देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। नाम में दम चाहिए, जब नाम में दम होता है तो जनता भी डरती है और रौब भी गालिब होता है। यही वजह है कि विभिन्न संगठनों की मांगों पर सरकार समय समय पर कर्मचारियों के पदनामों को बदलती रही है जैसे लेखपालों का परिवेक्षण करने वाले अधिकारी का नाम कई बार बदला गया। पूर्व प्रचलित नाम गिरदावर कानूनगो था। इसे बदल कर सुपरवाइजर कानून गो कर दिया गया। बाद में सुपरवाइजर कानूनगो से बदलकर भू लेख निरीक्षक और वर्तमान में राजस्व निरीक्षक कर दिया गया। जबकि बेचारे लेखपाल साठ साल से लेखपाल ही बने हुए हैं। इसी प्रकार ग्राम सेवक से ग्राम विकास अधिकारी, पंचायत सचिव से ग्राम पंचायत अधिकारी, कनिष्ठ लिपिक से कनिष्ठ सहायक, नलकूप चालक से नलकूप प्रभारी, चैकीदार से ग्राम प्रहरी आदि नाम परिवर्तित किये गये हैं लेकिन इस बीच किसी ने लेखपालों की सुध नहीं ली। यह बात अब लेखपालों को खलने लगी है और अब वह अपने लिए भी कोई रौबीला सा नाम चाहते हैं, जिसकी कुछ धमक बने। हालांकि ऐसा नहीं है कि लेखलापों ने इससे पहले ये प्रयास नहीं किया लेकिन प्रयास रंग नहीं लाया। तीन मई 2016 को हुई राजस्व परिषद की बैठक में तथा 31 अक्टूबर 2017 में लिये गये निर्णय के अनुशार लेखपाल का पदनाम राजस्व उपनिरीक्षक किये जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। अपर मुख्य सचिव राजस्व ने 9 जुलाई 2019 हुई बैठक में लेखपाल का नाम परिवर्तित किये जाने पर सैद्धांतिक सहमति भी बनी थी। जिस पर कार्मिक विभाग से अनापत्ति भी प्राप्त हो चुकी है। इसके बावजूद शासन से कोई शासनादेष अभी तक पारित नहीं हुआ है।
मंगलवार को प्रदेशव्यापी आव्हान पर लेखलानों ने सभी तहसील मुख्यालयों पर प्रदर्षन किया। इस दौरान उनकी दर्जन भर मांगे थीं जो लम्बे समय से चली आ रही थीं। इन मांगों में लेखलान पदनाम परिवर्तन किये जाने को लेकर भी लेखपालों के अंदर खासी बेचैनी देखी गई। आंदोलित लेखपालों को उम्मीद यही है कि उन्हें भी जल्द ही दमदार और रौबीला नाम मिल जाएगा।













Related Items
MATHURA : ठाकुर जानकी वल्लभ लाल का धूमधाम से मनाया अन्नकूट महोत्सव
MATHURA : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज आएंगे मथुरा
MATHURA : प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर अधिकारियों की दौड़ भाग जारी