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दीपावली पर रिकॉर्ड व्यापार - उद्योग जगत ने माना, ‘मेड इन इंडिया’ और जीएसटी सुधारों का दिखा सीधा असर

नई दिल्ली,। देश भर के उद्योग जगत के दिग्गजों ने बुधवार को इस साल देश में दीपावली पर रिकॉर्ड तोड़ व्यापार की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेड इन इंडिया' विजन और हालिया आर्थिक सुधारों के जमीनी स्तर पर अच्छे परिणाम दिख रहे हैं।अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) द्वारा किए गए एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण के अनुसार, भारत ने दीपावली पर अब तक का सबसे अधिक व्यापार दर्ज किया, जिसकी कुल बिक्री 6.05 लाख करोड़ रुपए आंकी गई है। इस ऐतिहासिक आंकड़े को बढ़ते उपभोक्ता विश्वास और भारत में निर्मित उत्पादों के लिए मजबूत प्रोत्साहन के स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
ब्रिक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष हरवंश चावला ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मैंने पहले ही कहा था कि यह दीपावली एक शानदार दिवाली होगी। हमने अपनी अर्थव्यवस्था में इतनी बिक्री और उत्साह पहले कभी नहीं देखा जितना इस बार देख रहे हैं। इसका सारा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है।"
उन्होंने आगे कहा कि 'मेड इन इंडिया' का नारा जोर पकड़ रहा है और इसके नतीजे अगले छह महीने से एक साल में और ज्‍यादा दिखाई देने लगेंगे।
पीएचडीसीसीआई के सीईओ और महासचिव रंजीत मेहता ने भी इसी तरह की राय व्यक्त करते हुए कहा कि दीपावली से पहले लागू किए गए जीएसटी सुधारों का व्यापार पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
उन्होंने आईएएनएस को बताया, "प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया और यह कदम बेहद अहम था, खासकर आज के बिखरे हुए वैश्विक व्यापार माहौल में। दरअसल, बिकने वाली 80 प्रतिशत वस्तुएं भारतीय उत्पाद थीं, जो बेहद उत्साहजनक है।"
कोलकाता में, भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रदेश अध्यक्ष नरेश पचीसिया ने भी त्योहारी सीजन की सफलता की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपभोक्ता मांग कुछ ऐसी है जो हमने लंबे समय से नहीं देखी थी। उपभोग से जुड़ी वस्तुओं पर जीएसटी में कमी ने इसमें अहम भूमिका निभाई।"
उन्होंने आगे कहा कि 22 सितंबर की घोषणा के बाद बिक्री में आई कमी ने दबी हुई मांग को जन्म दिया, जिससे दीपावली के व्यापार में इस भारी उछाल को बढ़ावा मिला।"
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप छोटे उद्योगों को निरंतर समर्थन देने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा, "हमारी जिम्मेदारी लघु एवं मध्यम उद्योगों और सरकारी विभागों के बीच सेतु का निर्माण करना है। हमारा उद्देश्य हर संभव सहायता प्रदान करके छोटे उद्योगों को बड़े उद्योगों में विकसित होने में मदद करना है।"

साभार-khaskhabar.com

 

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