देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। 1942 के भारत छोडो आंदोलन में अपने प्राणों की आहूति देनेवाले वृंदावन के शहीद लक्षमण को स्थानीय निकाय भुलाने पर आमादा है। यह बात समाजसेविका प्रीती गोस्वामी ने कही। प्रीती ने कहा है कि शहीद के प्रतिमा स्थल की आसपास की जमीन पर एक व्यावसायिक भवन बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए तोड़फोड़ का काम शुरू कर दिया गया है।
समाजसेविका प्रीती ने बताया कि शहीद लक्षण का 73 वां बलिदान दिवस 28 अगस्त को स्थानीय नागरिकों ने मनाया था जिसमें इस स्मारक स्थल से कोई भी छेड़छाड़ न करने की अपील स्थानीय प्रशासन से की गई थी।
इससे पूर्व मथुरा के अनेक बड़े जनप्रतिनिधियों ने शहीद के स्मारक से कोई छेड़छाड़ न कर इसे रमणीय स्थल बनाने कि घोषणा भी की थी, बाबजूद इसके मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण इसे बर्बाद करने पर उतारू है। प्रति ने बताया की वे अपने साथियों के साथ हाईकोर्ट में इस निर्माण को रुकवाने के लिए याचिका दाखिल करेंगी।
शाहीद़ लक्षण बीकानेर से लड़कपन में गोवर्धन आकर बसे थे। गोवर्धन में यात्रियों के लिए प्याऊ लगाईं और फिर गांधी जी की आवाज पर 1942 के भारत छोडो आंदोलन में वृंदावन आये और एक जुलूस में शामिल हुए। जुलूस पर गोरी सरकार के सिपाहियों ने गोली चलाई। एक गोली लक्ष्मण को लगी और उन्होंने वहीं दम तोड़ दिया था।













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