देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। निजीकरण के विरोध में लगातार आंदोलन कर रहे विद्युतकर्मी अब टकराव के मूड में आ गये हैं। इससे निपटने के लिए प्रशासन ने भी कमर कस ली है। हडताली कर्मचारियों और यूनियन द्वारा किसी भी कर्मचारी को काम पर आने से रोका गया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाही की जाएगी।
निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के 5 अक्तूबर के पूर्ण कार्य बहिष्कार और आंदोलन को लेकर शासन-प्रशासन ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। निर्बाध विद्युत व्यवस्था के लिए पुलिस बल के साथ सभी बिजलीघरों का संचालन कर्मचारियों की हड़ताल के बावजूद भी चालू रहेगा। काम करन के इच्छुक कर्मचारियों को पूरी सुरक्षा दी जाएगी। शासन की तैयारियों का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि कानून-व्यवस्था के लिए पुलिस के अलावा दूसरे विकल्प भी खुले रखे गये हैं।
जनपद और मंडल मुख्यालय स्तर पर कंट्रोल रूम भी स्थापित होगा। इस कंट्रोल रूम का कार्य यह होगा कि हड़ताल के समय यहां से दैनिक सूचना शासन को भेजी जाएगी। जिला और मंडल स्तरीय कंट्रोल रूम को गृह विभाग के कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा। अपर मुख्य सचिव ने इन बिंदुओं के अनुपालन की आख्या भी मांगी है।
उप्र शासन के अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने कमिश्नर, आईजी, डीएम और एसएसपी को पत्र भेजा है। अपर मुख्य सचिव ने आदेश दिए हैं कि जो कार्मिक हड़ताल में भाग नहीं लेना चाहते तथा अपने काम पर आना चाहते हैं, उनको पूर्ण सुरक्षा दी जाए, ताकि उनका शोषण या उत्पीड़न संघर्ष समिति द्वारा न हो। उप्र पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के स्ट्राइक ऑर्डर पुस्तिका में दिए गए मानकों के अनुसार बिजलीघरों-संयंत्रों पर समुचित पुलिस बल तैनात किया जाएगा। इन स्थानों पर वायरलेस की भी सुविधा उत्पन्न करा दी जाए।
यूपीपीसीएल समेत सभी प्रबंध निदेशकों के कार्यालयों एवं आवासों पर सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था करा दी जाए। इसके अतिरिक्त वितरण कार्यालयों पर भी सुरक्षाध्समुचित प्रबंध करा दिए जाएं। सिर्फ पुलिस बल ही नहीं, पत्र में यह भी कहा गया है कि आवश्यकता पड़ने पर आर्मी का भी सहयोग लिया जा सकता है, इसके लिए स्थानीय स्तर पर आर्मी अधिकारियों को पूर्व से ही अवगत दिया जाए।
आंदोलन को सफल बनाने के लिए तैयार की रणनीति
केन्द्रीय विद्युत संघर्ष समिति के आह्वान पर जिला समिति द्वारा कैन्ट बिजलीघर परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। निजीकरण का विरोध किया। सांसद, जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भेजे गए। सभा में वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर व अभियन्ता विगत गत एक सितंबर से लगातार शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, किन्तु प्रबंधन का हठवादी व दमनात्मक रवैया बना हुआ है, जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किसी भी प्रकार से प्रदेश व आम जनता के हित में नहीं है। निजी कंपनी मुनाफे के लिए काम करती है। निजीकरण का प्रस्ताव हर हाल में रद किया जाना चाहिए।













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