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नई दिल्ली। भारतीय नौसेना में स्कॉर्पीन श्रेणी का एक नया सबमरीन शामिल किया जा रहा है। ‘करंज’ नाम की इस सबरमरीन (पनडुब्बी) को बुधवार को मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड से लॉन्च किया जाएगा। रेडार की पकड़ में न आने वाली ये पनडुब्बियां जमीन पर हमला करने वाले मिसाइलों से लैस होंगी और इनमें ऑक्सीजन बनाने की क्षमता होगी जिससे ये लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकेंगी।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक करीब 70 हजार करोड़ रुपये के डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी कार्यक्रम को प्रॉजेक्ट-75 इंडिया नाम दिया गया है। इसके लिए आगामी छह फरवरी को अक्सेप्टेंस ऑफ निसेसिटी (एओएन) की समय सीमा खत्म हो रही है, लेकिन भारतीय शिपयार्ड और विदेशी सहयोगी को चुनने की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए एओएन को पहली बार नवंबर 2007 में जारी किया गया था, जिसे अब फिर बढ़ाया जाएगा।
इंडियन नेवी के पास 13 पुरानी पनडुब्बियां
इस देरी के बीच एक बात ध्यान देने वाली है कि फाइनल कॉन्ट्रैक्ट के सात से आठ साल बाद ही नेवी को पहली पनडुब्बी मिलेगी। इस प्रॉजेक्ट में देरी ऐसे समय पर हो रही है जब इंडियन नेवी के पास मात्र 13 पुरानी पनडुब्बियां हैं और इनमें से आधी ही एक समय में सक्रिय रहती हैं। हालांकि इस सप्ताह नेवी के लिए एक अच्छी खबर आएगी। 31 जनवरी को तीसरी स्कॉर्पीन पनडुब्बी मझगांव डॉक में लॉन्च की जाएगी। छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का मौजूदा प्रॉजेक्ट फ्रांस की कंपनी डीसीएनएस के सहयोग से चलाया जा रहा है।
इसके तहत मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड को फ्रांसीसी कंपनी, टेक्नॉलजी ट्रांसफर भी करेगी। करीब 23 हजार करोड़ रुपये का यह प्रॉजेक्ट चार साल लेट हो चुका है। इस सीरीज की पहली पनडुब्बी कलवरी है। दूसरी पनडुब्बी खंडेरी है। करीब 1565 टन वजनी तीसरी पनडुब्बी का नाम आईएनएस करंज रखा गया है। सभी छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियां जून 2020 तक नेवी में शामिल हो जाएंगी।
साभार-khaskhabar.com













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