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MATHURA : मरीजों को नहीं मिल रहीं सामान्य सुविधाएं

मथुरा। जिला चिकित्सालय में निरीक्षण, आदेश, समीक्षा, रिमेण्डर, स्पष्टीकरण, आडिट ये सब बदस्तूर जारी है। हाल ही में उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, अनुश्रवण समिति, एडीएम के निरीक्षण हो चुके हैं। तीन सदस्यीय अनुश्रवण समिति का तीन दिवसीय आडिट रविवार को पूरा हुआ। शनिवार को एडीएम ने निरीक्षण किया था। शनिवार को ही उर्जा मंत्री ने जिलाधिकारी सहित दूसरे जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक ली और जिलाधिकारी को निर्देश दिये कि सीएमएस से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिये। उर्जामंत्री ने बाकायदा इस मामले में रूचि ली और जिलाधिकारी से कहाकि उनके निरीक्षण के दौरान जो निर्देश सीएमएस को दिये गये थे, सीएमएस ने उनका स्पष्टीकरण नहीं दिया है। मंत्री से लेकर अधिकारी तक सब जिला चिकित्सालय को लेकर इतने गंभीर हैं बावजूद इसके चिकित्सालय की बदहाल व्यवस्थाओं में किसी तरह का कोई सुधार कहीं से होता हुआ नहीं दिख रहा है। यहां तक कि 33 साल पुरानी एक्सरे मशीन की जगह डिजिटल मशीन के लिए के लिए आठ साल से सीएमएस द्वारा लगातार  लिखा जा रहा है लेकिन मशीन आठ साल में भी नहीं मिली है। सांसद हेमा मालिनी के निरीक्षण के दौरान भी यह बात सीएमएस ने उठाई थी, लेकिन कुछ हुआ नहीं। सीएमएस यहां तक कह चुके हैं कि इस एक्सरे मशीन से सही रिपोर्ट नहीं आ रही है। ऐसे में मेडिकोलीगल रिपोर्ट कैसे बन रही हैं यह भी बडा मुद्दा है।

उर्जा मंत्री ने कहा पीने लायक नहीं पानी, फिर भी प्रशासन ने नहीं कराई टेस्टिंग
उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने जिला चिकित्सालय के निरीक्षण के दौरान आरओ के पानी को पीने लायक नहीं बताया था। इस पर सीएमएस मौर्या ने कहा था कि पानी पीने लायक है। एक आर ओ का टीडीएस 55 और दूसरे का 65 है। उर्जामंत्री के पानी को पीने लायक नहीं बनाने के बाद जिला प्रशासन ने पानी की टेस्टिंग तक नहीं कराई जिससे कि उर्जा मंत्री की बात को बल मिलता और कोई कार्यवाही हो पाती।

ये है जिला चिकत्सालय की हालत
-एक्सरे मशीन 35 साल पुरानी है, इसकी जगह डिजिटल एक्सरे मिल जाए तो बेहतर होगा।
-एक्सरे और अल्ट्रा साउण्ड के लिए मरीजों को दिया जा रहा है एक से दो महीने आगे की तारीख
-प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर अधिकाश दवाएं ऑर्डर देने बावजूद उपलब्ध नहीं हो रही हैं।
-जिला चिकित्सालय में ठीक से कभी चालू नहीं रहा है ट्रोमा सेंटर
-काफी पुराना और बेहद छोटा है ऑपरेशन थियेटर, हर बार की जाती है अपग्रेड करने की बात
 -ब्लड बैंक में ब्लड सेप्रेशन कक्ष में खराब रहती है मशीन।
-एक्सरे और अल्ट्रा साउण्ड टेक्नीशियन के पद हैं खाली
-महिला जिला अस्पताल में रात के समय नहीं रहते चिकित्सक
-महिला चिकित्सालय में रात के समय अगर आपरेशन की जरूरत पड जाए तो कोई व्यवस्था नहीं है
-चिकित्सालय में लगे सीसीटीवी कैमरे लम्बे समय से खराब पडे हैं

बाहर की दवाएं लिखते हैं, बाहर रेफर करते हैं
जिला चिकित्सालय में इलाज और दवाएं मुफ्त मिलंेगी यही सोच कर कोई अपने मरीज को यहां लाता हैै। अस्पताल में दवाएं नहीं होने पर अस्पताल के अंदर ही सस्ती दर पर दवाएं बेचने वाला मेडिकल स्टोर खुला हुआा है। इस स्टोर की भी हालत खराब है। यहां चिकित्सक बाहर की दवाएं खिलते हैं और मरीज को बाहर के कमीशन वाले हास्पीटल के लिए लिए रैफर करते हैं।  

 

नारद संवाद

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