देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। मथुरा महानगर में यहां वहां कहीं भी सडक पर पार्किंग नजर आ जाएगी। यह पार्किंग किसी होटल की हो सकती है। किसी कामर्शियल काॅम्लेक्स की अथवा किसी शिक्षण और कोचिंग संस्थान की। हाॅस्पीटल के आगे पार्किंग शहर का अभिन्न अंग बन चुकी हैं। इन बस में समानता यह है कि ये कद्दावर लोगों की हैं या फिर किसी ताकतवर के सहारे चल रही हैं। कहीं किसी राजनेता की शह भी हो सकती है। अतिक्रमण हटाओ अभियान चलते हैं लेकिन इन पार्किंग को छूने तक की जहमत कोई नहीं उठाता। यह पार्किंग कई जगह निशुल्क हैं तो कई जगह बाकायदा वाहन खडा करने वाले व्यक्ति से शुल्क लिया जाता है। यहां तक कि शुल्क की रशीद भी दी जाती है। अगर कोई ऐतराज जताये तो पहले समझाया जाता है कि यह जनहित में और फिर भी न माने तो इनके पास समझाने कई तरीके हैं। वसूली करने वाला भी इन पार्किंग के लिए जिम्मेदार नहीं है। तमाम जगह बाकायदा इसका ठेका तक उठाया जाता है। मथुरा महानगर आए दिन जाम से झूझते लोग आ रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जाम का सबसे बडा कारण है इसी के अंतर्गत अब जिन लोगों ने रोड पर पार्किंग बना रखी है। उन लोगों के खिलाफ आखिरकार कब होगी कार्यवाही यह कोई नहीं बता सकता। क्योंकि जाम से हर व्यक्ति परेशान है फिर भी ठोस कोई उपाय ना मिल पाने के कारण लोग घंटों जाम में फसे रहते हैं और जल्दबाजी के कारण जाम में लोग दुर्घटना ग्रस्त हो जाते हैं।













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