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सामाजिक दूरी के नियमों का नहीं हो रहा है पालन

मथुरा(सतपाल सिंह)। लाकडाउन में सरकारी राशन की दुकानांे पर उमड रही भीड सब किये धरे पर पानी फेर रही है। एक तरफ लोगों को घर के अंदर रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ कुछ किलो चावल और गैहूं के लालच में लोगों को घर से बाहर निकलने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हालात ऐसे बन गये हैं कि लाकडाउन में भी इंडिया फिजिकली कनेक्ट हो रहा है।
शहर से देहात तक सरकारी राशन की दुकानों पर हालात बेहतर नहीं हैं। अधिकारियों की मौजूदगी लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। मौके पर मौजूद अधिकारी लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करा पा रहे हैं। इस तरह के नजारे जगह जगह देखे जा सकते हैं। गोवर्धन तहसील की नगर पंचायत सौंख में नायब तहसीलदार और पूर्ति निरीक्षक की मौजूदगी में राशन की दुकान पर भीड लगी रही। दूसरी जगहों पर भी स्थिति कमोबेश इसी तरह की थी। जब अधिकारियों से इस बारे में पूछा गया तो वह तरह तरह से सफाई देने लगे लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग नहीं बना पा रहे थे।
सरकारी राशन लेने के लिए प्रत्येक घर से कम से कम एक या एक से अधिक व्यक्तियों को राशन लेने के लिए घर से बाहर निकलना अनिवार्य है। लोग कुछ किलो गैंहू और चावल के लिए अपने जीवन को दंाव पर लगा रहे हैं। कोरोना वाइरस के कोहराम में भी लोग इस सरकारी मदद का लालच नहीं छोड पा रहे हैं और सरकारी राशन की दुकानों पर भीड उमड रही है। इससे भी ज्यादा चिंता जनक बात यह है कि हर परिवार के कम से कम एक या इससे अधिक लोगों के इलेक्ट्रिकि मशीन पर अपने अंगुलियां लगाना अनिवार्य है। यह सब उस स्थिति में किया जा रहा है जब काफी समय पहले कार्यालयों में भी ई-अटेंडेंस को बंद कर दिया गया था। इस एक मशीन के माध्यम से राशन दुकान से संबंधित क्षेत्र के प्रत्येक परिवार का कम से कम एक व्यक्ति एक दूसरे के संपर्क में आयेगा। इस तरह से पूरा क्षेत्र फिजिकली कनेक्ट होगा। अगर एक क्षेत्र का एक व्यक्ति भी दूसरे क्षेत्र के एक व्यक्ति के संपर्क में आ जाता है तो इस तरह से पूरा शहर या पूरा जिला ही एक दूसरे से फिजिकली कनेक्ट हो  जाएगा। हालांकि कहा यह जा रहा है कि मशीन पर अंगूठा लगाने से पहले व्यक्ति के हाथों को साबुन पानी या सेनेटाइज से साफ कराया जा रहा है लेकिन जिस तरह से भीड उमड रही है और सोशल डिस्टेंसिंग नहीं बन पा रही है ऐसे स्थिति में कितने लोगों के हाथों को सेनेटाइज किया जा रहा है इसे आसानी से समझा जा सकता है।  
सरकारी राशन की दुकानों पर जिस तरह से मुश्किल आ रही है। बैंक शाखाओं और अनाज मंडी में भी इसी तरह की परेशानियों का सामना सिस्टम को करना पड सकता है। पन्द्रह अप्रैल से आनाज मंडी में गैहूं की खरीद शुरू हो जाएगी लेकिन अभी तक जिला प्रशासन इस तरह का कोई  प्लान तैयार नहीं कर सका जिससे पूरे जनपद के किसानों को एक साथ मंडी की तरफ आने से रोका जा सके। मंडी के आढतिया ओं का कहना है कि अगर ब्लाक के हिसाब से किसानों के लिए दिन निर्धारित कर दिये जाएं तो भीड को नियंत्रित किया जा सकता है। इस तरह के दूसरे उपाय भी कारगर हो सकते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक इस तरह का कोई प्लान उनके पास नहीं आया है।
 

 

नारद संवाद

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