देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। मथुरा बाल गृह में एक बार फिर बडी लापरवाही सामने आई है। सैप्टीसीमिया से तीन बच्चांे की मौत पर जिम्मेदार चुप्पी साध गये हैं। साफ सफाई के अभाव में मच्छर और मक्खियों से बच्चे संक्रमित हो जाते हैं। दूध पिलाने वाली निप्पल की ठीक से सफाई न होने पर भी यह संक्रमण फैलता।
बाल गृह में एक माह पहले 22 बच्चे कोरोना संक्रमित पाए गए थे। उस दौरान प्रशासनिक अमले में अफरा-तफरी तो मची लेकिन हुआ कुछ नहीं। संक्रमित बच्चों की रिपोर्ट तो निगेटिव आ गई, लेकिन संक्रमण बच्चों में घर कर गया। जिला महिला अस्पताल के चिकित्सक केके माथुर का कहना है कि बच्चों की मौत सैप्टीसीमिया से हुई है।
जबकि जिला प्रोवेशन अधिकारी अनुराग श्याम रस्तौगी बचाव करते हुए दिखेे उन्होंने दावा किया कि बाल गृह शिशु में साफ सफाई के पूरे इंतजाम हैं। बच्चों को पौष्टिक आहार दिया जा रहा है।
जिला अस्पताल के डा. रमन अपनी टीम के साथ हर सप्ताह बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण करते हैं।
30 अगस्त 2019 मंे मथुरा स्थित राजकीय बाल शिशु गृह में दो बच्चों की डायरिया से मौत हो गई थी। 24 घंटे में 14 बच्चे बीमार हुए थे। छह को आगरा रेफर किया गया था, जिनमें से दो की मौत हो गई थी। डायरिया के लिए भी साफ सफाई और दूसरी वही परिस्थितियां जिम्मेदार रहती हे जो सैप्टीसीमिया के लिए मानी जा रही हैं।













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