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MATHURA : भटक रहे ’बेसहारा’

मथुरा। लगातार किये जा रहे बदलाव, तकनीक के समावेश और सरकारी सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते सरकारी योजनाएं पंक्ति के अखिरी व्यक्ति की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। यही वजह है कि बेसहारा लोग छोटे छोटे कामों के लिए महीनों सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी अपना काम नहीं करा पा रहे हैं। यहां तक कि राशन कार्ड जैसी बेहद जरूरी और सामान्य सी प्रक्रिया के लिए लोगों को एक-एक साल तक भटकना पड रहा है। यह सब इसके बावजूद हो रहा है कि इन लागों के पास पहले से राशन कार्ड थे लेकिन बदलाव के तहत नये राशन कार्ड बनवाने के लिए कह दिया गया और फिर इन्हें राशन डीलर ने राशन देना बंद कर दिया।

9 महीने से चक्कर काट रही 75 साल की विधवा वृद्धा


75 साल की गरीब विधवा वृद्धा अपना राशन कार्ड बनवाने के लिए 14 जनवरी से जिलापूर्ति कार्यालय के चक्कर काट रही है। डांडरा मौहल्ला गौतम नगर थाना सदर बाजार निवासी शांति देवी ने बताया कि उनके राशल डीलर ने यह कह कर राशन देना बंद कर दिया कि नया राशन कार्ड बनवाओ। इसके बाद 14 जनवरी को जिलापूर्ति कार्यालय में नये राशन कार्ड के लिए आवेदन किया। कई महीने तक कार्यालय के चक्कर काटने के बाद भी राशन कार्ड नहीं मिला। इस दौरान राशन डीलर ने राशन भी नहीं दिया। विधवा वृद्धा का एक बेटा है जो मानसिक रूप से कमजोर है। इसके चलते उसका आधार कार्ड नहीं बन पा रहा है और आधार कार्ड नहीं होने के चलते राशन कार्ड भी नहीं मिल रहा है। जिला पूर्ति कार्यालय से इसके बाद कहा गया कि वह आनलाइन आवेदन करें। 21 सितम्बर को आनलाइन आवेदन भी कर दिया। इस बीच जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक शांति देवी न ेगुहार लगाई लेकिन राशन कार्ड नहीं मिला।
इसी तरह

3 विकालंग बेटों की मां दाने दाने को मुहताज, नहीं मिल रहा राशन कार्ड


तीन विकलांग बेटों की मां दानेदाने को मुहंताज है, पति रिक्शा चलाकर कुछ कमाता है तो विकलांग बेटों का पेट भरती है। इस पर भी सरकारी सिस्टम का सितम यह है कि उसका राशन कार्ड बिना कुछ बताये निरस्त कर दिया गया। जब उसने राशन डीलर से पूछा तो नाया राशन कार्ड बनवाने को कह दिया। इसे बाद बाढपुरा सदर बाजार निवासी धनवंती राशन कार्ड के लिए भटक रही है लेकिन 9 महीने से अधिक का समय हो गया उसे राशन कार्ड नहीं मिला। इस बीच धनवंती नियमितरूप से जिलापूर्ति कार्यालय इस उम्मीद के साथ जाती रही कि शायद उसे आज राशन कार्ड मिल जाएगा, जिसपर सरकारी राशन मिलेगा और उसके घर का चूल्हा भी जलेगा। धनवंती के घर के चूल्हे की आग तो नहीं सुलगी, सरकारी कर्मचारी उसके जले पर नकम जरूर छिडकते रहे। आवेदन करने के करीब नौ महीने बाद उसे यह बताया गया कि वह आन लाइन आवेदन करे। किसी का सहयोग लेकर धनवंती ने आनलाइन आवेदन भी किया लेकिन राशन कार्ड अभी तक नहीं मिला है।

नारद संवाद

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