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पहल: प्रोफेसर दंपति टीबी मरीजों को गोद लेकर करा रहा इलाज

हमारे आसपास ऐसे बहुत कम लोग हैं जो बीमार लोगों की निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं, लेकिन चुनौती तब आती है, जब कोई ऐसी बीमारी हो जो संक्रामक हो और उसके फैलने का खतरा हो। टीबी यानी क्षय रोग भी उन्हीं में से एक है। फिर भी उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले दंपति पीछे नहीं हटे।
 
प्रोफेसर दंपति ने लिया टीबी मरीजों को गोद

दरअसल, बरेली के रहने वाले अमित वर्मा और उनकी पत्नी हेमा वर्मा टीबी के मरीजों को गोद लेकर उनका मुफ्त इलाज करा रहे हैं। दंपत्ति एम.जे.पी. रुहेलखंड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। इस बारे में प्रोफेसर अमित बताते हैं कि 2017 में राज्य की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने इस पहल के लिए आह्वान किया और ऐसे टीबी के मरीजों को गोद लेने वालों को प्रोत्साहन देने की बात कही। यहीं से प्रोफेसर दम्पति को प्रेरणा मिली और टीबी मरीजों को ढूंढने के लिए उन्होंने कई जगह कैंप भी लगाए। 
 
मुहिम के तहत 250 टीबी मरीजों की देखभाल की

खास बात ये है कि प्रोफेसर परिवार की पहल से अब तक 100 लोग जुड़ चुके हैं, जो अब तक 250 टीबी मरीजों को गोद ले चुके हैं। इस बारे में प्रो, हेमा वर्मा कहती हैं कि इस समय हमारे पास 250 के करीब मरीज हैं। इन मरीज से मुहिम से जुड़े लोग हर 15 दिन में फोन करते हैं और उनका हाल जानते हैं। इसके अलावा उनसे कुछ सवाल करते हैं कि कुछ समस्या या दवाई अगर वक्त पर नहीं पहुंच रही है तो मदद करते हैं। ये मुहिम यहीं नहीं रुकी, बल्कि इससे बरेली के आईपीएस अधिकारी से लेकर कई प्रशासनिक अधिकारी तक जुड़ चुके हैं।                                                                                                   टीबी के लक्षण

दो हफ्ते से ज्यादा खांसी, बुखार, भूख न लगना, कमजोरी, थकावट और वजन में कमी, बलगम में खून आना टीबी के प्रमुख लक्षण हैं, जिनका वक्त पर इलाज हो जाए तो मरीज को नया जीवन मिल सकता है।

सरकार ने भारत को टीबी मुक्त करने के लिए 2025 तक का लक्ष्य रखा है और अगर इसी भावना के साथ लोग आगे आकर काम करते रहे तो हमारा देश जल्द ही टीबी से मुक्त जरूर होगा।

नारद संवाद

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