटनाषकों का छिडकाव किया लेकिन इस का कोई लाभ फसल में नहीं दिखा। नतीजा यह रहा कि किसानों को इस का बडा खामियाजा भुगतना पडा है। करीब 10 हजार हैक्टेयर धान की फसल में 70 फीसदी से भी अधिक नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों के बताये अनुषार खेतों में खाद और कीटनाषकों का प्रयोग किया इसके बाद भी फसल को बचाने में असफल रहे हैं। मथुरा में डेरा डाले हुए कृषि वैज्ञानिकों के पास भी किसानों के लिए इस बात का कोई ठोस जबाव नहीं है कि समय पर और सही मात्रा में कीटनाषकों और रासायनिक खाद का उपयोग करने के बाद भी किसान फसल को नष्ट होने से क्यों नहीं बचा सके।
तिल भी हो रहा बेकार
तिल की फसल में भी पकने से पहले बडा नुकसान हुआ है। बीज बनने से पहले ही तिल का पेड सूख कर गिर रहा हैं। इसे रोकने के लिए किसान अपनी ओर से हर संभव प्रयास कर रहे हैं, दवा का छिडकाव कर रहे हैं लेकिन कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
जिस तरह से बताया गया उसी तरह से दवा और रासायनिक खाद का धान की फसल में छिडकाव किया गया है। अच्छी बरसात हुई थी इस लिये धान की फसल अच्छी थी, इस लिए पहले से इस बात का प्रयास किया गया कि फसल में कोई रोग न आये, कई साल बाद इतनी अच्छी फसल पहलहा रही थी, लेकिन दवा छिडकाव को कोई फायदा नहीं हुआ।
बेदराम, किसान गांव कारब
किसान को खाद से लेकर कीटनाषक तक नकली बेचे जा रहे हैं। जिम्मेदार विभाग, ऐजेंसी और सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही हैं। जब किसान लगातार कीटनाषकों का छिडकाव कर रहा है तो लाभ क्यों नहीं मिल रहा, या तो वैज्ञानिक गलत सलाह दे रहे हैं, या जो कीट नाषक किसान छिडक रहा है वह सही नहीं हैं।
राजकुमार तौमर, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन













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