देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreकहते हैं कि दुनिया में शिक्षा दान से बड़ा कोई दान नहीं है। ऐसा ही पुण्य का कार्य इन दिनों महाराष्ट्र के एक शिक्षक द्वारा किया जा रहा है। वो भी ऐसे समय में जब कोविड-19 महामारी ने पूरे विश्व को स्वास्थ्य की दृष्टि से नुकसान पहुंचाया। इस दौरान कोरोना महामारी ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर भी कड़ा प्रहार किया। कोविड महामारी से बचने के लिए लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हो गए। ऐसे में तमाम स्कूल भी बंद करने पड़े, जिसके चलते बच्चों की पढ़ाई पर खासा असर पड़ा। हालांकि बहुत सारे लोगों ने इस बीच ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत की, जिससे कि बच्चे घर में पढ़ाई कर सकें, लेकिन बहुत से बच्चे ऐसे भी हैं, जो झुग्गी-बस्तियों में रहते हैं। उनके पास डिजिटल पढ़ाई का न तो कोई जरिया है और न ही उनके परिवार के लोग इसका खर्च उठाने में सक्षम हैं। ऐसे में महाराष्ट्र के लातूर के एक स्कूली शिक्षक ने इन वंचित बच्चों की पढ़ाई का बीड़ा उठाया है…
महाराष्ट्र के लातूर जिले के 45 वर्षीय शिक्षक की अभिनव पहल
कोविड 19 महामारी के बीच लॉकडाउन के प्रभाव ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों को अत्यधिक प्रभावित किया। लातूर जिले के निलंगा तालूका के बुजरुगवाड़ी के एक जिला परिषद स्कूल के शिक्षक साईंनाथ माने ने वंचित बच्चों की शिक्षा के महत्व और इसके नुकसान को समझा और जिला परिषद स्कूल के बच्चों को मुफ्त ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने का फैसला किया। इसके लिए शिक्षक साईं नाथ माने ने एंड्रॉयड मोबाइल और कम्प्यूटर की मदद से जोड़ने का काम शुरू किया। साईंनाथ माने पिछले सात महीने से बच्चों को मूल्यवर्धित शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। वे बच्चों को अंग्रेजी बोलने, गणित और व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ योग प्रशिक्षण पर भी जोर देते हैं। अब स्थिति यह है कि नासिक, मुंबई, पुणे, अहमदनगर और नांदेड़ जैसे महाराष्ट्र के अन्य जिलों के अभिभावक भी उनसे अपने बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने का अनुरोध कर रहे हैं। वंचित बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करने की दृष्टि से ये कक्षाएं शुरू की गईं। उनकी कक्षा में हर दिन 70 से 80 बच्चे जुड़ते जा रहे हैं और ये संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है।
दिन में 2 बार संचालित होती हैं ये कंक्षाएं
बच्चों की पढ़ाई के प्रति जिज्ञासा को देखते हुए अब कक्षाएं दिन में दो बार संचालित की जाती हैं। इतना ही नहीं अब प्रदेश के अन्य जिला परिषदों के स्कूल शिक्षक भी अब उनके साथ इन ऑनलाइन कक्षाओं के लिए खाली समय में मुफ्त शिक्षा प्रदान करने के लिए आगे आए हैं। बच्चों ने बेहद कम समय में धारा प्रवाह अंग्रेजी बोलना शुरू कर दिया है। माने कहते हैं कि स्कूल बंद होने के बाद कई गरीब छात्र अपनी शिक्षा के बारे में चिंतित थे। उन्हें खुशी है कि ये पहल उन्हें बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ने का काम करेगी। वे कहते हैं कि उनका उद्देश्य विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित करना है।
अभिभावकों को भी किया प्रेरित
इस संबंध में साईंनाथ बताते हैं कि हमने सभी अभिभावकों की मीटिंग लेकर उनको मोबाइल लेने के लिए प्रेरित किया। जिनके पास मोबाइल फोन हैं, उन्हें अपने बच्चों को देने के लिए प्रेरित किया। हमने शुरुआती दौर में हमने स्पोकन इंग्लिश और बेसिक इंग्लिश ग्रामर ताकि बच्चे अंग्रेजी बोल सकें, इसकी वजह से हमने अंग्रेजी क्लास शुरू की। उसके बाद हमें लगा कि जो गरीब बच्चे हैं, जिन्हें मुख्य प्रवाह में लाना हमारी जिम्मेदारी है।
शिक्षा का प्रकार बच्चों के जीवन में वास्तविक उजियारा भरने का करेगा काम
वर्तमान में ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे छात्रों के माता-पिता अपने बच्चों की प्रगति से काफी खुश हैं। इस पहल के लिए वे साईंनाथ माने को धन्यवाद देते हैं। यहां आधा घंटा केवल अंग्रेजी सिखाने के लिए दिया जाता है। पेंटिंग योग और अन्य मूल्यवर्धित शिक्षा ने ऑनलाइन सीखने की प्रक्रिया को और भी दिलचस्प बना दिया है। बच्चे इस पहल से काफी खुश हैं। शिक्षा के प्रति अपने जुनून के साथ साईंनाथ माने जैसे लोग अंधेरे मे उज्जवल प्रकाश की तरह है। उनकी शिक्षा का प्रकाश सभी बच्चों के जीवन में वास्तविक उजियारा भरने का काम करेगा।













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