देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreअसंभव ही है कि कोई खिलाड़ी, जो टेनिस कोर्ट पर उतरा हो, विम्बलडन जीतना उसका सपना न रहा हो। कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो इस सपने को बार-बार जीते हैं और दुनिया के बनाए हुए पैमाने को तुच्छ साबित कर बताते हैं कि सारे पैमाने सिर्फ एक आंकड़ें भर है और टूटना उनकी नियति है। ऐसे ही एक कलंदर का नाम है नोवाक जोकोविच। सर्बिया के इस महान खिलाड़ी ने विंबलडन 2021 का खिताब एक बार फिर जीत लिया है। फाइनल में जोकोविच ने इटली के माटियो बेरेटिनी को 4-6, 6-4, 6-4, 6-3 से हराया।
फेडरर और नडाल की बराबरी की
जोकोविच की बादशाहत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छठी बार विंबलडन का खिताब अपने नाम किया है। यह उनका ओवरऑल 20वां ग्रैंड स्लैम टाइटल है। इसके साथ उन्होंने स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर और स्पेन के राफेल नडाल की बराबरी कर ली है। दोनों ने 20-20 ग्रैंड स्लैम टाइटल जीते हैं। विम्बलडन का पहला खिताब जोकोविच ने 2011 में जीता था। इसके बाद उन्होंने 2014 और 2015 का खिताब भी अपने नाम किया। विम्बलडन के कोर्ट पर पिछले तीन बार से उनके अलावा कोई और इसे नहीं जीत पाया है। टेनिस की दुनिया में यह साल अब तक पूरी तरह जोकोविच के नाम रहा है। इस साल हुए तीनों ग्रैंडस्लैम का ताज जोकोविच के सिर सजा है।
2003 से टेनिस कोर्ट पर उतरे जोकोविच ने कई चमत्कारिक प्रदर्शन किए हैं। अबतक के अपने जीवन में 968 मैच खेलने वाले जोकोविच ने सिर्फ 195 मैच ही गवाएं हैं। जोकोविच टेनिस की वर्ल्ड रैंकिंग में शीर्ष पर काबिज हैं। जोकोविच को जितना प्यार उनके प्रशंसक करते हैं उतना ही प्रेम जोकोविच उनसे करते हैं। इसका हालिया उदाहरण विम्बलडन का फाइनल जीतने के बाद देखने को मिला, जब एक नन्हीं प्रशंसक को उन्होंने अपना प्रिय रैकेट तोहफे के रूप में दे दिया।
विम्बलडन का महत्व
विम्बलडन प्रतियोगिता या साधारण रूप से विंबलडन दुनिया में सबसे पुराना टेनिस टूर्नामेंट है और इसे सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के रूप में जाना जाता है। पहली बार विम्बलडन का आयोजन 1877 में किया गया था। इसके बाद से यह प्रतियोगिता विम्बलडन के लन्दन उपनगर में ऑल इंग्लैण्ड क्लब में आयोजित की जाती रही है। यह चार ग्रैंड स्लैम टेनिस टूर्नामेंट्स में से एक है। इसकी सबसे मजेदार बात है कि यह एकमात्र प्रतियोगिता है, जिसे आज भी खेल की मूल सतह, घास, पर खेला जाता है, जिससे लॉन टेनिस को इसका नाम मिला।
माना जाता है कि विम्बलडन वो हीरा है जिसके बिना टेनिस के शहंशाह का मुकुट अधूरा रहता है। अब तक इस हीरे को अपने मुकुट में सजाने का कारनामा चेक-अमेरिकन महिला खिलाड़ी मार्टिना नवरातिलोवा ने किया है। उन्होंने इस टूर्नामेंट को सर्वाधिक 9 बार जीता है। वहीं अगर पुरुष खिलाड़ियों की बात करें तो यहां मुकाबला बेहद नजदीकी है। विलियम रेनशॉ, पीट सम्प्रास और रोजर फेडरर तीनों ने इस खिताब को 7 बार अपने नाम किया है। नोवाक जोकोविच ने छठी बार विम्बलडन जीतकर अपने इरादे साफ जाहिर कर दिए हैं कि इस तिकड़ी को पीछे छोड़ने के लिए वो पूरी तरह तैयार हैं।
भारत और विम्बलडन
भारतीयों ने पहली बार विंबलडन में 1908 में भाग लिया था, तब देश आजाद नहीं था, लेकिन प्रतिभाएं कब किस की गुलाम रही हैं। आजादी के बाद 1954 में एक भारतीय विम्बलडन से ‘बॉयस सिंगल’ का खिताब जीत लाता है। उस खिलाड़ी का नाम रामनाथन कृष्णन था, जिसने भारतीय टेनिस के फलक पर लंबे समय तक अपने चिन्ह छोड़े।
यह कहना उचित होगा कि टेनिस की दुनिया को भारत ने कई रत्न दिए हैं, जिन्होंने विम्बलडन जैसे टूर्नामेंट में भी अपने जलवे बिखेरे हैं। रामनाथन कृष्णन 1960 और 1961 में दो बार विंबलडन सेमीफाइनल में पहुंचे और विश्व नंबर 6 की करियर-उच्च रैंकिंग प्राप्त की। 1936 में तमिलनाडु के नागरकोइल के एक छोटे से गांव तेनकासी में जन्मे कृष्णन को भारत का सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ी माना जाता है। रमेश कृष्णन दूसरे भारतीय थे, जो विम्बलडन के क्वाटर-फाइनल में पहुंचे थे। यह करनामा उन्होंने 1986 में किया था। इससे पहले वह 1979 में विम्बलडन जूनियर का खिताब भी अपने नाम कर चुके थे।
भारत की टेनिस परी: सानिया मिर्जा
भारत की टेनिस परी सानिया मिर्जा ने 2015 में पहला महिला डबल्स जीतकर भारतीय परचम एक बार फिर लहरा दिया था। सानिया ग्रैंड स्लैम जीतने वाली भारत की एकमात्र महिला टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने अपने करियर में अब तक 6 ग्रैंड स्लैम जीते हैं, जिनमें से 3 डबल्स में और 3 मिक्स्ड डबल्स में आए हैं। वह विश्व मंच पर नाम बनाने वाली अकेली भारतीय महिला टेनिस खिलाड़ी हैं, जो करियर की उच्च रैंकिंग 27 पर 2007 में पहुंच गई हैं।
पेस और भूपति ने किए कई कमाल
भारतीय टेनिस का इतिहास महेश भूपति और लिएंडर पेस के बिना अधूरा है। लिएंडर पेस टेनिस के सबसे सफल भारतीय हैं, उनके नाम पुरुष युगल वर्ग में 8 और मिश्रित युगल में 6 मिलाकर कुल 14 ग्रैंड स्लैम खिताब हैं। एकल खिलाड़ी के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले कोलकाता के मूल निवासी 4 दशकों में ओलंपिक पदक जीतने वाले देश के पहले टेनिस खिलाड़ी बने, जब उन्होंने 1996 के अटलांटा खेलों में कांस्य पदक जीता। इसके तुरंत बाद, उन्होंने अपना ध्यान युगल पर स्थानांतरित कर दिया और साथी भारतीय महेश भूपति के साथ उनकी साझेदारी एक बेहतरीन संयोजन साबित हुई। 1998 में, यह जोड़ी 3 स्लैम के सेमीफाइनल में पहुंची। अगले साल, यह जोड़ी सभी 4 ग्रैंड स्लैम के फाइनल में पहुंची, और फ्रेंच ओपन जीतने वाली पहली भारतीय युगल जोड़ी बन गई













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