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आंध्र प्रदेश में शुरू हुआ देश का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट प्रोजेक्ट, 7 हजार घर होंगे रोशन

नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में अपने सिम्हाद्री थर्मल स्टेशन के जलाशय पर देश में 25 मेगावाट का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट प्रोजेक्ट शुरू किया है। ये पावर प्लांट 2018 में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई फ्लेक्सीबिलाइजेशन योजना के तहत स्थापित होने वाला पहला सोलर प्लांट है। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, इससे लगभग 7000 घरों को रोशन करने में मदद मिलेगी। यह प्लांट जलाशय में 75 एकड़ में फैला हुआ है। जिसमें किसी भी नार्मल सोलर पावर प्लांट से ज्यादा बिजली पैदा करने की क्षमता है।

क्या है फ्लोटिंग सोलर प्लांट?


दरअसल, यह फ्लोटिंग सोलर प्लांट, किसी भी जमीन पर जो सोलर प्लांट लगाए जाते हैं उनसे काफी अलग होता। ये भूमि-आधारित सोलर प्लांट्स के लिए एक ऐसा विकल्प होता है, जिसमें वॉटर बॉडीज की सतह पर फोटोवोल्टिक पैनलों की तैनाती की जाती है। अक्सर सोलर प्लांट्स लगाने के लिए कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिसमें ग्रिड कनेक्टिविटी, भूमि अधिग्रहण, विनियम जैसी चीजें शामिल हैं। लेकिन फ्लोटिंग सोलर प्लांट्स इन महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करने में मदद करते हैं।

इन फ्लोटिंग सोलर प्लांट्स को स्थापित करने का एक अन्य लाभ वॉटर बॉडीज का कूलिंग प्रभाव है, इससे इन सौर पैनलों का प्रदर्शन 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। बता दें, भारत में पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट साल 2014 में कोलकाता में स्थापित किया गया था।

7 हजार घर होंगे रोशन
मिनिस्ट्री ऑफ पावर के अनुसार, 1 लाख से ज्यादा नॉर्मल सोलर पावर प्लांट में जितनी बिजली पैदा करने की क्षमता होती है उससे अधिक इस फ्लोटिंग सोलर प्लांट है। इससे न केवल लगभग 7,000 घरों को रोशन करने में सहायता मिलेगी, बल्कि इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि इस प्रोजेक्ट की पूरी समयावधि के दौरान हर साल कम से कम 46,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड को कम किया जाए।
इन सबके अलावा, इस प्रोजेक्ट से हर साल 1,364 लाख लीटर पानी की बचत होने की भी उम्मीद है। बता दें, इतना पानी 6,700 घरों की वार्षिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा।

फ्लेक्सीबिलाइजेशन स्कीम के तहत हो रहा है काम
2018 में केंद्र सरकार द्वारा ‘फ्लेक्सीबिलाइजेशन स्कीम’ लॉन्च की थी, इस फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट को उसी स्कीम अंतर्गत शुरू किया गया है। ये स्कीम बिजली उत्पादन कंपनियों को केवल थर्मल पावर के बजाय अक्षय ऊर्जा यानि रिन्यूएबल एनर्जी के माध्यम से आपूर्ति को पूरा करने की अनुमति देता है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, “कोयला/लिग्नाइट/गैस आधारित थर्मल उत्पादन स्टेशनों वाली कोई भी उत्पादन कंपनी, देश में कहीं भी मौजूदा स्टेशनों या नए स्थानों पर ऊर्जा उत्पादन क्षमता स्थापित कर सकती है या खरीद सकती है”।

बता दें, 66,900 मेगावाट की कुल क्षमता के साथ, एनटीपीसी के पास 29 रिन्यूएबल प्रोजेक्ट सहित 71 पावर स्टेशन हैं। एनटीपीसी ने साल 2032 तक 60 गीगावाट (जीडब्ल्यू) रिन्यूएबल कैपेसिटी स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

नारद संवाद

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