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गोवर्धन की सप्तकोसीय परिक्रमा में बनी अटूट मानव श्रृंखला

मथुरा। मुडिया पूनौ पर गिरिराज तलहटी एक बार फिर अद्भुत अटूट मानव श्रृंखला की साक्षी बनी। लाखों की संख्या में देश विदेश के कौने कौने से गोवर्धन पहुंचे श्रद्धालुओं ने गोवर्धन की सप्तकोसीय परिक्रमा लगाई। गिरिराज महाराज के जयकारों को गोवर्धन पर्वत की तलहटी गूंज उठी। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो जनसमुद्र चारों दिशाओं से उमड गोवर्धन पर्वत की तलहटी में शरण लेने को व्याकुल हो उठा है।

परिक्रमा मार्ग तक पहुंचने के लिए लोगों को कई किलोमीटर का पैदल रास्ता तय करना पडा। यातायात और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सभी तरह के वाहनों का प्रवेश कई दिन पहले ही परिक्रमा मार्ग में पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसके अलावा गोवर्धन के स्थानीय निवासियों को ही पहचान पत्र दिखाने पर बैरियर से आगे जाने दिया जा रहा था। हालांकि स्थानीय लोगों ने भी इस दौरान घरों से बाहर निकलने और खास कर वाहन लेकर निकलने से परहेज किया जिससे कि किसी तरह का व्यवधान व्यवस्था में पैदा न हो।

स्थानीय लोगों का पूर्ण सहयोग मिलने से व्यवस्था बहाली में प्रशासन को मदद मिली। गुरु पूर्णिमा से पांच दिन पहले यानी आठ जुलाई से ही परिक्रमार्थियों का आना शुरू हो गया था। रेलवे और सड़क परिवहन की पूरी व्यवस्था तभी से चाक चौबंद कर दी गई थी। इसके बाद धीरे धीरे परिक्रमार्थियों की भीड़ बढ़ती गई और गुरु पूर्णिमा पर उत्तर भारत का सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाला वार्षिक धार्मिक आयोजन अपने चरम पर पहुंच गया। यूं तो गोवर्धन में अब वर्ष भर श्रद्धालु गिरिराज परिक्रमा लगाते हैं लेकिन मुड़िया पूर्णिमा मेला के 5 दिनों में गोवर्धन की परिक्रमा लगाना परम पुण्य माना जाता है। बहुत सारे श्रद्धालु पूरे सात कोस की दंडवती परिक्रमा भी लगाते हैं।  

दूधिया रोशनी में झिलमिला रहे मठ, मंदिर और सरोवर
गोवर्धन तलहटी, दानघाटी मंदिर, जतीपुरा मुखार बिंदु, राधा कुंड, श्याम कुंड आदि स्थलों की मनोहारी शोभा लोगों का मन मोह रही है। मठ, मंदिर, कुंड, सरोवर और दूसरे धार्मिक स्थल निराली शोभा पाए हुए हैं। शाम होते ही समूचे ब्रज मंडल के धार्मिक स्थल, कुंड, सरोवर दूधिया रोशनी में झिलमिला उठते हैं। विधिवि प्रकार के धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला निरंतर जारी है। पवित्र गुंडों मंे स्नान कर लोग खुद को धन्य कर रहे हैं।  

 

नारद संवाद

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