देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreअभी कुछ समय पहले की बात है कुंभलगढ़ जाने का मौका मिला था... वहा परशुराम जी की तपोस्थली देखी जहां उन्होंने भगवान शिव की तपस्या की थी.... उनके स्थान के लिए जो रास्ता गया है वो एक जंगल का बहुत रोचक पैदल रास्ता है....लंगूरों से भरा रास्ता मिलेगा क़िस्मत अच्छी होगी तो लेपर्ड भी दिख सकता है...ये रास्ता लगभग 2 किलो मीटर का है,...इसके बाद 500 सीढ़ियों का सफर है...जानकारो की मानें तो इस गुफा का निर्माण एक ही चट्टान को काट किया गया है। गुफा का ऊपरी भाग गाय के थन समान प्रतीत होता है। इस गुफा मंदिर के अंदर ही भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। शिवलिंग के ऊपर गोमुख है, जहां से प्राकृतिक रूप से शिवलिंग का जलाभिषेक होता है। मंदिर से कुछ किमी की दूरी पर मातृकुंडिया नाम का एक स्थान है, माना जाता है कि मातृहत्या के पाप से मुक्ती परशुराम को यहीं मिली थी। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह वही स्थान है जहां परशुराम ने कर्ण को शस्त्र शिक्षा दी थी.













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