देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. षेर सिंह के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा तकनीकी सहयोगी संस्थाएं टीएसयू एवं टीसीआईएचसी के सहयोग से परिवार कल्याण कार्यक्रम के अन्तर्गत जनपद स्तरीय सेवा प्रदाताओं के लिए परिवार नियोजन परामर्श का एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य चिकित्साधिकारी डा.शेर सिंह ने परिवार नियोजन की बिभिन्न विधियों पर चर्चा करते हुए बताया कि बढती हुई जनसंख्या के कारण समाज एवं देश का विकास अवरूद्ध हो जाता है, साथ ही मां एवं शिशु के स्वास्थ्य पर भी बहुत बुरा प्रभाव पडता है। उन्होने बताया कि जिनका परिवार पूरा हो चुका है उनके लिए महिला पुरूष नसबन्दी एवं अस्थाई विधियों में मल्डीलोड, आईयूसीडी, तिमाही गर्भनिरोधक इन्जेक्षन, सप्ताहिक एवं देैनिक गर्भ निरोधक गोली आदि उपयोगी विधियां है। पुरूषों को भी नसबन्दी कराकर परिवार नियोजन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। इससे किसी भी प्रकार की कोई कमजोरी नही आती है।
जनपद परिवार कल्याण नोडल डा. दिलीप कुमार ने बताया कि लगभग 74 प्रतिष्शत महिलाएं प्रसव के तुरंत बाद परिवार नियोजन संबंधी विधि अपनाना चाहती हैं लेकिन पर्याप्त एवं उचित जानकारी ना हो पाने के कारण वह ऐसा नहीं कर पाती है। इसी के साथ 30 प्रतिशत महिलाएं ऐसी
है जिनके पहले प्रसव के कुछ माह बाद ही उन्हेें पुनः गर्भधारण हो जाता है जबकि दो बच्चों के बीच कम से कम 3 वर्ष का अन्तर आवश्य होना चाहिए।
उक्त कार्यशाला में राज्य स्तरीय प्रशिक्षक एवं जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी जितेन्द्र सिंह ने प्रशिक्षण का प्रारम्भ ज्ञान मूल्यांकन के उपरान्त विभिन्न परिवार नियोजन विधियों हेतु परामर्श कौशल स्थाई एवं अस्थाई गर्भनिरोधक विधियों पर व्याख्यान एवं समूह चर्चा के माध्यम से किया गया। कार्यशाला में जिला कार्यक्रम प्रबन्धक संजय सिहोरिया, फौजिया, खानम, एआरओ पंकज कुमार, ध्रुव कुमार एवं समस्त
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के चिकित्सा अधीक्षक, बीसीपीएम, स्टाफ नर्स एवं स्टाप नर्स ने प्रतिभाग किया।













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