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‘मंगला‘ ने देश-प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदलने का काम किया : मुख्यमंत्री

जयपुर/बाड़मेर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि करीब दस साल पहले हमारी सरकार के समय जिस ऐतिहासिक तेल प्रोजेक्ट मंगला के जरिए बाड़मेर में क्रूड आॅयल उत्पादन का शुभारम्भ किया गया था, उसने न केवल बाड़मेर जिले बल्कि देश और प्रदेश की तस्वीर एवं तकदीर बदलने का काम किया है। यहां खनिज तेल का उत्पादन किसी चमत्कार से कम नहीं है और इससे पूरे क्षेत्र में खुशहाली आई है।

गहलोत गुरूवार को बाड़मेर के मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल में मंगला फस्र्ट आॅयल की 10वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में केयर्न आॅयल एंड गैस, वेदांता लिमिटेड की नवीन योजना ‘‘उज्ज्वल‘‘ के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
दस साल में 650 फीसदी बढ़ी बाड़मेर की प्रति व्यक्ति आय
मुख्यमंत्री ने कहा कि तेल उत्पादन शुरू होने से पिछले एक दशक में बाड़मेर जिले की प्रति व्यक्ति आय 650 फीसदी तक बढ़ गई है। जो राज्य के शेष 32 जिलों में सर्वाधिक है। दस साल में यहां की प्रतिव्यक्ति आय 17 हजार रूपये से बढ़कर एक लाख 28 हजार रूपये हो गई है, जो कि बीते वर्ष के राष्ट्रीय औसत 82 हजार रूपये से डेढ़ गुना अधिक है। इतना ही नहीं राज्य की जीडीपी में बाड़मेर का योगदान जयपुर के बाद सर्वाधिक हो गया है।

देश के क्रूड आॅयल का एक चैथाई राजस्थान से

उन्होंने कहा कि बाॅम्बे हाई के बाद राजस्थान का बाड़मेर देश का दूसरा अग्रणी तेल उत्पादक क्षेत्र बन गया है। आज देश के कुल क्रूड आॅयल का करीब एक चैथाई भाग राजस्थान से निकल रहा है। 

रिफाइनरी पेट्रोकेमिकल काॅम्प्लेक्स से आएगी खुशहाली
गहलोत ने कहा कि हमारी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में रिफाइनरी कम पेट्रोकेमिकल काॅम्प्लेक्स की नींव रख दी थी। लेकिन गत सरकार के समय इस काम में देरी हुई जिसका नुकसान रोजगार तथा राजस्व के रूप में पूरे प्रदेश को हुआ। अब यहां देश की पहली ऐसी रिफाइनरी लगेगी जहां रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल काॅम्प्लेक्स एक साथ होंगे। हमने इस बार सरकार में आते ही केबिनेट की पहली बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने का फैसला किया। इस परियोजना के पूरा होने से इस क्षेत्र में और भी खुशहाली आएगी। रिफाइनरी के साथ सहायक उद्योगों के लगने से युवाओं को रोजगार एवं कौशल विकास के अवसर मिलेंगे।

इंजीनियराें एवं तकनीशियनों की सराहना

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की कई कम्पनियों ने यहां तेल खोजने के प्रयास किए। लेकिन सफलता केयर्न एनर्जी को ही नसीब हुई। अब उनके द्वारा उत्पादित तेल देश और प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने तेल उत्पादन के जरिए प्रदेश के विकास में भागीदारी निभा रहे इंजीनियरों एवं तकनीशियनों की सराहना करते हुए कहा कि वे कठिन परिस्थितियों में भी डटे रहकर देश और प्रदेश की सेवा कर रहे हैं।
गहलोत ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि उज्ज्वल योजना के जरिये केयर्न और वेदान्ता ने अपना सामाजिक उŸारदायित्व निभाने की कड़ी में एक ओर नई शुरूआत की है। इस योजना से जिले के 60 चयनित स्कूलों में नई डिजिटल शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों में आधारभूत विकास के काम किए जाएंगे।
प्रदेश के विकास के लिए बढ़ाएं तेल उत्पादन
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार के प्रयासों से केन्द्र सरकार ने राज्य में 10 तेल की खोज के लिए 10 ब्लाॅक आवंटित किए हैं। नये तेल क्षेत्र खोजने की दिशा में प्रयास हों। इसका फायदा पूरे राज्य को होगा। केयर्न प्रदेश के विकास में और अधिक भागीदारी निभाने के उद्देश्य से तेल का उत्पादन बढ़ाए।
इससे पहले राजस्व मंत्री हरीश चैधरी ने कहा कि केयर्न एनर्जी के द्वारा उत्पादित किए जा रहे खनिज तेल के कारण पिछले 10 साल में इस क्षेत्र का कल्पनातीत विकास हुआ है। जो बाड़मेर क्षेत्र अकाल और सूखे के कारण जाना जाता था वह आज तेल उत्पादन के कारण पहचाना जाने लगा है।
केयर्न आॅयल एण्ड गैस के सीईओ अजय दीक्षित ने कहा कि फिलहाल इस क्षेत्र में देश के तेल उत्पादन का करीब 24 प्रतिशत हिस्सा है, जिसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि उज्ज्वल योजना के जरिये 60 विद्यालयों में 15 हजार बच्चों को बेहतर वातावरण में शिक्षा देने की दिशा में काम किया जाएगा।
इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा, खान एवं पेट्रोलियम मंत्री प्रमोद जैन भाया, तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री सुभाष गर्ग, विधायक मेवाराम जैन, अमीन खान, पदमाराम मेघवाल, मदन प्रजापत सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि एवं केयर्न आॅयल एंड गैस के अधिकारी उपस्थित रहे।
मंगला से प्रतिदिन 1.75 लाख बैरल तेल उत्पादन

मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल का उद्घाटन 29 अगस्त, 2009 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डाॅ. मनमोहन सिंह ने किया था। इस टर्मिनल से अब तक 53.2 करोड़ बैरल तेल का उत्पादन हो चुका है। वर्तमान में प्रतिदिन 1.75 लाख बैरल तेल निकाला जा रहा है। पिछले एक दशक में राजस्थान में तेल उत्पादन के लिए 62 हजार करोड़ रूपये का निवेश किया जा चुका है। इससे 32 हजार करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।


साभार-khaskhabar.com

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