देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। धर्म नगरी में एक नई तरह की बेरोजगारी लाॅकडाउन के दौरान सामने आई है। इस से पहले शायद ही इस ओर किसी का ध्यान गया हो। पहली बार धर्म में पंडागीरी और यजमानी से जुडे लोगों ने बेरोजगारी का सवाल उठाया है। इस क्षेत्र से जुडे लोगों का कहना है कि जितने भी तीर्थ पुरोहित हैं एवं पंडा वर्ग के लोग हैं उनके खाते में भी सरकार को एक एक हजार रूपये की आर्थिक मदद भेजनी चाहिए। जैसे ढकेल वाले, मजदूर, सुनार, लोहार इन सब लोगों को जैसे एक एक हजार रूपये महीने की मदद की जा रही है उसी प्रकार से पंडा, तीर्थ पुरोहितों की भी सरकार की ओर से मदद की जानी चाहिए। जब से लोकडाउन हुआ है तब से तीर्थयात्री बिल्कुल भी मथुरा में नहीं आ रहे हैं और हमारा पूरा मथुरा तीर्थ यात्रियों पर निर्भर रहता है जो पंडा वर्ग है तीर्थ पुरोहित हंै मंदिरों से जुड़े हुए लोग हैं वह लालन पालन परिवार का नहीं कर पा रहे हैं उनके सामने मुसीबत यह है कि उनके पास में राशन भी नहीं है। यजमानी से जुडे और गोकुल नगर पंचायत चेयरमैन संजय दीक्षित का कहना है कि इसीलिए मेरा सरकार से अनुरोध है कि पूरे मथुरा जिले में जितने भी तीर्थ पुरोहित हैं पंडा वर्ग के लोग हैं मंदिरों से जुड़े हुए लोग हैं उन सभी को भी सरकार द्वारा राशन दिलाया जाए। उनके खाते में भी जैसे सभी लोगों को खातों में 1000 दिया गया है उसी प्रकार से मथुरा जिले के समस्त विप्र बंधुओं जिनका कामकाज तीर्थ यात्रियों पर ही निर्भर रहता है ऐसे लोगों को जो वास्तव में ही गरीब हैं और वह अपने परिवार का पालन पोषण नहीं कर सकते हैं। ऐसे लोगों के खाते में कुछ राहत दी जाए। जिससे समस्त लोग जो तीर्थ पुरोहित हैं जो पंडा वर्ग के लोग हैं उनका खर्चा पानी चल सके।













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