देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreआज का विचार : परमात्मा की बनाई हुई इस प्रकृति
में हम सभी का ये कार्य है की इस कैसे बचाया जाए...आप सभी सोचे.... क्योंकि ये जीवन में आप जो कुछ करते है उसका कर्म ईश्वर के यहां दर्ज हो जाता है...सोचिए आप कब बच्चे रहेंगे युवा तो होना पड़ेगा या कब युवा रहेंगे बुजुर्ग अवस्था तो आनी पड़ेगी....या बुजुर्ग अवस्था के बाद जाना तो पड़ेगा...फिर इतनी हाय तौबा क्यों...किस के लिए अपने परिवार के लिए जो होके भी नहीं होता समझिए इस मृत्यु लोक की सच्चाई। यहां तो अपना ये शरीर भी नही है जो राख होना है....बस जाने से पहले एक अच्छा काम जरूर करें...इस प्रकृति से आप और हम को बहुत कुछ मिला है....उन में से एक है.....कितनी फ्री में ऑक्सीजन मिल रही है जबकि पानी पे तो मानव रूपी दानव ने कब्जा करके इस किस प्रकार मूल भाव कर दिया उदहारण मेरी केदारनाथ यात्रा में इसे देख चुका हूं....वहां मंदाकिनी नदी का स्वच्छ और जड़ी बूटियों का जल है पर लोग वहां भी बोतल ही खरीद रहे थे जबकि तमाम छोटे बड़े झरने पानी के निकल रहे है...आखिर में एक बात कहूंगा कैसे भी आप यहां इस धरा पे कोई तो कर्म करके जाओ...सांसारिक जीवन तो सब का दायित्व है पर उसे बड़ा दायित्व है कुछ करो चाहे जीवों के लिए हो या प्रकृति से कोई भी चीज जोड़ी हो.....इंसान का कर्म बहुत बड़ी भूमिका में रहता है...ध्यान रहे कि भोगना जरूर पड़ेगा अगर गलत जहां भी करोगे.....आगे हरिहर इच्छा













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