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लक्ष्य के साथ पौधारोपण की तैयारी

मथुरा। बडी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने गांवों को लौटे हैं। इन्हें गांव में ही और आनन फानन में काम मुहैया कराने के लिए मनरेगा के कामों में लगा दिया गया है। अब इन मजदूरों को मनरेगा के तहत ही बरसात के मौसम में पौधारोण के लिए गड्ढे खोदने के काम में लगाया जा रहा है।

बडी संख्या में मनरेगा मजूदर काम कर रहे हैं ऐसे में संसाधनों को देखते हुए पिछले साल की तुलना में इस बार बडे लक्ष्य के साथ वृक्षारोपण करने की तैयारी है। विगत वर्ष 19 लाख 67 हजार 422 पौध एक ही दिन में रोप दिये गये थे।

पौधे रोपने के साथ ही इनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी उन्हीं विभागों को सौंपी गई थी जिन्हें पौधे लगाने को मिले थे। इससे पहले यह काम वन विभाग के जिम्मे था। पौधा रोपने का काम तो दूसरे विभाग करते थे लेकिन बचाने का जिम्मा वन विभाग के सिर ही था। विगत वर्ष इस दिशा में बडा कदम उठाते हुए उन्हें विभागों को इनको बचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी जो पौधारोपण कर रहे थे।

इसे लिए विभाग के कुल बजट का दो प्रतिशत इस काम पर खर्च करना था। अब बजट तो खर्च हो गया लेकिन यह बताने को कोई तैयार नहीं है कि उनके द्वारा रोपये गये पौधों में से कितने पौधे जिंदा हैं। दूसरी ओर जिला प्रशासन ने नये सिरे से कीर्तिमान बनाने और विगत वर्ष की तुलना में ज्यादा पौधे रोपने के लिए काम शुरू कर दिया है। यह सिर्फ पिछले साल का मामला नहीं है। इससे पहले भी यही होता रहा है।

पौधे रोपे जाने के बाद कितने प्रतिशत पौधे जीवित रहे, इसका आंकडा जिला प्रशासन जारी नहीं करता है। जबकि पूरा जोर हर साल कितने पौधे रोपे जाने हैं और कीर्तिमान बनाने पर लगा दिया जाता है।

दिलीप यादव का कहना है कि जिनते पौधे जिला प्रशासन हर साल रोपता है अगर उसके दस प्रतिशत भी बचा पता तो दो विगत 10 साल के पौधारोपण में ही पूरा जनपद हरियाली से आच्छादित हो जाता।

516 ग्राम पंचायत, निकायों को भी मिला था लक्ष्य


विगत वर्ष 516 ग्राम पंचायतों एवं 15 नगर निकायों को भी पौधारोण का लक्ष्य दिया गया था। इनके समन्वयकों ने वृक्षारोपण करके अपनी रिपोर्ट खण्ड विकास अधिकारी को प्रस्तुत की थी। जिससे वह वन विभाग में तैनात किये गये अधिकारियों को अपनी सूचना दे सकें।

नारद संवाद

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