देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। जनपद में करीब 200 ईंट भट्टा संचालित हैं। इस उद्योग में बडी संख्या में बाहरी और स्थानीय मजूदर काम कर रहे हैं। इन कामगारों के बेरोजगार होने की नौबत आ गई है। ईंट भट्ठा उद्योग पर जीएसटी बढ़ाने व कोयले के दामों में हुई बढ़ोतरी के विरोध में ईंट भट्ठा संचालकों की एक बैठक हुई। जिसमें अखिल भारतीय ईंट निर्माता महासंघ के आह्वान पर दस नवंबर को दिल्ली में रामलीला मैदान से संसद तक मार्च व प्रदर्शन में शामिल होने का निर्णय लिया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय बालिका इंटर कॉलेज नौहझील में आयोजित बैठक में जिला ईंट भट्टा एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर चैधरी ने कहा कि ईंट उद्योग पर जीएसटी बढ़ाई जाने व कोयले के दामों में बढ़ोतरी होने से भट्ठा संचालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले डेढ़ करोड़ रुपये तक के टर्नओवर पर एक प्रतिशत और उसके ऊपर पांच प्रतिशत जीएसटी था। सरकार ने एक प्रतिशत से बढ़ाकर छह प्रतिशत और पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया है। बड़ी बात यह है कि छह प्रतिशत जीएसटी देने वाले कारोबारी इनपुट क्रेडिट का लाभ भी नहीं ले पाएंगे। वहीं जिला ईंट भट्टा एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष मोरध्वज अग्रवाल ने बताया कि कोयले के दाम दस हजार रुपये प्रतिटन से बढ़कर 25000 रुपये प्रति टन हो गए हैं। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कड़े नियमों के चलते अब भट्टा संचालन संभव नहीं है। इससे ईंट भट्ठा उद्योग पर संकट मंडराने लगा है। सरकार की अनदेखी के कारण ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे। केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से ईंट निर्माता संघ के आह्वान पर देशभर के ईंट भट्ठा संचालक रामलीला मैदान से संसद तक पैदल मार्च में शामिल होंगे। जिसमें मथुरा जनपद से भी भट्ठा संचालक इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए 10 नवंबर को दिल्ली जाएंगे। बैठक की अध्यक्षता मथुरा ईंट भट्ठा एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर चैधरी और संचालन महामंत्री भानुप्रकाश वार्ष्णेय ने किया। धर्मवीर अग्रवाल, राजकुमार वाष्र्णेय, सुधीर अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, हीरामन अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, लेखराज अग्रवाल मुरारी लंबरदार, राजकुमार अग्रवाल, भूरा ठाकुर, यशपाल सिंह, दामोदर प्रसाद, अनिल सिंघल, तेजप्रकाश सिंघल, रवि पटेल, विष्णु अग्रवाल, किशन अग्रवाल समेत ईंट भट्ठा संचालक मौजूद थे।
बेरोजगारी की कगार पर लाखों मजदूर
ईंट भट्टा बंद होने से लगभग एक लाख मजदूरों की रोजी रोटी पर संकट मंडरा जायेगा। बड़ी संख्या में बिहार व मध्यप्रदेश के अलावा इलाके के लोग ईंट भट्टों पर मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। जिला महामंत्री भानु प्रकाश वाष्र्णेय ने बताया कि मथुरा जिले में लगभग दो सौ ईंट भट्ठे संचालित हैं। प्रत्येक भट्टा पर चार सौ से पांच सौ मजदूर मजदूरी करने का कार्य करते हैं। ईंट भट्टा बंद होने से बेरोजगारी बढ़ जायेगी।













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