देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। ब्रज में होली के आयोजनों की शुरूआत हो गई है। सोमवार को बरसाना में लड्डू होली खेली गई। मंगलवार का ब्रज की विश्व प्रसिद्ध लाठामार होली है। एक के बाद एक लगातार होली के भव्य आयोजनों का सिलसिला चल निकला है।
इसके बाद नंदगांव में लठामार होली, श्रीकृष्ण जन्मस्थान की होली, गोकुल की छडी होली, द्वारिकाधीश, बांकेबिहारी मंदिर की होली, दाउजी का हुरंगा, फालैन को होलिका दहन और दूसरे कई छोटे बडे आयोजन होने हैं।
बावजूद इसके मथुरा के बाजार मंे अब तक वह रौनक नहीं लौटी है जो होली जैसे त्योहार पर रहती है। महंगाई की मार से आम आदमी बेजार है और खरीददारी की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। होली का उल्लास गांव से शहर तक अभी जमा नहीं है। मठ मंदिरों और प्रसिद्ध आयोजनों तक होली की उमंग सिमट कर रह गई है।
ऐसे में रंग-गुलाल का थोक बाजार तो तैयार है, मगर फुटकर दुकानदार अभी भी माहौल भांप रहे हैं। कई राज्यों में लगातार बढ़ रहे कोरोना केसों को देखते हुए वह अभी माल का स्टाक कम ही कर रहे हैं।
29 मार्च को होली है। ऐसे में होली गेट, धौलीप्याउ, कृष्णा नगर और जमुनापार में रंग-गुलाल और पिचकारी की थोक की दुकानें लग तो गई हैं लेकिन अभी वह रौनक देखने को नहीं मिली है जो होली पर बाजार मंे रहती है। पिछले साल कोरोना के चलते होली फीकी रही थी। हालांकि इस बार कोरोना को लेकर पहले जैसा खौफ नहीं है, लेकिन अभी बाजार में ज्यादा चहल-पहल नहीं दिख रही। कारोबारियों का कहना है कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है।
इसका असर बाजार में दिख रहा है, हालांकि पिछले साल से बेहतर होने की उम्मीद है। इस बार भी लोग सूखी होली खेलना पसंद करेंगे। इसके मद्देनजर गुलाल का ज्यादा स्टाक मंगाया गया है। हर्बल गुलाल की ज्यादा डिमांड है। पानी में घोलने वाले रंग कम मंगाए हैं। ब्रांडेड गुलाल के पैकेट की कीमत 10 रुपये से लेकर 100 तक है। कारोबारी यमुनापार क्षेत्र के कारोबारी दीपचंद का कहना है कि होली को लेकर तैयारी पूरी कर ली है।
फुटकर दुकानदारों पर पिछले साल का स्टाक है। ऐसे में अभी खरीदारी में बहुत तेजी नहीं आई है। उम्मीद है कि होली से तीन-चार दिन पहले बाजार में रंगत दिखे। दूसरे राज्यों का पड़ रहा असर दूसरे राज्यों में कोरोना के केस बढ़ने का असर यहां पर भी दिखाई दे रहा है। लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं हैं। दुकानदारों को डर है कि पिछले साल की तरह स्टाक बच गया तो उनका काफी नुकसान हो जाएगा। ऐसे में माना जा रहा है कि होली की पूरी रंगत इस बार भी नहीं लौटेगी।
बाजार मंें तम्बाकू उत्पादों पर कालाबाजारी शुरू
यह शरारत है कि या सोची समझी रणनीति। तम्बाकू उत्पादों की कालाबाजारी शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि थोक विक्रेताओं ने जानबूझ कर इस तरह की उफवाह उडाई है कि लाॅकडाउन लग सकता है। इसका लाभ वह तम्बाकू उत्पादों की कालाबाजारी कर उठा रहे हंै। लोगों का पिछला अनुभव ठीक नहीं रहा है लिए लिए जिसे जरूरत नहीं है वह भी इनका स्टाॅक करने लगा है।













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