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मित्र कीट, जीवांश एंव पर्यावरण को बचाना सबकी जिम्मेदारी

वेटरनरी कालेज में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रोफेसर केएमएल पाठक फसल अवशेष प्रबंधन पर जानकारी देते हुए

मथुरा(केके पाठक) उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान वि.वि एवं गो अनुसंधान संस्थान मथुरा के कृषि विज्ञान केन्द्र के तत्वाधान में कुलपति प्रोफेसर के.एम.एल पाठक के दिशा निर्देशन में बुधवार को फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर जनपद के कृषि विभाग के प्रसार कर्मियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने फसल अवशेष प्रबंधन के बेहतर उपाय समझाते हुए लाभ एवं फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। प्रशिक्षण में प्रसार कर्मियों ने बढ चढ कर भाग लिया। 

कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डा. एस.के मिश्रा ने प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों द्वारा खरीफ में धान, रबी में गेहूं फसल अवशेषों को कदापि न जलाएं दें, उन्हें समझाएं कि ऐसा करने से मृदा के अंदर लाभदायक सूक्ष्म जीवाणु व मित्र कीट मर जाते हैं जिससे जमीन कमजोर होती है। उन्होंने धान काटकर हैप्पी सीडर से बिना जुताई के सीधी गेहूं बुवाई की जानकारी देते हुए बताया कि इससे खेत की तैयारी में धन व समय दोनो की बचत होगी। केन्द्र को जल्द हैप्पीसीडर प्राप्त होने वाला है जिससे खेतों के फसल अवशेष जीवांश में तब्दील हों जायेंगे। उप कृषि निदेशक धुरेन्द्र कुमार ने कहा कि फसल अवशेष जलाने की परंपरा जनपद के कुछ इलाकों में ज्यादा प्रचलित हैं जो किसानों के लिए बहुत घातक है। उस क्षेत्र में सघनता से कार्य किया जाए। सभी प्रसार कार्यकर्ता इस कार्य में कतई लापरवाही न बरतें । कृषि विज्ञान केन्द्र व कृषि विभाग मिलकर इस पर जनपद में कार्य करेगा। फसल अवशेष से खाद बनाने के फायदे किसानों को समझाएं तो ऐसा किसान कभी नहीं करेंगे।  साथ ही ऐसा करने पर  जुर्माना के प्रावधान की जानकारी भी उन्हें दें। डा. नीलम एस चैहान ने घरेलू अवशेष प्रबंधन के विषय में जानकारी दी। 

डा. बी.एल यादव ने कहा कि फसल अवशेषों से  जानवरों के लिए भूसा, चारा तैयार करें, तत्पश्चात शेष बचे अवशेषों को खेत में मिलाएं। तथा गाय व भैंस के गोबर से उपले न बनाकर उसकी खाद बनाकर खेतों में डालें जिससे मृदा की शक्ति में काफी बढोत्तरी होगी। डा. ब्रजमोहन ने कहा कि सब्जियों वाली फसलों के अवशेषों को भी किसान इधर उधर न  फेंककर खेतों में ही उनको सडाकर खाद तैयार करें। जिससे जमीन में जीवांश पदार्थो की मात्रा में बढोत्तरी होगी। डा. रविन्द्र कुमार राजपूत ने कहा कि फसल अवशेषों को खेत में सडाए।ं कभी आग न लगाएं, बल्कि अवशेषों को नाडेप कम्पोस्ट, वर्मीकम्पोस्ट व खेत के कोने पर आवश्यकतानुसार गढढा खोदकर खाद बनाएं और खेतों में मिलाएं। जिससे खेत की उर्वरा शक्ति के साथ-साथ मृदा का भौतिक, रासायनिक एवं जैविक संगठन सुदृढ होगा। खेत में पर्याप्त मात्रा में जीवाशं में बढोत्तरी होगी तथा उत्पादन भी बढेगा। साथ ही उन्होंने ने फसल अवशेष में प्रयोग होने वाली मशीनों के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। फसल अवशेष से संबधित फिल्म भी दिखाई गई।   कार्यक्रम में जनपद के सभी कृषि प्रसार कार्यकर्ताओं ने प्रशिक्षण में भाग लिया। 

 

नारद संवाद

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